चीन बनेगा भारत का दोस्त,चौंक गए अमेरिका – पाकिस्तान।

क्या भारत और चीन के बीच के तनाव भरे दिन अब खत्म होने वाले हैं? क्या गलवान घाटी की उस कड़वाहट के बाद अब दोस्ती की एक नई शुरुआत हो रही है? किरगिस्तान की राजधानी बिश्केक से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जिसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।

आज यानी मंगलवार को भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और चीन के रक्षा मंत्री एडमिरल डॉन जून के बीच एक बेहद अहम और हाई प्रोफाइल मुलाकात हुई है। यह मुलाकात शंघाई सहयोग संगठन यानी एससीओ की बैठक के दौरान हुई है और इसके मायने बहुत बड़े हैं। दरअसल दोनों देशों के रक्षा मंत्रियों के बीच यह बातचीत उस समय हुई है जब पूरा एशिया सुरक्षा के लिहाज से एक बेहद नाजुक दौर से गुजर रहा है।

सूत्रों की मानें तो इस मीटिंग में ना केवल क्षेत्रीय सुरक्षा पर बात हुई बल्कि इस पर भी जोर दिया गया कि कैसे दोनों देश मिलकर इलाके में अस्थिरता बनाए रख सकते हैं। सबसे बड़ी बात यह रही कि सीमावर्ती क्षेत्रों यानी एलएसी पर तनाव कम करने के लिए कम्युनिकेशन को और बेहतर बनाने पर सहमति बनी है।

राजनाथ सिंह ने इस मुलाकात के बाद सोशल मीडिया पर अपनी खुशी भी जाहिर की और इसे सकारात्मक बताया। इस मुलाकात की अहमियत समझने के लिए हमें थोड़ा पीछे जाना होगा। साल 2020 में पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में जो झड़प हुई थी, उसने दोनों देशों के रिश्तों पर जैसे बर्फ जमा दी थी।

विश्वास पूरी तरह से खत्म हो चुका था और सीमा पर हजारों सैनिक तैनात थे। लेकिन पिछले कुछ समय से कूटनीतिक स्तर पर जो कोशिशें चल रही थी, यह मुलाकात उसी का एक बड़ा नतीजा है। रक्षा विशेषज्ञ मान रहे हैं कि यह बातचीत संवाद के नए रास्ते खोलेगी और आने वाले समय में इसके ठोस परिणाम भी देखने को मिल सकते हैं। राजनाथ सिंह सिर्फ चीन से मिलने नहीं गए हैं बल्कि उनके इस दौरे के कई और भी पहलू हैं। बिकेक पहुंचते ही उन्होंने सबसे पहले विक्ट्री स्क्वायर पर जाकर शहीदों को नमन किया। इसके अलावा वह एससीओ के दूसरे सदस्य देशों के प्रतिनिधियों से भी द्विपक्षीय बातचीत कर रहे हैं।

राजनाथ सिंह वहां रह रहे भारतीय समुदाय से भी मिलेंगे जो भारत की सॉफ्ट पावर को दिखाता है। एसइओ की बैठक का मुख्य एजेंडा आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई और क्षेत्रीय सुरक्षा को मजबूत करना है। हालांकि जानकारों के मुताबिक भारत और चीन को करीब आता देख अमेरिका और पाकिस्तान जरूर दहशत में आ सकते हैं। भारत और चीन एक दूसरे के सबसे बड़े दोस्त बन गए तो दुनिया भर में अमेरिकी दबदबे को एक बड़ा झटका लगेगा।

वहीं पाकिस्तान के वजूद तक पर संकट आ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की उच्च स्तरीय मुलाकातों से विश्वास बहाली में मदद मिलती है। हालांकि रास्ता अभी लंबा है लेकिन बातचीत शुरू होना अपने आप में एक बड़ी जीत है। विषकेक की ठंडी हवाओं में भारत और चीन के रिश्तों की गर्माहट क्या रंग लाती है यह देखना बेहद दिलचस्प होगा।

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