सॉरी मालदीव लेकिन तुम्हारा मगरमच्छ का रोना इस बार काम नहीं आएगा क्योंकि भारत अब तुम्हारी नियत से अच्छी तरीके से वाकिफ हो चुका है। इसीलिए ऐसे कितने भी आंसू बहाए ना लेकिन इसका भारत पर कोई असर नहीं होने वाला। जी हां दोस्तों इस वक्त भारत की ओर से मालदीव को बहुत ही बड़ा झटका मिला है जिसकी शायद मोहम्मद मोइजो को उम्मीद भी नहीं होगी क्योंकि उन्होंने जाल ही इतना बेहतरीन डाला था कि उन्हें पक्का यकीन था कि भारत इसमें जरूर फंसेगा.
लेकिन इस बार भारत ने भी भावनाओं में फंसने के बजाय नैतिक रूप से फैसला लिया जो मुझे तो काफी पसंद आया और शायद आपको भी पसंद आए तो क्या है पूरी खबर चलिए विस्तार से समझते हैं बस वीडियो पूरी जरूर देके। देखिए कल मैंने आपको बताया था कि मालदीव की सरकार भारत से 2 साल का और टाइम मांग रही है ताकि भारत ने जो तकरीबन ₹1,000 करोड़ों का लोन मालदीव को दे रखा है उसे वह चुगता करें। क्योंकि फिलहाल ईरान की वजह से मालदीव का धंधा पानी सब बंद है।
जिस वजह से मालदीव की गवर्नमेंट की जेब भी खाली है और लोन के मुताबिक मालदीव को हर महीने भारत को ₹200 करोड़ ईएमआई के तौर पर देने हैं। तो इसी को लेकर कल यह न्यूज़ आई थी कि मालदीव के वित्त मंत्रालय ने भारत से विनती की है कि भारत मालदीव को थोड़ा और टाइम दें ताकि हम पैसे जुटा सके।
लेकिन रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत ने मालदीव की यह रिक्वेस्ट खारिज कर दी है। देखिए आपके सामने आर्टिकल होगा जिसके मुताबिक भारत ने मालदीव को लोन का बकाया चुकाने के लिए और टाइम देने से मना कर दिया है। अब मना इसलिए किया क्योंकि भारत पहले भी दो बार मालदीव को समय अवधि बढ़ाकर दे चुका है। इसके बावजूद मालदीव हर बार वही रोना रो रहा है कि हमारे पास लोन चुकाने के लिए पैसे नहीं। लेकिन यही मालदीव चाइना का लोन बराबर मंथ टू मंथ पे कर रहा है। शायद आपको पता नहीं होगा लेकिन मालदीव पर चाइना का भी 1.5 बिलियन का कर्ज है और वह भी ईएमआई में ही पे करना पड़ता है और उसका ईएमआई तो भारत से भी बड़ा है।
खबर के अनुसार मालदीव को चाइनीस लोन के तहत हर महीने ₹51 मिलियन यानी ₹423 करोड़ चीन को देने पड़ते हैं। और गौर करने वाली बात है कि मालदीव टाइम टू टाइम वह ईएमआई भर भी रहा है। लेकिन भारत का पैसा चुकाने के लिए इनके पास पैसे नहीं। जबकि भारत ने इतनी बार मालदीव पर तरस खा के छूट दी। फिर भी लोन नहीं चुकाया जा रहा। यही कारण है कि इस बार भारत ने भी कड़ा रुख अपनाना ही सही समझा और मेरे हिसाब से यह सही भी है। आप ही बताना कब तक इन्हें हम पोछते रहे। जबकि उन्हें इस बात का एहसास भी नहीं कि भारत उनके लिए क्या-क्या कर रहा है। आपको बता दूं कि मालदीव चाइना का लोन टाइम टू टाइम इसलिए भी चुगता कर रहा है क्योंकि अगर चीन का पैसा नहीं दिया तो चाइना फौरन जमीन ही कब्जा लेता है।
वह किसी पर भी दया नहीं दिखाता कि यह मेरा दोस्त है या पड़ोसी। टाइम पर पैसे नहीं मिले तो चीन सीधे कब्जा शुरू कर देता है और भारत यहीं पर नरम पड़ता है। इसलिए तो हर कोई हमारी मदद का फायदा भी उठाता है। आपको शायद पता नहीं होगा.
लेकिन आपकी जानकारी के लिए बता दूं कि भारत ने अब तक 60 से ज्यादा देशों को 35 बिलियन से ज्यादा का लोन दे रखा है। जिसमें से कितने देशों से पैसे वसूल किए वह भारत सरकार ही जाने। मेरे हिसाब से हमें इतना भी उधारचंद नहीं होना चाहिए।
