मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच एक और बड़ी कूटनीतिक हलचल सामने आई है और इस बार केंद्र में है दुनिया की सबसे अहम समुद्री लाइफलाइन स्टेट ऑफ हॉर्मोस।
इस बार चीन ने हॉर्मोस को लेकर ईरान और अमेरिका को जमकर सुनाया है। चीन ने साफ कहा है कि यह किसी एक देश की जागीर नहीं है। चीन के इस बयान से पूरी दुनिया के सारे मौजूदा सियासी समीकरण बदल गए हैं। दरअसल चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा है कि स्टेट ऑफ हॉर्मोस किसी एक देश की बपौती नहीं है बल्कि एक अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग है।
उनका मानना है कि इसे सभी देशों के लिए खुला रहना चाहिए। क्योंकि यह सिर्फ क्षत्रिय ही नहीं बल्कि वैश्विक हितों से जुड़ा मामला है। दरअसल शी जिनपिंग ने यह बात सऊदी अरब के क्रॉन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के साथ फोन पर बातचीत के दौरान कही। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस स्टेट को जल्द से जल्द सामान्य जहाजों की आवाजाही के लिए खोला जाना चाहिए।
उनका तर्क साफ था कि अगर यह रास्ता बंद रहता है तो पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर इसका असर पड़ेगा। चीन की चिंता भी जायज है। वह ईरान से तेल आयात करने वाला सबसे बड़े देशों में से एक है। ऐसे में अगर यह जलमार्ग लंबे समय तक बंद रहता है तो चीन की ऊर्जा सुरक्षा पर सीधा असर पड़ सकता है। यही वजह है कि बीजिंग अब इस संकट को सिर्फ एक क्षेत्रीय विवाद नहीं बल्कि वैश्विक अस्थिरता के लिए खतरा मान रहा है।
लेकिन इस कहानी का एक और पहलू है। ईरान का कहना है कि स्टेट ऑफ हॉर्मोस पर उसका एकाधिकार है और वह इसे अपने रणनीतिक हितों के अनुसार इस्तेमाल कर सकता है। वहीं अमेरिका इस जलमार्ग को खुला रखने के लिए सैन्य दबाव बना रहा है। इसी क्रम में ट्रंप की ओर से हॉर्मूस की नाकेबंदी की गई है। इस टकराव ने हालात को और भी ज्यादा विस्फोटक बना दिया है। चीन ने ना सिर्फ इस जलमार्ग को खोलने की मांग की है बल्कि एक तुरंत और व्यापक युद्ध विराम की भी अपील की है।
उनका कहना है कि संकट का समाधान केवल बातचीत और कूटनीति के जरिए ही संभव है ना कि सैन्य कारवाही से। दिलचस्प बात यह है कि चीन पहले ही 2023 में ईरान और सऊदी अरब के बीच सुलह कराने में अहम भूमिका निभा चुका है।
चीन को ईरान का सबसे अच्छा दोस्त माना जा रहा है। वहीं चीन और अमेरिका के बीच आर्थिक मोर्चे पर कंपटीशन का दौर जारी है। लेकिन मौजूदा अमेरिका ईरान संघर्ष की वजह से चीन के सियासी संतुलन भी लगातार बदल रहे हैं। अब सवाल यह है क्या चीन इस बार भी मध्यस्थ बन पाएगा? वह दुनिया के सभी ताकतवर देश और कमजोर देशों के लिए हारमोंस को खुलवा पाएगा या फिर यह टकराव एक बड़े वैश्विक संकट में बदल जाएगा।