ट्रंप का फिर बदला रूप, ईरान को दी धमकी – इतने ब!म की..

अमेरिका और ईरान के बीच खत्म होने के करीब है और इसके साथ ही एक बड़ी चेतावनी भी सामने आई है। यूएस प्रेसिडेंट डोन्ड ट्रंप ने कहा है कि अगर डील नहीं हुई तो हालात सीधे की तरफ जा सकते हैं। पीबीएस न्यूज़ से बात करते हुए ट्रंप ने क्या-क्या कहा जानने के लिए चलते हैं नावेद के पास।

डोनाल्ड ट्रंप ने अभिषेक ये कहा है कि अगर जो सीज फायर है वो किसी डील के बगैर खत्म होती है तो बहुत से बमगिरेंगे। यानी एक तरह उनका एक तरह से उनका इशारा जो था वो ईरान की तरफ था कि ईरान में बहुत सारे वो बम गिरा सकते हैं। अगर क्योंकि 21 अप्रैल को ये सीज फायर खत्म होने ही वाली है। तो उसको लेकर उन्होंने कहा कि बहुत सारे गिरेंगे।

ये पीवीएस न्यूज़ से कहा है। इसके अलावा एक और चीज जो 20 अप्रैल को उन्होंने ट्रुथ सोशल पर भी एक पोस्ट की है वो भी इसी तरफ इशारा करती है। उसमें जो लिखा है वो भी मैं आपको एक बार बता देता हूं क्योंकि खासकर उन्होंने को लेकर उस पर कहा है। उसमें डोनल्ड ट्रंप लिखतेहैं कि ईरान कभी भी हासिल नहीं कर सकता। जो मेन लाइन थी वो ये थी। उसके अलावा डिटेल में अगर हम जाए तो शब्दशा जो हिंदी अनुभवानुवाद उसका हुआ है। उसमें उन्होंने कहा कि इजराइल ने मुझे ईरान के साथ युद्ध के लिए कभी नहीं मनाया। ये कई रिपोर्ट्स भी थी।

7 अक्टूबर को जो हुआ उसने मेरी जिंदगी जो जिंदगी में भर की उनकी सोच थी ईरान को लेकर उसको और पक्का कर दिया कि ईरान को कभी भी न्यूक्लियर वेपन हासिल नहीं करने दिया जा सकता। मैं फेक न्यूज़ एक्सपर्ट्स और पोल्स को बिल्कुल भी भरोसा किए बगैर देखता पड़ताहूं। वो कहते हैं उसमें से 90% झूठ और मनगढ़ंत कहानियां होती हैं। पोल्स में धांधली होती है। ठीक वैसे ही जैसे 2020 के प्रेसिडेंशियल इलेक्शन में हुई वो खुद के इलेक्शन की बात करते हैं। जैसे वेनेजुएला में हुआ जिनके बारे में मीडिया बात भी नहीं करना चाहता, पसंद नहीं करता।

ईरान में भी वैसे ही जबरदस्त नतीजे देखने को मिलेंगे। और अगर ईरान के नए लीडर ब्रैकेट में वो लिखते हैं रिजीम चेंज स्मार्ट हैं तो ईरान का भविष्य बहुत अच्छा और खुशहाल हो सकता है। यानी डॉनल्ड ट्रंप ने एक तरह से ये कह दिया कि जो रिजीम चेंज के बारेमें वो बार-बार बात कर रहे थे। आपने अभी अभिषेक इसके बारे में बात की। तो एक तरह से वो नए लीडर का जिक्र करते हुए ये प्रूव करना चाहते हैं कि रिजीम चेंज वहां पर हो चुका है और अब वो एक तरह से नई लीडरशिप के साथ बातचीत कर रहे हैं। ये डॉन्ड ट्रंप का पक्ष है। अभिषेक जी इस बारे में ईरान का भी एक रुख जो है वो अलग है इस सारे मामलों से। ईरान के प्रेसिडेंट मसूद पिशियान है। उन्होंने क्या कहा एक बार यह भी अगर आप जी हां उन्होंने कहा है कि डिप्लोमेटिक रास्ता जो भी पॉसिबल हो हर तरह का डिप्लोमेटिक रास्ता अपनाया जाना चाहिए और लेकिन साथ ही साथ वो ये भी कहते हैं कि यूएस पर अमेरिका पर यकीन नहीं किया जा सकता। उनके मुताबिक वो कहते हैं कि विजिलेंस यानी सतर्कता और भरोसा जो है ट्रस्ट डेफिसिट उसकी कमी जो कह रहे हैं वो लोग तो एक ऐसी जरूरत है जिसे नकारा नहीं जा सकता। यानी कुल मिलाकर बात ईरान का पक्ष यह है कि बातचीत तो होगी लेकिन शक के घेरे में वह अभी भी हैं और ग्राउंड की जो सिचुएशन है ।

उस पर अगर जाए तो स्टेट ऑफ़ हॉर्मोस पर ईरान ने इसे थोड़े वक्त के लिए जरूर खोला था लेकिन अब फिर से स्टेट पे स्ट्रिक्ट कंट्रोल उसने अपना कर लिया है और ये वही वजह है कि यूएस ने जो कर दिया है ईरान का और स्टेट के इर्द-गिर्द तो इसको लेकर है और साथ में पोर्ट्स भी ब्लॉक कर दिए गए हैं ईरान के। तो दूसरी तरफ ईरान जो है वो भी अपना समुद्री रास्ता टाइट करने में लगा हुआ है और इसका असर दिख भी रहा है। कई जहाजों को वापस लौटना पड़ा और उसके बाद हमको वहां पर की भी घटनाएं देखने को मिली।

इवन भारतीय जहाजों की भी अगर हम बात करें तो उस पर भी और प्रोजेक्टाइल इंसिडेंट हमको दिखाई दिए। तो ईरान का फिलहाल जो स्टांस है वो ये है कि वो बातचीत करना चाहता है लेकिन यूएस के साथट्रस्ट डेफिसिट है। भरोसे की कमी है और अभी इस वक्त इनडायरेक्टली बातचीत चल रही है अमेरिका और पाकिस्तान के बीच और जिसमें पाकिस्तान जो मीडिएटर की भूमिका में पहले था उसी तरह से वो उस भूमिका में फिर से अपनी को पा रहा है और उसी तरह से कोशिश में लगा हुआ है कि दोनों देशों में कुछ बातचीत करवा सके और खुद की भी ग्लोबल पोजीशनिंग मजबूत कर सके।

तो फिलहाल ये चल रहा है लेकिन ईरान अभी किसी भी तरह से डायरेक्ट बातचीत अमेरिका से करने के मूड में नहीं दिखाई दे रहा है और ये बातें इसलिए भी और चिंताजनक हैं क्योंकि जो सीजफायर की मियाद थी वो अब खत्म होने को है। 7 अप्रैल को हुआ था। 14 दिन के लिए सीज फायर था जो ये 14 दिन का समय अब खत्म हो रहा है। ट्रंप ने इस बारे में क्या कहा? ने क्या कहा?

यह नावेद ने आपको बताया। इसके अलावा एक पक्ष और है बेंजामिन नेहू का। उन्होंने भी कहा है कि द टास्क इज़ येट टू बी फिनिश्ड। यानी हमने जो काम सोचा था, हमारा जो मोटिव था, वह अभी पूरा होना बाकी है।

Leave a Comment