ये मेरी पहचान है और ये पारुल यूनिवर्सिटीकी पहचान है। किसके हाथ हॉर्मूस का रिमोट? ईरान ट्रंप कौन कर रहा है कंट्रोल? तो यह बड़ा सवाल बन चुका है इस युद्ध के बीच जहां ईरान ने स्ट्रेट ऑफ हॉर्मोस पर पूरी तरीके से कब्जा जमाया हुआ था। ईरानी नौसेना की इजाजत के बिना एक भी जहाज इस जलमार्ग से नहीं गुजर पा रहा था। यह हमने और आपने शुरुआत से ही देखा। हालांकि अगर भारत के एंगल से हम बात करें भारत की बात करें तो शुरुआती दौर में यानी कि शुरुआती युद्ध के दौर में हमने देखा कि सभी देशों को इस समस्या से जूझना पड़ा।
लेकिन जिस तरीके से डिप्लोमेटिक फ्रंट पर भारत ने ईरान से बातचीत की। भारत को स्टेट ऑफ हॉर्मोन से गुजरने की अनुमति मिल गई। जिसके वजह से भारत में एलपीजी के कई खेप जो है वो आ गए। लेकिन ईरान ने दावा किया था कि उसने हॉर्मूस में सुरंग बिछा रखी है। जिनका रिमोट कंट्रोल ईरानी सेना के हाथ में ही है। क्योंकि अमेरिकी नौसेना ने हॉर्मूस स्टेट में मौजूद इन्हीं सुरंगों को हटाने का काम शुरू कर दिया है।
अमेरिका के दो विध्वंसक जहाज यानी कि यूएसएस फ्रंट ई पीटरसन और यूएसएस माइकल मॉर्फी इस काम को अंजाम दे रहे हैं। अमेरिका का दावा है कि यह युद्धपोत इस अहम समुद्री रास्ते को सुरक्षित करने की कोशिश की पहली कड़ी है। यह रास्ता दुनिया भर में ऊर्जा के प्रवाह के लिए बेहद ही जरूरी है। द वॉर ज़ोन यानी कि TWZ के मुताबिक अमेरिकी नौसेना के ये दोनों जहाज खासतौर पर बारूदी सुरंगों का पता लगाने के लिए तैयार नहीं किए गए हैं। लेकिन इनके सुनार सिस्टम का इस्तेमाल सुरंगों का पता लगाने के लिए किया जा सकता है। आपको बता दें कि यूएस सेंट्रल कमांड के कमांडर एडमिरल ब्रेड कूपर ने कहा है कि आज हमने एक नया समुद्री रास्ता बनाने का काम शुरू किया है और जल्द ही हम इस सुरक्षित रास्ते की जानकारी समुद्री व्यापार से जुड़ी कंपनियों के साथ साझा करेंगे ताकि व्यापार का निर्वाद प्रवाह बना रहे। अमेरिका की नौसेना इस बारूदी सुरंग हटाने के अभियान में मदद के लिए मानव रहित सिस्टम यानी कि ड्रोन का भी इस्तेमाल करेगी।
न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक आपको जानकारी दे दें कि ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉप्स यानी कि आईआरजीसी ने कहा है कि उन्होंने पानी के इस संकरे हिस्से में जो बारूदी सुरंगे बिछाई थी अब उनका पता नहीं चल पा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर यह कहा है कि अब हम हॉर्मोस स्ट्रेट को बारूदी सुरंगों से मुक्त करने का काम शुरू कर रहे हैं। ईरान की बारूदी सुरंगे बिछाने वाली सभी 28 नावों भी अब समुद्र की तलहटी में पड़ी हैं। अमेरिका की नौसेना फारस की खाड़ी में बारूदी सुरंगे हटाने वाले दो जहाज यूएसएस चीफ और यूएसएस पायोनीर भी भेज रही है। यह जहाज भी बारूदी सुरंग हटाने के अभियान में हिस्सा लेंगे। मिडिल ईस्ट में युद्ध शुरू होने से पहले ही अमेरिका की नौसेना ने फारस की खाड़ी में तीन इंडिपेंडेंट श्रेणी के लिटरल कॉम्बैट जहाज यानी कि एलसीएस तैनात किए थे।
टीडब्ल्यूzेड के मुताबिक आपको जानकारी दे दें कि बाद में इन जहाजों को उस इलाके से हटा लिया गया था। लिटोरल कॉम्बे जहाज दूर से ही सुरंगों को बेअसर करने वाले सिस्टम से लेस होते हैं।
जिससे नौसैनिक दूर से ही इन सुरंगों का पता लगाकर उन्हें नष्ट कर देते हैं। तो आपको बता दें कि जिस तरीके से अमेरिका अब इस युद्ध में एक बार फिर से जहां अभी तक सीज़ फायर की बात कर रहा था तो अब स्टेट ऑफ हॉर्मोस पर कब्जा जमाने जमाने की जो है पूरी तरीके से कोशिश में है। लेकिन अगर बात करें ईरान की तो ईरान भी कहीं से पीछे हटने वाला नहीं है। ईरान लगातार ये दावा करता है कि स्टेट ऑफ हार्मूस पर ईरान का कब्जा था है और हमेशा रहेगा। लेकिन क्या ईरान की इस धमकी से डोनाल्ड ट्रंप
