पुणे में एक पुल पर हादसा हो गया। एक पुल जो है गिर गया और यह 470 फुट लंबा पुल था। 4 फुट चौड़ा था और 1990 में बना था। लेकिन इसका निर्माण के बाद कभी इसका ऑडिट ही नहीं हुआ था। और एक और बड़ा खुलासा यह भी हुआ कि कल जब वहां सैलानियों की भीड़ होने लगी तो दोपहर 12:00 बजे गांव वालों ने पुलिस को फोन किया था कि यहां एक तो जजर पुल है और उस पर बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा हो रहे हैं। इसके बाद यहां पुलिस वाले आए और लोगों को वहां से हटाया। फिर पुलिस वाले चले गए जिसके बाद यह हादसा हो गया। तो यह महत्वपूर्ण जानकारी है कि ऑडिट नहीं होता है पुल का।
पुलिस वालों को जानकारी देते हैं गांव वाले लेकिन उसके बाद भी कोई ध्यान वहां पर नहीं रखा जाता है और यह हादसा यहां पर हो जाता है। गांव वालों का कहना है कि उन्होंने 5 साल पहले पीडब्ल्यूडी की मांग की थी कि पुल की हालत बहुत खराब है और इसे बंद कर दिया जाए।
लेकिन उस वक्त भी ग्रामीणों की मांग की अनदेखी हुई और अब यह बड़ा हादसा यहां पर हो गया है। तो यह बड़े सवाल हैं जो अब सामने हैं जिसका जवाब अब यहां पर देना चाहिए। 30 साल पुराना यह पुल और कभी स्ट्रक्चरल ऑडिट ही नहीं हुआ। ऐसा कैसे संभव है? क्या कभी किसी ने जो गांव वाले हैं उन्होंने कई बार कहा भी ऑडिट करने के लिए लेकिन कभी हो नहीं पाया। क्या रीजन रहा इसके लिए? क्यों किसी ने इसके ऊपर ध्यान नहीं दिया? देखिए अब और कुछ नए तथ्य सामने आ रहे हैं। बिल्कुल अनदेखी हुई और 2017 और 2022 ऐसे दो खत मेरे हाथ में है जो तो जो पूर्व विधायक है उन्होंने 2017 में कहा था कि यह पुल जो है पूरी तरह से नष्ट कर देना चाहिए। नया पुल बनना चाहिए। फिर उसको रिमाइंड किया गया 2022 में और फिर 2024 में। तो जो 2024 में पूर्व मंत्री थे अब वो मंत्री नहीं है पीडब्ल्यूडी के। तो उन्होंने लगभग ₹1 लाख की राशि इसको मंजूर की थी और जैसे अब पता चल रहा है कि इसका स्ट्रक्चरल ऑडिट भी नहीं हुआ था। जब यह पुल लोखंड का बना हुआ है तो यह हो सकता है कि बारिश की वजह से पानी की वजह से वो क्षतिग्रस्त हो और क्षतिग्रस्त होने के बावजूद इसका स्ट्रक्चरल ऑडिट नहीं हुआ।
कल और एक बात सामने आ रही है कि जब 12:00 बजे ग्रामीणों ने यह देखा कि लगातार यहां पे भीड़ बढ़ रही है तब उन्होंने कंट्रोल रूम जो है पुलिस की उसको कॉल किया। चार पुलिस वाले वहां पर आए भी और कुछ समय के लिए वहां पर रुके। उन्होंने लोगों को भीड़ को हटाया। जैसे ही वह चले गए फिर भीड़ इकट्ठा हुई और बिल्कुल 5 मिनट के अंदर इतना बड़ा हादसा हुआ। तो कई सारे नए सवाल आप पूछे जा रहे हैं। लोग कह रहे हैं कि जिन्होंने अपनी जान गवाई उनके रिलेटिव्स कह रहे हैं कि कल्पेबल होमिसाइड का क्राइम रजिस्टर होना चाहिए।
जी आपको 10 साल से पता है कि इस तरीके के ब्रिज जो पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो रहा है उसको नया बनाने की जरूरत है। बिल्कुल नया बनाने की जरूरत है राहुल और इतनी शिकायतें अगर हो रही है गांव वाले खुद इसके लिए चेता रहे हैं कि भाई ये पुल इस्तेमाल के लायक नहीं है। हादसा हो सकता है उसके बाद इस पे ध्यान नहीं देना ये तो और भी गंभीर इस मामले को बता दे बना देता है कि कितनी बड़ी लापरवाही यहां पर हुई है।
महाराष्ट्र के पुणे में कल एक ये बड़ा हादसा हुआ जहां पर कुंडमाला गांव के पास इंद्रायणी नदी पर यह पुल बना हुआ था जो हादसे का शिकार हो गया। का पुल टूटा तो हादसे में जो लोग वहां पर मौजूद थे पुल पर वो नदी में जा गिरे और हादसे में चार लोगों की निधन की खबर है। लोग बताए जा रहे हैं जो घायल हैं जिसमें से छह की हालत गंभीर है और बताया जा रहा है कि कई लोग फिलहाल लापता भी हैं। दो बच्चे भी नदी में बहने बह गए और रेस्क्यू ऑपरेशन में एनडीआरएफ की टीम जुटी हुई है।
हादसे की बड़ी वजह बताया जा रहा है कि इस जजर पुल पर क्षमता से अधिक लोग आ गए जिसमें कुछ बाइक लेकर भी पुल पर चढ़ गए। हादसे के बाद राज्य सरकार ने मृतकों के परिजनों को 5-प लाख मुआवजे का ऐलान किया। वहीं हादसे के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडनवीस से बात की और हादसा हादसे की जानकारी ली। वहीं डिप्टी सीएम अजीत पवार ने कलेक्टर से इस घटना की रिपोर्ट मांगी।
इसके बाद यहां पे अथर्व हॉस्पिटल में सात पेशेंट में एडमिटेड हैं। उनकी परिस्थिति का अभी अंदाजा लिया गया है। डॉक्टर के हिसाब से छह पेशेंट गंभीरता से बाहर हैं। एक जो पेशेंट हमें काफी देरी से मिला था। उसकी परिस्थिति क्रिटिकल है। लेकिन एज ऑफ नाउ स्टेबल है। टोटल मिला के अभी तक 50 लोगों को रेस्क्यू किया जा चुका है। अनफॉर्चूनेटली चार लोगों की मृत्यु हुई है। रेस्क्यू ऑपरेशन अभी भी कंटीन्यूअसली चल रहा है। हम इंश्योर करना चाहते हैं कि कहीं पे भी कोई भी ऐसा मनुष्य जो बह के चला गया हो और जिसकी डेड बॉडी ना मिली हो या फिर अभी भी कहीं पे कोई अटका हुआ हो। ऐसा कोई ना रह जाए। इसलिए थोड़ी देर अभी हमारा रेस्क्यू ऑपरेशन कंटिन्यू रहेगा। कोऑर्डिनेशन में काम चल रहा है। एनडीआरएफ, पुलिस प्रशासन, महसूल प्रशासन सारे कोऑर्डिनेशन में काम कर रहे हैं। और होपफुली जो हॉस्पिटल में हैं उनमें से किसी के भी जीवन हानि नहीं होगी। ऐसा अभी तक का अंदाज है। और आप सोचिए इनके परिजनों पर क्या बीत रही होगी जिन्होंने अपनों को यहां पर खोया दी थी और यह लापरवाही की बातें अब यहां पर आ रही है इस पुल को लेकर। कुछ लोग लापता भी बताए जा रहे हैं। जरा बताइए। उनके बारे में कुछ पता चल पाया है। रेस्क्यू किस तरह से चल रहा है वहां पर? रेस्क्यू ऑपरेशन कल करीब 5:00 बजे यहां पर शुरू हुआ और उसके बाद कम से कम 6:30 घंटे तक चला। तो 11:00 बजे क्योंकि यहां पे वैसे ही लाइट बहुत कम है और अभी थोड़ा क्लाउडडी वातावरण भी रहता है जिसकी वजह से नाइट लाइट भी ज्यादा अच्छी नहीं रहती है। इसकी वजह से 12:00 बजे से पहले ही रेस्क्यू ऑपरेशन बंद कर दिया गया। अभी थोड़ी ही देर पहले हम यहां पे पहुंचे। तो सबसे पहले यहां पे क्यूआरटी क्विक रिस्पांस टीम यहां पे आई और जो एनडीआरएफ के पथक है वो भी यहां जल्दी आना जल्दी आएंगे ऐसा एक्सपेक्टेड है।
आज वैसे यहां पे कल का यहां पे सबसे बड़ा काम जो था वो था वो जो ब्रिज है वो जो मिटिल ब्रिज उसको वो जो अटका हुआ था नदी के अंदर उसको निकालना और उसके अंदर उसकी नीचे भी कोई बॉडीज दबी हुई थी। अभी हम जब लोकल से बात कर रहे थे तो वह कहते हैं कि बहुत ज्यादा लोग बह जाने की बह जाने के विजुअल्स उन्होंने देखे लाइव जो आई विटनेसेस थे। बट अब तक ऑफिशियल तौर पे जो पुष्टि हुई है उसके हिसाब से बस एक आदमी मिसिंग बताया जा रहा है और चार आदमियों को मृत घोषित कर दिया गया है। बट आज शाम तक हम एक्सपेक्ट कर सकते हैं कि ये नंबर बढ़ सकता है क्योंकि आगे भी एनडीआरएफ के पैरेलल इन्वेस्टिगेशन चल रहे
