क्रूज हादसे के ड्राइवर का बड़ा खुलासा, हाथ जोड़कर किससे मांगी माफी?

हर दिन चलती है ये क्रूज जब मौसम खराब होता है तब आप लोग चलाते थे नहीं चलाते रोक देते हैं उसको उस दिन फिर भी पहले निकली थी और बाद में मौसम खराब हो गया सर कितने लोग बैठ सकते हैं इस क्रूज में 70 लोग सर 70 लोग क्या-क्या रहता है इसमें क्रूज में लाइफ जैकेट अपनी सेफ्टी के लिए हैं लाइफ जैकेट है नहीं बैठने के लिए नीचे एक हॉल जैसा बना हुआ है ऊपर कुर्सियां लगी रहती है ।

गानेवाने सब चलते रहते हैं कुछ खानेवाने का भी इंतजाम रहता है फ्रिज वगैरह रखा रहता है फ्रिज ऐसा है सर कि इमरजेंसी का कोई पार्टी का रहता है उसके लिए अच्छा उसके लिए रहता है ठीक है आपका शुभ नाम क्या हुआ महेश पटेल महेश जी अच्छा महेश जी आप ही उस शिप को चला रहे थे। तो अ तो थोड़ा सा आपसे भी समझने की कोशिश करेंगे क्योंकि अह जैसे उस दिन भी दिक्कत आई होगी तो कैसे क्या किया आपने? कैसे उसको आप लेकर के आए? क्या हुआ उस दिन? सर मैं यहां से निकला तो मौसम सही था। ठीक है। हल्की-हल्की हवा चल रही थी।

जैसे ही मैं वहां पहुंचा हूं। लहर थोड़ी तेज हुई तो मैं मोड़ दिया बोट। जब वहां से बोट मोड़ा तो तूफान एकदम से इतना तेज आया। अच्छा। कि वे्स मतलब इतनी बड़ी-बड़ी विप्स थी। अच्छा। तो वेब्स में वो पानी बहना शुरू हुआ। फिर मैंने बोट मोड़ा। अच्छा सामने अपना वो बना हुआ है क्या बोलते हैं ब्रिज टाइप का उससे बोट टकराई वाली थी वहां जैसे बोट मोड़ाई हूं मैंने और पानी एकदम बोट में भर गया अच्छा जैसे ही बोट में पानी भरा तो मैंने फ़ लगाया अपने रिसेप्शन सर बोट में पानी भर गया छोटी बोट भेज दीजिए कहीं भी कुछ हादसा हो सकता है और उससे पहले मैं लड़कों को बोल दिया था कि सर अब सबको लाइफ जैकेट पहना दीजिए अब शायद भी कुछ लाइव जैकेट पहन चुके थे नियम तो ये कहता है कि जैसे ही बोट में बैठते हैं लाइफ जैकेट देना चाहिए तो लोगों ने पहना नहीं आप लोगों ने दिया नहीं था नहीं सर वो अपने यहां ऐसा होता था कि जैसे जैसे बोट चल रही है।

अब आप डांस भी कर रहे हैं। कर रहे हैं तो नहीं पहनते। जैसे अपन ने देखा मौसम खराब हुआ। फटाफट अप जाके सबको दे देते हैं। और जाके अब सभी लोगों ने पहन रखा था। किसी ने बाकी नहीं था जैकेट ना पहना हो। कुछ लोग कह रहे थे कि जब तेज हवाएं चलने लगी तो उन्होंने आपसे कहा कि आप किनारे पे ले लीजिए। फिर नहीं दिया। नहीं सर किसी ने नहीं बोला है। साक्षी हैं। मुझे किसी ने ऐसा नहीं बोला कि आप बाहर ले लीजिए। मैं अपने हिसाब साइड ही लगा दी लगा दे। वहां तक वोट पहुंची थी। कितने सालों?

आप कितने साल से चला रहे हैं? सर 15 साल करीब। साल कभी इस तरह की तेज हवा या इस तरह की तेज आंधी याने के बाद कई बार ऐसा हुआ है बट इतना तेज कभी नहीं आया तो आपको भी डर लगा उस वक्त उस वक्त सर मैं तो बस यही लग रहा था कि ऐसी हाल में बोट थोड़ा साइड में हो जाए थोड़ा साइड में हो जाए बस तो कहां तक ला पाए थे आप बस वहां तक ले गए सर वहां से यहां तो आ ही नहीं रही थी बोट किसी हालत में तो मैंने ऐसा मुड़ा वहां से मान लीजिए 100 मीटर करीब बचा था पूरी बोट पलट गई हां तो फिर आप भी पानी में कूद गए नहीं पहले सभी लोग उस बाद में उसी आया था थे तो दादा सिंह उनको ऐसे करके तो उन्होंने अपना हाथ इसको लात मारी मुझे फिर मैं निकल यहां से बाहर आप कुछ लोगों को बचा पाए थे क्या नहीं मैं कोशिश नहीं मैं सब नहीं कोशिश की था कि सबको ला जा पहनवा पाया आप खुद तैर के बाहर आए आपको रेस्क्यू ने फिर बाहर निकाला हुआ है।

नहीं सर मैं खुद आया था तैर के आए आप तैर रहे थे कितने सालों से आप बोट चला रहे हैं सर मैं ये 2006 करीब से 2006 से मतलब जब से ये यहां पर ये बोट खड़ी है तब से आप चला रहे थे इसको अच्छा कुछ चीजें हैं जैसे कि जो बोट चलाने के लिए योग्यता होती है सेरंग या मास्टर लाइसेंस जो कि अपना ये या छोटी नौकाओं को चलाने का अनुभव ये है आपके पास कोई लाइसेंस कौन सा लाइसेंस है? मेरे को गोवा लाइसेंस है। कौन सा गोवा से गोवा से सबकी ट्रेनिंग होती है। हर हर हर दो साल में लाइफ सेविंग भी है मेरे पास लाइसेंस है और बोर्ड का भी लाइसेंस है। तो आपको डीजल इंजन या जो भी इसका बुनियादी ज्ञान है तकनीकी का वो है नौकाओं का।

जी और शारीरिक फिटनेस तो आप फिट लग रहे हैं। लेकिन जो लाइव जैकेट का उपयोग होता है या जो रेस्क्यू ऑपरेशन का ज्ञान है ये आप लोगों को ट्रेनिंग दी गई है। जी सर। कब कब दी जाती है? हर दो साल में सर। हर दो साल में कौन देता है ट्रेनिंग? मतलब एमपी के गोवा से आते हैं वो। हां। लाइसेंस सब रखा हुआ अपना। आपने लाइसेंस कब लिया था? अभी सर अभी एक साल भी नहीं हुए सर। एक साल भी नहीं हुए। पर आप चला रहे हैं लगभग 20 साल से। नहीं 15 साल सर। 15 साल से लेकिन लाइसेंस आपने एक साल पहले लिया। नहीं सर। हर दो साल में बनता है लाइसेंस। नहीं तो जो शेरंग जो मास्टर लाइसेंस है वो कब मिला? 2012 से। 2012 से आपके पास 2006 से चला रहे हैं आप? जी।

तो छ साल बाद आप नहीं मेरे मतलब पहले हेल्प था इसी में। अच्छा इसी में हेल्पर थे। फिर मेरी ट्रेनिंग हुई। फिर फिर मुझे सहायक में 2012 उसमें रख लिया गया था। इस तरह की जो आपदा की स्थिति बन जाती है इसमें आप लोगों को बताया गया कि लोगों को कैसे बचाना है। इस तरह की कोई ट्रेनिंग होती है? इस तरह सर यही होता है कि जहां तक हो तो बोट को सेफ्टी जगह ले चले अपन लेकिन कुदरत ने हमें बिल्कुल इतना समय नहीं दे पाया क्योंकि मतलब अभी हम सेफ जगह पहुंच जाए जब तूफान पे मतलब समय बेस इतना तेज तूफान कि कुछ नहीं कर पाए। कुछ नहीं कर पाए। किसी को नहीं बचा पाए। अच्छा एक तस्वीर दिख रही है जब पूरी लहर हिलने लगती है तब उनको सेफ्टी जैकेट बांटा जा रहा है पन्नी से खोल खोल सर पहले कभी की बात और नहीं अभी कल की ही कल का ही वीडियो है वो वीडियो आप देख पाए हैं मैं आपको दिखाता हूं का वीडियो है ये देखिए वो जब पूरी नाव हिलने लगी है उस वक्त ये सेफ्टी जैकेट बांटे गए हैं तो सवाल यही है ये देखिए ये आप ही की बोट का वीडियो है ठीक है अभी देखिए आप यहां पर ये सारे जैकेट आप बांटे जा रहे हैं सर ये तो मामू भेजगी बोट हां नहीं पर देखिए ना नए-नए मैं फाड़ फाड़ के आप पानी का वो देखिए ना हां नहीं वही मैं कह रहा हूं कि इसके पहले क्योंकि इसके पहले जो वीडियो है ये देखिए इसमें किसी ने जैकेट नहीं पहन रखी है कोई भी पर्यटक नहीं पहना उसकी कोई पहनता नहीं सर देंगे तो अभी नहीं बोलेंगे हम एंजॉय कर रहे हैं जब अपन ऐसा रहेगा जैसे अभी वीडियो आप जो दिखा रहे हैं उसमें वेव्स नहीं चली रिपोर्ट नहीं है अच्छा आप ऊपर आइए ना एक बार आपसे समझने की कोशिश करते हैं कि क्या इसमें कैसे आप चलाते हैं क्या तकनीकी दिक्कत हो सकती है तो बाकी जो लोग थे यहां ऊपर सवार थे इसमें है ना यह ऊपर उस उसमें भी तीन एसी लगे हुए से गर्मी के लिए ये आपका केबिन होता है।

है ना? कैसा होता है ये केबिन? जरा एक बार अंदर से देखें। मेरे कैमरा सहयोगी कहूंगा ये आए। यहां कितने लोग बैठ सकते हैं इस केबिन में? इसके अनुस एक आदमी बैठ सकते हैं। ये आपका कंट्रोल होता है। ये कंट्रोल होता है। ये देखिए इस तरह से। और यह सारे स्विच बिजली के होते हैं। हां नहीं अपने इंजन के हैं कि मतलब इंजन है तो बंद हो जाता है ये तो बत्ती जल जाएगी। स्टार्ट करेंगे हल्का सा ऑन होगा और जैसे स्टार्ट हो जाएगा तो बंद हो जाएगा। ये किस चीज के कंट्रोल होता है? ये गियर है सर। दो ही गियर होती है फॉरवर्ड और बैक। अच्छा सेम डबल इंजन। दोनों साइड में फॉरवर्ड और गियर। ये हमने अक्सर देखा है। तो क्या कुछ ऐसा तकनीकी खराबी आई थी? कुछ कह रहे हैं कि बीच में बंद हो गया था बोट। नहीं ऐसा कुछ नहीं सर। क्या हुआ कि वोट जैसे ही वहां पहुंचे ते हुई और मैं वहां से वोट लाया कि साइड पहुंचा दूं।

जब वहां वहां तक आने के बाद वोट नहीं हुई साइड मतलब हवा मेरे को आने नहीं दे रही। फिर मैंने बोला कि यहां कहीं कोने में लगा देता हूं वोट। वहां से बात करते हुए फिर बाहर चलते हैं। तो ये जो वहां से आप यहां लाने की कोशिश कर रहे थे जहां पर डॉक होती है बोट लेकिन नहीं ला पाए। नहीं। फिर मैंने बोला कि वहां कोने में लगा देता हूं वो। ये बताइए कि ऐसी बोट तो लगभग 100 किलोमीटर प्रति घंटे में भी कुछ लोग कह रहे थे कि ऐसे डूबती नहीं है। कुछ आपको ऐसा लगा कि कुछ तकनीकी खराबी आ गई वोट रुक गई तो फिर ऐसे डूबी कैसे? वोट से मैं आपको बता रहा हूं। जी बताइए। ये मेरी वोट है। हां हां भरोसा में मतलब क्या बताऊं? जी। वहां तक वोट हवा ने यहां से दिखाया जाऊं। वोट मुझे यहीं से दिखा। जी। तो वेब्स ने मुझे वहां धकेलना शुरू की। अच्छा। और मैंने जैसे ही वोट को मैंने सोचा कि मैं एक कोने में ले जाऊं। हां हां जैसे ही कॉर्नर पे मैं मुड़ा हूं। हां हां विप्स का पानी पूरा सामने आया सर।

अच्छा हां सामने और इस इस तरफ वाले इंजन रूम में पूरा पानी भर गया। अच्छा वैसे ही पानी भरा तो वैसे ही मैं फोन लगा नीचे इंजन रूम में हां दोनों इंजन रूम नीचे हैं। इसमें जैसे ही पानी भरा तो मुझे लगा कि मतलब वोट नहीं पहुंच पाएगी। फिर वो पूरी कोशिश करके मतलब यहां से समझ लीजिए ये बचा है। ये सामने वाले टाकू इतना बचा था बस। अच्छा बस यहां से वो सामने इतनी दूरी बची बोट के बाजू वाले टाकू। इतनी दूरी बचा था। बोर्ड लगा वहां से मतलब पत्थर है कुछ मैं उसमें राग आग के मैं सेट करके गेस्टों को उतार दूंगा अच्छा पर वहां तक भी नहीं पहुंच पाई बहुत डेप्थ में आगे तो देखिए दो तीन चीजें आइए मनीष जी बाहर चलते हैं ये बड़ी बात बता रहे हैं कि इससे तो बोट चलाते हैं इससे इससे आगे पीछे करते हैं रिवर्स और आगे के लिए दो गियर होते हैं और लगभग इतनी दूरी रही होगी जहां से ये बोट खड़ी से आप तट देख रहे हैं वहां तक भी तेज हवा के थपड़ों में नहीं पहुंच पाई इंजन रूम में पानी भरने लगा तब महेश पटेल जो उस क्रूज को चला रहे थे तो समझ गए कि अब वो किनारे नहीं पहुंच पाएंगे। आपने लाइफ जैकेट पहन रखी थी। जी आपने लाइफ जैकेट पहन रखी थी। नहीं सर। तो आपने फिर छलांग लगा दी। अब ऐसे उल्टा हो गया। वोट आ रहा। मेरा केबिन ये है सर। सब लोग पहले ही निकल गए थे। मैं नहीं निकला। तो मैं बाद में जब लास्ट टाइम में जब देखा कि नहीं अब पूरा पलट जाएगा। मैं सोचा था ऐसा होने पर रुक जाएगा वोट बट नहीं रुका। नहीं रुका। फिर उसके बाद मैं फिर निकला वहां। मतलब यहां से नहीं निकल पाया। यहां से निकला वोट पूरे ऐसा हो गया था। अभी आपके ऊपर कारवाई हो गई है।

अब सर ये तो कुदरती है उसमें जैसा कुछ भी हो है ना मेरे मेरी तो इसमें एक पैसे की गलती नहीं है। मैंने इतना सोचा कि मतलब पूरे गेस्टों को सही सलामत कहीं साइड में लगा दूं। तनख्वाह वगैरह क्या देती थी सरकार आपको? मेरे को यहां से हां यहां सर 27,000 को देती थी। बच्चे-वच्चे कितने हैं? दो बच्चे हैं सर। अब क्या सोचा है? क्या करेंगे? बूढ़ी मां-बाप मूढ़ी मां है। बाप तो है नहीं है। जमीन जाया कुछ है नहीं है। बस इसी के भरोसी में थे। 45 साल उम्र हो गई। इस हादसे का दुख आपके मन में है लगता है 100% है सर बहुत ज्यादा संभावना में तीन दिन हो गए मैंने खाना भी नहीं खाया अभी तक बच्चों की याद आती है जो आपके क्रूज में सवार थे और जो नहीं रहे सर रात दिन वही देखते हैं मुझे तो होने की तस्वीर नजर आती है मतलब मैं अपना बयान नहीं बयान नहीं कर सकता हूं कि इतना पढ़ा लिखा तो नहीं इतना बयान नहीं कर सकता जिसको मेरे को हुआ है रोना आ रहा है आपको जी मतलब वही देखता नींद नहीं आती मुझे ना खाना खाने की इच्छा होती है ना बस थोड़ा पानी पी अगर वो पीड़ित परिवार सामने आ गए जो उस वक्त क्रूज में सवार थे जिनके अपने नहीं रहे तो क्या कहें ना कहना चाहेंगे बस उनसे सर यही प्रार्थना करूंगा जो मतलब कुदरत ने प्रकृति ने जो लिखा था उसके लिए आप मुझे क्षमा कर दें हालांकि उसमें मेरी कोई गलती नहीं है और आपको सद्भावना दें कि आप हमेशा मतलब इस चीज को भूलने की थोड़ा सा कोशिश करें और जहां तक हो सके तो मुझे तो 100% माफ़ करें। मैं 100% कोशिश की थी कि मतलब सब सेफ रहें और सब जगह पहुंच जाए अपने बावजू में लगा दूं कैसे भी करके कैसे भी करके और कुछ जो आप उस दिन की घटना बताना चाहे कैसे क्या हो रहा था जब आप यहां से निकले कितने बजे निकले थे आप लोग मैं यहां से निकला सर 56 करीब थे 5 16 के करीब तब मौसम साफ था हां मतलब हल्की जैसे अभी चल रहा है ऐसा चल रहा था जैसे अभी चल रहा है हां ऐसे ही चल रहा था तो जब वहां हम लोग ये समय से दिया जाता है कि जब पूरी हवा शांत रहे हो सकता है कि तूफान आएगा लेकिन हवा हवा थोड़ी बहुत चलती रहती है। तूफान आने की संभावना नहीं रहती। ऑरेंज अलर्ट था फिर भी आप लोग लेके गए। ऐसा था कि तेज हवाएं चलेंगी 50 50 कि.मी. प्रति घंटा।

आप लोग को नहीं बताया गया था कि हवा तेज नहीं बताया। नहीं नहीं और लगभग कितने बजे हादसा हुआ? ये मान लीजिए सर करीबन 6 पौ. करीब पे हुआ सर। मतलब मैं तो यहां पास पे निकला हूं सर। तो 45 मिनट का ही ट्रिप रहता है पूरा का पूरा और लगभग मैं मान के चलूं कि आधे घंटे के बाद ये हादसा ये होगा। आधा 25 मिनट के बाद जी दुख आपके मन में आप सबसे क्षमा मांगना चाहेंगे जो सबका पैर पाए सब क्षमा मांगू सर अब जो घटना हो गई मुझे इतना दुख है कि मैं अपने बयान नहीं कर सकता चलिए महेश जी तो ये महेश पटेल थे जो उस दिन उस क्रूज को चला रहे थे जो वहां डूबी बिल्कुल ऐसी ही वो क्रूज है ऊपर माला ऐसा ही था यहां पर लोग डांस कर रहे थे कुछ बच्चे बैठे थे जो आप उन तस्वीरों में देख सकते हैं और ये महेश पटेल इन्होंने इनको भी बचाया गया। उस जो 31 लोगों की सूची थी। कई लोगों ने टिकट नहीं ली थी। आपको याद है कितने लोग होंगे? 29 लोग तो थे। पांच छ साल से छोटे बच्चों का टिकट नहीं लगता। लगभग कितने लोग होंगे महेश? सर इसमें करीबन मतलब पांच साल ऊपर सब मिला के मतलब किसी उसके भी थे मतलब हां स्टाफ में। हां।

29 दो क्रूज मेंबर 31 हो गए। कितने लोग होंगे टोटल लगभग उस दिन? टोटल मान लीजिए सर पांच बच्चे छोड़ के छोड़ के। यह 35 के 35 36 35 36 क्योंकि 28 लोगों को बचाया गया है। नौ लोगों की लाश मिल चुकी है। तो यह आंकड़ा उससे ज्यादा चला जाता है और चार और लोग अभी लापता हैं। सर वही बता रहा हूं कि हिसाब में दो मेरा वोट स्टार्ट हुआ मेरा फिर नीचे काम नहीं रहता सर जी। हां। मैंने वोट स्टार्ट किया। अच्छा इतने चार पांच लोग आए हैं ना। कितने चक्कर लगाते हैं आप? सॉरी पब्लिक पे डिपेंड करता है सर जी। फिर भी मोटा-मोटे अगर बहुत भीड़ रहती। बहुत भीड़ रही तो पांच छह राउंड। पांच छह राउंड। एक राउंड 45 मिनट का जी। तो यह बता रहे हैं कैसे उस दिन क्या हादसा हुआ। महेश पटेल अब नौकरी में नहीं है। लेकिन ये हाथ जोड़कर माफी मांग रहे हैं उन लोगों से। इनका कहना है कि ये प्राकृतिक था सब कुछ। इनके हाथ में कुछ नहीं था। इन्होंने कोशिश बहुत की लेकिन वहां से जो आप देख रहे हैं कि वो बोट पलटी हुई है और बिल्कुल बिल्कुल सेम है दोनों नाव। बिल्कुल सेम है दोनों क्रूज। उसको लाने की कोशिश कर रहे थे। डॉक करने की कोशिश कर रहे थे लेकिन नहीं कर पाए। ये भी दो अहम जानकारियां दे रहे हैं कि इनको मौसम इतना खराब है इसकी जानकारी नहीं दी गई।

इनकी ट्रेनिंग होती है। 20 साल से ये सेवा दे रहे हैं। क्रूज चला रहे हैं। इससे पहले हेल्पर के तौर पे थे और 2012 से ये इसके चालक बने और बाद में गोवा में ट्रेनिंग भी कंप्लीट की। हर दो साल पर इनको ट्रेनिंग दी जाती है। ये सारी चीजें बता रहे हैं। लेकिन उस दिन इनका ये कहना है कि कई मुसाफिरों ने खुद से भी जैकेट नहीं पहनी। ये भी आप कह रहे हैं। हां आखिरी वक्त उनको जैकेट देने की कोशिश की गई लेकिन तब तक वह क्रूज़ लगभग पूरी तरह से पलटने नहीं नहीं नहीं नहीं तो जो मौत हुई है क्या वो क्रूज के पलटने से नहीं सर नहीं जितने वो थे मतलब जैसे ही हवा हल्की वैसे तेज होने लगी सभी को जैकेट दी गई सभी पहने हुए थे अभी भी आप मैं तो नहीं था अभी कल जब पेयर में लगा हुआ है तो जितने भी आपको मिले हैं सब लाइव जैकेट पहने ही मिले होंगे किसी ने जो पोस्टमार्टम हुआ उसमें से एक सिर्फ महिला जो बच्चे को उसमें भरी थी उन्होंने लाइव जैकेट बनाया था आठ लोगों के शरीर पे लाइफ जैकेट नहीं थी नहीं सर जैकेट तो सभी को दी गई थी।

हां वो नहीं थी कुछ लोगों के शरीर मेरा तो केवल यहां पे था। मैं लड़के को खुद बोला था भैया सबको जैकेट पहना दीजिए और कुछ बोल दीजिए। लगता है कि सबने जैकेट पहनी होती तो बच सकते थे नाव पलटने के बाद भी क्योंकि कुछ लोग तो दब गए थे शायद बता रहे नीचे। नहीं सर ये बोला गया था उनसे कि मतलब मैं तो नहीं बोल रहा सर क्योंकि मैं तो केबिन में था कि या तो सामने खड़े हो जाइए या ऊपर आ जाइए लाइफ जैकेट पहने हुए। कितने लोग होते हैं आप लोग एक क्रूज में? होते सर लेकिन तीन लेकिन उस बार दो ही गए थे हम। अच्छा उस दिन दो ही ऐसे तीन होते हैं। एक जो आप चालक होते हैं पायलट और दो आपके हेल्पर होते हैं। जी एक एक ही हेल्पर गया था। एक छोटी पे था। तो अमूमन तीन लोग होते हैं।

एक पायलट दो हेल्पर लेकिन उस दिन एक ही हेल्पर था। इस तरह की वो क्रूज होती है। एसी लगी लगा हुआ है। तमाम है पानी का वो है। नीचे एक टॉयलेट भी है और वहां आप देख रहे हैं वहां वो हादसा हुआ। यह क्रूज के पायलट थे जो काफी कोशिश की। उनका कहना है लोगों को बचाने के लेकिन उसमें कामयाब नहीं हो पाए और वह क्रूज़ डॉक नहीं हो पाई। यहां उसको आना था यहां तक नहीं पहुंच पाई।

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