ट्रंप ने ईरान को दिया फोनकॉल का ऑफर, बदले में ईरान ने क्या शर्त रख दी?

अमेरिका ने ईरान को एक खुला ऑफर दिया है और बदले में ईरान ने कुछ लिमिटेशन सेट कर दी है। ईरान ने साफ कर दिया है कि किन चीजों पर वो नेगोशिएट करेंगे और किन पर नहीं करेंगे। शुरुआत ट्रंप के ऑफर से करते हैं। न्यूज़ को एक इंटरव्यू दिया जिसमें डॉनल्ड ट्रंप ने कहा कि अगर वह यानी कि ईरान बात करना चाहते हैं तो हमारे पास आ सकते हैं या फिर वह हमें कॉल कर सकते हैं।

आप जानते हैं यहां टेलीफोन है। हमारे पास अच्छी और सिक्योर लाइनें भी हैं। रिपोर्ट के मुताबिक ट्रंप ने आगे कहा कि उन्हें विश्वास है कि ईरान जल्दी खत्म हो जाएगा और जंग अमेरिका जीत जाएगा। एक तरफ ट्रंप का ऑफर है कि बातचीत के लिए ईरान कभी भी उन्हें फोन कर सकता है और दूसरी तरफ ईरान ने भी अमेरिका के सामने एक प्रपोजल रखा है। एक्स के रिपोर्ट के मुताबिक ईरान ने प्रस्ताव रखा कि स्टेट ऑफ हॉर्मूस को फिर से खोला जाए और टॉक को फिलहाल के लिए रोक दिया जाए।

ईरान के प्रपोजल में कहा गया कि पहले हॉर्मूस को खोलो न्यूक्लियर की बात बाद में होगी। बातचीत के लिए दोनों देशों को पाकिस्तान में साथ बैठना था। लेकिन अमेरिकी डेलीगेट्स नहीं आए। जानकारी खुद डोनल्ड ट्रंप ने दी। उन्होंने ट्रुथ सोशल पर लिखा कि मैंने पाकिस्तान की यात्रा रद्द कर दी है। मेरे प्रतिनिधि ईरानियों से नहीं मिलेंगे। यात्रा में बहुत समय बर्बाद होता है। हमारे पास बहुत काम है। इसके अलावा उनकी आपस की लीडरशिप में ही जबरदस्त कलाह और कंफ्यूजन है। किसी को नहीं पता कि सत्ता किसके हाथ में है। यहां तक कि खुद उन्हें भी नहीं पता।

साथ ही हमारे पास सारे पत्ते हैं। उनके पास एक भी नहीं है। अगर वह बात करना चाहते हैं तो उन्हें बस एक फोन करना है। यानी कि ट्रंप ने साफ कर दिया है कि पासा हमारे पाले में है। हम कहीं नहीं जाने वाले। ईरान को बात करनी है तो हमें फोन कॉल करें। अब दूसरी तरफ ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराक्षी एक देश से दूसरे देश घूम रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक अरा पहले ओमान गए फिर पाकिस्तान और अब रशिया तमाम देश घूमने के बाद भी नतीजा फिलहाल शून्य पर अटका है। अगर आपको ध्यान हो तो ट्रंप बार-बार बयान देते हैं कि ईरान की लीडरशिप में इंटरनल क्लेश है।

इसी तरह का दावा न्यूयॉर्क टाइम्स ने भी अपनी रिपोर्ट में किया था। रिपोर्ट के मुताबिक अभी ईरान के सुप्रीम लीडर जो हैं मुस्तबा खामने वो किसी भी तरह का फैसला लेने में सक्षम नहीं है। उनकी तबीयत गंभीर है बहुत ज्यादा। सारे फैसले फिलहाल आईआरजीसी यानी कि इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉब्स की तरफ से आते हैं।

ऐसे में वहां के नेताओं और आईआरजीसी के बीच में मतभेद की खबरें हैं। ईरान के नेताओं को लगता है कि देश का काफी नुकसान हो चुका है। जंग अब रुक जानी चाहिए। जबकि आईआरजीसी किसी भी कीमत पर झुकने या फिर पीछे हटने को तैयार नहीं है। पाकिस्तान को लेकर भी दो तरीके की बातें हैं। विदेश मंत्री अराची पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की तारीफें करते नहीं थकते। कई सारी उनकी तारीफों में पोस्ट करते हैं। जबकि ईरान के राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति आयोग के प्रवक्ता इब्राहिम रिजाई का कहना है कि पाकिस्तान पक्षपात करता है।

उसका झुकाव अमेरिका की तरफ है। अमेरिका के खिलाफ वो कुछ बोलता नहीं है। रजाई ने लिखा कि पाकिस्तान हमारा अच्छा दोस्त और पड़ोसी है लेकिन वो अच्छा मध्यस्थ नहीं है। उसमें विश्वसनीयता का अभाव है। वह हमेशा ट्रंप के फायदे को ध्यान में रखते हैं। अमेरिकियों के खिलाफ एक शब्द भी नहीं बोलते। उदाहरण के लिए वो दुनिया को यह बताने को तैयार ही नहीं है कि पहले अमेरिका ने पाकिस्तान का प्रस्ताव स्वीकार किया था।

लेकिन बाद में अपने वादे से मुकर गया था। वो यह भी नहीं कहना चाहते कि अमेरिकीयों ने लेबनान के मुद्दे पर जो वादा किया था वो उसे पूरा नहीं कर पाए। एक मध्यस्थ निष्पक्ष होना चाहिए ना कि एक पक्ष की तरफ झुकाव रखना चाहिए। अमेरिका के डेलीगेट्स की जो बात होनी थी वह नहीं हो पाई और अब अमेरिका का कहना है कि अगर ईरान को नेगोशिएट करना है तो हमें फोन करें

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