यहां से बचा लास्ट मैं सुन रही हूं तमाशा लेके जाओ यहां से बचा मैं नहीं रखूंगी काटो ना साहब हटो ना यहां का चार इकट्ठे हो गए तमाशा करने के लिए भागो यहां से एक लगा है कैमरा दो घंटे की नौटंकी तुम लोग की सबकी कैद हो चुकी है इसमें करो जगह शिकायत जहां इच्छा हो बता रही हूं बच्चों के टीकाकरण हो रहा है मुझे अंदर जाना है छ घंटे लगा दिए यहां पर पेशेंस मेरा लूज करके छोड़ दिया।
जब हमको काम है बकवास करने यू तो अभी क्यों दो घंटे बिताए यहां पर क्यों आ रही हो दो घंटे नहीं सुनूंगी नहीं सुनूंगी नहीं सुनूंगी नहीं सुनूंगी नहीं सुनूंगी नहीं सुनूंगी नहीं सुनूंगी नहीं सुनूंगी कभी नहीं सुनूंगी आपकी बार जिंदगी में नहीं सुनूंगी कभी नहीं सुनूंगी मैं इतनी मैं नहीं सुनूंगी मैं यू शट अप यू आल्सो शट अप यू शट अप मैं नहीं सुनूंगी नहीं सुनूंगी ये प्रिंसिपल मैडम है तो मैडम एक बात बताइए बुक्स जहां से आप कहेंगी वहीं से खरीदेंगे यूनिफार्म जहां से आप कहेंगे वहीं से लेंगे एडमिशन फीस टाइम से जमा करेंगे फीस 3 महीने की साथ में जमा करेंगे वो भी टाइम से वरना लेट फीस लगेगी और क्लास में बच्चे को झेलना पड़ेगा टीचर्स सबके सामने डांट देती है ना इसलिए क्यों क्योंकि हमें अपने बच्चे बच्चे को प्राइवेट इंग्लिश मीडियम में पढ़ाना है, अच्छा बनाना है।
मेरी इन बातों से वह तमाम पेरेंट्स इत्तेफाक रखेंगे जिनके बच्चे प्राइवेट स्कूल में पढ़ रहे हैं। क्योंकि ये तमाम रूल्स मानने के अलावा कोई ऑप्शन है ही नहीं। अप्रैल का महीना है। कई पेरेंट्स इन चीजों से गुजर भी रहे होंगे। ऐसे ही एक पेरेंट्स स्कूल कॉपी से जुड़ी समस्या लेकर स्कूल पहुंचे थे। लेकिन प्रिंसिपल मैडम का पारा इतना हाई हो गया कि उन्होंने सबके सामने उन्हें ऐसा डाटा माफ कीजिएगा। उन पर चीख-चीख कर वहां मौजूद सभी लोगों के सामने ऐसी बेइज्जती की कि आसपास के लोग तक सहम गए। इस वीडियो के दो पक्ष हैं। हम आपको पेरेंट्स का पक्ष बताएंगे और प्रिंसिपल मैडम की भी सफाई आई है। उसे भी सुनाएंगे। यह मामला यूपी के हरदोई का है।
न्यू सनवीम स्कूल का वीडियो है। 24 अप्रैल को नीलम वर्मा नाम की पेरेंट्स स्कूल पहुंची। उनकी शिकायत थी कि उनके बच्चे के पास जो कॉपी थी उसे यूज करने से टीचर्स मना कर रहे थे क्योंकि वो स्कूल की कॉपी नहीं थी। माने उस पर स्कूल का नाम नहीं छपा था। टीचर्स का कहना था कि स्कूल ने जो कॉपीज छपवाई हैं उसे यूज करना है। नीलम का दावा है कि 2 तारीख से टेस्ट शुरू होने वाले थे। बच्चे की पढ़ाई में कोई अड़ंगा ना आए। इसलिए उन्होंने स्कूल से 15 दिन की मोहलत मांगी थी कि 15 दिन की मोहलत दे दीजिए। नई कॉपीज ले लेंगे। उन्होंने मोहलत मांगी कि इन्हीं कॉपीज में काम करने दीजिए फिर नहीं ले लेंगे। लेकिन प्रिंसिपल उन्हें इस बात के लिए डांटने लगी। सुनिए नीलम वर्मा ने क्या आरोप लगाए हैं। मैंने कोर्स जो खरीदा उसमें कॉपी भी आई है। लेकिन वो मैम कह रही है इस कॉपी में नहीं वर्क कराया जाएगा बच्चों को। हमारे स्कूल में जो कॉपी छपी है आपको उसी में वर्क कराया जाएगा। बच्चा चाहे पढ़े आपका या ना पढ़े। तो या तो अपना बच्चा लेकर जाइए। और बहुत बदतमीजी से मतलब बात करने लगी। मैंने फिर भी उनसे बोला कि मैम मेरी बात सुन लीजिए। मुझे सिर्फ 15 दिन की मोहलत दे दीजिए। मैं अपने बच्चे की कॉपी ले लूंगी। जब तक आप इसमें वर्क दे दीजिए। बच्चा के टेस्ट शुरू होने वाले थे 2 तारीख से। तो इसी वजह से कि नहीं सुनूंगी नहीं सुनूंगी और बहुत बदतमीजी से बात करने लगी गवार अनपढ़ चली आती है यहां मुंह उठा के और खड़ी रहती है यहां पर आकर और पता नहीं क्या क्या बहुत उल्टी-उल्टी मतलब बातें बोलने लगी वो और कॉपी कहा कि कॉपी यहीं से लेनी है तो यहीं से लेनी है क्या कोई शिकायत वगैरह की है।
आपने इस बारे में जी सर शिकायत की है मैंने डीएम साहब के पास शिकायत की है मैंने उन्होंने मेरे साथ ज्यादा बदतमीजी की है सर वीडियो में बहुत ज्यादा वायरल हो रखा है अच्छा एक मिनट उनका भी एक वीडियो आया है जिसमें वो कह रही हैं कि कॉपी का कोई मामला नहीं है। आप फीस कम कराने का दबाव बना रहे थे और एक बात उन्होंने यह भी कही कि कोई आपके पति ने ग्रुप बनाया था उसमें भी स्कूल के लिए लिख रहे थे। जी नहीं सर मेरे पति के पास फोन ही नहीं है जो वो ग्रुप बनाएंगे। वो तीन यहां रहते भी नहीं। तीन साल से वो बीमार चल रहे हैं ना कोई जॉब करते हैं। वो अभी गए हैं 15 दिन हुए केवल उन्हें जाए। यह बात वो झूठ बोल रही हैं। और फीस का कोई दबाव फिर अगर वह दबाव बनाती तो 2 साल पहले से नहीं बनाती। तब तो मैंने कभी कुछ नहीं कहा। मैं सिर्फ कॉपी के मामले में कहने गई थी कि मैम मेरी बात सुन लीजिए। मैं 15 दिन में आपको यह कॉपी बच्चे को दिला दूंगी। लेकिन उन्होंने मेरी बात नहीं सुनी और बहुत बदतमीजी से बोलने लगी। जाहिल गवार अनपढ़ और यहां चली आती है। लिपस्टिक लगा के यहां चली आती हैं। बच्चे सड़क पे फेंके अपने यहां से निकाल लिया। बच्चे सड़क पे फेंके। ये सब बोलने लगे। तो यह था अभिभावक का पक्ष। इस मामले पर स्कूल प्रिंसिपल ममता मिश्रा की भी सफाई आई है। उनको भी सुनना जरूरी है। उन्होंने दावा किया है कि नीलम वर्मा जो बच्चे की पेरेंट हैं, कॉपी की शिकायत नहीं बल्कि स्कूल फीस कम कराने आई थी और वह अपने पति के साथ मिलकर लगातार फीस कम करने का दबाव बना रही थी।
24 अप्रैल को स्कूल में वैक्सीनेशन प्रोग्राम था और उन्होंने जानबूझकर यही दिन चुना। ऐसा प्रिंसिपल का दावा है। सुनिए प्रिंसिपल का पूरा पक्ष। नमस्कार, एक वीडियो वायरल है। जो सनवीन का है और उसमें मेरी भाषा शायद कुछ ज्यादा खराब है या खराब है लेकिन उससे तीन घंटे पहले क्या हुआ उसके आधे घंटे पहले क्या हुआ किसी को नहीं पता और शायद कोई जानना भी नहीं चाहता है और मेरी शिक्षा के ऊपर मेरी परवरिश के ऊपर मेरी उम्र के ऊपर सबके ऊपर खूब सारे सवाल उठाए जा रहे हैं अच्छी बात है उठाना चाहिए आसान है ये जो जिन्होंने वीडियो बनाया है और जो लोग कुछ खड़े हैं। इसके पीछे तथ्य क्या है? वह जानना बहुत जरूरी है। तथ्य यह है जो एक महाशय आपको दिख रहे हैं। इन्होंने इनका बच्चा तीन साल से पढ़ रहा है। उनको अभी तक कोई शिकायत नहीं थी और इन्होंने अभी छोटे बच्चे का एडमिशन कराया और ये लगातार मेरे ऊपर फीस कम करने का दबाव बना रहे थे। इन्होंने एडमिशन फीस काफी कम कराई। बहुत छोटा अमाउंट दिया जिसका मेरे पास प्रूफ है। और इसके बावजूद भी लगातार चीजों के लिए तंग कर रहे थे मुझको। प्रेशराइज कर रहे थे।
मैंने उनको बहुत समझाया जो भी इन्होंने इस तरीके से काफी सारे पेरेंट इकट्ठे किए जिनको फीस कम करानी थी और अपने फायदे के लिए बहुत कुछ करना था। स्कूल में वैक्सीनेशन का प्रोग्राम था जो कि गवर्नमेंट की तरफ से था। 23 तारीख को स्कूल सारे बच्चों को WhatsApp ग्रुप के द्वारा बता दिया गया था। पेरेंट्स को बता दिया गया था कि 24 को वैक्सीनेशन प्रोग्राम है। जब टीकाकरण होता है, आप घर में भी देखते होंगे बच्चों को जब टीके के लिए जाते हैं, मम्मी पापा साथ में जाते हैं और बच्चों को कंसोल करते हैं। यहां पर स्कूल में जब टीकाकरण का प्रोग्राम था और इन्होंने वो सॉफ्ट दिन चुना। इनको पता है मुझे बच्चों से कितना स्नेह है। इन्होंने वो सॉफ्ट दिन चुना और ये 7:45 पर स्कूल प्रमिसेस में आए और लगातार मुझे तंग करते रहे। मैंने उनको बहुत बार समझाया। आज टीकाकरण का प्रोग्राम है। वैक्सीनेशन है।
आज रहने दीजिए। हम आपकी बात सुनेंगे। जो उचित होगा करेंगे। बहुत सारे स्कूल में बच्चे हैं जो नीडी है उनको स्कूल फ्री शिक्षा देता है। मैं आरटी की बात नहीं कर रही हूं। मैं वैसे जनरल बात कर रही हूं कि जो बहुत सारे बच्चे आपको मिलेंगे स्कूल में जो जरूरतमंद है उसको स्कूल फ्री शिक्षा देता है। यहां जेल में भी जो बच्चे मांओं के साथ रहते हैं पांच साल तक। मैंने उन बहुत सारे ऐसे बच्चों को फ्री शिक्षा दी है। अब भी करती हूं जो तो यह सवाल स्कूल की फीस ₹1300 है। नर्सरी केजी एलकेजी की फीस जिसके पेरेंट हैं गार्डियन है उसकी फीस ₹1300 है। ₹1300 फीस अगर ज्यादा है तो मुझे बताइए कितनी होनी चाहिए और कितनी होनी चाहिए? फिर सारे स्कूलों की फीस ₹34,000 ना होके ₹13,000 या ₹200 जो भी आप तय करें वो होनी चाहिए। प्रिंसिपल का कहना है कि वह वैक्सीनेशन वाले दिन बच्चों के साथ रहना चाहती थी। लेकिन यह माता-पिता बैरियर बन गए थे। वैक्सीनेशन का प्रोग्राम था।
मेरा सारा फोकस बच्चों के ऊपर था। मैं उस समय बच्चों के अलावा कुछ भी सुनना नहीं चाहती थी। सिर्फ बच्चों के पास जाना चाहती थी। और यह उसमें बैरियर बने हुए थे। तो यह बैरियर मैंने प्यार से 3 घंटे तक समझाने की कोशिश की। ऑफिस में बिठा के समझाने की कोशिश की। मेरे हस्बैंड ने इनको ऑफिस में बिठा के समझाने की कोशिश की। आपके जो भी परेशानियां है दूर होंगी लेकिन आज नहीं कल लेकिन उनको तो वो दिन मिला था ना क्योंकि अभी बच्चे के संग ऊंचनीच होती है मुझे छोड़ते नहीं तो जरा दूसरे का पक्ष कई लोगों ने मुझे कहा कई पत्रकारों ने कहा कि मैडम आपको अपना पक्ष रखना चाहिए इसलिए मैं अपना पक्ष रख रही हूं और वरना मैं जानती हूं मेरा भगवान जानता है ये क्लिपिंग निकाल के किसी के चरित्र के ऊपर उंगली उठाना, अभद्र भाषा का इस्तेमाल करना, सम्रांत लोगों को एक महिला के ऊपर अभद्र भाषा के लिए टीका टिप्पणी करना तो वो भी तो अच्छी बात है। थैंक यू सो मच। तो यह था प्रिंसिपल का पक्ष। लेकिन मैडम प्रिंसिपल वजह चाहे जो भी हो फीस का मुद्दा हो या कॉपीज का अगर आप एक अभिभावक के साथ चीख-चीख कर अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल करेंगी तो वह किसी भी तरह से जायज नहीं ठहराया जा सकता।
उसे जस्टिफाई नहीं किया जा सकता। पेरेंट्स के पास ऑप्शन नहीं है लेकिन आपके पास ऑप्शन था। ऑप्शन था कि आप सिक्योरिटी गार्ड्स को बुलाती। ऑप्शन था कि आप कानून की मदद लेती। जैसा कि आपने दावा किया कि आपके ऊपर दबाव बनाया जा रहा था। अगर यह सच है तो आप इन दो ऑप्शंस का इस्तेमाल कर सकती थी। लेकिन आपने नहीं किया। आप चिल्लाने लगी। मैडम आप पर उन सभी बच्चों की जिम्मेदारी है जो वहां पढ़ रहे हैं। यू हैव अ फ्यूचर इन योर हैंड मैम।
