बिलासपुर: बादाम प्रोटेस्ट के बाद 2 अफसरों पर क्या एक्शन ?

एक बादाम क्या कर सकता है किताबों में पढ़ा था दिमाग तेज करता है घर वालों से सुना था याददाश्त बढ़ाता है लेकिन छत्तीसगढ़ में एक बादाम ने एक सरकारी विभाग की साल भर से खोई हुई याददाश्त लौटा दी है। साल भर से जो फाइल नहीं मिल पा रही थी बादाम की याददाश्त वह घंटे भर में मिल गई और लापरवाही बरतने के आरोप में दो अधिकारियों पर एक्शन भी हो गया है। आपके लिए मैं बादाम लेकर के आया हूं।

यह देखिए आपको इसको खाना और आपको जब याद आ जाए कि आपका फाइल कहां पर है आप मेरे को बता देना। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले का एक सरकारी दफ्तर और इस दफ्तर में एक सरकारी अफसर की टेबल पर बिखरे हुए यह बादाम। बादाम बिखेरने वाले शख्स का नाम है तरुण साहू जो सिस्टम से हार कर अब ड्राई फ्रूट्स के सहारे लड़ाई लड़ रहे हैं। तरुण वीडियो बनाते हुए कहते हैं मैडम यह बादाम खा लीजिए याददाश्त तेज हो जाएगी फिर शायद आपको याद आ जाए कि मेरी फाइल कहां है। यह कहानी शुरू होती है साल भर पहले यानी मार्च 2025 में। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में रहने वाले तरुण साहू ने रिसेल में एक ईडब्ल्यूएस फ्लैट खरीदा था।

सपना था कि एक छोटा सा अपना घर हो। ट्रांसफर का जो प्रोसेस होता है वह बिल्कुल क्लियर था। संबंधित विभाग में जाकर डॉक्यूमेंट जमा कराइए। एकद महीने में जो फ्लैट है वो आपके नाम ट्रांसफर हो जाता है। लेकिन यहीं पर आता है कहानी में एक ट्विस्ट। एक महीना, 2 महीना, 6 महीना और फिर साल भर सरकारी दफ्तर में तरुण की फाइल नहीं मिली। लगातार वो चक्कर काटते रहे।

अब सवाल यह है कि वो फाइल आखिर गई कहां? क्या वह खुद चलकर कहीं घूमने निकल गई थी? तरुण हर बार दफ्तर आते थे और हर बार उनको यही जवाब मिलता था कि फाइल नहीं मिल रही है। ढूंढनी पड़ेगी। यह ढूंढनी पड़ेगी जो है ना यह भारतीय सरकारी तंत्र का सबसे लंबा वाक्य है जिसका मतलब होता है अप्रत्यक्ष रूप से ही सही कि काम अभी नहीं होगा। तो एक दिन तरुण ने तय किया कि अब बहुत हो गया।

इस बार वह दफ्तर पहुंचे वह भी आधा किलो बादाम लेकर। सरकारी अफसर की टेबल पर उन्होंने बादाम फैला दिए और बोले आप यह बादाम खाइए इससे आपकी याददाश्त तेज होगी। ललन टॉप से बातचीत में तरुण ने पूरी कहानी बताई है इस इंसिडेंट की। साल भर से अभी तक क्या-क्या हुआ है वो आपको सुनवाते हैं। सर ये एक साल पहले मैंने ये जो आप पीछे घर देख रहे हैं। ये फ्लैट है। ये फ्लैट खरीदा था एक साल पहले जिसकी नामांतरण जिसका रजिस्ट्री हुआ था। रजिस्ट्री पश्चात नामांतरण की प्रोसेस होती है। तो 163 2025 को सारे डॉक्यूमेंट्स बना करके मैंने फाइल बना करके जो रजिस्ट्री पेपर होता है वो मैडम पूनम बंजारे के हाथों दिया नामांतरण प्रोसेस के लिए।

उसके बाद फिर मैं हमेशा ऑफिस जाता था। बट ये बोलती थी कि अभी हुआ नहीं है क्योंकि हमारे पास वर्क प्रेशर है करके। ऐसे करते-करते सर छ महीने चले गए। सातवें महीने में जब मैं गया तो मैडम बोली कि नामांतरण हो चुका है आपका करके। आप कल आना। दूसरे दिन मैं गया मैं बोला मैडम नाम की कॉपी मतलब मैं यह बोला मेरा वर्ड ये था कि नाम का क्या हुआ करके बोले नामांतरण हो चुका है बट आपका फाइल है वो नहीं मिल रहा है करके ऐसे तो नहीं मिल रहा है मतलब फिर उसके बाद मैं हर 10 से 15 दिन में वहां पर जाता था और बीच में ये भी हुआ था कि मैडम मेरे को बोली कि अलमारी है वहां पर आप अपना फाइल ढूंढिए करके तो 4 घंटे तक मैं खुद वहां पर फाइल ढूंढ रहा था अगर वहां पर सीसीटीवी कैमरा लगा होगा तो अधिकारी चेक कर सकते हैं और फिर उसके बाद फ्राइडे को मैं गया ऑफिस में तो फ्राइडे फ्राइडे को मॉर्निंग सुबह 11:30 के आसपास मैं ऑफिस गया था।

मैं मैडम से मिला। मैडम बोला मैडम मैम फाइल मिला करके तो मैम बोली अभी फाइल नहीं मिला है करके। फिर मैं बाहर आया सोचा कि क्या करूं करके। तो मेरे को यही लगा कि मेरा मैडम का याददाश्त कमजोर हो गया है। क्योंकि फाइल मिल नहीं रहा है। मतलब उनका याददाश्त ही कमजोर हुआ है। तो मैं मार्केट गया। 500 ग्राम बादाम लेकर के आया और बादाम भेंट करने का सोचा। तो बादाम भेंट करता अगर बिना कैमरे का भेंट करता तो यह कुछ अलग ही जाता। तो इस वजह से मैं एक कैमरा लिया।

मतलब मेरे पास एक कैमरा है इंस्टा 360 जिसमें कैमरा को खुद ही हाथ में पकड़ के वो सभी तरफ का शॉट आ जाता है। तो एक कैमरा मैं हाथ में पकड़ा और एक हाथ में मैं बादाम का पैकेट पकड़ा हुआ था। मैं गया मैडम केबिन में। अगर मैं वो बादाम को पैकेट सहित अगर मैडम को देता तो वो रिश्वत जैसा कुछ दिखाई पड़ता। तो मैंने वहां पर उनके टेबल में बादाम को डाल दिया और ये बोला कि मैडम आप ये बादाम को खाइए। खाने के बाद जब आपका याद आ जाए कि मेरा फाइल कहां पर रखा है तो आप कॉल करके बता दीजिएगा। वैसे मैडम जो है वह मोबाइल निकाल कल मेरा वीडियो बनाने लगी और फिर मेरे को लगा कि अब इसके अलावा बात करने का कोई मतलब नहीं है करके और मैं यह भी बोला कि मैडम बादाम जो है वो याददाश्त बढ़ाता है तो आप इस बादाम को खाइए क्योंकि ये बादाम ऐसा ड्राई फ्रूट है जो याददाश्त तेज करता है तो आप खाइए और वैसे ही करके मैं बाहर निकला और बाहर निकलने के बाद जो कैमरा है.

अपनी तरफ करके मैं अपनी सारी समस्या कैमरे में बताया। सर यह आम सूचना की कॉपी जो वहां से दिया गया है आप देख सकते हैं। इसमें डेट लिखा हुआ है। इसमें डेट लिखा है 1732 का है। आप देख सकते होंगे यहां पर 173 2025 का ये आम सोचने की कॉपी है। वैसे ये बादाम फैलाने वाला जो मामला है ये सिर्फ गुस्सा नहीं था। यह एक साइलेंट प्रोटेस्ट था। जिसमें ना नारे थे ना पोस्टर थे। था तो सिर्फ बादाम। और यकीन मानिए इस देश में कई बार बादाम आरटीआई से ज्यादा असरदार साबित हो सकता है। ऐसा मैं क्यों कह रहा हूं? बस यह वीडियो आगे देखते जाइए। अब आते हैं असली ट्विस्ट पर। यह वीडियो वायरल होने के बाद एक सरकारी आदेश सामने आता है और पता चलता है कि तरुण का जो आवेदन है वो 17 मार्च 2025 को जमा हुआ था। उसी दिन आगे भेज भी दिया गया।

11 नवंबर 2025 को जरूरी जो लेटर है वह तैयार हुआ। साइन हो गए और डिस्पैच नंबर भी मिल गया। यानी फाइल पूरी तरह से एक्टिव थी। फाइल जिंदा थी, सांस ले रही थी और आगे बढ़ रही थी। बस एक छोटी सी दिक्कत थी। दिक्कत यह कि वो फाइल फाइल में ही कहीं दब कर रह गई थी। बिल्कुल सही सुना आपने। क्योंकि इसके बाद यह फाइल जिसे भेजी जानी थी उसे भेजी नहीं गई और पूरे एक साल तक कहा जाता रहा कि फाइल नहीं मिल रही है। अब आप इसे क्या कहेंगे? लापरवाही, सिस्टम का फेलियर या याददाश्त की समस्या। सोचिए तरुण एक साल तक चक्कर पे चक्कर काटता रहा लेकिन कोई असर नहीं हुआ। लेकिन जैसे ही बादाम टेबल पर बिखेरे और वीडियो वायरल हुआ तो अचानक से मामले में जांच बैठ गई।

आज तक से जुड़े हमारे सहयोगी मनीष शरण की रिपोर्ट के मुताबिक 18 अप्रैल को छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड के आयुक्त ने एक आदेश जारी किया। लबोल लवाब यह था कि लापरवाही हुई है और लापरवाही के चलते दो अधिकारियों एलपी बंजारे जो कि प्रभारी संपदा अधिकारी हैं और पूनम बंजारे जो कि उपसंपदा अधिकारी हैं। पूनम बंजारे वही अधिकारी हैं जिनके टेबल पर बादाम फैलाए गए थे। बादाम फेंके गए थे। इन दोनों को इनके जो मौजूदा काम है उससे हटाकर मुख्यालय यानी रायपुर में अटैच कर दिया गया है। हालांकि पूनम बंजारे का आरोप है कि मेरा पक्ष सुने बिना मुझे मुख्यालय अटैच कर दिया गया है और वीडियो वायरल होने के बाद जो पूनम बंजारे हैं वह एसपी कार्यालय भी पहुंच गई थी शिकायत दर्ज कराने। उनका आरोप है कि उनके दफ्तर में उनका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल किया गया जिससे उनकी छवि धूमिल हुई है। उन्हें मानसिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ा है। इन सब चीजों को लेकर उन्होंने तरुण के खिलाफ आईटी एक्ट के तहत केस दर्ज करने की मांग की है।

हालांकि केस अभी दर्ज हुआ नहीं है। वो शिकायती आवेदन लेकर गई थी। और क्या बता रहे हैं वो भी आपको सुनवाते हैं। जा रहे हैं। मैं छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल में सहायक संपदा प्रबंधक के पद पर अभी कार्यरत हूं। कल मैं अपने टेबल में लगभग 1 बजे के टाइमिंग थी अपने कार्य स्थल पर काम कर रही थी। उस बीच में एक तोरण साहू नाम का एक लड़का आया और उसने मुझे मतलब कि मेरे टेबल में मेरा काम नहीं हो रहा है करके बादाम को फेंकते हुए मुझे एकदम लज्जा करते हुए अपमानित करते हुए और यह कहते हुए कि तुम इस बादाम को खाओ और तुम अपने याददाश्त को बढ़ाइए और जब तुम्हारी याददाश्त बढ़ जाएगी तो तुम मेरा फाइल को ढूंढ देना और तुम मेरा काम को करना। इस तरीके से मेरे से बसती से बात करते हुए अपमानित करते हुए मेरे कैबिन से निकलते हुए मतलब कि मेरे ऊपर और घोर अपराध मतलब कि रिश्वत लेने का क्या बोलते शिकायत दर्ज करूंगा करके धमकी देते हुए उसने वीडियो बनाते बनाते पूरा 5 मिनट का वीडियो बनाते बनाते मेरे टेबल से निकला उसके बाद कल शाम को वो 5:00 से छह बजे मेरा वीडियो सोशल मीडिया में Instagram में वायरल किया गया है जिससे मैं बहुत डरी हुई हूं अपमानित सी महसूस कर रही हूं और बहुत तनाव पूर्ण महसूस कर रही हूं और अगर उसको किसी काम अगर उसका उसका पेंडिंग है तो वो बड़े अधिकारी के पास जाकर शिकायत कर सकता था। डायरेक्ट वो मेरे पास आकर इस तरीके से कृत नहीं कर सकता है और मेरे ऊपर इस तरीके के लांछन नहीं लगा सकता है।

सर ये सरा सर वो झूठ बोल रहा है कि एक साल से उसका पेंडिंग कोई भी प्रकरण नहीं है। उसने आवेदन दिया था। उसके आवेदन में कुछ डॉक्यूमेंट की कमी थी। उस डॉक्यूमेंट के लिए हमारे स्टाफ के द्वारा भी मेरे द्वारा भी उसको कॉल किया गया कि इस डॉक्यूमेंट को आप पूरा करिए। उसके बाद भी उसने कॉल नहीं किया। उसके बाद जब आया 3 महीने के बाद भी तो फिर उसको मैंने बोला कि आपका ठीक है आम सूचना वाले में हम कर दिए हैं डॉक्यूमेंट को आप जमा कर दो तो बोलते हुए ये मतलब बोलते हुए चले गया कि इतने दिन तक पेंडिंग है मेरा फाइल और मुझे डायरेक्ट नामांकन की आदेश की कॉपी दो मैं नहीं छपवाऊंगा इसको और अगर जिन अधिकारी को कितने रुपए का रिश्वत लेता है या तुमको कितने रुपए की रिश्वत चाहिए यह बोलते हुए उस टाइम पे मुझे दिया और छोटे जाति के लोग ऐसे सीट में बैठ जाते हैं करके देते हुए भी निकला और आज सर मेरे साथ बादाम फेंका है।

कल ये भी कर सकता है कि मेरे ऊपर तेजाब लाकर फेंक सकता है, चाकू मार सकता है या कुछ भी और नीचे जो भी हरकत उसको करना है कर सकता है। तो मैं यही बोलना चाहती हूं कि मुझे सुरक्षा और न्याय मिलना चाहिए और सोशल मीडिया में जो भी उसने वायरल किया है वीडियो उसको तत्काल ब्लॉक किया जाए। बस मेरा तो अब संबंधित जिम्मेदार अधिकारी अटैच कर दिए गए हैं। सिस्टम जाग गया है। यानी जो काम 365 दिन में नहीं हुआ वो एक वीडियो और आधा किलो बादाम ने कर दिखाया है। तो अब सवाल यह है कि क्या इस देश में हर काम के लिए एक बादाम वाला प्रोटोकॉल बनाना पड़ेगा? वैसे अगर इस केस से सीख लेकर एक सरकारी गाइडलाइन बनाई जाए। मतलब यह इमेजिन कर लीजिए आप तो शायद वो कुछ ऐसी होगी कि अगर फाइल अटक जाए तो 100 ग्राम बादाम 6 महीने से ज्यादा फाइल अटकी है तो 250 ग्राम बादाम साल भर से ज्यादा अटकी है तो आधा किलो बादाम और एक वायरल वीडियो और फिर भी काम नहीं हो पा रहा है तो काजू किशमिश का एक कॉम्बो पैक बादाम के साथ दे दीजिए और अधिकारी को फिर भी समझ ना आए तो अगला स्टेप है अखरोट क्योंकि वो दिमाग के शेप का होता है ना शायद वो ज्यादा असर करे तरुण साहू का गुस्सा एकदम जायज था उनका का तरीका जो है प्रोटेस्ट करने का वो बिल्कुल अलग था, अनोखा था और उसका असर जो है वह सीधा सिस्टम पर पड़ा है।

तो अगली बार जब कोई पूछे कि एक बादाम क्या कर सकता है? तो जवाब होगा कि एक बादाम फाइल ढूंढ सकता है, सिस्टम को जगा सकता है, सरकार को याद दिला सकता है और पूरे देश को हंसा सकता है और सोचने पर मजबूर भी कर सकता है। क्योंकि कभी-कभी देश में बदलाव जो है वह आरटीआई से नहीं ड्राई फ्रूट से भी आ जाता है। इस कहानी से तो हमें यही पता चलता है।

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