अहमदाबाद विमान हादसे को हुए अब कुछ दिन बीत चुके हैं लेकिन जिन परिवारों ने अपनों को इस हादसे में खोया है उनके लिए हर गुजरता लम्हा जैसे एक जिंदा कब्र बन गया है। जख्म है जो ना भरते हैं और यादें हैं जो चैन नहीं लेने देती। मरे हुए लोगो की आत्मा की शांति के लिए हर धर्म के लोग अपने-अपने रीति-रिवाज से प्रार्थना कर रहे हैं। सोमवार की शाम क्रैश साइट के बाहर एक मुस्लिम परिवार आकर पुलिस से कुछ मांग करता है। नहीं कोई न्याय की गुहार नहीं, कोई सवाल नहीं। सिर्फ एक भावनात्मक विनती। हमें वहां जाने दीजिए।
हमें एक रस्म पूरी करनी है। आज तीजा है। यह वही जगह थी जहां उनका पूरा परिवार जावेद, उनकी पत्नी मरियम और दो मासूम बच्चों ने अपनी आखिरी सांसे ली थी। जावेद की मौसी ने कहा, हमारे पास अब खोने को कुछ नहीं बचा। हम बस उस जगह बैठकर दुआ मांगना चाहते हैं ताकि जावेद की आत्मा को और शायद हमें भी थोड़ी शांति मिल जाए। दरअसल, जावेद अली का परिवार अपनी मां से मिलने के लिए मुंबई आया था।
वह A171 विमान से लंदन वापस जा रहा था। जिसमें जावेद, उसकी पत्नी मरियम और दो बच्चों की मौत हो गई। परिजनों का रो-रो कर बुरा हाल है। शायद उस दिन वर्दी के पीछे छुपा दिल00:01:04 भी पसीज गया था। पुलिस ने उस परिवार को रोकने के बजाय इजाजत दी। जाइए अपनी रस्म पूरी कराइए और यही वह पल था जब इंसानियत ने फिर एक बार इंसाफ से पहले जगह बना ली।
उन्होंने कहा कि तीजा की एक रस्म होती है जिसमें मृतकों की आत्मा की शांति के लिए हम दुआ मांगते हैं। हम बस दुआ मांगने आए थे। हमने सोचा जिस जगह पर जावेद का इंतकाल हुआ है, उसी जगह पर बैठकर अगर हम दुआ मांगेंगे तो शायद हमारी दुआ कबूल होगी और हमें भी शांति मिलेगी कि हमने जावेद के लिए कुछ तो किया। जिनकी जिंदगी 300 फीट की ऊंचाई से कुछ ही सेकंड में मिट्टी में मिल गई। उनके लिए अब लोग धरती पर बैठकर दुआ कर रहे हैं।
हर धर्म, हर समुदाय के लोग, कोई मंदिर में, कोई मस्जिद में तो कोई गुरुद्वारे में प्रार्थना कर रहा है। क्योंकि मौत किसी मजहब की नहीं होती और आंसू इंसान के होते हैं। दरअसल अस्पताल प्रशासन के मुताबिक लगभग 100 ऐसे लोग हैं जिनका डीएनए सैंपल मैच कर लिया गया है। बावजूद उसके अभी 150 से ऊपर डीएनए सैंपल ऐसे हैं जिनका मैच होना बाकी है। यही वजह है कि अस्पताल प्रशासन का कहना है कि इस पूरे काम में थोड़ा वक्त लग रहा है।
कई परिवार ऐसे हैं जिनमें एक से अधिक सदस्य हैं। उन्होंने यह तय किया है कि जब सभी सदस्यों का डीएनए मैच हो जाएगा तो उन सभी का शव एक बार ही लिया जाएगा। यह सिर्फ एक हादसा नहीं था। यह सैकड़ों कहानियों का अनसुना अंत था और अब इन कहानियों में सिर्फ नाम बचे हैं। बाकी सब राग बन चुका है।
