कैमरा देख दुपट्टा हटाया ?पोती जनाई की हरकत पर बौखलाए फैंस

दुख की घड़ी में हम भी क्या इंसानियत भूल चुके हैं। लेजेंड्री सिंगर आशा भोसले जी के घर दुख का माहौल है। लेकिन सोशल मीडिया पर लोग इस वक्त भी पैशन पुलिस बने बैठे हैं। आशा जी की पोती जनाई भोसले को इस वक्त बुरी तरह लोग ट्रोल किए जा रहे हैं। क्यों? क्योंकि अपनी दादी की फ्यूनरल पर वो चश्मा लगाए बालों को सेट किए हुए और फुल मेकअप ऑन करके पहुंची थी।

देखिए पहले तो आपको कमेंट्स पढ़ाते हैं। फिर ही आपको समझ आएगा कि हम बात किस चीज की कर रहे हैं। एक ने लिखा चश्मे नहीं उतरने चाहिए। एक का कहना है लेकिन इससे सैड वाली फीलिंग नहीं आ रही। उस टाइप का जैसी बोली थी कि यह कितनी अटैच है अपनी ग्रैंडमा से। क्या यार चश्मा लगाने का क्या मतलब है? कोई इस दुनिया से गया है। इतना महान सिंगर थी वो। एक सिंगर युग का अंत हो गया। एक का कहना है कि सेलिब्रिटीज का क्या ही कहूं। मां की डेथ है और उसकी लड़की गगल सर पर लगाकर हैट्स ऑफ टू दिस घर की बेटी।

रेस्ट इन पीस सासा जी। यह क्या देखना पड़ रहा है भाई? हेयर प्रॉपर सेट, आई ग्लास प्रॉपर सेट और लास्ट में तो बिल्कुल एक्टिंग और घर वाली हैबिट भी दिखा दी। एक ने कहा उसे पता था कैमरा उस पर है। इसीलिए यह हरकतें कर रही है। दुपट्टा हटाने पर भी लोगों ने उन्हें ट्रोल किया। शायद इमोशंस दुपट्टे की वजह से बाहर नहीं आ पा रहे थे। सो सैड। लोगों का मानना है कि अगर आपने चश्मा लगाया है या आप कैमरे के सामने हरकतें करते हुए दिखाई दे रहे हैं तो इसका मतलब आपको दुख नहीं हो रहा। पर क्या सच में किसी के गम को उसके कपड़ों से नापा जा सकता है?

दोस्तों वही कैमरा जो उनके गगल्स दिखा रहा था। उनका दुपट्टा हटाने का तरीका दिखा रहा था। उसने उन्हें कितनी बार टूट कर रोते हुए भी दिखाया। वो अपने परिवार को संभाल भी रही थी। लोगों के गले लगकर रो भी रही थी। यहां तक कि उनकी आंखें रोने की वजह से सूझी हुई भी नजर आ रही थी या शायद वह अपने दुख दुनिया से छुपाना चाहती थी। क्या रोना सिर्फ तभी असली होता है जब वह कैमरे के सामने दिखाया जाए।

अब थोड़ी बात उन लोगों से जो बैठकर कमेंट्स लिख रहे हैं। सीरियसली किसी के घर मौत हुई है और आप यह नोटिस कर रहे हैं कि उनके बाल कितने सेट हैं। हम कितने जजमेंटल हो गए हैं। एक बेटी अपने परिवार के बुजुर्ग को खो चुकी है। वो उस दुख से गुजर रही है जो शायद आप सोच भी नहीं सकते। लेकिन दुनिया तो बदल रही है। सोच वहीं अटकी हुई है कि रोना है तो दिखावा करके रो।

इंटरनेट पर बैठकर जज करना बड़ा आसान है। लेकिन उस इंसान की जगह खड़े होकर देखिए जिसके घर से अर्थी उठ रही है। वैसे आपका क्या मानना है? क्या हम वाकई हर बात पर लोगों को ट्रोल करने के लिए तैयार रहते हैं। उन्हें जज करने के लिए बैठ जाते हैं?

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