ट्रूकॉलर के इस बड़े खतरे से हो जाए सावधान।

सर एक और कमेंट आया है। वो ये पूछ रहे हैं कि इज ट्रू कॉलर सेफ? सवाल इसलिए भी आता है क्योंकि कोई भी रैंडम नंबर से कॉल आ जाता है और उसका नाम आ जाए हेल्पफुल भी है। प्लस ऐसा होता है कि एक डाटा जो है हर किसी का नाम वगैरह मैंने कभी नहीं बताया ट्रू कॉलर को कि भाई मेरा नाम ये है। मेरा प्रोफेशन ये है। लेकिन जब कोई कॉल करता है तो वहां लिखा आ जाता है ।

मेरा मैंने किसी ने मैंने कॉल किया तो उसको पता लग जाता है। तो ये भी तो एक तरीके से डाटा जाना है। प्लस उसमें एसएमएस परमिशंस भी होती हैं। बहुत सारी परमिशंस होती हैं जो ऐप लेता है। देखिए अभी गवर्नमेंट ऑफ इंडिया भी यह ट्राई कर रही है। कोशिश कर रही है जो ट्राई है कि वह कॉलर आईडी सर्विसेस दे दे। ओके? और आप एज ए मेरे ख्याल से फ्री देंगे या पेड देंगे तो मुझे नहीं पता। लेकिन यह अब सर्विस ऑफर होने वाली है। ट्रू कॉलर आपको कॉलर आईडी सर्विस ही देता है। वो आपको नंबर देख के बता देता है कि बंदा किस नाम से उसके डेटाबेस में सेव्ड है। वो बंदा वही है या नहीं है यह नहीं बताता।

वो कंफर्म नहीं कर रहा है। मैं अयाज़ के नाम से किसी दूसरे नंबर को भी सेव करके कॉल करूंगा तो बंदा कंफ्यूज हो सकता है। तो याद रखना वो जब आप ट्रू कॉलर यूज़ कर रहे हो तो ब्लाइंडली उस नाम पर ट्रस्ट भी ना करें। क्योंकि वो नाम तो कोई भी क्रिएट कर सकता है। आप कई बार लोग कॉल आता है अब उसने कर रखा है के नाम से तो आपको दिख रहा है तो आप डर जाते हैं या पुलिस के नाम से सेव कर रखा है। तो ट्रू कॉलर के वो रिस्क भी है क्योंकि वो वेरीफाई नहीं कर रहा है कि ये बंदा वही है। उसने जो फोन बुक है उससे वो डिटेल्स निकाली हुई है। दूसरा जो रिस्क है वो ये है कि ट्रू कॉलर डाटा बहुत लेता है आपका। फोटो, वीडियोस, फाइल्स इस तरह की डिटेल्स भी बहुत सारे हैं। यहां पे वही जो प्रोसेस मैंने बताया था प्ले स्टोर पर जाएं। ट्रू कॉलर सर्च करें। ट्रू कॉलर के आइकॉन पर क्लिक करेंगे तो नीचे सी डिटेल्स करके ऑप्शन आएगा। उस पर क्लिक करेंगे तो आपको पता पड़ेगा कि ट्रू कॉलर आपका क्या-क्या डाटा लेता रहा है।

वो डाटा ट्रू कॉलर के पास है। अब ट्रू कॉलर हैक भी हुआ है। कई बार हैक हुआ है। आप डार्क वेब पर जाएंगे तो ट्रू कॉलर के हैक डेटाबेसिस में आपके डिटेल्स पड़े भी हो सकते हैं। तो वो रिस्क रहता है। इसलिए हम कहते हैं कि ट्रू कॉलर अनसेफ है। बिकॉज़ ना सिर्फ नंबर और नाम आपके बाकी डिटेल्स भी डार्क वेब पर हो सकते हैं बिकॉज़ ऑफ़ एनी सच ऐप। फाइन। सर, अभी जैसे हम बात कर रहे थे कि आप कह रहे थे कि अगर किसी ने सीबीआई के नाम से सेव कर रखा है तो वो आ जाएगा। तो उसमें तो ऐसा भी कर सकता है बंदा फॉर कोई नया नंबर लिया और का ग्रुप हुआ उस ग्रुप ने उस ग्रुप के सारे बंदों ने उसका नाम एज ऑफिसर फला फला सेव कर लिया और तो वो ट्रू कॉलर पे चला जाएगा एज अ ऑफिसर तो फिर जब किसी के पास कॉल आएगा तो एज अ ऑफिसर आएगा कि फला फला चीज सीबीआई ऑफिसर तो इससे कैसे बच सकते हैं देखिए बचने का तो यही है कि आप ब्लाइंडली ट्रस्ट ना करें जीरो ट्रस्ट मॉडल ही है क्योंकि आप ट्रू कॉलर पे ब्लाइंडली ट्रस्ट कर रहे हो मान के चल रहे हो कि वो सही ऑथेंटिकेशन दे रहा है तो ये तो मैंने पहले ही नलीफाई कर दिया कि उस पर भरोसा नहीं कर सकते।

उसने वेरीफाई नहीं किया कि बंदा वही है। तो जो भी कंप्लेंट्स आ रही हैं या जो भी डेटाबेस में एंट्रीज हो रही है उसके बेस पर वो एनालिसिस दे रहा है। जैसे स्पैम कॉल का भी है यदि 50- 100 लोगों ने रिपोर्ट कर दिया है कि ये नंबर स्पैम है तो उसने बताना शुरू कर दिया कि भाई इतने लोगों ने रिपोर्ट किया है। ये इसका पैटर्न है। लेकिन वेरिफिकेशन उसके बाद भी नहीं हुआ है। सर अभी हमने ट्रू कॉलर की बात की तो मैं एक चीज और बात करूंगा। नए बच्चे फस लेते हैं नए और उसमें सबसे पहली चीज मैंने देखा वो इंस्टॉल करते हैं। वो फोन लांचर इंस्टॉल करते हैं। फोन लांचर ऐप [गला साफ़ करने की आवाज़] ताकि कलरफुल बन जाए और ये चीज हो जाए। उसमें भी एसएमएस की परमिशन होती है और बहुत सारे ऐसे होते हैं जो मतलब बस ऐसे ही उन्होंने मतलब डाउनलोड कर ली।

उनको कोई ऑथेंटिसिटी होती नहीं है। तो ये कितना मतलब उनके लिए नुकसानदेह हो सकता है क्योंकि उनके भी पासवर्ड्स बैंक्स वगैरह के सब उसी पे आते हैं। तो क्या इस इसको भी बहुत देख के इंस्टॉल करने चाहिए ये सब चीजें? बिल्कुल देखिए कोई भी मैंने एक जनरिक अंडरस्टैंडिंग मान के चलिए। फोन लांचर ऐप को भी आप एक बार मूवी आर्मर से स्कैन करके देख लेना कि क्या-क्या परमिशन वो लेकर बैठी है। वह आपको इंटरनल परमिशन भी दे देगा कि एक्चुअली कितनी परमिशन लेके वो बैठी है और वो कमा कैसे रहे हैं उसका आईडिया आपको लग जाएगा कि यदि वो आपके एप्लीकेशन के पैटर्न को देख रहे हैं। बिहेवियर को देख रहे हैं। कई बार वो कीबोर्ड तक का एक्सेस ले लेते हैं। एग्जैक्टली सर वो कई बार वो माइक्रोफोन का भी एक्सेस लेके बैठे हैं। अब आप फोन लांचर ऐप को क्यों क्योंकि वह वॉइस ल्च करवाना है या वैसा कमांड देना है। वो रिस्की हो जाता है। तो मेरे ख्याल से किसी भी ऐप को किस हद तक कन्वीनियंस देगा वह आपको पर उसके बाद एक रिस्क है ना तो आर यू रेडी टू टेक दैट रिस्क विद फॉर दैट कन्वीनियंस चाहे वो ऑटो फिल हो चाहे वो फोन लांचर हो यदि वो रिस्क आपको समझ में आ जाता है तो मेरे ख्याल से आप खुद ही उसको अवॉइड करोगे बिल्कुल कीबोर्ड जैसे आपने बात की मैं देखता हूं बहुत सारे लोग कीबोर्ड के लिए भी अलग-अलग सा स्टाइलिश फॉन्ट आ जाए ये सब चीज आ जाए उसके लिए अलग से एक ऊपर से स्क्रीन आ जाता है आपको पता है Lindin पे केस हुआ था Lindin कीबोर्ड एक्सेस करता ओके और उसके बाद उस पर काफी शायद पेनल्टी वगैरह भी लगी। TikTok पर तो हुआ ही था।

इनफैक्ट आपको याद होगा कि ईलॉन मस्क ने कुछ दिन पहले एक Android में फीचर आया था जिसमें बैकग्राउंड ऐप पे जो चल रही है ना उसका लॉक देख सकते हैं आप। अभी भी है वो। तो ईलॉन मस्क ने उस लॉक को निकाल के दिया कि रात के 2:30 बजे मेरे WhatsApp का माइक्रोफोन WhatsApp ने माइक्रोफोन एक्सेस किया। तो क्यों किया? तो इसको लेकर काफी फिर यू एंड क्राई फैला। तो यह चीजें अब छुपी हुई नहीं है जो हम पिछले कई सारे पडकास्ट में डिस्कस कर चुके हैं। इसलिए हमें हम उसको बड़ा लाइटली लेते रहे कि ठीक है दे दिया।

लेकिन जब हमारे संगड़ होने लगती है। जैसे कि मैं आपको एग्जांपल दूं किसी व्यक्ति आज जो केस हुआ आज ही का लेते हैं। एक बहुत बड़ी कंपनी के नेक्स्ट सीईओ उनका ₹1 लाख निकला। मुझे आप कॉल आ रहा था। मैं कहीं बिजी था और उसके बाद बोले कि साहब मेरा बहुत ही क्लोज मित्र है। उसका पिक्चर लगा के WhatsApp पे मैसेज आया और यूएस का नंबर था। वो यूएस में ही रहता है। तो मुझे लगा उसका ही है। यूएस का ही है तो उसने पैसे मांगे। मैं मीटिंग में था मैंने दे दिया।

मैंने कहा ठीक है। अब हमें समझ में आ रहा है कि इसने गलती की। उसको कॉल चेक क्यों नहीं किया? मीटिंग में था। उसने कुछ अर्जेंसी दिखाई। दैट्स आल्सो ओके। पर उससे बड़ा सवाल यह है कि जिस बंदे ने उस दोस्त के नाम से इससे पैसे मांगे उसको कैसे पता था कि इसका क्लोजेस्ट फ्रेंड है? बिल्कुल सर ये बात किसी ने कैसे नहीं सोची? भाई उसके नेटवर्क में हो सकता है 2000 लोग हो। बिल्कुल या 4000 लोग हो।

वो सबको पैसे मांगने पे नहीं देगा। एक ऐसा बंदा ट्रस्ट एक ऐसा बंदा जरूर होता है आपके नेटवर्क में जिसको आप शायद कभी निराश नहीं करोगे। और वो रात के 2:00 बजे भी कहेगा तो आप कहोगे यार बाद में बात कर लेंगे। पहले तू ले तूने मांग लिया तो दे किसी ने इतना क्लियरली उसको बता रखा है क्रिमिनल को कि देखो यह मांगेगा तो यह देगा और ये इसलिए देगा क्योंकि ये बिजी होगा मीटिंग में तो मैंने गौर से सोचा कि यार ऐसे केसेस फिर इन लोगों के संग ये क्यों हो रहा है इसका मतलब है कि कोई है जो ऑर्गेनाइज्ड तरीके से ये डाटा फिल्टर करके दे रहा है बिल्कुल कि भाई ये और ये इसको मांग इसके नाम से मांगना है और इससे मांगना है।

अब आप सोचिए कि वो डाटा कहां से जा रहा है बिल्कुल सर वो ज्यादा हमारे पास से ही रहा है वो तो हो गया हमारे पास से आपका क्लोजेस्ट फ्रेंड कौन है यह क्रिमिनल को किसने बताया 2 मिनट सोचना और यदि यह बता दिया तो फिर किसी किस्म भी गलती हो सकती है बिल्कुल मतलब सर इससे तो ये समझ आता है कि मतलब कोई भी ऐप जैसे आप अभी बता रहे हैं कि कोई भी ऐप किसी पे भी ब्लाइंडली ट्रस्ट कर ही नहीं कर सकती कौन ऐप किस क्रिमिनल के पीछे जुड़ी है।

मैं ऐसे नहीं बोल रहा पर हम कैसे ट्रस्ट करें बिल्कुल एटलीस्ट जो ऑथेंटिक ऐप है उसको चलिए मान ले ओके फाइन उसमें लिखा हुआ है कई सारे गेम्स वगैरह हैं वो डिजाइन ही ऐसे होते हैं कि वो इवेंचुअली उनका जो सोर्स ऑफ़ अर्निंग है वो क्राइम के थ्रू ही होगा। रसमवेयर आते थे जो हम tlegram पर जाते हैं और परेटेड फिल्म्स वगैरह डाउनलोड करते हैं। उसके थ्रू रसमवेयर भी सर्कुलेट किए जाते हैं। तो ये तो हमें पता ही है पैटर्न। तो थोड़ा सा एक्स्ट्रा वो रखें। लिंक हमेशा स्कैन करें पहले। उसके बाद ही उसको यूज़ करें। यदि आपको Telegram पे भी कोई लिंक मिल रहा है तो पहले उसको मूवी आर्मर से स्कैन कर लें। एक बार देख लें। उसमें मैवेयर तो नहीं है कोई। नहीं है तो फिर आप करें। उसमें कोई दिक्कत नहीं है। मैं रोक नहीं रहा हूं। लेकिन हमें एक आदत डालनी है कि हमें स्कैन करना है, वेरीफाई करना है।

चाहे वो एक फोन कॉल आया है, चाहे वो कोई मैसेज आया है, चाहे वो ईमेल आई है। आप ब्लाइंडली कैसे ट्रस्ट करते हैं? अभी आप सर कीबोर्ड की बात कर रहे थे। किसी ऐप के बारे में बात हुई और मेरे भी ज़हन में अभी कुछ साल पहले एक बड़ी मोबाइल फर्म है। आई डोंट थिंक नाम मैं इसलिए नहीं लूंगा कभी गलत हो जाए। तो बड़ी मोबाइल फर्म है। उसके ऊपर भी आया था कि उसका जो कीबोर्ड ऐप था वो डाटा ले रहा था लोगों का स्टोर कर रहा था और वो चाइना जा रहा था। बिल्कुल। तो ये इसके थ्रू भी काम हो रहा था। अब और Google कीजिएगा। एक मोबाइल बड़ी मोबाइल कंपनी उसके एक ही आईएमआई से 22,000 फोन रजिस्टर्ड थे। टिल एक्सक्ट्ली सर वो स्टोरी पता याद है? बिल्कुल बिल्कुल अब मैंने कहा था 22,000 फोन एक नहीं दो नहीं 100 नहीं 22,000 फोन एक ही आईएमआई पे कैसे रजिस्टर्ड हो सकता है?

मतलब वो इंपोर्ट कर रहे थे चाइना से। अब ये कितना बड़ा रिस्क है? आप सोचिए। बिल्कुल। क्योंकि आईएमआई तो कोर्ट एडमिस एविडेंस होता है। यदि आपके आईएमआई सेलिंग कोई डाटा है तो एक क्रिमिनल का है और उसके बाद जो बंदे ने कुछ किया नहीं वो फंस जाएगा उसके चक्कर में। तो ये सारी चीजें जो बिकॉज़ ऑफ चाइनीस हार्डवेयर इन्वज़ इंडिया में हुई रेगुलेशंस थे नहीं। मेरे ख्याल से बहुत बड़ा रिस्क लोग क्रिएट करता है। सर इनकी बात चल रही है। अभी जितने वॉलेट ऐप है एक वीडियो हमने किया था ट्रू कॉलर पे। हमने उसको डाला एंड आई थिंक वो काफी मिलियन 1ढ़ मिलियन के अराउंड हो गया और उस ट्रू कॉलर पे वाले जो हमने वीडियो बनाया था ।

उसमें किस तरह डाटा वगैरह ये सब एप्स लेते हैं और उस पे ट्रू कॉलर ने कमेंट किया स्पेसिफिकली पूरे पांच छह पॉइंट बना के उन्होंने YouTube पे डाल दिया और मैंने उनको पिन भी कर दिया उनके कमेंट को तो उस पे चाह रहा था मैं आप उसप कुछ क्लेरिटी दे दें तो उनका ये कहना था कि मैं पढ़ लेता हूं बल्कि वो वो ये कह रहे थे कि हम कुछ क्लेरिफाई करना चाहते हैं ऑफिशियली और वो कह रहे थे कि हमारे पास जो नाम आते हैं ।

वो कैसे आते हैं वो कह रहे हैं एक कम्युनिटी एफर्ट है कि आपने कोई सेव किया तो हमारे पास नाम आ जाएगा वरना नहीं आएगा। तो इस तरह से हम कुछ गलत नहीं कर रहे। फिर वो कह रहे हैं हम कमिटमेंट है हमारा प्राइवेसी एंड सिक्योरिटी को लेके परमिशन सर वो हर कोई कहता है डाटा फिर भी लेते रहते हैं। फिर वो कहता है कि भ जो डार्क वेब की बात होती है उसमें हमारा कुछ नाम नहीं होता। ऑफन बैड एक्टर्स जो है वो डाटा उठा के इधर-उधर डाल देते हैं। उसमें हमारा नाम बदनाम हो जाता है। स्पैम रिपोर्टिंग हम करते हैं। वो ये कह रहे थे कि होप दी सॉर्ट ऑफ़ थिंग्स प्रोवाइड क्लेरिटी और ये वो देखिए जब आप कोई सर्विस देते हो तो आप कोई रिस्पांसिबिलिटी भी ऑन करते हो। बिल्कुल।

आप सिर्फ ये नहीं कह सकते कि नहीं हम तो मतलब लोग नॉर्मली चाहे वो चाहे वो फिर Facebook हो, चाहे वो Twitter हो, Instagram हो या ट्रू कॉलर हो। मेरा जो पर्पस था शायद सिर्फ उधर था। सो फर्स्ट ऑफ ऑल थैंक यू फॉर क्लेरिफाइंग दीज़ थिंग्स। बट स्टिल यह तो आपने माना कि हम कल के दिन यदि किसी कॉल नंबर पर आपको लिख के आ जाए कि सीबीआई है तो वो सीबीआई है। इस बात की कोई गारंटी तो नहीं है। बिल्कुल। ये तो आपने हमें दिखा दिया हम डर गए या आपने उसमें लिखवा दिया आरटीओ ऑफिस और मैं उस चक्कर में डर के लुट गया। तो मुझे यह जानने का हक है कि ये चीज गलत हो सकती है। बिल्कुल। यही मैंने उस दिन बताया कि ये चीज वेरीिफाइड नहीं होती। औरकि यह वेरीिफाइड नहीं होती क्रिमिनल उसका फायदा उठाते हैं। वह किसी भी नंबर से कॉल करके उसमें कुछ लिखवा देते हैं और वह आप डर के या लोअर होकर उसमें ट्रैप हो जाते हो कि वो ट्राई का नंबर है या आरटीओ का है, पासपोर्ट ऑफिस का है, सीबीआई का है या किसी दूसरी एजेंसी का है। कई बार उसमें आईपीएस नाम लिख के आ जाता है, ईसीपी लिख के आ जाता है तो आदमी वैसे ही कांप जाता है। फोटो लगा देते हैं। तो मेरे ख्याल से उनको यह कोशिश करनी चाहिए कि इस तरह के कीवर्ड फिल्टर करें कि कोई भी जो भी स्टैंडर्ड कीवर्ड है गवर्नमेंट नोटेशंस हैं जिनको कि इंपर्सनेट करके किसी को लूटना आसान है वो कम से कम बिना वेरिफिकेशन के अलाउ ना करें। बिल्कुल ये तो एक बहुत ज्यादा कॉमन प्रॉब्लम है जो मैं चाहूंगा। दूसरा जैसा उन्होंने कहा कि डेटा नहीं लेते या लेते हैं या इंक्रिप्टेड है। तो मैंने जो दिखाया था वो Play Store पर जो इन्होंने खुद एक्सेप्ट किया वही देख मैंने कहा था Play Store पे ये कह रहे हो आप मैं अपनी तरफ से कुछ ऐड नहीं किया। अब उस पर आपका क्या क्लेरिफिकेशन है? दूसरा Twitter हैक हुआ था मल्टीपल टाइम्स हुआ है तो वो डाटा है डार्क में और यह तो पब्लिक है इनफेशन सर खबरें हमने पढ़ी है पढ़ी है तो इस तरह की जो जितनी भी चीजें हैं वो अवेयरनेस के लिए पब्लिक को यदि पता होंगी तो वो प्रिपयर्ड रहेंगे नहीं पता है और फिर कुछ होता है तो फिर वो लूट जाते हैं। इस वजह से मेरे ख्याल से हम यदि नाम लेकर चाहे वो सनफार्मा का हो जब लीक हुआ तो हमने पूरा डिस्कशन किया सनफार्मा पे डोमिनोज का लीक हुआ हमने ब्रोमिनोज़ पे किया वी आर नॉट अगेंस्ट एनी ऐप एस लॉन्ग एस बिल्कुल सर डाटा सिक्योरिटी हमारा पर्पस है ।

लेकिन हमारा पर्पस है कि लोगों को पता तो हो कि ऐसा होता है तो इसका इंपैक्ट क्या होगा सो उस एंगल से था सो फर्स्ट ऑफ ऑल थैंक यू फॉर क्लेरिफिकेशन बट स्टिल लोगों की कॉन्शियसनेस में जाना बहुत जरूरी है कि किस-किस तरीके से मिसयूज़ हो सकता है काफी कमेंट भी आए और मेरे को तो सर इस चीज में ये लगता है मतलब मेरा अगर ओपिनियन ये रहेगा कि अगर किसी ने गलत नाम सेव कर रखा है और फिर आप वो हाईलाइट करके कांटेक्ट बुक से दिखा रहे हो तो इनिशियली आप ये कह रहे हो अगर उसने गलत सेव कर रखा है तो मैं आगे गलत आगे दिखाऊंगा। तो इट इज़ एक्चुअली हेल्पिंग द गाय जो मिसलीड कर रहा है। कर हेल्प कर ही रहा है। दूसरा कुछ ऐसा भी प्रोविजन इनको करना। इन्होंने कहा कि हम रिपोर्ट कर देते हैं। किसको रिपोर्ट करते हैं? पुलिस को रिपोर्ट करता है। नहीं तो किसको रिपोर्ट कर रहे हो? बिल्कुल। मुझे क्लेरिफिकेशन दीजिए। यदि पुलिस को रिपोर्ट किया तो बंदा पकड़ा गया क्या? कोई अरेस्ट हुआ। यू नीड टू नो। यदि किसी बंदे ने गलत नाम सेव करके किसी को इंपसनेट किया हुआ है तो उस पर इमरसनेशन एक्ट है ।

हमारे यहां 66 डीआईटी एक्ट था उसके खिलाफ एफआईआर कराइए और सजा दिलवाइए हम उधर रिसोंसिबिलिटी नहीं लेना चाहते एक्सक्टली तो फिर मतलब अच्छा मेरा है बुरा तुम्हारा वाला सामना नहीं चलेगा दूसरा लोग रिपोर्ट करते हैं लोग उसमें जब आप ट्रू कॉलर पे देखते हो तो स्पैम रिपोर्टिंग आती है उसमें आती है कि भ 367 लोगों ने नंबर को रिपोर्ट किया है। जब वो सिग्निफिकेंट रिपोर्टिंग हो जाती है तब आप उसको दिखाना भी शुरू कर देते हो। लेकिन मुझे ऐसा लगता है कई बार उधर भी खेला हो सकता है। मैं अयाज के नंबर को रिपोर्ट करवा देता हूं 200 लोगों से। बिल्कुल सर। [हंसी] हां सर मेरा ग्रुप है WhatsApp का। आप करवा सकते हैं। नंबर तो सबको पता है। तो उसके लिए क्या है फिर? सो दोनों एंगल से आप अपने आपको क्लीन चिट नहीं दे सकते। आपको कहीं ना कहीं कोई प्रोविजन रखना पड़ेगा कि ऐसा भी ना हो पाए और वैसा भी ना हो पाए। फाइन सर एक दो कमेंट्स ले लेते हैं और इसी से रिलेटेड फिर क्वांटम पे कुछ कमेंट्स है कुछ क्वेश्चंस है उसको लेंगे।

पिछले वीडियो में जो कुछ रह गए थे वो एक दो मेरे पास है कमेंट टेकिंग से रिलेटेड कोई दीप्ति परिमल करके हैं। वो लिख रही है मेरा भी WhatsApp हैक हुआ था। आज क्या मुझे मेरा मोबाइल नंबर ही बदल लेना चाहिए? फिर क्या नहीं देखिए WhatsApp हैक करके उसको क्या-क्या मिला होगा यह सोच लीजिए उसको आपकी कांटेक्ट लिस्ट मिल सकती है जो ग्रुप्स वगैरह होंगे वो दिख जाएंगे उसको और जितनी देर उस को एक्सेस था उस देर में वो कुछ डाटा ले सकता है यदि वो डाटा आया गया है उस उस दौरान आया गया उतना ही रिस्क है यदि आपको पता है कि क्या डाटा था और क्या था क्योंकि आप नंबर बदल लेंगे उससे आपको कोई हेल्प होने वाली नहीं है बिल्कुल हां हां आप नंबर रखेंगे और अपने कंट्रोल में रखेंगे तो हेल्प हो सकती है। देन यू कैन क्लेरिफाई देयर इज एनी कन्फ्यूजन डाउट्स। यदि आपका नंबर चला गया और वो उसको कॉल कर रहा है जिसको भी नया उस नंबर असाइन हो जाता है और वो उसका बेनिफिट ले ले या इल्लुजन में कुछ गड़बड़ हो जाए उससे अच्छा है कि नॉट टेक रेस्पोंसिबिलिटी।

मैं एक और एग्जांपल दूंगा कि Facebook लोन होता है। Facebook पे पिक्चर उठाई किसी ने और नया Facebook अकाउंट बनाया। दोस्तों को रिक्वेस्ट भेजी और उनको लूटना शुरू कर दिया। मुझे एक ऑफिसर का फोन आया एक कमिश्नर साहब का। और कहते हैं कि साहब मेरा Facebook लोन हुआ और किसी ने नया बना लिया तो मैं घबरा गया क्योंकि मेरे नाम से तो कुछ भी हो सकता है। तो मैंने तुरंत अपना Facebook डिलीट कर लिया। तो मैंने उनसे कहा सर आपने अपना डिलीट किया तो क्रिमिनल की हेल्प कर दी। बिल्कुल सर। आपके डिलीट करने से क्या फर्क पड़ जाएगा? भाई आपका तो अपना था ही ना। आपको तो रखना चाहिए था। अब तो एक ही है। आपके नाम पे वो क्रिमिनल ऑपरेट कर रहा है तो तो और ऑथेंटिक हो गया वो। कहने का मैंने ये यही है। वो तो है ही नहीं। तो ऐसी गलती नहीं करना चाहिए कि अपना नंबर बदल ले मेरे ख्याल से लेन देन यू आर मोर यू शुड बी मोर कॉन्शियस एंड अकाउंटेबल फाइन सर एक राकेश शौकीन है वो लिख रहे हैं कि Apple iPhone 13 का WhatsApp भी हैक हो सकता है क्या सर प्लीज रिप्लाई करना और अगर होता है तो कैसे होता होगा मेरे साथ हुआ है ऐसा WhatsApp तो किसी का भी हैक हो सकता है वो तो हमने पूरा डिस्कशन किया है कि यदि आपका WhatsApp टू फैक्टर ऑथेंटिकेटेड नहीं है।

तो आप मान के चलिए कि वो हैक है क्योंकि मुझे एक ओटीपी ही तो चाहिए उसके लिए अगर ओटी पपी चुराने के हमारा पूरा वीडियो 12 तरीके तो बताए हमने तो आप चाहे iPhone पे हो चाहे Android पे हो उससे कोई फर्क नहीं पड़ता।

Leave a Comment