ओह माय गॉड ओह माय गॉड रविवार की वो दोपहर हैदराबाद से हुबली की एक सामान्य उड़ान 22 मुसाफिर अपनी मंजिलों की ओर बढ़ रहे थे। किसी को क्या पता था कि अगले कुछ घंटे उनकी जिंदगी के सबसे लंबे और डरावने घंटे साबित होने वाले हैं। लेकिन तभी बादलों के बीच एक जहाज फंस गया और फिर शुरू हुआ मौत का खौफ। जिसकी वजह से उसमें सवार यात्रियों की हालत खराब हो गई। खौफ से भर देने वाली इन तस्वीरों पर नजर डालिए। यह फ्लाइट 91 की फ्लाइट संख्या IC3401 है।
[संगीत] विमान के अंदर का मंजर रूह कपा देने वाला है। कोई फूट-फूट कर रो रहा है तो कोई अपने मोबाइल से परिवार को आखिरी संदेश [संगीत] भेज रहा है। कोई खुदा को याद कर रहा है तो कोई भगवान से सलामती की भीख मांग रहा है। यात्रियों की चीखें बता रही हैं कि जब जमीन से हजारों फीट ऊपर हवा में जहाज हिचकोले खाता है तो इंसान कितना बेबस हो जाता है। ओह माय गॉड। अब इसके पीछे की कहानी आपको सिलसिलेवार तरीके से समझाते हैं। यह सिलसिला शुरू हुआ दोपहर ठीक 3:00 बजे।
हैदराबाद के राजीव गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट से फ्लाई 91 के इस एटीआर टर्बो प्रॉप विमान ने उड़ान भरी शेड्यूल के मुताबिक इसे शाम 4:30 बजे कर्नाटक के हुबली में लैंड करना था। सब कुछ सामान्य था। लेकिन जैसे ही विमान हुबली के करीब पहुंचा, मौसम ने अपना रौद्र रूप दिखाना शुरू कर दिया। हुबली में भारी बारिश और खराब विजिबिलिटी की वजह से पायलट को लैंडिंग की इजाजत नहीं मिली। ऐसे में पायलट ने विमान को होल्ड पर रखा और वह आसमान में ही चक्कर काटता रहा।
लेकिन यह वेटिंग टाइम 10 या 20 मिनट नहीं बल्कि घंटों में तब्दील हो गया। विमान हुबली के ऊपर ही नहीं बल्कि मुंडगोंड, दावणगे और शिवमगा जैसे इलाकों के ऊपर मंडराता रहा। 90 मिनट का सफर 4 घंटे के डरावने इंतजार में बदल गया। शुरुआत में खबर आई कि तकनीकी खराबी [संगीत] है। यात्रियों का आरोप है कि उन्हें सही जानकारी नहीं दी गई। विमान में झटके महसूस हो रहे थे। बाहर अंधेरा था और नीचे सिर्फ घने बादल। वीडियो में सुना जा सकता है कि यात्री पायलट से मिन्नतें कर रहे हैं।
हमें बेंगलुरु ले चलो। हमें बेलगाम उतार दो। बस कहीं भी सुरक्षित उतार दो। उधर विमान हवा में फंसा था। इधर परिजनों की सांसे भी थमी हुई थी। घंटों तक कोई अपडेट ना मिलने से नाराजगी बढ़ रही थी। आखिरकार जब हुबली में उतरना नामुमकिन हो गया तो पायलट ने सूझबूझ दिखाई और विमान का रुख बेंगलुरु की ओर मोड़ दिया। शाम करीब 6:30 पर जब पहियों ने बेंगलुरु के कैंपेगोड़ा एयरपोर्ट के रनवे को छुआ तब जाकर 22 यात्रियों की जान में जान आई। यात्रियों के लिए यह सिर्फ लैंडिंग ही [संगीत] नहीं बल्कि एक नया जीवन था। बाद में जब मौसम साफ हुआ तो इसे विमान को रात 11:00 बजे वापस हुबली भेजा गया।
लेकिन वो4 घंटे उन यात्रियों के ज़हन से कभी नहीं मिटेंगे। घटना के बाद फ्लाई 91 एयरलाइन ने अपना पक्ष रखा। कंपनी ने साफ तौर पर कहा कि विमान में कोई तकनीकी खराबी नहीं थी। सारा विवाद सिर्फ खराब मौसम की वजह से था।
एयरलाइन ने दावा किया कि उन्होंने यात्रियों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया और हवा में विमान को रोकना या डायवर्ट करना दुनिया भर की विमानन कंपनियों की सामान्य प्रक्रिया है। सच्चाई जो भी हो लेकिन इस घटना ने एक बार फिर हवाई सफर की सुरक्षा और आपातकालीन स्थितियों में यात्रियों की मानसिक स्थिति पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
शुक्र है कि कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ और सभी 22 यात्री अपने सुरक्षित घर पहुंच गए। लेकिन उन यात्रियों के लिए यह सफर कभी ना भूलने वाला सफर बनकर रह गया। [संगीत]
