फिल्म इंडस्ट्री में मोस्ट ईगोइसिस्टिक लोग कौन है? उसकी लिस्ट में सबसे टॉप पर नाम आता है राजकुमार साहब का। हां, अभी के कुछ सुपरस्टार्स का भी नाम आता है। लेकिन इन सब से भी अगर सबसे ज्यादा कोई ईगोइसिस्टिक है तो वो थे ओपी नयर। और उन्होंने तो ऐसी-ऐसी चीजों पर ईगो रखी है कि उनकी कहानियां काफी मशहूर है।
वेल यह तो सब जानते हैं कि ओपी नयर का लता जी से 36 का आंकड़ा था और उन्होंने लता मंगेशकर के साथ कभी भी काम नहीं किया और प्रूफ किया कि बिना लता भी अच्छा म्यूजिक बन सकता है। वहीं दूसरी तरफ जब आशा भोसले से उनके संबंध खराब हो गए और उनका आशा भोसले के साथ ब्रेकअप हो गया तब ओपी नयर ने आशा भोसले को भी रिप्लेस कर दिया था वाणी जयराम और कृष्णा काले से। इनफैक्ट लिरिसिस्ट कवि प्रदीप के साथ तो उनका एक किस्सा इतना मशहूर है कि 1969 में जब ओपी नयर फिल्म संबंध के लिए म्यूजिक बना रहे थे तो कवि प्रदीप ने इस फिल्म के गाने लिखे थे।
लेकिन ओपी नयर को प्रदीप की शक्ल पसंद नहीं थी। यही वजह है कि प्रदीप से वो कभी मिलते नहीं थे। प्रदीप से अगर गाने मंगाने होते तो वो अपने किसी आदमी को भेज देते थे। या फिर प्रदीप अपने किसी आदमी को भेजकर वो गाने ओपी नयर तक पहुंचा देते थे। लेकिन ओपी नयर कभी भी प्रदीप से फेस टू फेस नहीं मिलना चाहते थे। इसी संबंध फिल्म का एक गाना है चल अकेला जो बहुत ही मशहूर गाना है और आज भी इस गाने को बहुत पसंद किया जाता है। कवि प्रदीप ने जब इस गाने को लिखा था तो उन्होंने इच्छा जताई थी कि वो इस गाने को गाना चाहते हैं। जब ओपी नयर को प्रोड्यूसर ने यह बात कही कि कवि प्रदीप इस गाने को गाना चाहते हैं तो उस दिन वो बिना कुछ बोले वहां से चले गए। रात भर में उन्होंने घर पर बैठकर इस गाने की धुन बनाई और फिर धुन उन्होंने प्रोड्यूसर को सुनाई और कहा कि चल अकेला गाना इस गाने में मुकेश की आवाज बहुत सही सूट होगी। कवि प्रदीप की आवाज सूट नहीं होगी। प्रोड्यूसर को भी आईडिया सही लगा और प्रोड्यूसर मान गया और इस तरह से उन्होंने यह गाना कवि प्रदीप को नहीं गाने दिया। सिर्फ इसलिए क्योंकि वो कवि प्रदीप की शक्ल नहीं देखना चाहते थे। हालांकि वो उन्हें रिस्पेक्ट बहुत करते थे। और ओपी नयर की ईगो का सबसे ज्यादा मशहूर किस्सा है मोहम्मद रफी साहब के साथ। नो मोहम्मद रफी नो ओपी नयर म्यूजिक। यह कोट ओपी नयर एक टाइम पर मोहम्मद रफी के लिए किया करते थे। उनका हर गाना वो मोहम्मद रफी से ही गवाते थे। लेकिन एक बार ईयर 1966 में जब मोहम्मद रफी को ओपी नयर के लिए गाना गाना था। रिकॉर्डिंग के लिए स्टूडियो में सब मोहम्मद रफी का इंतजार कर रहे थे।
तो मोहम्मद रफी 1 घंटा लेट पहुंचे। मोहम्मद रफी के आने के बाद रिकॉर्डिंग शुरू हुई। लेकिन इसी बीच जब ब्रेक हुआ तो किसी ने मोहम्मद रफी से पूछा कि आज आप लेट क्यों हो गए? तो मोहम्मद रफी ने बताया कि वो शंकर जयकिशन के यहां रिकॉर्डिंग कर रहे थे और उनकी रिकॉर्डिंग में थोड़ा टाइम लग गया। इसीलिए वो यहां पर आने में लेट हो गए। ओपी नयर ने जब यह बात सुनी तो वो बहुत ज्यादा खफा हो गए। उनका यह कहना था कि शंकर जयकिशन के लिए गा रहे थे। इसीलिए तुमने मेरी रिकॉर्डिंग लेट की।
अब मुझे तुम्हारे साथ रिकॉर्ड नहीं करना। ओपी नयर ने उसी दिन मोहम्मद रफी को स्टूडियो से जाने के लिए बोल दिया और उसके बाद उन्होंने मोहम्मद रफी के साथ लंबे समय तक काम नहीं किया। अब सवाल यह उठता है कि जब मोहम्मद रफी से वो गाना नहीं गवा रहे थे तो वो गाने जो मोहम्मद रफी गाते थे वो कौन गा रहा था? तो उसकी जगह उन्होंने रिप्लेस किया महेंद्र कपूर से।
महेंद्र कपूर मोहम्मद रफी की तरह ही साउंड करते थे और उन्हीं के डिसाइपल थे। यही वजह है कि मोहम्मद रफी को उन्होंने रिप्लेस किया महेंद्र कपूर से और उन्होंने दो-चार साल तक कई फिल्मों के गाने महेंद्र कपूर से ही गवाए जिसमें यह रात फिर आएंगी, बहारें फिर आएंगी, सावन की गटा जैसी फिल्मों में उन्होंने महेंद्र कपूर से ही गाना गवाया। हालांकि मोहम्मद रफी के साथ जब ओपी नयर काम करते थे तो उनके कॉम्बिनेशन के म्यूजिक को बहुत पसंद किया जाता था और सॉन्ग्स बहुत ट्रेंड सेटर होते थे। लेकिन महेंद्र कपूर के साथ वह सक्सेस नहीं मिल रही थी।
फिर भी ओपी नयर महेंद्र कपूर के साथ काम करते रहे। इसके कुछ सालों बाद कहीं पार्टी में ओपी नयर की मुलाकात मोहम्मद रफी से हुई और मोहम्मद रफी उनके पास आए। उनसे गले मिले और कहा कि आजकल आप अपने गानों के लिए मुझे याद नहीं करते। वहां से इन दोनों के बीच की जो कड़वाहट थी वो खत्म हो गई और उसके बाद ओपी नयर ने फिर से मोहम्मद रफी के साथ काम करना शुरू कर दिया। और इस इंसिडेंट के बारे में उन्होंने अपने एक इंटरव्यू में भी जिक्र करते हुए कहा था कि मैंने लता के साथ काम नहीं किया। इस बात का मुझे घमंड है। लेकिन मोहम्मद रफी के साथ जो मेरी दूरियां हुई थी उस बात का मुझे रिग्रेट है। मुझे लगा था कि मोहम्मद रफी के बिना मेरा काम चल जाएगा और मैं महेंद्र कपूर के साथ हिट म्यूजिक दे पाऊंगा।
लेकिन मोहम्मद रफी जैसा कोई नहीं। नो मोहम्मद रफी नो ओपी नयर म्यूजिक। यह उन्होंने अपने आखिरी इंटरव्यू में कोट किया था। और ओपी नयर की मोहम्मद रफी साहब के साथ इतनी लॉयल्टी थी कि झगड़े के बाद जैसे ही वो दोनों मिले तो उसके बाद फिर से ओपी नयर ने अपने सारे गाने मोहम्मद रफी के साथ ही गवाए। उन्होंने महेंद्र कपूर से एक भी गाना उसके बाद नहीं गवाया। हां, बाद में जब रफी साहब की हो गई, तो फिर से उन्होंने महेंद्र कपूर के साथ काम करना शुरू किया। वरना झगड़ा सुलझने के बाद उन्होंने मोहम्मद रफी के जीते जी कभी महेंद्र कपूर के साथ फिर काम नहीं
