नेपाल में गिर गई बालेन सरकार?भारत से दुश्मनी महंगी पड़ी।

क्या नेपाल में गिर गई बालन सरकार? भारतनेपाल सीमा पर क्यों बढ़ा तनाव? नेपाल भारत के रिश्ते पर क्या पड़ेगा असर? नेपाल में बड़े बदलाव और सुधारों के वादों के साथ सत्ता में आई बालन शाह की सरकार शुरुआती दिनों में ही मुश्किलों में घिरती जा रही है। अभी नई सरकार के गठन के एक महीने भी नहीं हुए और दो मंत्रियों ने इस्तीफा दे दिया।

महज 26 दिन के भीतर भ्रष्टाचार और नैतिकता के आधार पर दो कैबिनेट मंत्रियों के इस्तीफे ने बालिन शाह की सरकार की स्थिरता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। दरअसल एक ओर जहां नेपाल की बालिन सरकार के भीतर राजनीतिक उथल-पुथल मची है तो दूसरी ओर भारतनेपाल सीमा पर नए सीमा शुल्क नियमों और आसमान छूती महंगाई ने आम जनता के गुस्से को और ज्यादा भड़का दिया है। ऐसे में अब इस बात पर संदेह उठने लगे हैं कि क्या नया नेतृत्व अपने वादे पूरे कर रहा है? रैपर से राजनेता बने 35 साल के बालिन शाह के प्रधानमंत्री बनने के बाद से उनकी सरकार अस्थिरता से जूझ रही है।

महज 26 दिनों के भीतर दो मंत्रियों के इस्तीफे ने बालिन शाह की सुधारवादी छवि और उनकी पार्टी राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी की ओर से किए गए वादों पर अब संदेह पैदा कर दिया है। जिसने भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने और पारदर्शी शासन लाने का वादा करते हुए भारी बहुमत से सत्ता हासिल की थी। अब बालशाह गिरते हुए दिख रहे हैं।

एक नए नियम के तहत भारत से 100 नेपाली रुपए से ज्यादा मूल्य का सामान लाने वाले किसी भी व्यक्ति को सीमाशुल्क देना जरूरी है। सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले कई लोग जो कि अपनी दैनिक जरूरतों के लिए भारत से आने वाले सस्ते सामान पर निर्भर हैं। इस कदम से बुरी तरह प्रभावित हुए। इस नीति ने लोगों में स्पष्ट आक्रोशपैदा कर दिया और प्रवर्तन कारवाइयों के वीडियो सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से प्रसारित हो रहे हैं। अब इस पूरे मामले का भारत नेपाल के संबंधों पर क्या असर देखने को मिल सकता है? इस पर एक्सपर्ट निपुण आलम बयान ने क्या कहा? आइए आपको सुनाते हैं।

देखिए नेपाल सरकार के बारे में यह कहा जा रहा है कि नेपाल सरकार में काफी ज्यादा एक महीना भी नहीं हुआ है कि अस्थिरता के दौर से गुजर रही है। लेकिन जो हम दो बातों की बात करें एक तो उनका जो यह फैसला कि जो भारत से आने वाली वस्तुएं हैं ₹100 से ऊपर की उन पर हम टेलीफ वसूलेंगे। उन पर हम ड्यूटी लगाएंगे। तो मुझे लगता है कि हां इस फैसले से निश्चित रूप से नेपाल की जनता को काफी परेशानी हो रही होगी क्योंकि काफी ऐसी चीजें हैं जिन डेली यूज की भी चीजें हैं जिसमें नेपाल के लोग भारत पर क्या है निर्भर है और इसका कहीं ना कहीं इंपैक्ट हमको भारत और नेपाल के संबंधों पर भी देखने को मिल सकता है तो ये मुद्दा ऐसा है कि जहां पर नेपाल की जनता में रोष हो सकता है नई सरकार के प्रति। यह थोड़ा वाजिब लगता है क्योंकि जनता जब परेशान होती है तो वह कहीं ना कहीं सरकार के ऊपर एक क्वेश्चन मार्क उठाती है कि आप आखिर डिसीजन ले कैसे रहे हैं।

दूसरा बड़ा बात यहां पर क्या है कि जो अभी दो मंत्रियों के इस्तीफे इससे पहले एक मंत्री का इस्तीफा स्वास्थ्य मंत्री जी का हुआ था कि आरोप लगा था कि एक पद उन्होंने अपनी पत्नी के लिए सुरक्षित किया था। दूसरा अब हाल में गृह मंत्री जी का इस्तीफा और दोनों पर आरोप भ्रष्टाचार के नैतिकता के उल्लंघन के आरोप थे। लेकिन बड़ी बात मुझे जो लग रही है कि रिजाइन करना नैतिकता के आधार पर यह जो चुनावों में उन्होंने वादा किया था कि हम भ्रष्टाचार को सपोर्ट नहीं करेंगे। भ्रष्टाचार को समाप्त करेंगे।

तो मुझे लगता है कि कहीं ना कहीं बाल सरकार अपनी पार्टी के अंदर भी अपनी सरकार के अंदर भी किसी भी तरीके से भ्रष्टाचार को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है और नैतिकता के आधार पर अगर इस्तीफा ले रही है तो मैं कहूंगा कि एक लोकतंत्र के लिए एक बेहतर सिचुएशन है। हां इसको लेकर एक अस्थिरता की बात जरूर कही जाती है कि सरकार गिर सकती है, अस्थिर हो सकती है।

लेकिन फिलहाल तो इतनी संभावना नहीं है और इसका एक बल्कि अच्छा मैसेज जाता है कि सरकार में बने रहने के लिए बाल सरकार जो है वो भ्रष्टाचार को स्वीकार कर लेगी ऐसा नहीं है। यह जो एक उन्होंने भ्रम तोड़ने का प्रयास किया है। मुझे लगता है इससे दीर्घमी या दूरगामी भी लाभ हो सकते हैं।

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