इस पार्टी में आज एक वर्क एनवायरमेंट है। आपको काम करने से रोका जाता है। पार्लियामेंट में बोलने से रोका जाता है। आप पार्टी छोड़ने के बाद राघव चड्डा को जिन लोगों ने कहा कि राघव चड्डा ने जिस थाली में खाया उसी में छेद किया या राघव चड्डा को विभीषण बताया। उन्हीं राघव चड्डा ने अब उन लोगों के सवालों का जवाब दिया है। जिस राघव चड्डा के लिए कहा जा रहा था कि उन्होंने आप पार्टी को एज एन इंटर्न जॉइ किया था और छोटे-छोटे काम वो करते थे।
लेकिन धीरे-धीरे वो पार्टी के पॉपुलर पॉलिटिशियन बन गए। उन राघव चड्डा ने कहा कि मैं तो पॉलिटिक्स में आने से पहले ही अपना करियर बना चुका था। मैं एक प्रैक्टिसिंग सीए था और पॉलिटिक्स में मैं अपना करियर बनाने नहीं आया था। और तो और जिस पार्टी में वो 15 साल रहे आप पार्टी उस पार्टी के एनवायरमेंट को उन्होंने टॉक्सिक एनवायरमेंट बताया है और कहा है कि इस पार्टी को मैंने अपने खून पसीने से सींचा है। मैंने अपनी जवानी के 15 साल इस पार्टी को दिए हैं और इस पार्टी ने मेरे साथ यह किया। मुझे बोलने नहीं दिया।
हमारे मुद्दों को दबाया गया और हमें अपना मुद्दा रखने की आजादी नहीं दी। आप खुद ही सुन लीजिए राघव चड्डा की यह वीडियो। पिछले तीन दिनों से आप सबके बहुत मैसेजेस आ रहे हैं। आप में से ज्यादातर लोग मुझे बेस्ट विशेस दे रहे हैं। कांग्रेचुलेट कर रहे हैं। और कुछ लोग मेरे इस फैसले के पीछे क्या रीज़ंस हैं वो जानना चाहते हैं। तो आज ये वीडियो उनके लिए और उन लोगों के लिए भी जिन लोगों ने शायद मेरी प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं देखी।
दोस्तों पॉलिटिक्स में आने से पहले मैं एक प्रैक्टिसिंग चार्टर्ड अकाउंटेंट था। मेरे सामने एक बेहतरीन करियर था। लेकिन मैं उस करियर को छोड़कर पॉलिटिक्स में आया। अपने करियर को बनाने के लिए पॉलिटिक्स में नहीं आया। और एक पिटिकल पार्टी का फाउंडिंग मेंबर बना। जिस पार्टी को मैंने अपने प्राइम यूथ के 15 साल दिए अपने खून पसीने से बहुत मेहनत से इस पार्टी पार्टी को सींचा। लेकिन आज यह पार्टी वो पुरानी वाली पार्टी नहीं रही। इस पार्टी में आज एक टॉक्सिक वर्क एनवायरमेंट है। आपको काम करने से रोका जाता है। पार्लियामेंट में बोलने से रोका जाता है। और यह पिटिकल पार्टी आज चंद करप्ट और कॉम्प्रोमाइज लोगों के हाथ में फंस कर रह गई है।
जो अब देश के लिए नहीं अपने निजी पर्सनल फायदे के लिए काम करते हैं। पिछले कुछ सालों से मैं यह फील कर रहा था दैट परहप्स आई एम द राइट मैन बट इन द रोंग पार्टी। और इसी के चलते मेरे सामने सिर्फ तीन ऑप्शंस थे। पहला ऑप्शन कि मैं पॉलिटिक्स ही छोड़ दूं। दूसरा ऑप्शन कि मैं इसी पार्टी में रहूं और चीजें ठीक करने की कोशिश करूं जो कि हुआ नहीं। और तीसरा ऑप्शन कि मैं अपनी एनर्जी और एक्सपीरियंस लेकर पॉजिटिव पॉलिटिक्स करूं। एक और प्लेटफार्म के साथ एक और पॉलिटिकल पार्टी के साथ जुड़कर सकारात्मक राजनीति करूं। इसीलिए मैंने अकेले ने नहीं मेरे साथ एक नहीं, दो नहीं, तीन नहीं, चार नहीं, पांच नहीं, छह और सांसदों ने यानी कि कुल सेवन एमपीस ने ये फैसला लिया कि हम अपनी इस पॉलिटिकल पार्टी से रिश्ता तोड़ते हैं।
एक आदमी गलत हो सकता है, दो आदमी गलत हो सकते हैं। लेकिन सात लोग गलत नहीं हो सकते। और वो अनगिनत लोग जो एजुकेटेड एरोडाइट लोग थे, जो इस पॉलिटिकल पार्टी के सपने के साथ जुड़े थे वो तमाम लोग जो इस पार्टी को छोड़ के चले गए। क्या वो सारे गलत हो सकते हैं? आप ऐसे समझिए आप में से जितने ऑफिस गोइंग लोग हैं यदि आपका वर्क प्लेस एक टॉक्सिक प्लेस बन जाए, उसका एनवायरमेंट टॉक्सिक हो जाए तो आप कितना काम कर पाएंगे? क्या आप वहां काम कर पाएंगे? अगर आपको वहां काम करने से रोका जाए, आपकी मेहनत को दबाया जाए, आपको चुप कराया जाए, तो आप क्या करेंगे? उस स्थिति में सही फैसला यही है कि आप उस वर्क प्लेस को छोड़ दें। और शायद हमने भी वही किया।
आप में से बहुत सारे लोगों ने यह भी मुझे मुझसे पूछा कि क्या अब मैं वैसे ही आपके मुद्दे ऑर्डिनरी प्रॉब्लम्स ऑर्डिनरी सिटीजंस उठाता रहूंगा या बंद कर दूंगा। मैं उन्हें विश्वास दिलाना चाहता हूं कि मैं आपकी प्रॉब्लम्स को लगातार और एनर्जी के साथ और जोश के साथ उठाऊंगा और अच्छी बात यह कि अब हम उन प्रॉब्लम्स की सशंस को भी ढूंढ पाएंगे और उसे इंप्लीमेंट करा पाएंगे।
