भारत से करीब 7000 कि.मी. दूर एक ऐसा इलाका है जहां दुनिया की महाशक्तियों के बीच एक होश उड़ा देने वाली जंग शुरू हो चुकी है। यह वो इलाका है जहां कई बार तापमान -50° तक गिर जाता है। लेकिन पिछले कुछ सालों में ग्लोबल वार्मिंग के चलते इस इलाके का तापमान बढ़ने लगा है। यहां की बर्फ पिघलने लगी है और इसी की वजह से नए-नए रास्ते और शिपिंग रूट्स दुनिया के सामने आने लगे हैं।
इन्हीं पर दावा ठोकने के लिए रूस ने भारत के साथ मिलकर एक ऐसा प्लान बनाया है जिसने इस इलाके का कूटनीतिक तापमान भी बढ़ा दिया है। यह इलाका है आर्कटिक। बर्फ पिघलने की वजह से इस इलाके में नए-नए शिपिंग रूट्स बनने शुरू हो गए हैं। इनमें से एक है नॉर्थ वेस्ट पैसेज वे। दूसरा है ट्रांस पोलर सी रूट और तीसरा है नॉर्थ सी रूट। आज से 20-25 साल बाद यह जगह भारत और दुनिया के लिए सबसे बड़ा खजाना बनने वाली है।
मौजूदा समय में भारत ने इस इलाके में अभी तक सिर्फ एक उंगली रखी है। लेकिन अब यहां पर पैर जमाने की बारी आ गई है। भारत यह काम रूस के साथ शुरू भी कर चुका है। इसका ऐलान खुद रूस ने कर दिया है। यह होश उड़ा देने वाली कहानी क्या है? वो आपको आसान भाषा में समझाते हैं।
दरअसल आपने खबर देखी होगी कि भारत और रूस के बीच रेसिप्रोकल एक्सचेंज ऑफ लॉजिस्टिक्स सपोर्ट नाम का एक मिलिट्री एग्रीमेंट हुआ है। इस एग्रीमेंट के तहत भारत और रूस एक दूसरे के देश में एक ही समय पर 3000 तक सैनिक, 10 मिलिट्री एयरक्राफ्ट और पांच युद्धपोतों की तैनाती कर सकते हैं। कई लोगों ने इस खबर को ऐसे पेश किया मानो भारत रूस का साथ देने के लिए यूक्रेन के खिलाफ अपनी सेना उतार देगा। तो वहीं रूस भी भारत के लिए पाकिस्तान पर हमला करने के लिए अपने सैनिक और हथियार भेज देगा।
लेकिन ऐसा कुछ नहीं होने वाला। सबसे पहले तो यह एग्रीमेंट मुख्य रूप से जॉइंट मिलिट्री एक्सरसाइज, ट्रेनिंग, ह्यूमैनिटेरियन असिस्टेंस और डिजास्टर रिलीफ ऑपरेशन के लिए किया गया है। लेकिन इस एग्रीमेंट की सबसे खास बात यह है कि अगर रूस और भारत किसी महत्वपूर्ण चीज को लेकर एक मत हैं तो दोनों एक दूसरे के देश में अपने मिलिट्री एसेट्स की तैनाती कर सकते हैं। और अब आपको बता दें कि इस एग्रीमेंट के तहत भारत और रूस को वो महत्वपूर्ण काम मिल गया है जिसके लिए भारत के सैनिक एयरक्राफ्ट और जंगी जहाज रूस जा सकते हैं।
रूस भारतीय सेना को अपने देश में एक ऐसी रणनीतिक जगह पर तैनात करना चाहता है जहां भारत भी घुसने की तैयारी कर रहा है। वैसे तो इस एग्रीमेंट के तहत भारत रूस के 40 से ज्यादा बेसिस का इस्तेमाल कर सकता है। लेकिन आने वाले समय में रूस भारतीय सैनिकों को अपने मरमंस्क इलाके में लाकर बैठा सकता है। रूस इसी इलाके से आर्कटिक में अपनी सबसे बड़ी दावेदारी पेश करता है।
इस वक्त आर्कटिक की मोटी बर्फ की तह के नीचे अरबों का खजाना छिपा है। आर्कटिक में अरबों के क्रिटिकल और रेयर अर्थ मिनरल्स है। आर्कटिक में तेल और नेचुरल गैसेस के भी भंडार है। अभी तक इन्हें निकालना मुश्किल था क्योंकि यहां पर बर्फ की मोटी परत थी, लेकिन बर्फ के पिघलने के बाद दुनिया की बड़ी-बड़ी महाशक्तियां इन पर दावा ठोकने आ रही हैं।
आपको बता दें कि आर्कटिक किसी एक देश का नहीं है। यह आठ तटीय देशों में बटा हुआ है। जिनमें कनाडा, डेनमार्क, ग्रीनलैंड, फिनलैंड, आइसलैंड, नॉर्वे, रूस, स्वीडन और अमेरिका शामिल हैं। डॉनल्ड ट्रंप ग्रीनलैंड पर इसीलिए कब्जा करना चाहते हैं ताकि आर्कटिक के इलाके में अमेरिका की पकड़ सबसे ज्यादा मजबूत हो जाए। लेकिन रूस इस इलाके में भारत के साथ मिलकर अपनी मौजूदगी बढ़ाना चाहता है।
आपको बता दें कि आर्कटिक के विशाल बर्फीले इलाके में रूस, अमेरिका, यूरोप और चीन के बीच वर्चस्व की जंग शुरू भी हो चुकी है। यह इलाका वैसे तो भारत से दूर है, लेकिन भारत के लिए भी बहुत जरूरी है और अब रूस भारत को इसी इलाके में रणनीतिक बढ़त दिलवाना चाहता है। इससे भारत को भी फायदा होगा और रूस को भी। रूस इस इलाके में बड़ा दावेदार है। लेकिन रूस के पास इतने रिसोर्सेज नहीं है कि वह अकेले इस इलाके पर अपना दावा ठोक सके क्योंकि यहां पर रूस अमेरिका और यूरोपीय दुश्मनों से घिरा है।
चीन भी इस इलाके में रूस को पछाड़ना चाहता है। ऐसे में रूस अपने इस मरमंस्क इलाके में भारत को लाना चाहता है। वैसे तो भारत मौजूदा स्थिति में इस इलाके में अपने हिमाद्री रिसर्च स्टेशन के जरिए साइंटिफिक रिसर्च का काम कर रहा है। लेकिन भारत को अगर खजाने से भरे इस इलाके में अपनी मौजूदगी दर्ज करनी है तो भारत को रूस की मदद चाहिए ही होगी। भारत यहां पर दबा हुआ खजाना नए-नए शिपिंग रूट्स के जरिए ला सकता है।
भारत को आर्किटिक के इलाके में अगर रूस के साथ मिलकर कोई इन्वेस्टमेंट करनी है। कोई बड़ा प्रोजेक्ट और रिसर्च का काम शुरू करना है तो उसकी सुरक्षा के लिए भारत को अपने सैनिक यहां पर तैनात करने होंगे। और यह तभी संभव हो पाता जब भारत का रूस के साथ ऐसा एग्रीमेंट होता जिसके तहत भारत अपने मिलिट्री एसेट्स को रूस की जमीन पर लाकर बैठा सके। और अब यह एग्रीमेंट हो गया है।
