ईरान और अमेरिका की इस ने पूरी दुनिया में एक अलग ही हलचल मचा दी। पूरा मध्यपूर्व तनाव की स्थिति से गुजरता रहा। दिन-बदिन तनाव में सिर्फ इजाफा ही हुआ। ना ईरान अमेरिका की बात मानने को राजी था ना अमेरिका ईरान की। अमेरिका चाहता है कि ईरान उसके सामने बैकफुट पर आए। ईरान चाहता है कि अमेरिका उसके आगे नतमस्तक हो जाए।
लेकिन अब वो कहावत तो आपने सुनी होगी कि जंग कभी समाधान नहीं होता और का असर भुगतना पड़ता है। और यही भुगतान दुनिया में एक हलचल की तरह से लोगों की जिंदगी में समा गया है। ईरान और अमेरिका की जंग ने जहां एक ओर गैस संकट को जन्म दिया। पेट्रोल डीजल के दाम बढ़े तो दूसरी ओर भारत में भी गंभीर संकट के बादल छा गए। हालांकि भारत सरकार ने पहले ही कहा कि हम पूरी तैयारी कर रहे हैं मुस्तैद हैं। लेकिन जंग कोई विकल्प नहीं होता।
भारत सरकार ने भी ईरान और अमेरिका के जंग को लेकर हमेशा यही कहा कि इस लड़ाई को जल्द से जल्द सुलझाना जरूरी है। हालांकि पाकिस्तान की राजधानी में यानी इस्लामाबाद में सीज फायर के बीच शांति वार्ता की पहल शांतिदूत बनकर पाकिस्तान के वजीर ए आजम यानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ तो आए। लेकिन पहली बार में यह शांति वार्ता फेल हो गई। दूसरी कोशिश फिर से लेकिन सवाल वही कि क्या बात बनी? हालांकि इस बीच ईरान युद्ध के चलते दुनिया भर में 3 करोड़ 20 लाख से ज्यादा लोग गरीबी की रेखा के नीचे धकेले जा सकते हैं।
एक बहुत बड़ा खुलासा है यह। संयुक्त राष्ट्र यानी कि यूएन यूनाइटेड नेशंस ने चेतावनी दी है कि विकासशील देशों को ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी खाद्य असुरक्षा और धीमी आर्थिक वृद्धि के रूप में ट्रिपल शॉक का सामना करना पड़ रहा है। यह युद्ध गरीब राष्ट्रों में विकास की रफ्तार को सीधे तौर पर धीमा कर रही है। दरअसल यूएनडीपी की एक रिपोर्ट आई है। इसके मुताबिक अमेरिका इजराइल के ईरान पर हवाई हमलों के बाद ईरान की ओर से जब से स्ट्रेट ऑफ हॉर्मोस यानी कि हॉर्मोस जलडम मध्य को बंद किया गया उसके बाद से वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति में रुकावटें पैदा हुई हैं और यह बात हर कोई जानता है।
इससे ऊर्जा कीमतों में तेज उछाल आया जिसका असर उर्वरक आपूर्ति और शिपिंग पर पड़ा जिससे विकासशील देशों में खाद्य संकट गहराने की आशंका है। अब इस रिपोर्ट में तीन कंडीशन का जिक्र है। सबसे खराब स्थिति में जहां तेल गैस उत्पादन में हफ्तों तक रुकावट और महीनों तक ऊंची कीमतें बनी रही तो 3 करोड़ 25 लाख लोग गरीबी में जा सकते हैं। गरीबी में होने वाली वृद्धि का लगभग आधा हिस्सा खाड़ी, अफ्रीका, एशिया और छोटी द्वीपीय विकासशील देशों सहित ऊर्जा आयात करने वाले करीब 37 देशों में केंद्रित होगा।
आपको बता दें यूएनडीपी प्रशासक और बेल्जियम के पूर्व प्रधानमंत्री एलेक्जेंडर डी क्रू ने कहा कि इस तरह का संघर्ष विकास को उल्टी दिशा में धकेल देता है। जंग रुकने के बाद भी इसका असर बरकरार रहेगा। अगर ईरान अमेरिका का जंग रुक भी जाता है तो जो तबाही का मंजर पूरी दुनिया ने देखा उसका असर भी थोड़े दिन तो जरूर बरकरार रहेगा। गरीब देशों में लोग गरीबी से बाहर निकले अब वापस धकेले जा रहे हैं। यह सबसे दर्दनाक पहलू है। उन्होंने कहा कि करीब $6 अरब डॉलर की मदद से प्रभावित परिवारों की सुरक्षा की जा सकती है।
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष यानी आईएमएफ ने भी चेतावनी दी है कि संघर्ष के निशान वैश्विक अर्थव्यवस्था पर स्थाई असर डाल चुके हैं। अमीर देश बेहतर तरीके से संभाल सकते हैं। लेकिन विकासशील राष्ट्र सीमित संसाधनों और मौजूदा दबावों के कारण ज्यादा प्रभावित होंगे।
हालांकि पश्चिमी देशों द्वारा सहायता व्यय में कटौती ने समस्या को और ज्यादा गंभीर कर दिया है। हालांकि इस बीच जो स्थिति उत्पन्न हो रही है और यह जो दावा यूएनडीपी की रिपोर्ट कर रहा है इसने गंभीर परेशानी खड़ी कर दी है कि क्या ईरान का असर इतना गंभीर होगा कि 3 करोड़ से ज्यादा लोग गरीब हो जाएंगे क्योंकि यूएनडीपी के ट्रिपल शॉक वाली चेतावनी अब सामने आ गई है।
