भारत में इन दिनों एक फिल्म काफी चर्चा में है। नाम है धुरंधर। फिल्म की कहानी कुछ ऐसी है जिसमें एक जासूस दुश्मन देश में घुसकर का सफाया करता है। लेकिन अब जो हम आपको बताने जा रहे हैं वो किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है बल्कि हकीकत में घट रही एक ऐसी कहानी है जिसने सबको सोचने पर मजबूर कर दिया है।
पाकिस्तान में पिछले कुछ सालों से एक के बाद एक बड़े-बड़े आतंकी चेहरों पर हमले हो रहे हैं। और सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि हर बार हमलावर अज्ञात रहते हैं। कोई बाइक पर आता है। करीब से चलती हैं और फिर हमलावर हवा में गायब हो जाते हैं। ना कोई संगठन जिम्मेदारी लेता है, ना कोई आधिकारिक बयान आता है।
यही वजह है कि यह पूरा मामला अब एक रहस्य बन चुका है। सवाल उठता है क्या वाकई कोई धुरंधर है जो पाकिस्तान में घुसकर चुन-चन कर आतंकियों को खत्म कर रहा है? और यह सवाल फिर से इसलिए उठ रहा है क्योंकि हाल ही में लश्कर तैयबा के सह संस्थापक आमिर हमजा पर हमला हुआ है। लाहौर में हुए इस हमले में बाइक सवार हमलावर आए। फायरिंग की और फरार हो गए। फिलहाल आमिर हमजा घायल बताया जा रहा है और उसका इलाज चल रहा है। लेकिन यह कोई पहली घटना नहीं है।
अगर पिछले दो से तीन सालों का रिकॉर्ड देखें तो यह सिलसिला अब इतना लंबा हो चुका है कि इसे महज इत्तेफाक नहीं कहा जा सकता। लश्कर तबा, जैश-ए-मोहम्मद और हिजबुल मुजाहदीन जैसे संगठनों से जुड़े कई बड़े नाम एक-एक करके इसी तरह मारे जा चुके हैं। कभी लाहौर, कभी कराची तो कभी पीओके हर जगह एक जैसा पैटर्न। करीब से मारना और तुरंत फरार हो जाना। इससे एक बात तो साफ नजर आती है कि कोई आम वारदात नहीं है बल्कि किसी संगठित नेटवर्क का काम हो सकता है। अब सवाल यह है कि यह नेटवर्क है कौन? क्या यह आतंकियों के बीच आपसी है या फिर कोई बाहरी ताकत पाकिस्तान के अंदर एक्टिव हो चुकी है?
पाकिस्तान की एजेंसियां भी अब तक इस सवाल का कोई साफ जवाब नहीं दे पाई हैं। कई मामलों में तो पुलिस सिर्फ अज्ञात हमलावर कहकर केस बंद कर देती है। जिससे यह शक और गहरा हो जाता है कि या तो जांच कमजोर है या फिर सच्चाई को छुपाया जा रहा है। अब जरा आपको बताते हैं कि आखिर किन-किन बड़े नामों को इस अज्ञात बंदूकधारी ने निशाना बनाया है। साल 2022 में मिस्री जाहूर इब्राहिम जो IC 814 हाईजैकिंग से जुड़ा हुआ नाम था उसे कराची में मार दिया गया। फिर 2023 में अबू कताल सिंधी जो लश्कर तैयबा का सक्रिय सदस्य था उसे झेलम में गोली मार दी गई। इसी साल शाहिद लतीफ जिसे पठानकोट हमले का मास्टरमाइंड माना जाता था उसे सियालकोट में मार गिराया गया। मुफ्ती कैसर फारूक जो हाफिज सईद का करीबी था उस पर कराची में हमला हुआ और बाद में उसकी हो गई। परमजीत सिंह पंजर ख़स्तान कमांडो फ़ोर्स का प्रमुख उसे लाहौर में वॉक के दौरान मार दी गई। फिर अकबर खान गाजी लश्कर का कमांडर नवंबर 2023 में मारा गया। ख्वाजा शाहिद जो पीओके में सक्रिय था उसे अगवा किया गया और बाद में उसका सिर कटा मिला और अब 2025 और 2026 में भी यही सिलसिला चल रहा है।
मोहम्मद ताहिर अनवर जो मसूद अजहर का भाई बताया जाता है संदिग्ध परिस्थितियों में उसकी मौत हो गई और अब आबिर हमजा पर हमला यानी साफ है यह कोई एक-दो घटनाएं नहीं है बल्कि एक पूरा पैटर्न बन चुका है जिसमें टारगेट वही लोग हैं जो किसी ना किसी तरीके से आतंकवाद से जुड़े हैं या भारत में वांटेड रहे हैंI इन घटनाओं ने पाकिस्तान के सुरक्षा तंत्र पर भी बड़े सवाल खड़े कर दिए। क्या वहां की एजेंसियां इतनी कमजोर हो गई हैं कि उनके ही देश में कोई लगातार ऐसे हमले कर रहा है और उन्हें भनक तक नहीं लग रही या फिर कहानी में कुछ और भी है जो सामने नहीं आ रहा।
फिलहाल इन अज्ञात हमलावरों की पहचान आज भी एक रहस्य बनी हुई है। लेकिन उनके निशाने और उनके टारगेट दुनिया भर में चर्चा का विषय बन चुके हैं। और सबसे बड़ा सवाल क्या यह महज इत्तफाक है या फिर कहीं सच में कोई धुरंधर है जो चुपचाप अपना मिशन पूरा कर रहा है?
