मजहबी क!ट्टर-पंथी’ सलीम वास्तिक पर बड़ा खुलासा!

क्या कोई अपराधी तीन दशक तक अपनी का नाटक कर कानून को चकमा दे सकता है? क्या कोई कातिल अपनी पहचान बदलकर सोशल मीडिया पर लाखों लोगों का हीरो बन सकता है? दिल्ली पुलिस ने हाल ही में एक ऐसे राज का पर्दा उठाया है जिसने सबको सन कर दिया है। यह कहानी है सलीम अहमद उर्फ़ सलीम वास्तिक की।

एक ऐसा नाम जो 2026 में कट्टरपंथियों के हमले के बाद सुर्खियों में आया। लेकिन जिसके पीछे 31 साल पुराना एक खौफनाक खून और का राज छिपा था। आइए जानते हैं क्या है अपराधों की दुनिया का मास्टरमाइंड सलीम वास्तिक की सनसनीखेज कहानी। बात शुरू होती है 20 जनवरी 1995 से। उत्तरपूर्वी दिल्ली में एक संपन्न कारोबारी का 13 साल का बेटा संदीप बंसल अचानक लापता हो जाता है। पूरे घर में कोहराम मच जाता है।

तभी फोन की घंटी बजती है। दूसरी तरफ से एक भारी आवाज आती है। ₹00 का इंतजाम करो वरना बेटा नहीं बचेगा। ने फिरौती का तरीका भी किसी फिल्म जैसा चुना। उन्होंने निर्देश दिया कि लोनी फ्लाईओवर के पास ₹00 बागपत जाने वाली एक बस के सामान रखने वाले रैक में छोड़ दिए जाए। परिवार ने पुलिस को सूचना दी लेकिन होनी को कुछ और ही मंजूर था। पुलिस की तफ्तीश जब शुरू हुई तो शक की सुई दरियागंज के रामजस स्कूल में एक मार्शल आर्ट्स इंस्ट्रक्टर पर जाकर रुकी। नाम था सलीम खान। शामली के नानूपुरा का रहने वाला सलीम कुंगफू का माहिर था।

एक पड़ोसी ने गवाही दी कि उसने संदीप को आखिरी बार सलीम के साथ देखा था। पुलिस जब सलीम के घर पहुंची तो उसने जो सच उगला उसने पत्थर दिल इंसान को भी दहला दिया। सलीम पुलिस को मुस्तफाबाद के गंदे नाले के पास ले गया जहां से मासूम संदीप का बेजान शव बरामद हुआ। सलीम ने अपने साथी अनिल के साथ मिलकर महज ₹00 के लिए उस बच्चे का कत्ल कर दिया था। 5 अगस्त 1997 को कोर्ट ने सलीम और अनिल को उम्र कैद की सजा सुनाई। दोनों ने हाईकोर्ट में अपील की। साल 2000 में सलीम को अंतरिम जमानत मिली और यहीं से शुरू हुआ इस अपराधी का सबसे बड़ा मास्टरमाइंड खेल।

बाहर आते ही सलीम गायब हो गया। उसने पुलिस और अदालती रिकॉर्ड में खुद को मृत घोषित करवा दिया। पुलिस की फाइलों में सलीम खान का चैप्टर बंद हो चुका था। फरार होने के बाद सलीम देश के अलग-अलग कोनों में छिपा रहा। कभी हरियाणा के करनाल में अलमारी बनाने वाला बना तो कभी अंबाला में मजदूरी की।

लेकिन 2010 में वह वापस गाजियाबाद के लोनी में आकर बस गया। अब वो सलीम खान नहीं बल्कि सलीम अहमद उर्फ़ सलीम वास्तिक था। साथियों हैरानी की बात तो यह है कि जिस शख्स ने खुद कट्टरपंथ और मौलाना के रूप में वक्त बिताया था, उसने अब अपनी छवि एक्स मुस्लिम के तौर पर पेश करनी शुरू कर दी। वो इस्लाम के खिलाफ और समाज सुधार की बातें करने वाला एक मशहूर यूबर बन गया। सोशल मीडिया पर उसे सुनने वाले लाखों थे और उसके लिए वह एक साहसी आवाज बन चुका था। साल 2026 में किस्मत ने फिर बाजी पलट दी। ने सलीम वास्तिक पर हमला किया। जीशान औ गुलफाम नाम के दो हमलावरों को यूपी पुलिस ने एनकाउंटर में ढेर कर दिया। इस घटना के बाद सलीम वास्तिक नेशनल हीरो की तरह उभरा।

हर तरफ उसके नाम की चर्चा थी, लेकिन यही शहरत उसकी बर्बादी का कारण बनी। संदीप बंसल के परिवार और दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच की नजर जब इस मशहूर चेहरे पर पड़ी, तो उन्हें कुछ खटका। फिंगरप्रिंट्स का मिलान किया गया। पुरानी तस्वीरों को खंगाला गया और आखिरकार 31 साल पुराना सच सबके सामने आ गया। एक्स मुस्लिम स्टार सलीम वास्तविक ही वह सजायाफ्ता कातिल सलीम खान है। गिरफ्तारी के बाद जो खुलासा हुआ वह और भी ज्यादा चौंकाने वाला था।

सलीम ने बताया कि एक बड़े बॉलीवुड फिल्म निर्माता ने उसकी संघर्षपूर्ण जिंदगी पर बायपिक बनाने के लिए उससे संपर्क किया था। उसे एडवांस के तौर पर ₹15 लाख का चेक भी मिल चुका था। लेकिन रियल लाइफ का हीरो बनने से पहले ही रियल लाइफ का यह विलेन कानून के शिकंजे में आ गया।

शनिवार की सुबह दिल्ली और गाजियाबाद पुलिस ने मिलकर उसे गिरफ्तार कर लिया। 31 साल तक भागा हुआ यह मुजरिम आज फिर सलाखों के पीछे है। सलीम वास्तिक की एक कहानी हमें सिखाती है कि गुनाह का साया कितना भी लंबा क्यों ना हो जाए कानून के हाथ उस तक पहुंच ही जाते हैं।

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