प्लेन हादसे से पहले क्या थे यात्रियों के आखरी शब्द?

तो मेडे कॉल के बाद यह तो स्पष्ट था कि विमान में कोई बड़ी तकनीकी गड़बड़ी आ गई है। कोई ऐसी खामी है जिस पर पायलट्स पूरा जोर लगा के उसको काबू करने की कोशिश कर रहे थे। लेकिन परिस्थिति उनके हाथ से तकरीबन निकल चुकी थी और उन्हें वो बात समझ आ चुकी थी। इसीलिए जो फ्लाइट का जिसमें कि प्लेन धीरे-धीरे नीचे जाता हुआ फट रहा है उसमें वो ऊपर की तरफ है। यानी आगे का हिस्सा जिसको नोक बोला जाता है वो ऊपर की तरफ है और उसको तब ऐसा पोजीशन किया जाता है जब टेक ऑफ के लिए फ्लाइट को लिफ्ट देनी होती है तो उस पोजीशन में विमान रहता है। यानी इससे एक बात तो स्पष्ट होती है कि पायलट्स ने लास्ट मोमेंट तक कोशिश करी कि कैसे भी थस्ट मिल जाए और फ्लाइट ऊपर की तरफ जाए। और ऐसी सिचुएशन में बहुत सारे एक्सपर्ट्स का यह कहना था कि फ्लाइट का गियर बंद नहीं हुआ।

गियर मतलब टायर बंद नहीं हुआ जो कि टेक ऑफ के 50 फीट के बाद जाके उसको क्लोज करने का प्रोसेस शुरू हो जाता है। अब क्या यह भी किसी तकनीकी गड़बड़ी की वजह से था? या फिर यहां पर कोई मैनुअल एरर का चांस हो सकता है। यह सब कुछ ब्लैक बॉक्स से मिले हुए डाटा को डिकोड करने के बाद सामने आएगा। लेकिन जब फ्लाइट ऐसी परिस्थिति में जा पहुंची कि अब आगे कुछ नहीं होगा। सुमित सबरवाल जो कैप्टन थे क्लाइव कुंदर जो उनके फर्स्ट ऑफिसर थे यानी को पायलट थे जब उनको इस बात का एहसास हो गया और यह सब कुछ सेकंड्स के अंदर हुआ है। जब उनको इस बात का एहसास हो गया कि अब कुछ नहीं हो सकता। मेडे कॉल भी की जा चुकी है और वह बहुत तेजी से नीचे आ रहे हैं।

प्लेन अगर हाइट पर होता है तो बचाने के लिए कुछ समय मिलता है लेकिन प्लेन उतनी हाइट अचीव नहीं कर पाया था और ये एयरपोर्ट के 2 कि.मी. बाद जाकर ही फट गया था। तो उस वक्त जो है मिनिमम डिस्ट्रक्शन हो। प्लेन को कहां पर हार्ड लैंडिंग के लिए डायरेक्शन दी जा सके। इस पर पायलट का फोकस होता है और उसके साथ-साथ जो यात्री हैं उनको भी कहीं ना कहीं यह एहसास हो चुका होता है कि कुछ तो गड़बड़ है क्योंकि जो इसके लोन सर्वाइवर है उन्होंने यह कहा कि थोड़ी हाइट पे जाने के बाद ऐसा लगा उन्होंने एक आवाज सुनी और फिर सब कुछ थम गया। किसी तरह की कोई आवाज ही नहीं हो रही थी और हम नीचे की ओर जा रहे थे। तो ऐसी परिस्थिति में क्या पैसेंजर्स को इन्फॉर्म किया जाता है? एयरलाइंस का प्रोटोकॉल क्या कहता है? जिस वक्त पायलट को यह एहसास हो जाता है कि अब कुछ नहीं बचेगा।

वह अपने सारे एफर्ट्स लगा चुके हैं और फिर भी अंतिम सांस तक अपने एफर्ट्स को लगाने की पूरी कोशिश कर रहे हैं। तो ऐसे में जो क्रू मेंबर्स होते हैं पायलट की तरफ से उनको एक कॉल दिया जाता है। उसको कहा जाता है ब्रेस कॉल। ब्रेस एक पोजीशन होती है कि जब तेजी से फ्लाइट नीचे आती है या ऐसी परिस्थिति आती है तो ऐसे में पैसेंजर्स अगर इस पोजीशन में बैठे हैं तो उनकी रीड की हड्डियां टूट जाती हैं। तो ऐसे में पायलट की तरफ से कमांड आती है ब्रेस ब्रेस ब्रेस। यानी उसके बाद क्रू मेंबर्स की ड्यूटी होती है कि सभी पैसेंजर्स को वो ब्रेस पोजीशन में बिठाएं। ब्रेस पोजीशन एक ऐसी पोजीशन है जिसमें सीट के आगे के हिस्से को पकड़ कर और उस तरह झुक कर उनको बैठने के लिए कहा जाता है ताकि तेजी से अगर हार्ड लैंडिंग हो या प्लेन क्रैश हो तो कम से कम इस डिस्ट्रक्शन को बचाया जा सके। वरना गारंटेड उनकी रीड की हड्डियां टूट जाती हैं। तो इस ब्रेस कॉल को कब दिया जाता है? इ

सके बारे में भी मैंने एक्सपर्ट से बातचीत की। एयरलाइंस का प्रोटोकॉल क्या कहता है और क्या उन अंतिम क्षणों में एयरलाइंस की तरफ से क्या यह बता दिया जाता है कि अब कुछ नहीं बचेगा। कुदरत का करिश्मा है। मैं आपको ये बताऊं 11 ए सीट पर बैठे हुए यात्री अपनी जान बचा सके। उन्होंने जैसे आपने बोला एक आवाज सुनाई दी। तो मैं यह कहूंगा कि एक जहाज जो कि बोइंग 787 जितना विशाल जहाज अंदर बैठे हुए यात्रियों को इसका अनुमान लगाना बहुत मुश्किल है। हां आप खिड़की से बाहर देख सकते हैं। आपको बारिश का अनुमान लग जाता है।

खराब मौसम का अनुमान लग जाता है। बट कॉकपेट के अंदर की जो कहानी है वो सिर्फ वो पायलट्स जानते हैं। यात्रियों को नहीं पता लग पाता। अगेन मैं ये बोलूंगा कैबिन00:03:43 क्रू बहुत ट्रेंड होती हैं। अगर ये अगेन ये सीवीआर में निकल के आएगा। अगर कोई पायलट की तरफ से कॉकपेट के अंदर से कोई कॉल आउट आया हो टुवर्ड्स दी पैसेंजर्स टुवर्ड्स दी कैबिन क्रू ये इन्वेस्टिगेशन के बाद निकलेगा। क्या शायद उन्होंने ब्रेस ब्रेस ब्रेस का एक कॉल आउट दिया हो कि जब जहाज ब्रेस एक ऐसी पोजीशन है कि जब जहाज नीचे जा रहा है। अगेन ऐसे सिचुएशन में जब आप आउट ऑफ कंट्रोल हो रहे हैं तो कैबिन क्रू के पास एक ट्रेनिंग दी जाती है। कैबिन क्रू वन ऑफ द मोस्टेंट यू नो हमारे हम कहते हैं दे आर आर आईज एंड इयर्स इन द कैबिन एज अ पायलट।

वह एक सिचुएशन को डील करने के लिए उनको एक ट्रेनिंग दी जाती है। वह पैसेंजर्स को अपने हाथ नीचे करके एक कुशनिंग इफेक्ट देने के लिए बॉडी को जब एक बड़ा इंपैक्ट होता है तो आपकी रीड की हड्डी आपकी शरीर को एक स्टेबिलिटी मिले तो आपको सीट पकड़ने के लिए बोलते हैं। उन आपको नीचे झुकने के लिए बोलते हैं। उसको ब्रेस्ट पोजीशन कहते हैं। सो दैट इन टर्म्स ऑफ अ ह्यूज इंपैक्ट द बॉडी डस नॉट सफर दैट मच। तो ये सारी चीजें निकल के बैक बोन भी टूट सकती है। बिल्कुल। क्या ये सही है? बिल्कुल बिल्कुल इसीलिए वो ब्रेस पोजीशन बनवाई जाती है।00:04:49 ब्रेस पोजीशन बनवाई जाती है। जी ओके कुछ खास निर्देश दिए जाते हैं क्योंकि दोनों पायलट्स को पता चल चुका है कि सिचुएशन उनके हाथ से निकल गई है। जो पीछे यात्री हैं या वो खुद हैं वो इस वक्त ग्रेव डेंजर में हैं। तो क्या कोई ऐसे निर्देश होते हैं जो दिए जाते हैं या कोई कुछ अनाउंस किया जाता है या लोगों को भी इस बात का आभास कराया जाता है कि अब उन्हें क्या फेस करना है। जी अगेन मैं ये बोलूंगा इस इस सिचुएशन की अगर हम बात करें जो कि एयर इंडिया 171 की बात करूं। टाइम बहुत कम था । जी पायलट अपनी तरफ से पूरी कोशिश कर चुका होएगा। उसने कॉल आउट दी नहीं दी। अगेन मैटर इन्वेस्टिगेशन है। बट द फर्स्ट प्रायोरिटी इज टू टेक कंट्रोल ऑफ दी मशीन।

हम हमें सिखाया जाता है तीन चीज फ्लाई, नेविगेट एंड कम्युनिकेट। इस प्रायोरिटी पे आप चलते हैं। पहले आप जहाज को फ्लाई करते हैं। उसके बाद आप ईटीसी को बात करते हैं, नेविगेट करते हैं। फिर आप कम्युनिकेट करते हैं। जी। यू नो ये सारी चीजें करने के लिए एक सीक्वेंस बनाया जाता है पायलट्स। दे आर हाईली ट्रेंड इंडिविजुअल्स प्रोफेशनल्स जो कि ये सारे प्रोटोकॉल्स फॉलो करते हैं। सिमिलरली कैबिन क्रू को भी अगर इन मिल गई00:05:47 हो फ्रॉम द कैप्टन तो वो भी अपने एक एसओपीस फॉलो करते हैं। एयर इंडिया आफ्टर क्या लोगों को बता दिया जाता है। जी बिल्कुल बताना पड़ता है स्थिति में बिल्कुल बताना चाहिए। कैसे बताया जाता है? क्या कहना होता है?

एक कॉल आउट होती है जो कि कैप्टन अंदर से पहले कैबिन क्रू को दिया जाता है कि ब्रेस ब्रेस ब्रेस कि आप टच डाउन जब आपका जहाज नीचे जा रहा होता है उससे पहले आपको एक कॉल आउट देनी मैंडेटरी है यू नो एस पर द डीजीसीए रूल्स आल्सो कि आपको बताना पड़ेगा टू द कैविंग क्रू एंड टू दी पैसेंजर्स आपको पब्लिक एड्रेस सिस्टम जो पीए सिस्टम कहते हैं उसको दबा के बताना पड़ेगा कि अब जहाज नीचे जाने वाला है। नाउ अगेन दीज़ आर दी एसओपीस जो हम कहते हैं स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर्स इन द ऐसी फर्टिलिटीज जब होती है ऐसे एक्सीडेंट्स होते हैं इसको बायपास किया नहीं किया दिस इज़ अगेन अ मैटर ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन।

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