ईरान से में कूदना अमेरिका के लिए अब भारी पड़ता दिख रहा है। शुरुआत में डोनाल्ड ट्रंप को लगा था कि यह जंग जल्दी खत्म हो जाएगी। खाड़ी देश साथ देंगे और ईरान पर दबाव बनाकर उसे झुका लिया जाएगा। लेकिन सात हफ्ते बाद तस्वीर बिल्कुल उलट चुकी है।
खत्म होने का नाम नहीं ले रही और जो देश शुरुआत से अमेरिका के साथ खड़े थे अब वही धीरे-धीरे दूरी बनाने लगे। हालात यह है कि अब अमेरिकी राष्ट्रपति को हर दिन नया झटका लग रहा है। सबसे बड़ा संकेत संयुक्त अरब अमीरात से आया। वही यूएई जो इस के शुरुआती दौर में अमेरिका के साथ खुलकर खड़ा दिखाई दिया।अब वहां से ही अमेरिकी मिलिट्री बेस हटाने की मांग उठने लगी।
यूएई के बड़े राजनीतिक विश्लेषक अब्दुल खालिक अब्दुल्ला ने साफ कहा है कि अब देश को अपनी सुरक्षा के लिए अमेरिका की जरूरत नहीं है। ईरानी हमलों के दौरान यूएई ने खुद को संभाल लिया जबकि अमेरिका उसकी रक्षा करने में पूरी तरीके से सफल नहीं हो पाया।
ऐसे में अब अमेरिकी बेस अब वहां सुरक्षा नहीं बल्कि बोझ बनते जा रहे हैं। यही वजह है कि अब वहां से यह सवाल उठने लगे कि आखिर इन बेस को रखा ही क्यों जाए? दरअसल इस युद्ध में यूएई को भारी नुकसान झेलना पड़ा। ईरानी मिसाइलों ने दुबई और अबू धाबी जैसे हाई प्रोफाइल शहरों को निशाना बनाया। वर्ल्ड क्रॉस इंफ्रास्ट्रक्चर को नुकसान पहुंचा और सबसे बड़ी बात जिस अमेरिका पर भरोसा था वही उस वक्त ढाल नहीं बन पाया।
यही वजह है कि अब भरोसा डगमगा चुका है और यूएई अब अपने हितों को नए नजरिए से देखने लगा है। दुबई एयरपोर्ट पर तो रोज उड़ाने रोकी जा रही थी। उधर सऊदी में एडमिनिस्ट्रेटिव लेवल पर भी लोग अब दबी आवाज में तंज कसते हुए कह रहे हैं कि अमेरिका खुद की सुरक्षा ठीक से नहीं कर पा रहा तो वह दूसरों की रक्षा कैसे करेगा? यह बयान सिर्फ एक प्रतिक्रिया के तौर पर नहीं बल्कि पूरे क्षेत्र के बदलते मूड के तौर पर संकेत है। दरअसल सऊदी अरब भी इस जंग में सुरक्षित नहीं बच पाया।
उसके सैन्य ठिकानों पर भी ईरानी मिसाइलें गिरी। ऑयल रिफाइनरीज पर हमले हुए और ऊपर से हॉर्मोन स्ट्रीट को प्रभावित होने से उसकी अर्थव्यवस्था को भी बड़ा झटका लगा। तेल सप्लाई बाधित हुई और नुकसान बढ़ता गया। ऐसे में अब सऊदी भी सोचने पर मजबूर हो चुका है कि क्या अमेरिका पर भरोसा करना सही फैसला होगा? यानी साफ है कि जिस जंग को अमेरिका अपनी ताकत दिखाने के लिए लड़ रहा था वही अब उसकी कमजोरी उजागर करने लगी। खाड़ी देश जो कभी उसकी सबसे बड़ी ताकत माने जाते थे। अब सवाल पूछने लगे, भरोसा टूटने लगा।
समीकरण बदलने लगे और अमेरिका की पकड़ इस पूरे इलाके में ढीली पड़ती नजर आ रही है। सबसे बड़ा सवाल अब यही है। क्या यह सिर्फ अस्थाई नाराजगी है या फिर मिडिल ईस्ट में अमेरिका की पकड़ सच में कमजोर पड़ चुकी है? क्योंकि अगर खाड़ी देश की दूरी बनाने लगे तो यह जंग सिर्फ ईरान बनाम अमेरिका की नहीं रहेगी बल्कि अमेरिका के पूरे प्रभाव की एक परीक्षा भी बन जाएगी। सेपा नेवी सेपा नेवी यू गव मी क्लीयरेंस टू गो। यू आर फायरिंग नाउ। लेट मी टर्न बैक। ईरान ने शनिवार को स्ट्रेट ऑफ हुर्मों से गुजर रहे दो भारतीय झंडे लगे जहाजों पर गोलीबारी की।
भारत सरकार के एक सूत्र ने बताया कि जिन जहाजों पर हमला हुआ उनमें से एक की पहचान सेंबर्ल्ड के रूप में हुई है। सूत्र ने बताया कि जहाज पर सवार चालक दल और जहाज दोनों सुरक्षित हैं। इस दौरान ईरानी सेना और भारतीय क्रू मेंबर के बीच हुई रेडियो बातचीत का ऑडियो भी सामने आया है। इसमें भारतीय जहाज पर मौजूद क्रू कह रहा है कि आपने ही तो मुझे गुजरने की इजाजत दी थी और अब आप ही गोली चला रहे हैं। ईरान द्वारा वापस लौटने पर मजबूर किए जाने से पहले जहाज ने रेडियो पर ईरानी सेना को संदेश भेजा
उन्होंने कहा कि मेरा नाम आपकी लिस्ट में दूसरे नंबर पर है। आपने मुझे आगे बढ़ने की मंजूरी दी थी और आप ही मुझ पर गोलीबारी कर रहे हैं। मुझे वापस मुड़ने दीजिए। सेपा नेवी सेफा नेवी। दिस इज मोटर सनम हेडल्ट। यू गव मी क्लीयरेंस टू गो। माय नेम सेकंड ऑन योर लिस्ट। यू गव मी क्लीयरेंस टू गो। यू आर नाउ। लेट मी टर्न बैक। यह कहने के बाद भारतीय जहाज वापस लौट गया। रेडियो पर हुई बातचीत ठीक इसके बाद ही कट गई। की घटना के बाद नई दिल्ली ने शनिवार को ईरानी राजदूत को तलब किया और हुरमुज में दो भारतीय झंडे वाले जहाजों से जुड़ी गोलीबारी की घटना पर विरोध दर्ज करवाया।
ईरान ने मध्यपूर्व युद्ध में संघर्ष विराम के दौरान इस रणनीतिक व्यापार मार्ग को कमर्शियल आवाजाही के लिए फिर से खोलने का अपना वादा वापस ले लिया है। यह कदम उसने इस जलमार्ग पर अमेरिका द्वारा लगाई गई जवाबी नाकेबंदी के विरोध में उठाया है। यह जलमार्ग कच्चे तेल और गैस के लिए एक बेहद अहम रास्ता है। सुरक्षा पर नजर रखने वाले कई लोगों ने बताया कि शनिवार को जब कई कमर्शियल जहाज इस स्ट्रेट को पार करने की कोशिश कर रहे थे तो उन्हें ईरानी सेना की ओर से गोलीबारी और धमकियों का सामना करना पड़ा।
भारत के विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि सचिव विक्रम मिश्री ने ईरानी राजदूत को तलब किया और होरमुज में आज पहले हुई दो भारतीय झंडे वाले जहाजों से जुड़ी गोलीबारी की घटना पर भारत ने गहरी चिंता से अवगत कराया। बयान में यह भी कहा गया है कि नई दिल्ली ने ईरान से आग्रह किया है कि वह होरमुस से भारत आने वाले जहाजों की आवाजाही को सुगम बनाने की प्रक्रिया जल्द से जल्द फिर शुरू करें। ईरानी राजदूत ने इन विचारों को ईरानी अधिकारियों तक पहुंचाने का आश्वासन दिया है। आपको बता दें कि युद्ध शुरू होने के बाद यह पहली घटना है जब आईआरजीसी ने भारतीय जहाजों को रोका हो या फिर उन पर हमला किया हो। देखना होगा कि युद्ध आगे किस ओर रुख करता है। लेकिन जल्द ही 14 दिन का सीज फायर भी समाप्त होने वाला है और अब इसके बाद ईरान, इजराइल और अमेरिका तीनों एक दूसरे पर क्या कदम उठाएंगे यह देखना बेहद अहम होगा मिडिल ईस्ट के अशांत समुद्री क्षेत्र रेस्टोरेट ऑफ होस में दो भारतीय ध्वज वाले तेल टैंकरों पर हमले के बाद भारत और ईरान के बीच कूटनीतिक तनाव बढ़ गया है। शनिवार को भारत ने इस गंभीर घटना पर कड़ा रुख अपनाते हुए ईरानी राजदूत को तलब किया था और अपना विरोध दर्ज कराया।
खबरों के मुताबिक ओमान के उत्तर में ईरानी नौसेना द्वारा दो भारतीय तेल टैंकरों जग अर्नव और सलमान एरर पर गोलीबारी की गई। यह जहाज तेल लेकर जा रहे थे। इस हमले ने वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की आपूर्ति और कीमतों को लेकर चिंताएं बढ़ा दी है। ईरान के बाद यह पहली घटना है जब ईरान ने भारतीय जहाजों को निशाना बनाया हो। इस घटना के पीछे वास्तविक कारण अभी सामने नहीं आया है और ना ही ईरान के किसी अधिकारी ने मामले में आधिकारिक बयान जारी किया। लेकिन बताया जा रहा है कि टैंकर के पास होमों से गुजरने की पूर्वानुमति नहीं थी और इसलिए ईरान ने उसे किसी दुश्मन देश का टैंकर समझकर निशाना बनाया हो सकता है।
हालांकि दूसरी ओर जो खबरें सामने आ रही हैं उसमें बताया जा रहा है कि ईरान के पास लिस्ट थी और उसमें दूसरा नंबर इन टैंकरों का था। लेकिन फिर भी यह गोलीबारी हुई है। लेकिन ईरान ने आधिकारिक तौर पर इसमें अभी तक कोई बयान जारी नहीं किया है। विदेश मंत्रालय ने शनिवार को ईरानी राजदूत डॉ. मोहम्मद फताली को तलब किया। विदेश सचिव ने इस घटना पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि भारत व्यापारिक जहाजों और नाविकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है। मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि ईरान ने पहले भारत आने वाले जहाजों के सुरक्षित मार्ग की सुविधा प्रदान की है।
ऐसे में व्यापारिक जहाजों पर फायरिंग की घटना गंभीर है। हमने राजदूत से आग्रह किया है कि वे ईरान सरकार तक भारत का पक्ष पहुंचाएं और होरमोस से भारत आने वाले जहाजों के लिए सुरक्षित मार्ग की प्रक्रिया को जल्द से जल्द बहाल करें। ईरान बोला भारत से मजबूत संबंध। दूसरी ओर भारत में ईरान के सर्वोच्च नेता के प्रतिनिधि डॉ. अब्दुल माजिद हकीम इलाही ने इस घटना पर अनभिज्ञता जाहिर की है। उन्होंने न्यूज़ एजेंसी एनआई से बातचीत में कहा कि मुझे इस घटना की कोई जानकारी नहीं है। लेकिन भारत और ईरान के संबंध 5000 साल पुराने हैं और बहुत मजबूत
हैं।