मेजर जनरल अहमद वाहदी वो नाम जो ईरान की डिसीजन मेकिंग के सेंटर पर है। अहमद वाहदी ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर यानी आईआरजीसी के कमांडर हैं। अमेरिकी संस्थान रिपोर्ट कर रहे हैं कि इस वक्त वाहिदी ही ईरान के लिए बड़े फैसले ले रहे हैं। अमेरिकन मीडिया ऑर्गेनाइजेशन द न्यूयॉर्क पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक ईरान में फिलहाल असल कंट्रोल आईआरजीसी के कमांडर के ही पास है। साथ ही नरम दल के नेताओं को साइडलाइन कर दिया गया है। मॉडरेट नेताओं को जो अमेरिका के साथ बहुत ज्यादा सख्त नहीं है।
उनको फॉरेन मिनिस्टर अब्बास अराजची को भी बाकी कई नेताओं के मुकाबले मॉडरेट माना जाता है। लेकिन रिपोर्ट में कहा गया है कि उन्होंने यूएस के साथ पहले दौर की बातचीत में कुछ फ्लेक्सिबिलिटी यानी नरमी दिखाई। रिपोर्ट में दावा है कि अराची ने वीकेंड्स पर स्ट्रीट ऑफ हॉर्मूस खोलने पर सहमति जता दी थी। लेकिन आईआरजीसी ने इसे मानने से इंकार कर दिया। यहीं पर पावर स्ट्रगल दिखाई दिया। आप जानते ही हैं कि नेगोशिएशंस की बात हो रही है जो बीते हफ्ते पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में हुए थे। इसमें ईरान की ओर से बातचीत के लिए ईरानियन पार्लियामेंट के स्पीकर मोहम्मद बाकिर कालिबा की अगुवाई में डेलीगेशन पाकिस्तान पहुंचा था।
ईरानियन डेलीगेशन। इसी डेलीगेशन में ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास सरागची भी थे और उन्हीं के साथ थे एक और शख्स मोहम्मद बाकिर जुल कद्र। ये ईरान के सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल यानी एसएससी के सेक्रेटरी हैं। आईआरजीसी के बैकग्राउंड से आते हैं। एसएससी में उनकी वही ऑफिशियल डेज़िग्नेशन है जिस पर अपने असेसिनेशन के वक्त अली लारी जानी थे। वाशिंगटन के एक थिंक टैंक इंस्टट्यूट फॉर द स्टडी ऑफ वॉर शॉर्ट में कहें तो आईएसडब्ल्यू ने अपने एक एनालिसिस में बाकिर जुल कद्र के रोल पर बात की है।
अमेरिकी आईएसडब्ल्यू का दावा है कि जुल कद्र को इसी डेलीगेशन में शामिल करवाने वाले खुद आईआरजीसी कमांडर मेजर जनरल अहमद वाहिदी ही थे। दावे के मुताबिक वाहिदी और जुलक ने मिलकर स्ट्रीट ऑफ हॉर्मोस पर ईरान का कब्जा मजबूत किया और सिर्फ मिलिट्री ही नहीं नेगोशिएशन टीम पर भी नजर रखी। आईएसडब्ल्यू थिंक टैंक के मुताबिक मोहम्मद बाकिर जो कद्र ने ईरान को एक शिकायत भेजी। कहा कि अराची ने बातचीत के दौरान फ्लेक्सिबिलिटी दिखाकर अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाने का काम किया। आईएसडब्ल्यू रिपोर्ट कहती है कि जुलक के गुस्से की वजह से सीनियर नेताओं ने शांति वार्ता के लिए गए ईरानी डेलीगेशन को वापस तेहरान बुला लिया है। लेकिन यहां एक डिस्क्लेमर है जो दावे किए जा रहे हैं वो अमेरिका के वाशिंगटन में बैठा एक थिंक टैंक आईएसडब्ल्यू कर रहा है। और इन दावों को जो संस्था छाप रही है वो भी अमेरिका की ही द न्यूयॉर्क पोस्ट है।
अगर ISW के इस एनालिसिस को रैशनली एनालाइज़ करें, तो ध्यान जाता है कि ईरान के डेलीगेशन से पहले तो अमेरिका का डेलीगेशन पाकिस्तान से लौटने के लिए रवाना हो गया था। यानी जेडी मेंस की लीडरशिप वाला डेलीगेशन पहले इस्लामाबाद से वापस अमेरिका लौट गया था। ईरान वाला डेलीगेशन बाद में निकला। फिर ये दावा कहां से आया कि ईरान ने अपना डेलीगेशन वापस बुला लिया था। इसलिए पी स्टॉक्स रुक गई। साथ ही यह वैसे ही कुछ वेस्टर्न मीडिया चैनल्स से रिपोर्ट्स आ रही हैं जिन्हें ईरान खारिज करता आया है। इसलिए इन दावों पर आंख मूंदकर भरोसा किया जाना भी मुश्किल है। लेकिन अगर यह दावे सच्चे हैं तो मेजर जनरल अहमद वाहदी के हाथ में अब दो-दो कमान है। मिलिट्री की भी और नेगोशिएशन यानी बातचीत की भी। इसका सीधा असर ग्राउंड पर दिख भी रहा है।
न्यूयॉर्क पोस्ट की रिपोर्ट कहती है कि फिलहाल जमीन पर फैसले लेने में ताकत आईआरजीसी के पास ज्यादा दिख रही है। क्योंकि सुप्रीम लीडर जो हैं ईरान के सुप्रीम लीडर मुस्तबा खमैनी अभी तक पब्लिकली सामने नहीं आए। हैं। डॉनल्ड ट्रंप इन रिपोर्ट्स की ओर से और इनका जो दावा है उनकी ओर से इस तरह पोट्रे करते हैं। इनको दिखाते हैं जैसे ईरान में रिजीम चेंज हो गया है। इनका हवाला देकर क्योंकि उन्होंने ईरान में रिजीम बदलने को अपनी जंग शुरू करने का एक मकसद बताया था। 20 अप्रैल को भी उन्होंने जब ट्रुथ सोशल में पोस्ट की तो उन्होंने कहा अगर ईरान के नए नेता यानी रिजीम चेंज स्मार्ट हैं तो ईरान का भविष्य बहुत बढ़िया और खुशहाल हो सकता है। ब्रैकेट में उन्होंने लिखा था रिजीम चेंज स्पेशली। यानी डोनाल्ड ट्रंप ने एक तरह से यह दावा करने की कोशिश की है कि ईरान में रिजीम चेंज तो हो ही गया है। लेकिन इसे पूरा सच नहीं माना जा सकता। तो वजह सीधी भी है। भले ही अमेरिकन मीडिया रिपोर्ट्स में ये बार-बार कहा जा रहा हो कि ईरान में रिजीम चेंज हो गया है।
ईरान इन रिपोर्ट्स को हमेशा से नकारता आ रहा है। बीच में एक दफा ऐसा भी हुआ था जब ईरान की फॉरेन मिनिस्ट्री ने ये ऑफिशियली क्लियर किया कि ईरान में कोई रिजीम चेंज नहीं हुआ है और मसूद पजिशियान ही अभी भी उनके राष्ट्रपति हैं। कई बार ईरानियन एंबेसीज डोनल्ड ट्रंप को इस बात के लिए भी ट्रोल करती रही हैं कि एक ट्वीट या सोशल मीडिया पोस्ट कर देने से कोई काम नहीं हो जाता। इसके बावजूद डोनाल्ड ट्रंप ने 20 अप्रैल को अपनी पोस्ट में फिर से रिजीम चेंज का दावा कर ही दिया पोस्ट में। यहां तक कि जब हम आपके लिए ये रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं, उससे ठीक पहले भी ईरान ने डोनाल्ड ट्रंप के ऐसे ही दावों को खारिज किया है। ईरानी विदेश मंत्रालय के पूर्व प्रवक्ता रमीन मेहमान परस्त ने कहा है कि ईरान के खिलाफ ट्रंप अपनी खुद की शुरू की जंग से बाहर निकलने के लिए झूठी बातें और मिलिट्री दिखावे का सहारा ले रहे हैं।
वो झूठी बातें करके यह साबित करना चाहते हैं कि जिस मकसद से उन्होंने यह जंग शुरू की थी, वह कथित मकसद उन्होंने हासिल कर लिया है। इससे परे फिलहाल अमेरिकी थिंक टैंक आईएसडब्ल्यू का कहना है कि ईरान में अब कमांडर मेजर जनरल अहमद वाहिदी के पास वैसी ही ताकत है जैसी अली लारीजानी के पास हुआ करती थी। बल्कि अली लारी जानी ईरान की सरकार में जिस पद पर थे उसी पद पर यानी एसएससी सेक्रेटरी के पद पर जो शख्स हैं मोहम्मद बाकिर जुल कद्र वो भी अहमद वाहदी के ही वफादार हैं। इस पर वेस्टर्न मीडिया प्लेटफार्म न्यूयॉर्क पोस्ट लिखता है ट्रंप एडमिनिस्ट्रेशन यह मानकर चल रहा था कि ईरान में वो एक बदली हुई रिजीम से डील कर रहा है।
लेकिन अगर ग्राउंड पर कंट्रोल आईआरजीसी के पास है तो इक्वेशन पूरी तरह बदल जाती हैं। क्योंकि आईआरजीसी ट्रेडिशनली अपने कड़े और सख्त रुख के लिए जाना जाता है अमेरिका के प्रति। इसका असर अब अमेरिका के साथ ईरान की शांति वार्ता पर भी पड़ सकता है।
स्थिति साफ है कि कुछ भी साफ नहीं है। चश्मा लगाकर हम देख रहे हैं धुन छड़ते ही साफ-साफ जानकारियां आपके लिए इसी तरह लाते रहेंगे
