क्या कोई इंसान बैंक से पैसे निकालने के लिए अपने कंधे पर किसी का कंकाल लेकर बैंक जा सकता है? सुनने में यह थोड़ा अजीब लगता है, लेकिन यह सच है। आगे बढ़ने से पहले एक जरूरी डिस्क्लेमर इस खबर से जुड़ा वीडियो आपको परेशान कर सकता है।
लेकिन घटना की गंभीरता को बताने के लिए इसे दिखाना भी जरूरी है। मामला उड़ीसा के केंदुधर जिले के पटना का है। यहां दियानाली गांव के रहने वाले जीतू मुंडा ने वह किया जिसकी कोई कल्पना भी नहीं कर सकता। 27 अप्रैल को वह अपनी बहन के को कंधे पर उठाकर बैंक पहुंच गए। आज तक से जुड़े अजय कुमार नाथ की रपट के मुताबिक जीतू मुंडा की बड़ी बहन कालरा मुंडा की करीब 2 महीने पहले बीमारी की वजह से हो गई थी। जीतू की उम्र 50 साल है।
से पहले उन्होंने अपने अकाउंट में लगभग ₹19,000 जमा किए थे। यह रकम उन्होंने अपने मवेशी को बेचकर जुटाई थी और उनका अकाउंट ओसा के ग्रामीण बैंक की एक लोकल ब्रांच में था। बहन की मौत के बाद जीतू मुंडा उस पैसे को निकालना चाहते थे। कोई और कानूनी वारिस ना होने की वजह से वह पैसा निकालने के लिए कुछ दिन पहले बैंक गए। लेकिन उसे जरूरी दस्तावेज लाने को कहा गया। यानी कि डेथ सर्टिफिकेट, नॉमिनी की जानकारी और बाकी कागज।
लेकिन वह कागज नहीं जुटा पाए। फिर वह अपनी बहन की कब्र पर गए। वहां से उनकी कंकाल निकाल ली और कंधे पर रखकर करीब 3 कि.मी. पैदल चलकर बैंक पहुंच गए ताकि साबित कर सके कि बहन अब जिंदा नहीं है। बैंक के बाहर उसने कंकाल रख दिया और धरने पर वहीं बैठ गए। डेकन हराल्ड की रिपोर्ट के मुताबिक जीतू मुंडा ने बताया कि मैं कई बार बैंक गया। वहां के लोग कहते थे कि जिस व्यक्ति के नाम पर पैसा है यानी कि अकाउंट है उसे साथ लेकर आओ। मैंने कहा कि वह मर चुकी हैं। लेकिन उन्होंने मेरी बात नहीं मानी इसलिए मजबूरी में मैंने कब्र खोदी और उसकी कंकाल लेकर बैंक पहुंचा ताकि साबित कर सकूं कि वह अब नहीं रहे। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची।
पटना थाना के प्रभारी किरण प्रसाद साहू ने बताया कि जीतू पढ़े लिखे नहीं है और आदिवासी व्यक्ति हैं। उन्हें यह नहीं पता कि नॉमिनी या कानूनी वायरस क्या होता है। बैंक अधिकारियों ने भी उन्हें सही तरीके से प्रक्रिया समझाने की कोशिश नहीं की जिसकी वजह से ऐसा हुआ। वहीं ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिसर यानी कि वीडियो मानस दंडपात ने कहा कि मुझे इस घटना की जानकारी मिली है। हम देखेंगे कि इस समस्या का समाधान कैसे किया जा सकता है। डेकन हरायण ने बैंक के सूत्रों के हवाले से अपनी रपट में कहा है कि जो असल नॉमिनी था वह भी पहले ही उसकी मौत हो चुकी थी।
ऐसे में जीतू मुंडा ही एकमात्र हकदार बचा था उस बैंक अकाउंट का। पुलिस और प्रशासन के इंटरफेरेंस के बाद बैंक अधिकारियों ने भरोसा दिलाया कि जीतू मुंडा को पैसा दिलाने का प्रयास और प्रोसेस किया जाएगा। इसके बाद पुलिस की मौजूदगी में कंकाल को दोबारा कब्र में दफनाया गया। लेकिन जीतू को अब आखिरकार राहत मिल गई है। उनका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद लोगों का ध्यान इस मामले पर गया था।
अब प्रशासन ने उनकी मदद की है। वीडियो मानस ने बताया कि जीतू मुंडा को तुरंत राहत के तौर पर रेड क्रॉस फंड से ₹00 दिए गए हैं। साथ ही बैंक ने भी उनके खाते में जमा ₹1,204 उन्हें दे दिए हैं। उन्होंने आगे कहा कि आगे की जरूरी प्रक्रिया भी पूरी की जा रही है ताकि उन्हें और मदद मिल सके।
