रिजर्वेशन इज़ नॉट अ पॉवर्टी एलिवेशन प्रोग्राम। हाउ कैन दे गेट द सेम पोजीशन और द सेम लेवल ऑफ एजुकेशन? वेस्ट बंगाल में हो या फिर पूरा देश में हो हर जगह पर जो सिटीजन का फंडामेंटल राइट्स है उन लोगों को जो मिलना चाहिए उन लोगों को वो नहीं मिल रहा है। मेरे विलेज की मैं बात करूं तो वहां पे फॉर्मल रिप्रेजेंटेशन है। पर वुमेन को पता ही नहीं है कि हमारे जो विलेज में क्या चल रहा है। वो कौन डोमिनेट करता है।
वो मेल मेंबर जो है वो डोमिनेट कर रहा है। पढ़ने के लिए मेरे को रायगंज जाना पड़ता है। पर मेरा होमटाउन है अहमदाबाद।अपनी मातृभूमि में जन्मभूमि में नहीं पढ़ सकता। उसके लिए हायर स्टडीज के लिए कोलकाता आना पड़ता है। 500 कि.मी. दूर घर से आना पड़ता है। कोई अच्छा यूनिवर्सिटी नहीं है। अच्छा हॉस्पिटल भी नहीं है। अच्छा कॉलेज कुछ भी नहीं है। और हमारा हॉस्पिटल फैसिलिटी बहुत बुरा है वहां का।
ऑलरेडी जो पिछड़े कम्युनिटीज के लोग हैं उनको सालों तक अपना हक नहीं मिला। एजुकेशन राइट्स, प्रॉपर्टी राइट्स कुछ भी उनके पास नहीं था। क्यों ऐसा हो रहा है? जो गवर्नमेंट इंस्टीटशंस है, जो स्कूल्स है वो डेवलप्ड क्यों नहीं हो रहे? देश के युवा सिर्फ उम्र का नाम नहीं होतेहैं। उनके अंदर सपनों की आग होती है। देश को बदलने की ताकत होती है। और आज हम वेस्ट बंगाल के युवाओं से रूबरू होने आए हैं। तो आइए हम उनसे बातचीत करते हैं। क्या नाम है आपका? मेरा नाम कोयल बॉल है। अ मैं बैरकपुर से आती हूं और मेरा जो होमटाउन है वो बगुला में है जो नदिया में है। नदिया डिस्ट्रिक्ट में है जो कि एक रूरल एरिया है ऑब्वियसली।
अभी जो सिचुएशन है वहां की एजुकेशन उतनी अच्छी डेवलप्ड है नहीं। इसीलिए इसीलिए मेरे पेरेंट्स को सोचना पड़ा कि वो यहां पे बैरकपुर में आए। हम यहां स्टे करें और यहां से हम मेरी पढ़ाईहुई। इसीलिए वहां की एजुकेशन खराब होने की वजह से मेरे पेरेंट्स को मेरे हायर एजुकेशन के लिए इधर आना पड़ा। क्यों ऐसा हो रहा है? जो गवर्नमेंट इंस्टीटशंस हैं, जो स्कूल्स हैं वो डेवलप्ड क्यों नहीं हो रहे? जब भी मैं वहां पर विजिट करती हूं, मेरे होमटाउन में जब मैं विजिट करती हूं, तब मैं देखती हूं कि वहां के स्टूडेंट्स जो मेरी सिस्टर्स है, जिन्होंने वहां से पढ़ाई की उन लोग को बहुत कम उम्र में उनकी शादी हो जा रही है। जो लड़के हैं वो लोग किसी कंस्ट्रक्शन में या फिर किसी इनफॉर्मल सेक्टर में जॉब ढूंढे जा रहे हैं। टू सपोर्ट देयर फैमिलीज़ व्हिचबिलोंग टू अ वेरी रूरल बैकग्राउंड। लाइक देयर आर वेरी लेस नंबर ऑफ ऑफिसर ग्रेडेड पीपल देयर।
सो ये एक तो बहुत बड़ी प्रॉब्लम है कि एजुकेशन सिस्टम जो गवर्नमेंट इंस्टीटशंस है क्योंकि वहां के लोगों की इकोनॉमिक कंडीशंस तो उतनी अच्छी है नहीं कि वो लोग बड़े-बड़े जगह में पढ़ा सके। प्राइवेट स्कूल्स में या फिर यहां पे आके शिफ्ट हो के पढ़ा सके। इनफैक्ट हम भी जो बैरकपुर में रहते हैं हम रेंट पे रहते हैं। तो अ बहुत मुश्किल से सर्वाइव करना पड़ता है। और उधर के स्टूडेंट्स को भी पेरेंट्स की तो उतनी ये नहीं कैपेसिटी नहीं है। तो उन लोग को उसी इंस्टीटशंस मेंस्कूल्स में पढ़ना पड़ता है जहां पे टीचर्स नहीं है।
बुक्स फैसिलिटीज नहीं है। मिड डे मील्स की हालत बहुत खराब है। बेसिकली आप यह कहना चाह रही हैं कि बंगाल में हर जगह अच्छी एजुकेशन नहीं है। अच्छी एजुकेशन आपको कोलकाता आना पड़ता है। बिल्कुल बिल्कुल आप कहां से हैं? मैं मैं जलपाईगुड़ी से हूं और जलपाईगुड़ी का हालत भी वैसा ही है जो वहां पर अगर अच्छा एजुकेशन एजुकेशन फैसिलिटी होता तो मैं तो जादूपुर में नहीं आता ना। तो जलपागुड़ी में ऐसे भी बहुत फैसिलिटी फैसिलिटीज मतलब जो गवर्नमेंट लैंड गवर्नमेंट लैंड बहुत है मैं जो विलेज मेंरहता हूं वो है दमहानी वो दमोहनी एक टाइम के एक टाइम पे बहुत ही मतलब डवर्स्ड एरिया था हां तो दमोहनी में अभी मोर देन 600 एकड़ मतलब गवर्नमेंट लैंड वहां पर है।
फिर भी वहां पर कोई तो सेंट्रल यूनिवर्सिटी हो सकता था या स्टेट का भी कोई यूनिवर्सिटी हो भी सकता था और और मतलब ना सेंट्रल ना सेंट्रल कोई मतलब सेंटर कोई मतलब एक्शन ले ले रहा है और ना स्टेट कोई गवर्नमेंट कुछ कर रहा है। ये कह रहे हैं कि गवर्नमेंट लैंड होने के बावजूद भी वहां पे ना स्टेट कोई एजुकेशन के लिए स्टेप उठा रहा है ना सेंट्रल गवर्नमेंट। जी आप कहां से हैं? मैं नॉर्थबंगाल का दार्जिलिंग डिस्ट्रिक्ट से बिलोंग करता हूं। दार्जिलिंग जो चाय के लिए जाना जाता है। अभी आपको कोलकाता आपको भी आना पड़ा। दार्जिलिंग में नहीं थे अच्छे यूनिवर्सिटी? नहीं अभी नॉर्थ बंगाल का जो सिचुएशन है बहुत दिन से है। कोई अच्छा यूनिवर्सिटी नहीं है। अच्छा हॉस्पिटल भी नहीं है। अच्छा कॉलेज कुछ भी नहीं है। और हमारा हॉस्पिटल फैसिलिटी बहुत बुरा है वहां का। और हम लोग को ट्रीटमेंट करने के लिए कोलकाता जैसे शहर में आना पड़ता है। और वहां पर कुछ प्राइवेट हॉस्पिटल है। वो लोग पूरी कमर्शियल है। पुअर पीपल लोग बिलोंगकरते हैं।
वो लोग को तो बहुत हमारा एक रिलेटिव था। वो रिलेटिव का हार्ट अटैक हो गया था। हार्ट अटैक का वजह से मौत हो गया था। वहां पर बिल था 5 लाख बट 5 लाख जितना टाइम तक डिपॉजिट नहीं किया बॉडी रिकवरी नहीं किया गया। ऐसा सिचुएशन है। आप कहां से हैं? साउथ 24 परगना से है हम। अच्छा जो बगल में ही है मुझे लग रहा है। से बगल में ही है। मेरा दो बात है मैं बोलना चाहूंगा कि पहले तो शहर और गांव का जो फराक है हम शायद यहां पर यहां पर नजर आएगा। ओके फैसिलिटी ऑफ़ एजुकेशन हेल्थ। द मेन पॉइंट इज़ द गैप बिटवीन अर्बन एंड रूरल इज़ विज़िबल हियर। ओके?एंड मैं और एक बात बोलना चाहता हूं कि जो यहां पर एसी और एसटी से है वो फैसिलिटी डेवलपमेंट नहीं होता है इन एजुकेशन इन हेल्थ इन एवरीवेयर तो ये आप कहां के एससी एसटी की बात कर रहे हैं? ओवरऑल बंगाल की बात कर रहे हैं? ओवरऑल ओवरऑल बंगाल में जो एससी एसटी से है उसका उसका उसका डेवलपमेंट जितना होने की जरूरत है नहीं हो रहा है। सो दिस इज़ वन ऑफ द मेन रीज़ जो बंगाल पीछे छूट रहा है। आप कहां से हैं? मैं नॉर्थ 24 परगना डिस्ट्रिक्ट का रेजिडेंट हूं।
अभी एक दो फंडामेंटल चीज है जो सब लोगों को समझना चाहिए। मुझे लग रहा है कि हर कोई जो रेसिडेंट है, हर कोई जोवोटर है पूरा देश का हमारा वेस्ट बंगाल का उन लोगों में दो-तीन फंडामेंटल प्रॉब्लम्स हैं। ये फंडामेंटल प्रॉब्लम्स वो है जो जो देश का मीडिया है फोर्थ पिलर ऑफ डेमोक्रेसी होकर भी वो लोग ज्यादातर समय पर एक ट्रांसपेरेंट पिक्चर हम लोगों के सामने नहीं खड़ा करता है। इससे प्रॉब्लम क्या होता है? क्या प्रॉब्लम है आपको मीडिया से? बताइए।
देखिए मीडिया से मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं है। प्रॉब्लम ये है कि अगर कोई मीडिया बायस हो जाएगा तो उसमें प्रॉब्लम होता है। अभी प्रॉब्लम क्या है? अगर हम लोग को क्लियर पिक्चर दिखाना है तो वेस्ट बंगालमें और सेंट्रल में दोनों में ही एक बहुत प्रॉब्लम है। प्रॉब्लम क्या है? अगर आप वेस्ट बंगाल के बारे में देखेंगे 8000 प्राइमरी स्कूल बंद हो चुका है। अगर प्राइमरी स्कूल बंद हो जाएगा तो उसमें प्रॉब्लम क्या होगा कि जो जो स्टूडेंट है जोज पहले एकदम छोटा बच्चा लोग है जो घर से पढ़ाई कर रहा है जिन लोगों का घर में उतना इकोनमिक कंडीशन अच्छा नहीं है उन लोगों के पास पढ़ाई करने के लिए वो गवर्नमेंट प्राइमरी स्कूल को छोड़कर और कुछ नहीं होता है। अभी प्रॉब्लम यह है कि अगर ये सब प्राइमरी स्कूल बंद हो जाएगा तो ओवरऑलडेवलपमेंट किसी सिटीजन का नहीं होगा। उसके बाद अगर हम लोग सेंट्रल में जाएंगे तो क्या देखेंगे हम लोग? जितना पब्लिक सेक्टर है, जितना गवर्नमेंट सेक्टर है, वह सबका प्राइवेटाइजेशन हो रहा है। इसका मतलब क्या है? इन दोनों का कुछ सेट एजेंडा है। जिन एजेंडा का मेन मतलब यह है कि उन लोगों का पॉकेट में कितना पैसा जा रहा है। देश के अगर प्रधानमंत्री का बात अगर आप करेंगे तो वहां पर आ जाएगा अडानी और अंबानी के पास कितना पैसा जा रहा है और बीजेपी का पार्टी ऑफिस कितना बड़ा हो रहा है। फाइव स्टार होटल है या फिर बीजेपी का पार्टी ऑफिस वोसमझ में नहीं आता है। अगर आप वेस्ट बंगाल में आएंगे तो करप्शन का तो बात ही नहीं।
नहीं मतलब करप्शन अगर अगर करप्शन टर्म का कोई डिक्शनरी में मीनिंग देखने को जाएंगे तो वो टीएमसी को ऑल टाइम मनी मशीन हम लोग बोलते थे बहुत पहले से ही वो बात है। तो अगर आप लोग मोटा-मोट तौर पर देखेंगे तो प्रॉब्लम यह रहता है कि वेस्ट बंगाल में हो या फिर पूरा देश में हो हर जगह पर जो सिटीजन का फंडामेंटल राइट्स है उन लोगों को जो मिलना चाहिए उन लोगों को वो नहीं मिल रहा है। और हम लोग ये थैंकफुल है कि आप जैसे कुछ इंडिपेंडेंट मीडियाज जो लोगहैं वो ये दिखा रहा है कि एक्चुअली प्रॉब्लम क्या-क्या है।
मार्जिनलाइज सेक्शन जो है उन लोगों को कोई रिप्रेजेंटेशन नहीं है। पार्लियामेंट में भी रिप्रेजेंटेशन नहीं है। बाहर भी रिप्रेजेंटेशन नहीं है। उन लोग के बारे में कुछ होता नहीं है। आप कहां से हैं? मैं अर्पण हूं। मैं उत्तर दिनाजपुर रायगंज से हूं। मतलब मेरा ब्राउन एंड बॉटम रायगंज में हुआ। और एज अ स्टूडेंट मैं बोलना चाह म बोलना चाहता हूं कि उत्तर दिनाजपुर एक ऐसा जिला है जिस जिले के बारे में बात तो होती ही नहीं। मतलब पूरे दिनाजपुर डिस्ट्रिक्ट को अगर देखें तो दो हिस्सोंमें बंटा हुआ है। एक उत्तर और दक्षिण उसके नीचे मालदा उसके ऊपर दार्जिलिंग। यह जो म एरिया है यह एरिया बहुत ही माइनॉरिटी पापुलेशन यहां पे ज्यादा है और आप अगर देखेंगे तो पूरे वेस्ट बंगाल के डेमोग्राफी में सबसे ज्यादा इलिटरेसी सबसे ज्यादा इकोनमिक बैकवर्डनेस सबसे ज्यादा अ मल्टीडमेंशनल पॉवर्टी अगर देखेंगे तो ये सब जिलों में ज्यादा है।
सरकार कुछ भी करके इन सब जिलों पे काम नहीं करना चाहती या कर सकती है या नहीं कर सकती है ये सरकार के ऊपर होना चाहिए था। पर जिस जिले में आपका पॉपुलेशन का सबसे वनरेबल ग्रुप रहता है आप जानते हो क्योंकि ये जिलाबॉर्डर प्रोन जिला है। पार्टीशन के वक्त सबसे ज्यादा मने समस्या के ऊपर से यह सब जिला ये है। तो पर इन लोगों के लिए काम नहीं किया सरकार ने। स्टूडेंट लोगों के लिए हस्पताल के लिए जो मरीज है वहां पे अगर कुछ चिकित्सा करने की जरूरत होता है तो ममता बनर्जी नाम का एक सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल सिर्फ रायगंज में पूरा उत्तर दिनाजपुर का डिस्ट्रिक्ट में एक सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल है वो रायगंज और एक सब डिवीजनल हॉस्पिटल है जो इस्लामपुर में है जिसके अंदर टोटल 100 किमी का गैप है। अगर कोई इंसान रायगंज में सही चिकित्सा नहींमिलता उन लोगों को या मालदा जाना पड़ता है या सिलीगुड़ी जाना पड़ता है।
मोस्ट ऑफ़ द केसेस इंसान या पेशेंट की मतलब यह जर्नी में जाने में ही डेथ हो जाती है। तो, यह मतलब यह मैंने सोचा है। मैंने सोचा मतलब मैंने देखा मेरे घर के दो लोग ऐसे मारे गए हैं। मतलब यू यू कैन नॉट इग्नोर दिस थिंग्स बिकॉज़ छोट छोट वाला मतलब एकदम चाइल्डहुड से जो प्रॉब्लम आपको दिख रहा है ना मैं बनर्जी हूं। एक अपर कास्ट हिंदू मेल ब्राह्मण हूं। इस देश में इससे ज्यादा बड़ा प्रिविलेज बैकग्राउंड नहीं हो सकता। पर इस प्रिविलेज बैकग्राउंड से आते भी आते हुएभी मेरे को जो सब देखना पड़ता है, मैं जिस बैकग्राउंड से आता हूं, मैं जिस एनवायरमेंट से आता हूं, जहां पे मेरे को लिए पढ़ने के लिए मेरे को रायगढ़ जाना पड़ता है। पर मेरा होमटाउन है अहमदाबाद। तो मतलब कुछ तो गलत हो रहा है ना। जो अपनी मातृभूमि में जन्मभूमि में नहीं पढ़ सकता उसके लिए हायर स्टडीज के लिए कोलकाता आना पड़ता है। 500 कि.मी. दूर घर से आना पड़ता है। तो मतलब मेरे को कैमरे पे सामने आने की जरूरत क्या होती? अगर मैं मेरा सब कुछ आप कैमरे के सामने आ सकते हैं। आप अपनी बात हमेशा रख सकते हैं। एक मैं आप सभी सेडिस्कशन करना चाहती हूं। सब लोग अपनी-अपनी आइडेंटिटी असर्ट कर रहे हैं और करनी भी चाहिए। हम एक डेमोक्रेटिक देश के नागरिक हैं। मैं एक जो इंडियन एजुकेशन सिस्टम में एक बहुत ही बड़ा डिबेटेबल इशू है। दैट इज रिजर्वेशन। आप लोगों के क्या-क्या विचार हैं? अपने इंडिविजुअल विचार बताइएगा। जी। अ रिजर्वेशन एक बहुत ही वाइटल पार्ट है हमारे इंडियन पॉलिटिकल सिस्टम का। क्योंकि पहली बात तो दो चीजों पे मैं फोकस करना चाहूंगी रिजर्वेशन के इशू पर। फर्स्ट इज एससी एसटी रिजर्वेशन, एससी, एसटी, ओबीसी रिजर्वेशन। जो पिछड़े और मार्जिनलाइज्डकम्युनिटीज के लोग हैं उनके लिए जो रिजर्वेशन है। एंड सेकंड इज़ वुमेन रिजर्वेशन। पहली बात तो एससी, एसटी, ओबीसी के लिए जो रिजर्वेशन है, उसके अगेंस्ट में जो ब्राह्मणवाद के बारे में बोला जा रहा था, ब्राह्मिनिज़्म के बारे में बोला जा रहा था। अ लॉट ऑफ़ पीपल आर देयर हु थिंक दैट दिस रिजर्वेशन इज़ डिस्क्रिमिनेटरी टू देम। व्हेन दे शुड नो दैट हिस्ट्री इज डिफरेंट। ऑलरेडी जो पिछड़े कम्युनिटीज के लोग हैं उनको सालों तक ये अपना हक नहीं मिला।
एजुकेशन राइट्स, प्रॉपर्टी राइट्स कुछ भी उनके पास नहीं था। तो अब इफ वी पुट देम इन द सेम लाइन हाउ कैन दे गेट द सेमपोजीशन और द सेम लेवल ऑफ़ एजुकेशन और सेम मेरिट एस देम? तो पहली बात तो यह है। और दूसरी बात है वुमेन रिजर्वेशन का। वुमेन रिजर्वेशन तो वुमेन को तो इंटरसेक्शनल डिस्क्रिमिनेशन सहना पड़ता है। एसटी एससी एसटी वुमेन को और भी डिस्क्रिमिनेशन सहना पड़ता है। और हर एक पॉलिटिकल पार्टी जो भी आप देखिए बीजेपी हो, टीएमसी हो या फिर सीपीएम हो वेस्ट बंगाल के पर्सपेक्टिव में अगर हम देखें तो कोई भी पार्टी वुमेन के लिए हर एक पार्टी ऑप्रेसिव है। आप बीजेपी सरकार जहां जिस स्टेट में है, जैसे कि यूपी में हम देख सकते हैं कि वीमेन कावहां पे क्या कंडीशन है। रेप अक्सर होता है और उसका कुछ होता नहीं है। हम हमारे यहां पे टीएमसी में टीएमसी गवर्नमेंट के अंदर हमने देखा आरजीगर केस था। वो सीबीआई के अंडर गया फिर भी कुछ नहीं हुआ। तो हम देख सकते हैं कि हर एक गवर्नमेंट या स्टेट हो, सेंटर हो कोई भी वुमेन के लिए काम करता ही नहीं है। और वुमेन रिप्रेजेंटेशन की बात करें तो वो तो एक डीजर रिप्रेजेंटेशन कुछ एक हो रहा है और डिफेक्टो में कुछ हो ही नहीं रहा है। जो हम लोग ने 73 74 अमेंडमेंट में हमारा लोकल में रिजर्वेशन आया। बट एक्चुअली में लोकल लेवल पे अगर हम देखें मेरे विलेज कीमैं बात करूं तो वहां पे फॉर्मल रिप्रेजेंटेशन है। पर वुमेन को पता ही नहीं है कि हमारे जो विलेज में क्या चल रहा है।
वो कौन डोमिनेट करता है। वो मेल मेंबर जो है वो डोमिनेट कर रहा है। वहां पे अभी भी पेट्रियर्की है। वहां पे कोई सुपरविजन नहीं है। तो इस चीज को हमें ध्यान में रखना पड़ेगा। जी मैं इंटरप्ट करना चाहूंगी। मैं बस यह बोलना चाहूंगी यहां पे पूछना चाहूंगी बाकी लोगों से कि क्या इनके अलावा और किसी का और थॉट प्रोसेस है रिजर्वेशन पे जैसे इन्होंने बताया एससी एसटी ओबीसी एंड वुमेन आर मोर मार्जिनलाइज्ड उसके अलावा आप लोगोंको लगता है और कोई तबका है जो मार्जिनलाइज्ड है?
पहली बात तो रिजर्वेशन के बारे में एक बात हम लोगों को समझना चाहिए कि रिजर्वेशन हम हमारा पूरा देश के लिए बहुत ही इंपॉर्टेंट फैक्टर है। इन दोनों चीज एससी एसटी हो जैसे कि कास्ट रिजर्वेशन हो उसके ऊपर फीमेल रिजर्वेशन हो जेंडर के लिए जो जो रिजर्वेशन है ये दोनों बहुत ही इंपॉर्टेंट है। और इसके साथ-साथ फीमेल के साथ-साथ और एक चीज बोलना बहुत जरूरी है। जो एलजीबीटी क्यू कम्युनिटी का जो लोग हैं उन लोगों को बहुत डिस्क्रिमिनेशन फेस करना पड़ता है। हम लोगों को यह देखना चाहिए कि पूरा देशमें पूरा राज्य में उन लोगों का रिप्रेजेंटेशन हो।
उन लोगों को जगह मिले। जो लोग उन्हें डिस्क्रिमिनेट करना चाहते हैं उन लोगों के खिलाफ स्टेप लिया जाए और उन उन लोगों को भी एक सच्चा एक साफ एनवायरमेंट मिले। जैसे कि कोई लड़का, कोई लड़की, कोई अपर कास्ट, कोई लोअर कास्ट जो भी हो एक ह्यूमन बीइंग को ह्यूमन बीइंग की तरह ट्रीट किया जाए। ये हम लोग को एनश्योर करना चाहिए। मैं आपसे पूछना चाहूंगी। अभी हम लोग रिजर्वेशन पे बात कर रहे थे औरकि आपने अपनी आइडेंटिटी को रिवील किया है इसलिए यह सवाल मेरा आपसे है कि आप ने बताया कि आपतथाकथित रूप से एक अपर कास्ट से आते हैं।
तो आपके क्या विचार हैं रिजर्वेशन पे? फर्स्ट ऑफ ऑल रिजर्वेशन होना चाहिए। मतलब हर स्टेट में है। हर स्टेट मींस हर कंट्री में है। स्टेट एक अपने वनरेबल ग्रुप के लिए एफमेटिव एकशंस लेती है। ये बहुत नॉर्मल है। सदियों से जो प्रथा चली आती है। इसमें कोई डाउट नहीं कि ब्राह्मणों ने दूसरे कास्ट के ऊपर लोअर कास्ट के लोअर स्ट्राटा के ऊपर ऑपरेशन किया है। यह मानने वाली चीज है। अगर यह नहीं मानते तो प्रॉब्लम है। और अगर मानते हैं तब उनको समान जगह देने के लिए हमको कोई एक्शन लेनापड़ता है।
मतलब हर एक व्यक्ति के वर्क के लिए मतलब मैं ब्राह्मण परिवार से हूं। मेरा यह फ़िफ्थ जनरेशन है जो पढ़ाई करके, नौकरी करके अच्छे से कमा के खा रहा है। पर मेरे बहुत दोस्त हैं जो फर्स्ट जनरेशन लर्नर है जो यूनिवर्सिटी के मुंह देखे हैं। तो ये मेरे लिए और उसके लिए तो लड़ाई सेम नहीं है ना। मेरे मां-बाप अच्छे से पढ़े हुए हैं। एमए किए हैं, नौकरी करते हैं। पर उसके मां-बाप खेतों में मजदूरी करते हैं। क्यों करते हैं? ये हमको समझना पड़ेगा।
कास्ट कैपिटल है। मेरे परदादा ने उसने उसके परदादा का ऑपरेशन किया था। इसीलिए वो खेत में ही है। औरमेरे परदादा उसके कास्ट कैपिटल को गेन करके आज जमींदार से नौकरी नौकरी से मेरे यहां पे बैठा। पर वो बंदा आ रहा है मतलब उसको सरकार ने अफरमेटिव एक्शन देके सेम प्लेग्राउंड में ले आया है। इसमें कोई भी बात मतलब रिजर्वेशन को लेके कोई डिबेट हो ही नहीं सकती। रिजर्वेशन इज़ नॉट ए पॉवर्टी एलिवेशन प्रोग्राम। ये हमको समझना पड़ेगा। ये सोशल स्टेटस को को मेंटेन करने के लिए नहीं है।
ये सोशल स्ट्रक्चर को समान करने के लिए इक्विलिब्रियम लाने के लिए है। और उसी तरह अगर हम देखेंगे तो इकोनॉमिक्स बेस पे रिजर्वेशन दी जाती है। ईडब्ल्यूएस आयाहै और मतलब मैं पहले भी बोल सकता हूं कि रिजर्वेशन सबके लिए होता है। क्योंकि रिजर्वेशन में आप इंटरसेक्शनलिटी की इंटरसेक्शनलिटी को भी आप देख सकते हैं क्योंकि ये रिजर्वेशन सिर्फ माइनॉरिटी के लोगों के नहीं है। माइनॉरिटी में भी मेल से ज्यादा वुमेन या फीमेल ज्यादा वनेरेबल होती है। उनसे भी ज्यादा जो एकदम क्या बोले बच्चे लोग 15 से 16 साल के बच्चे जो अभी-अभी लेबर फोर्स के अंडर मतलब नौकरी करने के लिए एलिजिबल भी नहीं है पर घर चलाने के लिए उसको काम करना पड़ता है। उन लोगों को भी सरकार को एक इंक्लूसिविटी लाना चाहिए।
क्योंकि इंडिया इज अ लैंड ऑफ़डायवर्सिटी। अगर इस डायवर्सिटी के लैंड में अगर तुम इंक्लूसिव नहीं बन सकते हो तो समाज का कुछ नहीं हो सकता। और ये मैं अपरकस्ट हो के मानता हूं। ये मानना चाहिए सबको। मैं आप लोगों से कट टू कट एक सवाल पूछना चाहती हूं क्योंकि इलेक्शन का टाइम चल रहा है वेस्ट बंगाल में। तो आप लोग के अनुसार आपका सीएम कैसा होना चाहिए? आप बताइए। देखिए हमारा एडुकेट बंगाल इंडिया का एजुकेशन हब था। ठीक है। वहां पर वीरानचंद राय से ज्योति बसु ऐसा बुद्धराय भट्टाचार्य ऐसा चीफ मिनिस्टर था। हमारा इस 15 इयर्स का जो टीएमसी गवर्नमेंट का जोरूलिंग है.
उसमें बंगाल का एजुकेशन एजुकेशन सिस्टम टोटली डिस्ट्रॉय हो गया। इतना खराब का बात है हमारा एजुकेशन मिनिस्टर जेल में चले गया है। जहां पर जिस बंगाल में राजा राममोहन राय स्वामी विवेकानंद ऐसा रामकृष्ण परमहंस देव ऐसा महापुरुष की जन्म हुआ है। उस जो भूमि आज करप्शन से डूब गया है और जस्ट ओनली एजुकेशन नहीं है। हेल्थ सेक्टर और हमारा जो रेशन का जो भात चावल मिलता है उसमें भी करप्शन हुआ है। ट्रांसपोर्ट सारे कुछ में करप्शन हो गया है। हम लोग अभी टीएमसी को ब्लेम कर रहा है। बट हम लोग देख रहे हैं सारा देश मेंबीजेपी से भी खतरनाक करप्शन कर रहा है।
और हमारा जो एजुकेशन सिस्टम बंगाल में भी तो खत्म हो गया है। देश में आरएसएस के जो एजेंडा है ऐसे एनईपी और एनसीआरटी के जो सिलेबस हम लोग जो हिस्ट्री पढ़ते थे टोटली हिस्ट्री चेंज हो गया है। जो एक एक स्पेशल एक रिलीजियन को बार-बार अटैक कर हो रहा है और जो मुगल का जो हम लोग जो पढ़ाया है मेरा पिताजी जो आया है जो नेहरू का हम लोग देश भाग का जो इतिहास देश का जो इतिहास जानते हैं नेहरू का फिर नेताजी सुभाष चंद्र बोस टोटली चेंज कर दिया गया है।
तो हमने बहुत सारे मुद्दों पर बात की और यहबंगाल के युवा हैं जो कि बंगाल के बहुत सारे डिस्ट्रिक्ट से आए हैं। तो जब भी हम कोलकाता की बात करते हैं और वेस्ट बंगाल की बात करते हैं तो हमारे ज़हन में सिर्फ उसका कैपिटल कोलकाता ही नहीं होना चाहिए। हमने साउथ परगना, नॉर्थ परगना, दिनाजपुर हर इलाकों के छात्रों से बात करने की कोशिश की है। इन्होंने अपनी स्थानीय समस्याएं बताई हैं।
