आशा जी के निधन पर पाकिस्तान में बबाल क्यों?

लेजेंड्री सिंगर आशा भोसले का पहला गाना 1943 में रिलीज हुआ था। यानी उस वक्त जब भारत और पाकिस्तान का बंटवारा नहीं हुआ था। अपने आठ दशक लंबे सिंगिंग करियर में उन्होंने बॉर्डर के दोनों तरफ के करोड़ों लोगों का दिल जीता। यही कारण है कि पिछले दिनों जब उनका निधन हुआ तो भारत के अलावा कई पाकिस्तानियों ने भी उन्हें ट्रिब्यूट दिया। उनमें से एक पाकिस्तानी ब्रॉडकास्टर Jio न्यूज़ भी है। मगर इस चैनल पर आशा भोसले को श्रद्धांजलि देना भारी पड़ गया।

मामला यह है कि Jio न्यूज़ ने आशा भोसले के निधन की खबर के साथ उनके गानों को भी टीवी पर चलाया था। उनसे जुड़े विजुअल्स भी इस्तेमाल किए। यह बात वहां के सरकार को नागवारा गुज़री। नतीजन पाकिस्तान इलेक्ट्रॉनिक मीडिया रेगुलेटरी अथॉरिटी पैमरा ने Jio न्यूज़ को कारण बताओ नोटिस चिपका दिया। कैमरा का आरोप है कि इस चैनल ने पाकिस्तानी सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन किया है। यह वही आदेश है जहां कोर्ट ने पाकिस्तान में भारतीय गानों समेत किसी भी तरह के कंटेंट की ब्रॉडकास्टिंग पर बैन लगा दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने यह बैन साल 2018 में लगाया था। इसलिए जब Jio न्यूज़ ने आशा भोसले के गानों को प्ले किया तो कैमरा सक्ते में आ गया। चैनल ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि उन्होंने यह गाने केवल ट्रिब्यूट देने के मकसद से चलाए थे।

इसका मकसद किसी का मनोरंजन करना नहीं था। मगर पैमरा ने उनकी एक ना सुनी और Jio न्यूज़ को लाइसेंस रद्द करने की धमकी देने लगे। सरकार का यह रवैया देखकर चैनल वाले काफी नाराज हो गए। Jio न्यूज़ के मैनेजिंग डायरेक्टर अजहर अब्बास ने एक्स पर इसके खिलाफ खुलकर गुस्सा जाहिर किया। उन्होंने लिखा तंद्रा ने Jio न्यूज़ को शो कॉज नोटिस भेजा क्योंकि हमने लेजेंड्री सिंगर आशा भोसले से जुड़ा कंटेंट दिखाया था। आमतौर पर जब किसी महान कलाकार पर खबर की जाती है तो उनके काम को याद और सेलिब्रेट करने की एक परंपरा रही है। इनफैक्ट आशा भोसले जैसी बड़ी कलाकार के लिए तो हमें उनके और भी ज्यादा टाइमलेस और यादगार गाने दिखाने चाहिए थे। लेकिन पाकिस्तान के इलेक्ट्रॉनिक मीडिया रेगुलेटर पमरा ने इस पर रोक लगाने का फैसला किया है। अजहर ने कहा कि ज्ञान की तरह कला को भी सीमाओं से परे रखना चाहिए। आशा भोसले खुद भी लेजेंड्री पाकिस्तानी सिंगर नूरजहां का बेहद सम्मान करती थी।

वह उन्हें अपनी बड़ी बहन कहती थी। अजहर ने तर्क दिया कि आशा भोसले ने नुसरत फतेह अली खान जैसे पाकिस्तानी आर्टिस्ट के साथ भी कोलैबोरेट किया था। इसलिए जैसे माहौल में लोगों को कला और कलाकारों को नुकसान पहुंचाने से बचना चाहिए। अजहर का मानना है कि म्यूजिशियन नफरत के खिलाफ आवाज उठाते हैं। वो लोगों को एक दूसरे के करीब लाते हैं। कैमरा के खिलाफ अजहर के इस स्टैंड को इंटरनेट पर भारतीयों का खूब साथ मिल रहा है। मगर पाकिस्तानी जनता उनके खिलाफ हो गई है।

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