बड़ी खबर जो आ रही है वह यह है कि अमेरिका और ईरान में दूसरे दौर की बातचीत होगी। इसी हफ्ते आमने-सामने की बातचीत हो सकती है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान से जल्द बातचीत हो सकती है। अगले दो दिन में ईरान से यह वार्ता हो सकती है और पाकिस्तान में ही अमेरिका ईरान की ये बातचीत होगी। जगविंदर जी दूसरा पार्ट जो वार्ता का है उसको लेकर कितनी उम्मीदें हैं? उम्मीद तो बहुत ज्यादा है। ऐसा नहीं है कि बातचीत नहीं होगी।
अगर आप देखें कि हॉर्मोनस को क्यों बंद किया गया? अमेरिका ने इससे क्या हासिल किया? ये नाकेबंदी सिर्फ इसलिए की गई है कि जो पहले दौर की बातचीत शुरू हुई थी पाकिस्तान में अगर वो टूट गई है या फेल हो गई है तो वो खत्म ना हो जाए। अब बताइए कि हॉर्मूस में अमेरिका ने शिप खड़े करके क्या किसको क्या हासिल हुआ? इससे किसी को कुछ भी हासिल नहीं हुआ। अमेरिका को क्या हासिल हुआ? ईरान ने भी कोई ऐसी एक्टिविटी नहीं की। अगर लड़ना होता तो ईरान भी करता।
ये भी अटैक करते कि हम हॉर्मोस पे क्यों कब्जा कर रहे हैं? एक्चुअली डोन्ड ट्रंप ये चाहते थे कि कैसे यार ये बातचीत बनी रहे ताकि अगला कोई मौका आए और हम बातचीत करें। उसी के लिए हॉर्मस को बंद किया गया है। और जैसेजैसे ये हॉर्मूस को बंद करने के कारण यूरोपीय देशों पर बाकी देशों पर चीन पर दबाव बना तो ये बातचीत का सिलसिला आगे निकला। लेकिन मैं आपको बता दूं कि तब तक कुछ नहीं होगा जब तक चाहे पाकिस्तान लाख कोशिश कर रहा है। एक टेबल पर बिठाने की कोशिश कर रहा है।
असली हरी झंडी ईरान को चीन से मिलनी है। और अमेरिका इसीलिए चीन की तरफ बढ़ रहा है और अमेरिका की तमाम जो कोशिशें हैं उससे इन पूरे चाहे डिप्लोमेटिक तौर पर रहे चाहे जमीनी तौर पर रहे इसमें चीन को बहुत फायदा हुआ है और अमेरिका को बहुत नुकसान हुआ है। जी जगेंद्र जी एक सवाल और भी है कि जो पहले दौर की बातचीत हुई अमेरिका की अपनी शर्तें थी।
ईरान की अपनी शर्तें थी और दोनों ने एक दूसरों की शर्तों को मानने से इंकार कर दिया। अब दूसरे दौर की वार्ता की बात आ रही है तो क्या माने कि दोनों तरफ से थोड़ी सी ढिलाई हुई है और अब बीच का रास्ता निकालने की कोशिश होगी। देखिए हॉर्मोज और लेबनन पे तो कोई रास्ता निकलने नहीं वाला।
उस पर तो ईरान वही करेगा जो उसके मन की है जो उसकी जनता चाहती है। जो उसकी विचारधारा चाहती है वो वही करेगा। जो उसका स्टैंड है उसको क्लियर रखेगा। ये बीच में फेस सेविंग के लिए अमेरिका यही कह देगा कि जो हम कह रहे हैं कि आप यूरेनियम का संवर्धन जो कर रहे हैं उसको आप 20 साल तो ईरान कह देगा 10 साल कर लेता हूं। रूस बीच में आ जाएगा, चीन बीच में आ जाएगा। कागजों पर इस तरह के समझौते हो जाएंगे और जमीनी तौर पर वो चोरी छिपे चलते रहेंगे जैसे नॉर्थ कोरिया में चलते हैं। बाकी देशों ने चाहे वो भारत भी ले ले। उन्होंने कहा अमेरिका को बता के बनाया था। अमेरिका से परमिशन लेके बनाया था कि हम बना रहे हैं।
अब जो हालात बन गए हैं उसके बाद तो और अग्रेसिवली चाहे वो चोरी छिपे या बिल्कुल जो है वो भूमिगत तरीके से ये करना जरूर चाहेगा ईरान। उसको लगेगा कि ये कल नहीं तो परसों फिर ये हालात उसके साथ बन सकते हैं। तो कहते हैं ना दूध का जला छाछ को भी फूंक मार कर पीता है। लेकिन कागजों पर इस तरह की चीजें दिखा दी जाएंगी कि अमेरिका को यह ना लगे कि तू हार गया और ईरान कल को यह दावा ना कर दे कि मैं जीत गया। इसलिए फेस सेविंग मोड में आकर कुछ इस तरह की चीजें तय होंगी जिसके बाद अमेरिका कट लेगा और जो टसल चल रही है इजराइल और ईरान की वो आगे भी चलती रहेगी।
बिल्कुल और इसी वार्ता की संभावना के बीच एक बड़ी कूटनीतिक खबर आ रही है कूटनीतिक मोर्चे से और बड़ी खबर यह है कि पीएम मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच फोन पर बातचीत हुई। पीएम मोदी ने सोशल मीडिया पोस्ट करके इस बात की जानकारी दी। प्रधानमंत्री ने लिखा कि पश्चिम एशिया के हालात पर चर्चा हुई है। पीएम मोदी ने बताया कि हॉर्बुज को खुला और सुरक्षित रखने पर बातचीत में जोर दिया गया है। आशीष हमारे साथ बने हुए हैं। आशीष जी ये जो पूरी वार्ता होने जा रही है दूसरे दौर की उससे ठीक पहले डोनाल्ड ट्रंप का प्रधानमंत्री से बात करना यह इशारा करता है क्या कि भारत की भी भूमिका होगी वार्ता टू में। देखिए ये बात तो मैंने कल भी जिक्र किया था कि कहीं ना कहीं बाहरी तौर पर कम से कम भारत कोई ना कोई भूमिका निभा जरूर रहा है। जिस तरह से डॉक्टर जयशंकर मिडिल ईस्ट देशों के नेताओं से मिले और अब डॉन्ड ट्रंप की प्रधानमंत्री मोदी से बात हुई। हालांकि मैं यहां आपको क्वेश्चन कर दूं।
देखिए डॉन्ड ट्रंप सिर्फ और सिर्फ अपने मतलब की बात करते हैं। उन्होंने डॉक्टर माफ़ कीजिएगा। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को फोन किया है तो निश्चित तौर पर अपने ही उद्देश्य से किया होगा। मुझे ऐसा लगता है कि उनके पास दो तीन ऑप्शन या तो प्रधानमंत्री मोदी को उन्होंने फोन किया यह निवेदन करने के लिए कि ईरान के साथ आप लोगों के बड़े अच्छे क्लोज रिलेशनशिप है। आप उन पर दबाव बनाएं कि मेज पर हैं। हम नेगोशिएशंस कर रहे हैं और हमारी शर्तों को वो माने। या फिर दो दूसरे ऑप्शन ये हो सकते हैं कि उन्होंने स्ट्रेट अवे प्रधानमंत्री मोदी को कहा होगा कि जो चीन ने किया वो आप ना करें। आपने कई शिप्स तो वहां से निकाल लिए हैं। लेकिन अब ईरान को कोई भी पैसे देकर के आप अपने शिप वहां से मत निकालिएगा। आप हमारे एलआई के तौर पर हमारे साथ क्लोजर कोऑपरेशन में इसमें काम करें या फिर या फिर अवधदेश ये भी हो सकता है कि प्रधानमंत्री को उन्होंने कम्युनिकेट किया हो कि हम स्पेशल एक्सेंपशन आपको देते हैं इंडिया को आप अपने शिप्स सेफली निकाल लें लेकिन उसकी शर्त यही होगी कि आप ईरान पर दबाव डालेंगे कि वो हमारी शर्तें जो दो रोज बाद जैसा कि खुद डोनल्ड ट्रंप ने कहा है नेगोशिएशंस ईरान से होनी है वो मानना पड़ेगा।
मैं अपनी तरफ से आश्वस्त हूं कि डॉन्ड ट्रंप ने जब प्रधानमंत्री को आखिर में यह कहा है कि वी ऑल लव यू। तो आप यह मान के चलें। उन्होंने सिर्फ और सिर्फ अपने मतलब की बात की है। भारत कैसे नेगोशिएट करता है। भारत किस तरह से इसमें भूमिका निभाता है। लेकिन मैंने ये बात फिर से दोहरा दूं। कल भी कहा था। मुझे ऐसा लगता है कि भारत कोई ना कोई भूमिका जरूर अब ईरान को समझाने में निभा रहा है।
भले ही डायरेक्टली या फिर कुछ और देशों को इनवॉल्व करके कि जल्द से जल्द एक लॉन्ग टर्म सीज फायर के लिए बेहतर होगा कि ईरान कुछ शर्तों को माने और अपने अपने रुख में भी कुछ लचीलापन दिखाए।
