गोविंदा की भांजी क्यों नही बन सकती मां?

टीवी इंडस्ट्री की चमकती मुस्कान के पीछे कई बार ऐसे दर्द छिपे होते हैंजिन्हें कैमरे की रोशनी भी नहीं देख पाती। एक ऐसी ही कहानी जुड़ी है कृष्णा अभिषेक की प्यारी बहन और गोविंदा की भांजी आरती सिंह से जिनकी शादी की खुशियां अभी फीकीभी नहीं पड़ी थी कि उनकी जिंदगी को लेकर एक ऐसा सवाल खड़ा हो गया जिसने हर किसी को सोचने पर मजबूर कर दिया।

क्या बढ़ती उम्र सच में एक औरत के सबसे बड़े सपने के बीच दीवार बन जाती है? क्या शादीके बाद मां बनने का दबाव किसी महिला की मुस्कान छीन सकता है? और आखिर क्यों आरती सिंह ने अपनी जिंदगी का सबसे निजी डरदुनिया के सामने रखने का फैसला किया। आज की इस कहानी में सिर्फ एक सेलिब्रिटी की निजी जिंदगी नहीं बल्कि उन लाखों महिलाओं का दर्द छिपा है जो समाज के सवालों और उम्र के तानों के बीच हर दिन टूटती और फिर खुद को संभालती हैं।

तो इस भावुक और प्रेरणादायक सफर को आखिर तक जरूर देखिए क्योंकि इस कहानी का हर मोड़ आपको अंदर तक महसूस होगा। गोविंदा की भांजी पर टूटा दुखों का पहाड़। अब नहीं बन पाएंगी कभी भी मां। दोस्तों, [संगीत] हम बात कर रहे हैं कृष्णा अभिषेक की लाडली बहन आरती सिंह की। जिनकी शादी अभी कुछ ही महीने पहले बड़े धूमधाम से हुई थी। लेकिन शादी के कुछ ही वक्त बाद एक ऐसी खबर सामने आई जिसने उनके चाहने वालों को झकझोर कर रख दिया है। क्या वाकई आरती सिंह कभी मां नहीं बन पाएंगी? क्या 41 साल की उम्र उनके लिए एक अभिशाप बन गई है? और आखिर उनके पति दीपक चौहान ने इस मुश्किल घड़ी में आरती को ऐसा क्या कह दिया जिसे सुनकर हर कोई दंग रह गया है।

कहानी की शुरुआत होती है उस दिन से जब आरती सिंह ने अपने बिजनेसमैन बॉयफ्रेंड दीपक चौहान के साथ इस मंदिर में सात फेरे लिए थे। उस वक्त उनकीहंसी और चेहरे की चमक देखकर किसी ने सोचा भी नहीं था कि इस मुस्कुराहट के पीछे एक गहरा डर और एक बड़ी चिंता छिपीहुई है। आरती आज 41 साल की हो चुकी है और मेडिकल साइंस की नजर में इस उम्र पहली बार मां बनना किसी चुनौती से कम नहीं होता। आरती ने हाल ही में एक इंटरव्यू में अपनी इस परेशानी को दुनिया के सामने रखा हुआ है।

उन्होंने बताया कि कैसे समाज और उनके आसपास के लोग उन्हेंबार-बार उनकी बायोलॉजिकल क्लॉक की याद दिलाते रहते हैं। लोग उनसे पूछते हैं कि अब तो शादी गई है तो खुशखबरी कब मिलेगी। लेकिन यह खुशखबरी आरती के लिए इतनी आसान नहीं है जितनी लोग समझ रहे हैं। आरती कहती है कि जब आप 40 की उम्र पार कर लेते हैं तो शरीर में कई तरह के बदलावआते हैं और प्रेगनेंसी को लेकर रिस्क बढ़ जाता है। लेकिन क्या आरती ने हार मान ली है? बिल्कुल नहीं। आरती का कहना है कि वह इस बात का दबाव तो महसूस करती हैं, लेकिन उन्होंनेअपनी जिंदगी को किसी के डर के साए में जीने से इंकार कर दिया है। उनके लिए सबसेबड़ी मजबूती बनकर उभरे हैं उनके पति दीपक चौहान।

आरती और दीपक की शादी कोई आम लव मैरिज नहीं थी बल्कि यह एक अरेंजमैरिज थी जो बाद में प्यार में तब्दील हुई। लेकिन इस रिश्ते की सबसे खूबसूरत बात यह रही कि इसमें दिखावा कम और सच्चाई ज्यादा थी। आरती ने खुलासा किया कि शादी से पहलेही उन्होंने दीपक के सामने अपनी सारी सच्चाई रख दी थी। उन्होंने दीपक को साफ लफ्जों में बता दिया था कि मेरी उम्र 41 साल है और हो सकता है कि मैं कभी मां ना बन पाऊं या मुझे कंसीव करने में बहुत दिक्कत आए। एक पुरुष के लिए यह बात स्वीकार करना आसान नहीं होता। खासकर तब जब वो शादी करने जा रहा हो। लेकिन दीपक चौहान ने जो जवाब दिया उसने आरती का दिल जीत लिया और शायद यही वो पल था जब आरती को लगा कि उन्हें दुनिया का सबसे बेहतरीन जीवन साथी मिल गया है। दीपक ने आरतीका हाथ थाम कर कहा कि अगर हम मां-बाप नहीं बन सकते तो क्या हुआ?

दुनिया में ऐसे बहुत सारे बच्चे हैं जिनके पास अपना कोई घर नहीं है। हम एक बच्चा गोद ले सकते हैं। दीपक की यह सोच बताती है कि वह आरती से कितना गहरा प्यार करते हैं। उन्होंने आरती से वादा किया कि चाहेहालात जो भी हो वो उनके साथ हमेशा खड़े रहेंगे।

दीपक ने यह भी कहा कि अगर हमारा खुद का बच्चा हो भी जाता है तब भी हम एक बच्चे को जरूर गोद [संगीत] लेंगे ताकि किसी मासूम की जिंदगी सवर सके। और आरती के इस फैसले में उनके भाई कृष्णा उनके साथ खड़े हैं। लेकिन जब बात उनके मामा और मशहूर सुपरस्टार गोविंदा की आती है तो वह सिर्फ आरती को उसकी शादी में आशीर्वाद देने आए थे। उसके बाद कभी भी उन्होंने आरती के बारे में कोई बात नहीं की और उनका आरती से बहुत कम लगाव रहा है।

ऐसे में दोस्तों आरती सिंह की यह चिंता जायज भी है क्योंकि उनका बचपन खुद बहुत उतार-चढ़ाव भरा रहा है। आरती ने बताया कि उनके जन्म के सिर्फ [संगीत] एक महीने बाद ही उनकी सगी मां इस दुनिया को छोड़कर चली गई थी। एक नवजात बच्ची के लिए इससे बड़ा सदमा और क्या हो सकता [संगीत] है कि उसने अपनी मां का चेहरा तक ठीक से नहीं देखा था। इसके बाद आरती का पालन पोषण उनकी मां की एक बहुत करीबी सहेलीlने किया जिन्हें आरती आज भी अपनी असली मां से बढ़कर मानती है। आरती ने बताया कि बचपन में वह अपने भाई कृष्णा अभिषेक और कजिन भाई बहनों से भी दूर रही थी क्योंकि वह एक अलग परिवार में पली पड़ी।

हालांकि उन्हें वहां बहुत प्यार मिला लेकिन कहीं ना कहीं अपने [संगीत] सगे भाई से दूर रहने की एक टीस हमेशा उनके मन में रही। शायद यही वजह है कि आज आरती परिवार की अहमियत को सबसे ज्यादा समझती हैं। वो नहीं चाहती कि कोई भी बच्चा उस अकेलेपन से गुजरे जो उन्होंने अपनी मां के जाने के बाद महसूस किया था।

आरती की आंखों में आज भी वो दर्द दिखता है जब वो अपने बचपन की बातें करती हैं। वो कहती कि पीछे मुड़कर देखने पर उन्हें लगता है कि जो हुआ वो अच्छे के लिए हुआ क्योंकि उन्हें दो माताओं का प्यार मिला। लेकिन अपनी कोख से एक बच्चे को जन्म देने का सपना हर औरत की तरह उनका भी था जो अब उम्र के तकाजे की वजह से मुश्किलों में घिरा नजर आ रहा है। आरती और दीपक की मुलाकात एक मैच मेकर यानी बिचोलिए के जरिए हुई थी। शुरू में दोनों के बीच सिर्फ औपचारिक बातें होती थी, लेकिन जैसे-जैसे वक्त बीता, दोनों एक दूसरे की सादगी के कायल हो गए।

आरती ने बताया कि दीपक बहुत जमीन से जुड़े हुए इंसानहैं और उन्हें चकाचौंध वाली दुनिया से ज्यादा लगाव नहीं है। यही बात आरती को सबसे अच्छी लगी क्योंकि आरती खुद भी एक बहुत ही सरल स्वभाव की महिला है। शादी का फैसला लेने से पहले दोनों ने एक दूसरे को काफी वक्त दिया और अपनी हर कमी और खूबी को सांझा किया।

आरती ने बताया कि दीपक के साथ उनकीबॉन्डिंग इतनी गहरी हो गई है कि अब उन्हें इस बात का मलाल नहीं है कि अगर वह मां नहीं बन पाई तो क्या होगा। आरती ने समाज को एक बहुत बड़ा मैसेज दिया हैकि औरत की पहचान सिर्फ मां बनने से नहीं होती और अगर कुदरत ने आपको यह सुख नहीं दिया है तो इसका मतलब यह नहीं कि आपकी जिंदगी खत्म हो गई है। आप किसी दूसरे बच्चे की मां बनकर भी वही सुख पा सकती हैं। आरती का यह इंटरव्यू उन तमाम महिलाओं के लिए एक प्रेरणा है जो प्रेगनेंसीना होने की वजह से में चली जाती हैं या खुद को कमतर समझने लगती हैं। टीवी इंडस्ट्री में आरती सिंह ने अपनी एक अलगपहचान बनाई है।

बिग बॉस जैसे बड़े रियालिटी शो में भी हमने देखा कि आरती कितनी मजबूतlइरादों वाली लड़की है। वहां भी उन्होंने अपनी निजी जिंदगी के कई राज खोले थे और बताया था कि कैसे वह और सेजूझ चुकी है। आरती ने अपनी जिंदगी में हार मानना कभी नहीं सीखा और यही जज़बा उनकी आज की मुश्किल घड़ी में भी दिखाई दे रहा है। जब लोग उन्हें 41 की उम्र का ताना देते हैं तो वह मुस्कुराहट के साथ कहती हैं कि भगवान के पास हर किसी के लिए एक प्लान होता है। अगर उन्होंने मेरे लिए मां बनना नहीं लिखा होगा, तो उन्होंने मुझे दीपक जैसा पति भी तो दिया है जो मुझे बिना किसी शर्त के प्यार करता है। आरती और दीपक की लव स्टोरी आज की युवाओं के लिए एक मिसाल है जो छोटी-छोटी बातों पर रिश्ते तोड़ देते हैं। यहां आरती ने अपनी शारीरिक कमी या उम्र की बाधा को पहले ही साफ कर दिया और दीपक ने उसे पूरे सम्मान के साथ स्वीकार किया। यही सच्चा प्यार है जहां आप दूसरे की मजबूरियों को अपनी ताकत बना लेते हैं।

आजसोशल मीडिया पर आरती सिंह को लेकर तरह-तरह की बातें हो रही हैं। कुछ लोग उन्हें सहानुभूति दे रहे हैं तो कुछ लोग उनके फैसले की तारीफ कर रहे हैं। लेकिन हकीकत तो यह है कि आरतीसिंह इस वक्त अपनी जिंदगी के सबसे सुकून भरे दौर में है। भले ही मां बनने का सपना थोड़ा धुंधला नजर आ रहा हो लेकिन उनके पास एक ऐसा इंसान है जो उस सपने को पूरा करने के लिए हर मुमकिन रास्ता तलाशने को तैयार है।

आरती ने बताया कि वो अपनी [संगीत] सेहत का पूरा ख्याल रख रही हैं और अगर भगवान ने चाहा तो वह जरूर मां बनेंगी लेकिन उन्होंने इसके लिए खुद पर कोई मेंटल प्रेशर नहीं डाला है। वो कहती हैं कि किसी बच्चे को घर देना और उसे अपना नाम देना दुनिया का सबसे नेक काम है और वह इसके लिए पूरी तरह तैयार हैं। आरती के इस खुलासे के बाद उनके भाई कृष्णा अभिषेक और भाभी कश्मीरा शाह ने भी उनका पूरा सपोर्ट किया है। कृष्णा हमेशा से अपनी बहन के रक्षक रहे हैं और इस मुश्किल lवक्त में भी पूरा परिवार आरती के साथ मजबूती से खड़ा है। आरती सिंह की यह कहानी हमें सिखाती है कि जिंदगी हमेशा हमारी प्लानिंग के हिसाब से नहीं चलती।

कभी-कभी हम जो चाहते हैं वो हमें नहीं मिलता। लेकिन जो हमें मिलता है वोशायद हमारी सोच से कहीं ज्यादा बेहतर होता है। आरती का सपना भले ही आज मुश्किल लग रहा हो लेकिन उनका हौसला और उनके पति का साथ यह साबित करता है कि वह एक बहुत बहादुर महिला हैं। उन्होंने अपनी जिंदगी [संगीत] की सबसे बड़ी कमजोरी को सबके सामने रखा ताकि दूसरी औरतें भी खुलकर lइस मुद्दे पर बात कर सकें। अक्सर हमारे समाज में बढ़ती उम्र और प्रेगनेंसी को लेकर महिलाओं को बहुत ज्यादा मानसिक प्रताड़ना दी जाती है। लेकिन आरती ने दिखा दिया है कि अगर आपके पास एक समझने वाला जीवन साथी हो तो आप हर मुश्किल का सामना कर सकते हैंदीपक चौहान ने जिस तरह से गोद लेने की बात कही है उससे समाज की उस पुरानी सोचपर चोट लगती है जो सिर्फ खून के रिश्ते को ही सब कुछ मानती है।

आरती और दीपक की शादी की तस्वीरेंlआज भी इंटरनेट पर छाई रहती हैं। उनकी शादी में बॉलीवुड और टीवी के तमाम दिग्गज शामिल हुए थे। लेकिन इन चमक-धमक वाली लाइटों के पीछेएक शांत और समझदार कपल अपनी भविष्य की चुनौतियों पर चर्चा कर रहा था। आरती ने यहभी साझा किया कि शादी के बाद दीपक ने उन्हें कभी महसूस नहीं होने दिया कि उनमें कोई कमी है।

वो अक्सर आरती कोघुमाने ले जाते हैं और उनके साथ क्वालिटी टाइम स्पेंड करते हैं। आरती कहती हैं कि शायद यही वो प्यार है जिसकी उन्हें ताऊ उम्र [संगीत] तलाश थी। उनके करियर की बात करें तो आरती ने कई सुपरहिट शोज़ दिए हैं। लेकिन जो शोहरत और प्यार उन्हें उनकी सच्चाई की वजह से मिला है वो किसी अवार्ड से कम नहीं है। उनके फैंस लगातार उनके लिए दुआएं कर रहे हैं कि आरती कीझोली खुशियों से भर जाए और उन्हें जल्द ही वह सुख मिले जिसकी वह हकदार हैं।

इस पूरी दास्तान का सबसे अहम हिस्सा यह है कि आरती सिंह ने अपनी निजी पीड़ा को समाज के सामने एक सकारात्मक तरीके से पेश किया है। उन्होंने यह नहीं कहा कि मैं अभागीlहूं बल्कि उन्होंने यह कहा कि मैं भाग्यशाली हूं कि मेरे पास दीपक जैसा पति है जो बच्चे के लिए मुझ पर दबाव नहीं डालता बल्कि मुझे विकल्प देता है। यह सोच आरती को एक सफल और वायरल सेलिब्रिटी बनाती है। आज के इस दौर में जहां लोग सिर्फ अपनी अच्छी चीजें दिखाते हैं, आरती ने अपनी कमजोरी और अपने डर को सांझा करके एक नईबहस छेड़ दी है। उनका यह सफर अभी जारी है और हमें यकीन है कि आने वाले समय में आरती सिंह की जिंदगी से जुड़ी कोई ना बहुत अच्छी खबर जरूर सुनने को मिलेगी।

चाहे वो ऊ उनके अपने बच्चे की हो या फिर उनके द्वारा गोद लिए गए किसी नन्हे मेहमान की जो उनकी दुनिया को पूरा कर देगा। अब बस यही कहा जा सकता है कि सपने कभी नहीं टूटते। बस उनकेपूरे होने का तरीका बदल जाता है। आरती का सपना मां बनने का था और वह इसे पूरा जरूर करेंगी। चाहे रास्ता कुदरत का हो या गोद लेने का। इंसान की नियतसाफ हो तो रास्ते खुद ब खुद बन जाते हैं। आरती सिंह और दीपक चौहान की यह जोड़ी सलामत रहे और उन्हें वो हर खुशी मिले जिसकी वो तलाश कर रहे हैं। उनकी इस हिम्मत को हमारा सलाम हैऔर हम उम्मीद करते हैं कि आरती की यह कहानी उन लाखों करोड़ों महिलाओं तक पहुंचेगी जो आज अपनी उम्र या अपनी शारीरिक दिक्कतों की वजह से खुद को हारा हुआ महसूस कर रही हैं।

आरती सिंह की मुस्कान हमें यह बताती है कि हर अंधेरी रात के बाद एक सवेरा जरूर होता है और वह सवेरा आरती की जिंदगी में दीपक के रूप में आ चुका है। अब बस इंतजार है उस नन्ही किलकारी का जो आरती के घर को खुशियों से महका देगी। चाहे वह किसी भी रूप में आए। वो बात अलग है कि इस मुश्किल सफर में गोविंदा का परिवार आरती के साथ नहीं खड़ा है। लेकिन आरती का भाई कृष्णा हमेशा उनके लिए खड़े हैं।

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