तो ईरान की आवाम की तरफ से बिल्कुल क्लियर पैगाम है। हो या नेगोशिएशंस हो एक कदम पीछे नहीं हटाएंगे। ईरान पर जो हमला हुआ है वो इललीगल हुआ है। अरे अगर जंग दोबारा शुरू होती है तो ईरान ने कहा है इस बार जो हमले का जवाब दिया जाएगा वो मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा।
इस वक्त में एक जो पूरा पोस्टर जो एक तरीके से वायरल हो रहा है वो पोस्टर पहले मैं आपको दिखा दूं वो इस जैसे ये आपने देखा होगा ये पोस्टर में दिखाया जा रहा है कि आयतुल्लाह ये दिखाया गया कि जितने भी शहीद हुए उनको एक श्रद्धांजलि अर्पित करने का एक मशद एक रोजाइन है मशद जगह का नाम बताया गया है कि मशद है जबकि वो मशद पूरा नहीं है उसके बारे में हम जिक्र करेंगे और वहां पे दिखाया गया है कि जो जो लोग शहीद हुए जिसमें आप ये देखेंगे सबसे जो बड़ी पिक्चर आयतुल्ला खामनी की उनके बराबर में कासिम सुलेमानी और एक जो फोटो इब्राहिम नईसी की ऊपर आयतुल्लाह खुनी और इधर जो ये बिल्कुल उनके लेफ्ट साइड पे ऊपर आयतुल्ला मुस्तफा खामने जो उनके बेटे जो इस वक्त सुप्रीम लीडर है।
उनकी भी फोटो है और ये सारे वो लोग हैं जो इस वक्त में ईरान के अंदर जिनके अससनेट हो गया या जो शहीद हो चुके हैं व इसके बाद पूरा ये एक वायरल होने के बाद ये एक तरीके से पूरा ये खबर आ ये शहीदों में जो फोटो में उनकी आ चुका है तो यानी ईरान के लोग भी मानते हैं कि वो इस वक्त में शहीद हो चुके हैं। क्या इसमें पूरी सच्चाई है? क्या इसमें हर एक क्या ये असलियत है या नहीं है?
उस बात करने के लिए खुद ईरान से ही मेरे साथ प्रोफेसर जो मौलाना है जमीर अब्बास जाफरी साहब जो स्कॉलर भी है अल मुस्तफा यूनिवर्सिटी में ईरान के अंदर वो मौजूद है। सबसे पहले जमीर साहब बहुत-बहुत स्वागत है आपका एनडी टीवी में। क्या है इस पोस्टर की सच्चाई? पहले तो आप यही बताइए। जी बिस्मिल्लाह रहमान रहीम। शुक्रिया बहुत-बहुत दावत के लिए और पोस्टर की कोई सच्चाई नहीं है। वही एक प्रोपोगेंडा का पार्ट है। बिल्कुल जाहिर सी बात है कि इस वीडियो में इमाम खुमैनी का भी फोटो है और आयतुल्ला मुस्तफा खामनाई का भी फोटो है।
तो इमाम खुमैनी भी तो शहीद नहीं हुए हैं। ईरान में एक नॉर्मल प्रोसेस है कि जब भी कोई एक इस तरीके से पोस्टर लगाया जाता है तो अपने लीडर जो होते हैं उनका उनका फोटो सबसे ऊपर होता है। तो आयतुल्ला मुस्तबा खामिनाई का ईरान के लीडर होने के लिहाज से वहां पर फोटो है ना के शहीद होने के लिहाज से। तो ये तो मैं कहूंगा ये वेस्टर्न नरेटिव और प्रोपोगेंडा है कि ईरान के सिलसिले में दुनिया के अंदर कन्फ्यूजन को क्रिएट किया जाए। तो और ये बहुत ही अफसोस की बात है कि बगैर सब्सटेंस के और बगैर ऐसी बातें जिसके अंदर कोई डेप्थ हो इस किस्म की छोटी छोटी लेवल की बातें जो है वेस्ट उठा रहा है।
नेचुरल सी बात है जिसमें कोई दम इस बात में नहीं है और दो चीजें मैं इसके अंदर ऐड कर दूंगा। एक तो पहले तो खुद ये मशहद नहीं है। मशहद अर्देहाल है जो इसान से तकरीबन 200 किलोमीटर की जगह है और ये मशहद नहीं है। मैं इस वक्त मशहद में मौजूद हूं। मशहद एक अलग जगह का नाम है। मशहदे अर्देहाल एक दूसरी जगह का नाम है। वहां पर एक पोस्टर जो है वो लगाया गया था। और वो पोस्टर मिसाल के तौर पर हिंदुस्तान में भी कहीं पर अगर एक पोस्टर लगता है। अगर मान ले मिस्टेक भी हो गई है तो इसका मतलब थोड़ी ना है कि उसको इतना इसको प्रोपोगेंडा बना के पूरी दुनिया में फैलाया जाए। ना ये ऑफिशियल कोई गवर्नमेंट पोजीशन है। ना गवर्नमेंट ऑफिस है। कोई भी इसके अंदर ऑफिशियल वो नहीं। एक प्राइवेट ट्रस्ट है। ट्रस्ट की तरफ से एक पोस्टर रिलीज हुआ था। बाद में इन लोगों ने उस पोस्टर को करेक्ट भी कर दिया क्योंकि लोगों में कंफ्यूजन ना हो। तो एक दूसरा पोस्टर भी है वो इन लोगों ने रिलीज किया जिसके अंदर वो आयतुल्ला मुस्तबा खामिनाई साइड में है। वो फोटो भी आप शेयर कर सकते हैं। जी आयतुल्ला मुस्तबा खामनाई साइड में है और जो शहीद है उनके फोटो इस तरफ कर दिए गए हैं। तो ये क्लेरिफिकेशन और एक लेटर भी वहां से आया है मशद अर्हाल से क्लेरिफिकेशन का जो फारस न्यूज़ में दिया गया है जिसके अंदर क्लियरली उन लोगों ने कहा है कि ये दुश्मन का प्रोपोगेंडा है। बल्कि यहां पर आयतुल्ला मुस्तबामिनाई का फोटो जो है वो फोटो इस उनवान से है कि वो हमारी कंट्री के लीडर हैं। और एक और चीज मैं ऐड करना चाहूंगा कि यहां पर एक ईरान में बहुत ही मशहूर नोहा खान है मैसम मुतीही जिसे बहुत फेमस सिंगर होते हैं। उनका एक वीडियो है जहां पर वो क्लियरली कह रहे हैं कि मैं क्योंकि जो मैसम मुती है जो सिंगर हैं वो आयतुल्ला सैयद अली खामिनाई के भी बहुत क्लोज थे। उन्होंने कहा कि मेरे मेरी डायरेक्ट बात हुई है उनसे जो आयतुल्ला मुस्तबा खामिनाई की जिनसे मुलाकात हुई थी वो परफेक्टली फाइन है।
पूरे वॉर की सिचुएशन और कंट्रोल रूम पूरा मुस्तबा खामिनाई खुद जो है आयतुल्ला मुस्तबा खामिनाई खुद मैनेज कर रहे हैं। तो ये क्लेरिटी है। ईरान के अंदर कोई कन्फ्यूजन नहीं है। बल्कि बल्कि सिर्फ ये प्रोपोगेंडा है और वेस्टर्न न्यूज़ और उसके उसको जो न्यूज़ फॉलो करते हैं उनके दरमियान ये चीजें फैल रही है। तो वही यानी अब देखिए जो नया ये पोस्टर हुआ है वहां पे आयतुल्ला मुस्तफाने की फोटो हटा के वहां सैयद नसरुल्लाह जो है लेबान के जो महजुला के जनरल सेक्रेटरी थे उनकी फोटो लगा दी गई और ये नया पोस्टर यहां पे साइड में उनकी फोटो लगा दी गई तो यानी ये साफ तौर पे दिखा रहा है कि जो मुर्तबा उखामने की जो बात आई थी कि वो इस वक्त सही सलामत है।
लेकिन क्या क्या पता चल रहा है जमीर साहब क्या आप ईरान में है वहां पे किस तरीके के इस इस वक्त में उनके हालात है क्योंकि कई इंटरव्यूज भी था कि पैर जख्मी कहीं उनके हाथ भी जख्मी क्या असल क्या है हकीकत क्या कितने जख्मी है वो देखिए दो चीजें हैं एक तो ये है कि फैक्ट क्या है तो फैक्ट ये है ईरान के ऑफिशियल स्टेटमेंट्स आए थे कि आयतुल्लाह मुस्तबा खामिनाई उसी मौजूद थे उस जगह पर और थोड़ी देर के लिए वो हयात में गए थे यानी घर से थोड़े फासले पे गए थे और जब ये अटैक हुआ आयतुल्लाह सैयद अली खामिनाई की जिसमें शहादत हुई है तो उस वक्त उनका पैर जख्मी हुआ था। यह तो ऑफिशियल ईरान के गवर्नमेंट की तरफ से ऑफिशियल स्टेटमेंट है। लेकिन पैर का जख्मी होने का मतलब डिसफ्रैक्चरर्ड होना या आउट ऑफ शेप होना या पैर का ऑपरेशन करके नया पैर लगा देना। ये कोई भी बात जो है ये ये तमाम बातें बेबुनियाद है और हमला हुआ है। थोड़े जख्मी हुए थे। लेकिन दो हफ्ते के अंदर वो परफेक्टली अपनी नॉर्मल पोजीशन पे आ गए थे। और जब उनको वली फकी चूज किया गया तो उस वक्त डेफिनेटली एक चीज जो देखी जाती है कि वली फकी में फिजिकल और मेंटल कैपेबिलिटी है क्या कंट्री को लीड करने के लिए अगर वो फिजिकली डिसेबल्ड है या अनएबल टू लीड है तो डेफिनेटली यहां के जो मज मजलिस खुबरगान है जो एक्सपर्ट असेंबली है जिसके अंदर 80 से ज्यादा उलमा होते हैं और सब 50-50 इयर्स से ज्यादा पढ़े लिखे होते हैं तो उन लोगों 10 पीएचडी की होती है तो डेफिनेटली वो अपने कॉन्स्टिट्यूशन के हिसाब से ऐसे को नहीं चूज करते जो फिजिकली डिसेबल्ड हो या इनकैपेबल हो कंट्री को लीड करने के लिए। लेकिन ये वेस्ट में प्रोपगेंडा है। न्यूयॉर्क टाइम्स में भी एक पोस्ट आई थी जिसके अंदर जिसको इंडिया में कई चैनल्स ने कॉपी किया और वो जो न्यूज़ न्यूयॉर्क टाइम्स की जो लेडी है वो ईरानी लेडी है जिन्होंने वो लेटर लिखा। उसमें वो आर्टिकल लिखा उसमें वो कह रही है मैंने 23 लोगों से ईरान में बात की। एक का भी नाम प्रेजेंट नहीं किया। और फिर वो कह रही है कि ईरान में आयतुल्ला मुस्तबा खामिनाई की तबीयत ऐसी खराब है। यह हो गया फेस पे प्लास्टिक सर्जरी हुई है। पैर में ये हुआ है। और जब मैं उनके एक्स अकाउंट पर मैं गया तो मैंने एक्स अकाउंट पे जाकर देखा कि उन्होंने कम से कम 50 पोस्ट ईरान की गवर्नमेंट के खिलाफ डाली हुई है।
तो नेचुरल सी बात है कि अगर एक एक लेडी जो आर्टिकल लिख रही हैं और वो ईरान की गवर्नमेंट के खिलाफ उनकी क्लियर पर्सनल ओपिनियन है तो आप उसको जर्नलिस्टिक एथिक्स में उसे कहते हैं एडवर्स एडवर्सियल सोर्स यानी वो जो एक दूसरे का दुश्मन है उसकी सोर्सिंग को अगर आप इस्तेमाल करते हैं तो एटलीस्ट टू सोर्सेस से क्रॉस वेरीफाई करके उसे वेरिफिकेशन करना चाहिए। बिल्कुल देखिए ये वाली खबरें जरूर आई सामने कि आयतुल्ला मुस्तफा खामनी बीमार है। इस वक्त में उनकी तबियत नासाज है। उनके जख्मी भी हुए हैं। और अभी जिस तरीके से अभी आप जमीर जाफरी साहब को भी सुन रहे थे। उनका थोड़ा सा भी नेटवर्क में इशू आया है तो जरूर अभी हम उनसे फिर से कनेक्ट करेंगे।
तो ये सारी चीजें थी व जमीर साहब अगर आप मेरी आवाज सुन पा रहे हैं तो एक एस ए हिंदुस्तानी भी आप वहां पर है किस तरीके से एस हिंदुस्तान में और भी सुनने में है कि वहां से लोग आ भी नहीं पा रहे हैं उनको और जो कुछ लोग भी है तो उनको जमीनी रास्ते से ले आने जा रहा है। हिंदुस्तान के लोग क्या उस वक्त में सोच रहे हैं वहां पे ईरान के अंदर रहते हुए क्या कितना उनको कितने जल्दी आने की सोच रहे हैं? कितने लोग हैं जो आने की फिराक में और अभी तक नहीं आ पा रहे हैं या फ्लाइट्स की वजह से क्या है वहां पे माहौल हिंदुस्तानियों के लिए देखिए ईरान में इंडिया के इंडियन जो स्टूडेंट्स हैं उनमें बहुत ही अपीट मूड है। यहां पर मैंने एक वीडियो भी बनाया था। अपने Instagram पेज पर भी डाला था। यहां पर यहां के जो बिजनेस कम्युनिटी है, इंडिया इंडियंस जो यहां पर अलग-अलग चीजों में ट्रेड करते हैं। जैसे इंडिया से ईरान से खजूर आता है, एप्पल आता है, कीवी आता है, ऑइल रिलेटेड प्रोडक्ट्स आते हैं, विटामिन आता है या अलग-अलग चीजें जो ईरान से एक्सपोर्ट होती है, इंडिया आती है। यहां पर बहुत बड़े-बड़े बिजनेसमैन है। वो लोग डेली सबील लगाते हैं और लोगों को पानी बांटते हैं, लंगर लगाते हैं, शरबत पिलाते हैं। तो यहां पर वो यह पैगाम देना चाह रहे हैं कि ईरान की यह जंग में जो ईरान के ऊपर जुल्म हुआ है इसके अंदर वो अकेले नहीं है। और यहां के स्टूडेंट्स जो हैं जो यहां पर पढ़ते हैं वो लोगों ने भी तकरीबन मेरे मेरी इत्तला में तकरीबन 20 से ज्यादा डिफरेंट लोकेशनेशंस में कुम और मशहद में जो है वो सबले लगाई जा रही है इंडियंस की तरफ से ये पैगाम देने के लिए कि हम इनके साथ हैं। जिन्हें जाना था अक्सर लोग चले गए हैं और जिन्हें नहीं जाना है वो वो सब लोग मौजूद है और उनका कहना यही है कि ईरान की ये जो है सिर्फ ईरान की नहीं है इंसानियत की जंग है और इन जालिमों को जो पूरी दुनिया में जुल्म कर रहे हैं उसके खिलाफ ईरान खड़ा है तो हम तमाम इंसानों की जिम्मेदारी है इस गुंडागर्दी के खिलाफ खड़े रहे जिस तरीके से हम देख रहे हैं कि हमारे मुल्क में भी पिछले हफ्ते भी कुछ दिन ही गुजरे हैं कि डोनल्ड ट्रंप ने एक ट्वीट करके हिंदुस्तानियों की तौहीन किया इंसल्ट किया और कह रहा है कि हेलहोल है हिंदुस्तान नर्ग से आते हैं तो हम कड़ी निंदा करते हैं ऐसे लोगों की ऐसी शब्दों का इस्तेमाल करने के लिए या हिंदुस्तानियों के लिए कहा गया कि ये हैं जो लैपटॉप ले आते हैं और बच्चे पैदा करते हैं और अमेरिका के अंदर बच्चे इन बच्चों की तादाद इनकी ज्यादा होती है। तो नेचुरल सी बात है कि यही और दादागिरी की जुबान पूरी दुनिया में यह लोग चलाते हैं और ईरान इसी इसी के खिलाफ खड़ा है और ईरान ने पूरी इंसानियत के बिहाफ पे अमेरिका को एक सबक सिखाया है। तो हिंदुस्तानी इस वक्त जो यहां पर हैं उनकी फीलिंग यही है कि ईरान की जीत हो और ईरान जैसे जीत रहा है इसी तरीके से ईरान आगे जाए और अमेरिका को सबक सिखाए और ताकि पूरी दुनिया दोबारा एक ऐसे दौर में गुजरे जहां पर अदो इंसाफ हो गुंडागर्दी और दादागिरी ना हो। व आप क्या मानते हैं अभी अगर जैसे तो अभी जिस तरीके से चल ही रहा है और खुदा ना खास्ता फिर से ये जंग शुरू हो जाती है तो क्या ईरान के आवाम के अंदर जज्बा है क्या अब चाहते हैं आवाज आ रही है ।
जमी साहब आपको आवाज आ रही है? कुछ नेटवर्क इशू की वजह से हो रही है। देखिए ईरान की आवाम तो चाह रही है कि जंग जो है वो निर्णायक जंग हो और l में ऐसा ना हो कि बीच में जंग ऐसी जगह बंद हो जाए जहां पर ईरान को उसका हक और अधिकार ना मिले। तो ईरान पर जो हमला हुआ है वह इललीगल हुआ है। जी मुझे आ रही है। जी जी मैं कह रहा था कि ईरान की ईरान की आवाम में इस वक्त बहुत जोश है। ईरान ईरान की आवाम चाहती है कि जंग निर्णायक हो और ईरान का जो अधिकार है वो ईरान को मिले। जंग ऐसी जगह जाके ना रुके कि तीन हफ्ते या तीन महीने के बाद दोबारा जंग शुरू हो। तो ईरान एक ऐसी पोजीशन सुना आपने कि जमीर साहब से हम कांटेक्ट करने की कोशिश कर रहे थे वो ईरान के अंदर मौजूद है उनका नेटवर्क में कुछ ना कुछ इश्यूज होता रह रहा है लेकिन उन्होंने साफ तौर पर बताया कि वहां की जो आवाम है वो ये चाहती है कि एक जंग अगर हो भी तो बिल्कुल इस तरीके से जंग हो कि बिल्कुल ईरान का कोई हक ना मिटे और उन्हें पूरा जो हक है वो मिल सके।
लेकिन अब वही देखना होगा जिस तरीके से अभी 28 फरवरी से शुरू हुआ और आज पूरे दो महीने हो चुके हैं। आज 28 अप्रैल हो चुकी है। उसके बाद भी वहां पे जो लोग हैं हर रात में तेहरान स्ट्रीट की बात करें वहां पे आके प्रोटेस्ट एक तरीके से कर रहे हैं। तो वो दिखाता है कि किस तरीके से ईरान की जो आवाम अभी है वो ईरान के साथ खड़े। वहीं जाते-जाते आपको फिर से एक बार ये अपनी जो खबर थी हमारी वो हम आपको बता दें कि जैसा कि आपने देखा था कि जो पोस्टर जो थे वो पहले पोस्टर जो लगा हुआ था वो पोस्टर आपने देखा इस तरीके से वो पोस्टर था जिसमें एयतुल्ला मुस्तफा साहब की फोटो भी यहां लगी हुई थी तो जिसके बाद अब ईरान ने साफ तौर पे उस पोस्टर को हटा के दूसरा जो न्यू पोस्टर है वो जारी कर दिया गया है जिसमें हसन नसुल्ला साहब की फोटो भी दिखा दी है व जमीर साहब भी मेरे साथ कनेक्ट ही है उनसे भी मैं ये पूछ लेता हूं जमीर साहब आप बिलकुल जिस तरीके से आखरी का सवाल कि आपने जैसा बताया कि वहां की जनता भी अभी चाहती है कि एक तरीके से पूरा हक मिल सके।
क्या अगर जो ये क्योंकि छ महीने पहले भी इसी तरीके से जब ये जून जुलाई के वक्त में भी ये जो जंग हुई थी 12 दिन की तब भी ऐसी पोज़ गया था। उसके बाद फिर ये अटैक शुरू हो गया था। कितनी ईरान की तैयारी है वहां पे? वहां के आवाम कितनी तैयार है? क्या है वहां पूरा इस तरीके से समाप्त? लग रहा है संपर्क हो ही नहीं पा रहा है उनसे। हिसाब से कोई इशू नहीं है। तो यह हमारी पूरी मेन यही खबर थी जिसमें हमने आपको पूरी तरीके से सब बताया कि कैसे क्या तैयारियां है वहां पे और जो पोस्टर्स से साफ तौर पे जो ईरान ने एक तरीके से दिखा दिया कि वहां पे हम सही सलामत जो मुस्तफा है वो बिल्कुल सही सलामत है जो कि उनका पोस्टर्स भी जारी करके उन्होंने सब चीज बताई जमी साहब आपको आवाज आ रही है क्या? जी जी आ रही है। जी आखरी बार यही सवाल पूछ रहा था कि ईरान की क्या सरकार की क्या इतनी तैयार है क्योंकि जो फॉरेन मिनिस्टर है वो पाकिस्तान भी जाते हैं वहां रूस भी जाते हैं ओमान भी गए क्या एक तरीके से तैयारियां है वहां पे अगर फिर से जंग होती है कितने ताकतवर फिर से उभर के आएंगे क्या उनकी जो मिसाइल्स खत्म हो गई थी क्या और हो पाएंगी वैसे तो आपसे ये सवाल नहीं बट फिर भी क्या वहां की जो वहां ईरान के अंदर है किस तरीके से सोर्स बताते हैं देखिए ईरान में ईरान में पब्लिक में मूड बहुत हाई है। पब्लिक को पता है कि अमेरिका ने हुरमुस पे ये कंट्रोल नहीं कर पाया।
50 दिन होने के 40 दिन जंग चलने के बावजूद भी वो उनका अब्राहम लिंकन ईरान से 1000 किलोमीटर दूर खड़ा रहा। तो ये उनकी बहुत बड़ी शिकस्त है। और अभी कल एनबीसी रिपोर्ट ने एक रिपोर्ट शाया की है जिसके अंदर उन्होंने बताया कि अमेरिका कितनी बुरी तरीके से उनके मिलिट्री बेससेस तबाह हुए हैं। तो अमेरिका इस वक्त बहुत बैकफुट पर है। हुरमुस जो है उसका ईरान का कंट्रोल है कंप्लीटली। अमेरिका में ऑइल प्राइसेस बढ़ रहे हैं। गैस प्राइसेस बढ़ रहे हैं। अमेरिका में डॉन्ड ट्रंप की रेटिंग जो है वो तकरीबन 30% के आसपास आ गई है। यानी 70% लोग अमेरिका में अमेरिका में ट्रंप को पसंद नहीं करते। जो जंग को 77% लोग पसंद नहीं करते। वहां पर गैस और ऑइल के प्राइसेस बहुत बढ़ गए हैं। तो जंग जैसी तुलानी होती है अमेरिका के लॉस में है। ईरान के लॉस में नहीं है। ईरान पूरी तरीके से तैयार है। अगर जंग दोबारा शुरू होती है तो ईरान ने कहा है इस बार जो हमले का जवाब दिया जाएगा वो मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा और ऐसा जवाब दिया जाएगा कि दोबारा की बात नहीं होगी। सिर्फ सरेंडर की बात होगी और अमेरिका कंप्लीटली आकर सरेंडर करेगा। यहां की पब्लिक बिल्कुल तैयार है। चाहे जंग हो, चाहे नेगोशिएशंस हो जो भी हो लेकिन अपने हक और अधिकार में एक सेकंड के लिए ईरान जो है पीछे नहीं हटेगा। ईरान अपना पूरा हक और पूरा अधिकार लेके रहेगा और ईरान एक ऐसी पोजीशन पे आकर जंग को रोकेगा जहां पर ईरान के लिए क्लियर हो जाएगा कि अगली बार अमेरिका दोबारा ईरान पे हमला ना करे। यानी इस पोजीशन पे जब तक जंग आ के नहीं रुकेगी। तो वहां तक हमारे लिए क्लियर है कि जंग जारी रहेगी। यह वीडियो जो आप दिखा रहे हैं यह तेहरान में इंकलाब स्क्वायर का वीडियो है और यहां पर लोग नारे लगा रहे हैं कि अम्र फकत अम्र सैयद मुस्तबा यानी नारा लगा रहे हैं कि हम लोग सैयद मुस्तफा खामनाई के हुक्म पर और उनके अम्र पर हम लोग सारे कुर्बान है और हम लोग सब उनके लिए जमा हैं। तो पब्लिक में हर रोज रात को इसी तरीके से लाखों की तादाद में हर शहर में लोग आते हैं। मैं तकरीबन 950 किलोमीटर मैंने ड्राइव किया है कुम से मशहद और मैंने हर शहर में जब एंटर होता था तो मैं देखता था कि वहां इसी तरीके से लोग खड़े हैं।
पैगाम दे रहे हैं कि हम लोग जालिमों के मुकाबले में खड़े हैं। सिर्फ हमारी मिलिट्री नहीं लड़ रही है बल्कि पूरी आवाम मिलिट्री के साथ खड़ी है। तो ईरान की आवाम की तरफ से बिल्कुल क्लियर पैगाम है। जंग हो या नेगोशिएशंस हो एक कदम पीछे नहीं हटाएंगे। हक के लिए अपने लड़ेंगे। सर कट सकता है लेकिन सर झुक नहीं सकता।
ये ईरान की आवाम का पैगाम। बहुत-बहुत शुक्रिया जमी साहब। आपने पूरी तफसील से बात बताई और आपने बताया वो भी कि किस तरीके से जो ये पोस्टर था जो जो जारी हुआ था उसके बारे में आपने पूरा क्लियर करके बता दिया कि ये पोस्टर जो नया जारी हो चुका है जिसमें आयतुल्लाह मुस्तफा खामनी की फोटो साफ तौर पर दिखाई गई और बताया गया कि आयतुल्ला मुस्तफा खामनी पूरी तरीके से सही सलामत है। बहुत-बत शुक्रिया आपने अपना वक्त दिया।
तो वहीं आपने देखा ये हमारी खास रिपोर्ट थी जो सिर्फ आपको एक्सक्लूसिव सबसे पहले हमने जानकारी बताई जहां हर मीडिया ये बता रही है कि आज मुस्तफा खान ने भी क्या शहीदों की फोटो में आने के बाद क्या वो भी शहीद हो गए तो हमने पूरा क्लियर आपको ईरान से ही करके दिखाया और बताया कि अभी वो बिल्कुल सही सलामत है और वो
