भारत के लिए होर्मुज खुला रहेगा ईरान ने बनाया ट्रंप की ध!मकी का मज़ाक

ट्रंप का ब्लॉकेट प्लान बना मजाक। ईरान ने उड़ाया अमेरिकी का मजाक। भारत के जहाजों को हॉर्मोस से टोल फ्री रास्ता। दोस्ती के रिश्तों पर तेहरान की मोहर।अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आदेश के बाद यूएस नेवी द्वारा हॉर्मोन ट्रेड की नाकेबंदी की खबरों ने पूरी दुनिया में चिंता बढ़ा दी है। इस बीच यह सवाल भी उठने लगा कि क्या भारत अपने जहाजों को सुरक्षित निकालने के लिए ईरान को टोल दे रहा है?

इस मुद्दे पर भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फतह अली ने स्थिति साफ कर दी है। सोमवार 13 अप्रैल को नई दिल्ली स्थित ईरानियन एंबेसी में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पत्रकारों ने उनसे कई सवाल पूछे। जब भारत द्वारा टोल देने की बात पूछी गई तो उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा आप भारत सरकार से पूछ सकते हैं कि क्या हमने अब तक कोई चार्ज लिया है? उनके इस बयान से साफ हो गया कि भारतीय जहाजों से कोई टोल नहीं लिया गया है। फतह अली ने यह भी कहा कि भारत और ईरान के बीच मजबूत और दोस्ताना रिश्ते हैं।

ईरान भारत को उन पांच देशों में गिनता है जिन्हें वह अपना करीबी दोस्त मानता है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि अमेरिकी ब्लॉकेड के बावजूद ईरान भारतीय जहाजों को हॉर्मोन स्ट्रेट से सुरक्षित गुजरने की अनुमति देता रहेगा। राजदूत के अनुसार इस पूरे घटनाक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजिशकियान के बीच दो बार टेलीफोन पर बातचीत हुई। इसके अलावा दोनों देशों के फॉरेन मिनिस्टर्स के बीच भी चार से पांच बार चर्चा हो चुकी है। जिससे यह स्पष्ट होता है कि दोनों देश लगातार संपर्क में हैं। भारत सरकार ने भी उन खबरों को गलत बताया है जिनमें दावा किया गया था कि के बाद भारत ने अपने एलपीजी टैंकर्स को निकालने के लिए ईरान को टोल दिया। भारतीय अधिकारियों के अनुसार भारत के झंडे वाले लगभग 15 जहाज अभी भी परर्शियन गल्फ क्षेत्र में मौजूद है। अमेरिका की नाकेबंदी पर प्रतिक्रिया देते हुए फता अली ने कहा कि यूएसए भरोसे के लायक नहीं है और उसने पहले भी बातचीत के दौरान ईरान पर हमले किए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यदि आवश्यकता पड़ी तो ईरान किसी भी स्थिति का सामना करने के लिए तैयार है।

साथ ही उन्होंने जोर देकर कहा कि हॉर्मोन स्टेट पर ईरान का प्रभाव और नियंत्रण बना रहेगा। अंत में ईरानी राजदूत ने भारत सरकार और भारतीय जनता का धन्यवाद करते हुए कहा कि भारत ने मुश्किल समय में एक भरोसेमंद और दयालु साथी होने का परिचय दिया है। वहीं बीबीसी के मुताबिक ईरानी अखबारों और सोशल मीडिया के जानकारों ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हॉर्मोस जलमार्ग को बंद करने की धमकी का मजाक उड़ाया है। उ

नका कहना है कि अमेरिका एक बार फिर वही कोशिश कर रहा है जिसमें उसे पहले भी नाकामी मिली थी। 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर हमले शुरू किए थे। लेकिन ईरान ने भी इसका जोरदार जवाब दिया। इसके बाद 8 अप्रैल को दोनों पक्षों के बीच अस्थाई युद्ध विराम हुआ। हालात को बेहतर बनाने के लिए अमेरिका और ईरान ने पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में बातचीत करने पर सहमति जताई। लेकिन यह बातचीत किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी। ईरान ने इस पूरे संघर्ष में खुद को विजेता बताया है। ईरानी नेताओं और मीडिया का कहना है कि देश ने अपनी ताकत और संप्रभुता को सफलतापूर्वक बचाया है। 12 अप्रैल को ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफार्म ट्रुथ सोशल पर ऐलान किया कि अमेरिकी नौसेना हॉर्मोन जलडमरू मध्य से गुजरने वाले जहाजों की नाकाबंदी शुरू करेगी। उन्होंने यह भी कहा कि इस कदम में कुछ अन्य देश भी अमेरिका का साथ दे सकते हैं। बाद में अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने जानकारी दी है कि 13 अप्रैल को ईस्टर्न टाइम के मुताबिक सुबह 10:00 बजे से यह नाकाबंदी लागू की जाएगी। हालांकि यह कार्यवाही सिर्फ ईरानी बंदरगाहों में आने जाने वाले जहाजों पर केंद्रित होगी। जबकि अन्य देशों के जहाजों की आवाजाही जारी रहेगी।

13 अप्रैल को कई ईरानी अखबारों ने ट्रंप की इस चेतावनी को खारिज करते हुए तंज कसा कि अमेरिका सिर्फ उसी जलमार्ग को और ज्यादा बंद करने की बात कर रहा है जिसे ईरान युद्ध के बाद पहले ही काफी हद तक नियंत्रित कर चुका है।

ईरानी विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम अमेरिका की राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है और इसका जमीनी हकीकत पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा। उनके अनुसार इस संघर्ष ने एक बार फिर दिखा दिया कि ईरान क्षेत्र में एक मजबूत और प्रभावशाली देश है। अमेरिका हॉर्मोन स्टेट की नाकाबंदी के लिए तैयार ट्रंप ने कहा, ईरानी हमलावर जहाजों को खत्म कर देंगे।

Leave a Comment