अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष के बीच एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। जिसने पूरे पर सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिकी नौसेना ने एक ईरानी झंडे वाले कारगो जहाज टॉस को निशाना बनाते हुए उस पर कारवाई की और बाद में उसे अपने कब्जे में ले लिया।
बताया जा रहा है कि यह जहाज अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी को तोड़ने की कोशिश कर रहा था। जिसके बाद अमेरिकी युद्धपोत ने उसे रोकने के लिए पहले चेतावनी दी और फिर उसके इंजन रूम पर कर उसे निष्क्रिय कर दिया। इसके बाद अमेरिकी मरीन ने जहाज पर चढ़कर उसे अपने नियंत्रण में ले लिया।
इस कार्यवाही के बाद ईरान ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है और इसे सीधे तौर पर का उल्लंघन बताया है। तेहरान ने आरोप लगाया है कि अमेरिका एक तरफ बातचीत की बात करता है और दूसरी तरफ सैन्य कार्यवाई कर रहा है जो भरोसे को पूरी तरह खत्म कर देता है। ईरान ने साफ कहा है कि वह इस कार्य्रवाही का जवाब देगा और इसी के साथ उसने शांति वार्ता से दूरी बना ली है और उन्होंने कसम खाई है कि ईरान जवाबी कार्रवाई करेगा।
इसके साथ ही इस हमले को ईरान ने समुद्री डकैती बताया है। खबर है कि ईरान ने भी अमेरिकी युद्ध पोतों की ओर ड्रोन लॉन्च कर दिए हैं। ईरान की सरकारी मीडिया ने खतम अल अंबिया के प्रवक्ता के हवाले से सोमवार तड़के कहा कि जहाज चीन से ईरान जा रहा था। उसने कहा हम चेतावनी देते हैं कि इस्लामी गणतंत्र ईरान के सशस्त्र बल जल्द ही अमेरिकी सेना की इस सशस्त्र डकैती के खिलाफ जवाब देंगे और जवाबी कार्रवाई करेंगे।
इस पूरे घटनाक्रम का असर सिर्फ दोनों देशों तक सीमित नहीं है बल्कि इसका सीधा असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और तेल बाजार पर भी पड़ सकता है। स्ट्रेट ऑफ हॉर्मोज से दुनिया का करीब 20% तेल गुजरता है और वहां किसी भी तरह का टकराव वैश्विक सप्लाई को प्रभावित कर सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इसी तरह सैन्य कार्यवाही जारी रही तो पूरी तरह टूट सकता है और हालात एक बड़े युद्ध की ओर बढ़ सकते हैं।
फिलहाल स्थिति बेहद नाजुक बनी हुई है। जहां एक तरफ बातचीत की कोशिशें हैं, वहीं दूसरी तरफ जमीन और समंदर में टकराव लगातार बढ़ रहा है।
