ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे संघर्ष में पोप लियो ने एक ऐसा बयान दिया जिससे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप खफा हो गए। डॉनल्ड ट्रंप की ईरान नीति को पोप लियो ने अमानवीय और अन्यायपूर्ण करार देते हुए सीधे तौर पर चुनौती दे दी। इस तीखे हमले ने न केवल कूटनीतिक हलकों में हलचल मचा दी बल्कि राष्ट्रपति ट्रंप को भी एक निजी और राजनीतिक जवाबी हमले के लिए मजबूर कर दिया। ट्रंप ने पलटवार करते हुए दो टूक शब्दों में कहा कि पोप को अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हस्तक्षेप करने के बजाय अपनी आध्यात्मिक जिम्मेदारियों तक सीमित रहना चाहिए। दरअसल यह विवाद तब जब पोप लियो ने ईरान के साथ बढ़ते तनाव को लेकर अपना कड़ा विरोध दर्ज करवाया।
पोप ने ट्रंप की नीतियों को अन्यायपूर्ण बताते हुए कहा कि निर्दोषों की जान जोखिम में डालना और कूटनीति के दरवाजे बंद करना किसी भी धर्म या नैतिकता के दायरे में स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने अमेरिकी कांग्रेस से हस्तक्षेप करने की मांग की जिससे राष्ट्रपति ट्रंप खफा हो गए। ट्रंप ने इस आलोचना को अपमानजनक बताते हुए पोपलियो पर सीधा प्रहार किया। उन्होंने कहा पोपलियो अपराध के मामले में कमजोर हैं और विदेश नीति के लिए बहुत बुरे साबित हो रहे हैं। उन्हें एक राजनेता बनने की कोशिश करने के बजाय एक महान पोप बनने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। ट्रंप ने आरोप लगाया कि पोप उन वैश्विक शक्तियों का पक्ष ले रहे हैं जो अमेरिका के हितों के खिलाफ है।
अपने जवाब को और ज्यादा आक्रामक बनाते हुए ट्रंप ने चर्च की ऐतिहासिक भूमिका पर सवाल उठाए। उन्होंने उस डर का जिक्र किया जो महामारी के दौरान ईसाई संगठनों और कैथोलिक चर्च में व्याप्त था। ट्रंप ने कहा पोप मेरे प्रशासन द्वारा पैदा किए गए जिस डर की बात करते हैं वो उस डर के सामने कुछ भी नहीं है जो पादरियों और मंत्रियों ने कोविड के दौरान महसूस किया। उस समय चर्च की प्रार्थनाएं करने के लिए पादरियों को गिरफ्तार किया जा रहा था। यहां तक कि जब वे बाहर खुले में थे और एक दूसरे से 10 20 फुट की दूरी पर थे तभी उन्हें दंडित किया गया। पोप उस समय कहां थे?
यह विवाद केवल शब्दों का युद्ध नहीं है बल्कि यह दुनिया के सबसे बड़े ईसाई संप्रदाय के प्रमुख और दुनिया के सबसे शक्तिशाली लोकतांत्रिक नेता के बीच एक गहरा वैचारिक मतभेद है। जहां पोपलियों ने इसे नैतिक धर्म युद्ध की तरह देखा है तो वहीं ट्रंप इसे चर्च द्वारा उनकी सत्ता को चुनौती देने की कोशिश मान रहे हैं। जानकार मानते हैं कि ट्रंप का यह बयान उनके आधारभूत मतदाताओं यानी कोर वोटर्स को यह याद दिलाने के लिए है कि वे ही धार्मिक स्वतंत्रता के असली रक्षक हैं ना कि वेटिकन। फिलहाल एक ओर जहां पोबलियो ने ट्रंप पर निशाना साधा है तो दूसरी ओर ईरान और अमेरिका का युद्ध लगातार तेज होने की संभावना जताई जा रही है क्योंकि इस्लामाबाद वार्ता फेल होने के बाद कब दूसरी वार्ता होगी या दूसरी बैठक कब होगी इसके कोई भी संकेत नहीं है।
दुनिया की निगाहें फिलहाल रूस यूक्रेन जंग पर टिकी है। लेकिन इस बीच राष्ट्रपति व्लादमीर पुतिन ने एक ऐसा दांव चला है जिसने वाशिंगटन से लेकर तेहरान तक तहलका मचा दिया है। इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच सीधी बातचीत नाकाम होने के ठीक बाद पुतिन ने शांति की कमान संभालने की पेशकश की है। रविवार को रूसी राष्ट्रपति ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद फिजिशियान से फोन पर बात की। क्रमलिन के मुताबिक पुतिन ने इस बात पर जोर दिया है कि रूस मिडिल ईस्ट में एक पक्की और सही शांति लाने के लिए हर संभव कूटनीतिक मदद देने को तैयार है। पुतिन चाहते हैं कि जंग के बजाय इस विवाद का हल राजनीतिक मेज पर निकले।
पुतिन का यह ऑफर बेहद अहम वक्त पर आया है। पिछले कुछ घंटे पहले ही इस्लामाबाद में 1989 के बाद पहली बार अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधि आमने-सामने बैठे थे। लेकिन 21 घंटे की माथापच्ची के बाद भी नतीजा शून्य रहा। अमेरिका का कहना है कि ईरान ने परमाणु हथियार का रास्ता छोड़ने से मना कर दिया। वहीं ईरान के स्पीकर ने आरोप लगाया कि अमेरिका भरोसा जीतने में नाकाम रहा। इस कड़वाहट के पीछे तीन बड़ी दीवारें हैं। ईरान का प्रोग्राम, हॉर्मोन स्टेट पर कंट्रोल और तेहरान की क्षमता। इन मुद्दों पर सहमति ना बनने से दो हफ्तों के नाजुक सीज फायर के टूटने का खतरा अब और बढ़ गया है।
दिलचस्प बात यह है कि रूस खुद यूक्रेन के साथ युद्ध में उलझा है। लेकिन पुतिन कूटनीति का कोई मौका नहीं छोड़ रहे हैं। इससे पहले जून 2025 में भी उन्होंने इजराइल और ईरान के बीच मध्यस्था की पेशकश की थी। रूस ने अमेरिका को आड़े हाथों लेते हुए कहा था कि वाशिंगटन ईरान के बहाने अपनी अमानवीय नीतियां थोप रहा है। सवाल यही है कि क्या पुतिन का पीस प्लान काम करेगा या फिर रूस की यह पेशकश सिर्फ अमेरिका के प्रभाव को कम करने की कूटनीतिक चाल है। फिलहाल दुनिया की नजरें अब पुतिन के अगले कदम पर हैं। 21 घंटे की मैराथन बैठक, उम्मीदों का भारी बोझ और अंत में सिर्फ अविश्वास। अमेरिका और ईरान के बीच हुई ऐतिहासिक वार्ता विफल हो चुकी है।
लेकिन बात अब सिर्फ विफलता की नहीं है। बात उस कड़वाहट की है जिसने अब एक नए कूटनीतिक युद्ध का रूप ले लिया है। ईरान ने अमेरिका को दुष्ट और नीच तक कह डाला। ईरानी प्रतिनिधि मंडल का नेतृत्व कर रहे पार्लियामेंट स्पीकर मोहम्मद बाकिर गालिबाफ ने मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने दो टूक कहा है कि अमेरिका ईरान का भरोसा जीतने में बुरी तरह से नाकाम रहा। गालीबा ने एक्स पर लिखा ईरान ने तो सकारात्मक पहल की लेकिन दूसरी तरफ से भरोसे की एक बूंद भी दिखाई नहीं दी। ईरान का सीधा आरोप है कि अमेरिका जो युद्ध के मैदान में हासिल नहीं कर पाया उसे बातचीत की टेबल पर थोपना चाहता है। 2015 के परमाणु समझौते के चेहरा रहे मोहम्मद जावा जारीफ ने भी इस बार हमलावर हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिका को यह सीखना होगा कि वह ईरान पर अपनी शर्तें नहीं थोप सकता। जरिफ के मुताबिक अमेरिका के अडियल रवय ने ही इस बातचीत का गला घोटा है। दूसरी तरफ अमेरिकी दल जिसका नेतृत्व उपराष्ट्रपति जे डी वांस कर रहे थे अपनी कहानी सुना रहे हैं। वांस ने कहा कि हमने 21 घंटे तक अपनी पूरी ताकत झोंक दी। बेहतरीन प्रस्ताव रखा लेकिन ईरान परमाणु हथियार ना बनाने की प्रतिबद्धता पर राजी नहीं हुआ। वेंस ने तंज कसते हुए कहा यह समझौता ना होना हमसे ज्यादा ईरान के लिए बुरी खबर है। इस वार्ता में ईरान ने एक 10 सूत्रीय योजना रखी थी। मांग थी अमेरिकी सैनिकों की वापसी, प्रतिबंधों का खात्मा और सबसे अहम हॉर्मोज स्टेट पर पूर्ण नियंत्रण। लेकिन अब जब वार्ता टूट चुकी है तो दुनिया भर के ऊर्जा बाजार में डर का माहौल है। क्या हुरमूज का रास्ता खुलेगा या फिर तेल की सप्लाई पर संकट के बादल और गहरे होंगे। हालांकि ईरान के प्रवक्ता इस्माइल बकाई का कहना है कि कूटनीति अभी खत्म नहीं हुई है। 40 दिनों की के बाद इस अविश्वास के माहौल में किसी चमत्कार की उम्मीद तो कम थी लेकिन इस विफलता ने मध्य पूर्व को एक बार फिर अनिश्चितता की आग में झोंक दिया है। दोनों पक्ष अपने घर लौट चुके हैं। लेकिन सवाल वहीं खड़ा है।
क्या अगला दौर बातचीत का होगा या संघर्ष का? हॉर्मोस स्ट्रीट दुनिया का वो हिस्सा है जहां से गुजरने वाले हर जहाज सांसे थाम लेते हैं। खबर है कि यहां ईरान और अमेरिका के बीच एक बार फिर सीधी भिड़ंत हुई है। ईरान ने दावा किया है कि उसने अपनी समुद्री सीमा में घुस रहे एक अमेरिकी वॉरशिप को ना सिर्फ चेतावनी दी बल्कि उसे भागने पर मजबूर कर दिया। नजफ में ईरानी कंसोलेट ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर करते हुए तहलका मचा दिया है। इस वीडियो में एक ईरानी अमेरिकी बेड़े को ललकारता सुनाई दे रहा है। पोस्ट में लिखा गया दुश्मन ने 40 दिन पहले हमारी नौसेना को नष्ट करने का दावा किया था।
लेकिन हकीकत देखिए एक अकेले ईरानी युद्धपत ने दुश्मन को खदेड़ दिया। नो चैलेंज नेवी ट्रांजिटिंग फॉर रिपोर्ट एंड सी दिस नेवी दिस इज नेवी लास्ट वार्निंग लास्ट वार्निंग लास्ट वार्निंग अटेंशन ऑल वेसल्स अटेंशन ऑल वेसल्स अटेंशन ऑल वेल्स इन ओमान सी दिस इज इरेनियन सेपा नेवी इफ यू सी एनी वरशिप इन योर विसिनिटी कीप डिस्टेंस मोर देन 10 माइल्स फ्रॉम देम बिकॉज़ आई एम रेडी टू ओपन फायर ऑन देम। वीडियो में जो सुनाई दे रहा है वह किसी फिल्म के सीन से कम नहीं है।
ईरानी लड़ाकू विमान और युद्धपोत से संदेश आता है फौरन वापस हिंद महासागर में चले जाएं। अगर आप 10 मील से करीब आए तो हम फायरिंग शुरू कर देंगे। यह चेतावनी एक बार नहीं बल्कि तीन बार दोहराई गई। अमेरिकी वॉरशिप की तरफ से जवाब आता है कि वह अंतरराष्ट्रीय कानूनों के तहत इलाके से गुजर रहे हैं। लेकिन ईरान का रुख सख्त था। रेडियो पर गरजती आवाज सुनाई देती है।
यह आपके लिए आखिरी चेतावनी है। और फिर वीडियो में देखा जा सकता है कि शक्तिशाली अमेरिकी धीरे-धीरे दूर जाने लगता है। हालांकि इस वीडियो और दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। कई मीडिया रिपोर्ट्स में इस वीडियो की सत्यता की पुष्टि नहीं की गई है। यह घटना किस सटीक दिन की है, यह भी स्पष्ट नहीं है, लेकिन शनिवार को भी ईरान ने इस तरह की एक मुठभेड़ का दावा किया था। ईरानी कंसिलेट ने चेतावनी भरे लहजे में यह भी कहा है कि ईरान का क्रोध वास्तव में बहुत भयानक है।
अमेरिका और ईरान के बीच पहले से ही वार्ता विफल हो चुकी है और अब समुद्र में इस तरह की तनातनी ने दुनिया भर की चिंताएं बढ़ा दी है।
