गाजीपुर केस पर पुलिस ने राहुल गांधी को दी नसीहत – अफवाह न फैलाएं।

उत्तर प्रदेश में एक नाबालिक लड़की की का मामला अब कास्ट कॉन्फ्लिक्ट बनता जा रहा है। हुआ यह था कि 15 अप्रैल को उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले में नदी में लड़की का शव मिला था।

पहले आरोप लगे थे कि उसके साथ रेप किया और फिर उसकी हत्या कर दी गई। लेकिन मामले में पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में की कोई पुष्टि नहीं हुई है और मौत पानी में डूबने की वजह से हुई है। और इन सबके बीच मामले पर राजनीति भी तेज हो गई है। विपक्ष ने बीजेपी को घेरना शुरू कर दिया है। कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी कह रहे हैं कि मौजूदा सरकार को सत्ता में रहने का कोई अधिकार नहीं है।

एक्स पर जारी उनके बयान में लिखा है हाथरस, कठुआ, उन्नाव और आज गाजीपुर यह एक पैटर्न है। हर बार वही चेहरा पीड़ित दलित पिछड़ी आदिवासी गरीब हर बार वही सच्चाई अपराधी को संरक्षण पीड़ित को जिस देश और प्रदेश में मां-बाप को बेटी की एफआईआर लिखवाने के लिए भीख मांगनी पड़े उस देश की सरकार को सत्ता में रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।

महज 2 घंटे के अंदर ही राहुल गांधी के आरोपों पर गाजीपुर पुलिस का जवाब भी आ गया। गाजीपुर पुलिस के ऑफिशियल एक्स अकाउंट से राहुल गांधी के पोस्ट को शेयर करते हुए लिखा गया कृपया सही तथ्यों से अवगत रहें। 15 अप्रैल की सुबह 5:44 पर के पिता ने डायल 112 पर कॉल करके बताया था कि लड़की ने पुल से कूदकर अपनी जान दे दी है। प्रकरण में के पिता की तहरीर पर दर्ज एफआईआर में भी का कोई जिक्र नहीं है। मृतिका के रिपोर्ट में भी कोई संबंधी तथ्य नहीं आया है।

कृपया ऐसी असत्यापिठ तथ्यहीन और भ्रामक अफवाहें ना फैलाए जिससे समाज में शांति भंग हो। गाजीपुर पुलिस द्वारा इस मामले में हत्या के एक आरोपी और पथराव करने वाले 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है और भी गिरफ्तारियां जारी है। समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव की भी प्रतिक्रिया आई है। उन्होंने एक वीडियो शेयर करते हुए आरोप लगाया है कि पीड़ित परिवार पर दबाव बनाया जा रहा है।

अखिलेश के पोस्ट का स्क्रीनशॉट आप इस वक्त स्क्रीन पर देख पा रहे हैं। इसमें लिखा है कि इस बात की जांच हो कि बीजेपी के ये कौन लोग हैं जो समझाने के नाम पर दबाव बना रहे हैं और वो भी पुलिस की मौजूदगी में। इसकी भी जांच हो कि के मामले में कौन पुलिस वाले पीड़ित पक्ष को धमका रहे हैं और पीड़ित पक्ष का साथ देने वाले पर झूठे मुकदमे लगा रहे हैं।

इस बीच समाजवादी पार्टी ने एक प्रेस नोट जारी किया और बताया कि अखिलेश यादव 29 अप्रैल को गाजीपुर जाएंगे और पीड़ित परिवार से मुलाकात करेंगे। इससे पहले 22 अप्रैल को समाजवादी पार्टी का एक डेलीगेशन पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचा। रिपोर्ट के मुताबिक सिर्फ 15 लोगों को पीड़ित परिवार से मिलने की इजाजत मिली थी। सपा के जांगीपुर विधायक वीरेंद्र यादव, सदर विधायक जयकिशन साहू और जिला अध्यक्ष गोपाल यादव और कार्यकर्ता गांव पहुंचे थे। इसके बाद पुलिस ने बीच-बचाव कर पीड़ित परिवार को वहीं बुलाकर मुलाकात करवाई। आरोप है कि इस दौरान करीब 250 अन्य लोग गांव में घुसने लगे और हिंसा भड़क उठी। इसके साथ ही दो पक्षों के बीच पथराव होने लगा। इस पथराव में कई पुलिस वालों को भी गंभीर चोटें आई। एफआईआर के मुताबिक सपा समर्थकों पर ईंट पत्थर चलाने और माहौल बिगाड़ने का आरोप है। वहीं सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव का आरोप है कि बीजेपी के लोगों ने पुलिस पर पथराव किया।

मामले में सपा के जिला अध्यक्ष गोपाल यादव और एक विधायक समेत 40 नामजद और करीब 200 अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। 10 लोगों को गिरफ्तार भी किया गया।

आज तक की रिपोर्ट के मुताबिक गाजीपुर जिले के करंडा थाना क्षेत्र के कटरिया गांव में 15 अप्रैल को एक नाबालिग लड़की का शव गंगा नदी में मिला था। एडीजी पीयूष मोरदिया ने बताया था कि परिवार की शिकायत पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ली थी।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृतिका के साथ रेप की पुष्टि नहीं हुई। शरीर पर किसी भी तरह के चोट के निशान नहीं पाए गए थे। गाजीपुर जिले के पुलिस अधीक्षक यानी एसपी ईरज राजा ने बताया कि घटना से जुड़े सीसीटीवी फुटेज भी मिले हैं। जिसमें मृतिका पुल की तरफ अकेले जाती हुई दिख रही है।

मामले में मुख्य आरोपी हरि ओम पांडे को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। जबकि दूसरे आरोपी अभिषेक पांडे की तलाश जारी है। पुलिस ने लोगों से भ्रामक जानकारी ना फैलाने की अपील की।

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