ईरान यु!द्ध से अमेरिका हुआ कमजोर ह!थि- यारों की कमी से सेना संकट में

ईरान और अमेरिका के बीच को 2 महीने होने वाले हैं। इतना लंबा सैन्य संघर्ष अमेरिकी अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। थर्ड नहीं 13 डिग्री का केस है। माल मैंने ही चुराया है। बल्कि नहीं चुनवाया। हवालात की हवा अच्छे अच्छों को सुधार देती है।

इस ने अमेरिका की तैयारी, के भंडार और उत्पादन क्षमता की असली तस्वीर उजागर कर दी है। ट्रंप को लग रहा था कि वह ईरान के सुप्रीम लीडर की कर उसे घुटनों पर ला खड़ा करेंगे। इसके उलट ईरान ने अमेरिका के जट्स को मार गिराया और हुरमूज बंद करके अमेरिका को आर्थिक तंगी में धकेल दिया। विशेषज्ञों के मुताबिक इस से अमेरिका ने बड़ी संख्या में महंगे और अत्याधुनिक का इस्तेमाल किया जिससे उसकी क्षमता अब और कमजोर होती जा रही है और आर्थिक कमजोरी की वजह से उसका प्रोडक्शन भी कम हो गया है।

ऐसे में अब अगर इस में कोई नया मोड़ आता है तो यह अमेरिका को काफी मुश्किल में धकेल सकता है। आइए इस बारे में आपको विस्तार से बताते हैं। भारी मात्रा में मिसाइलों का इस्तेमाल है। आपको बता दें अमेरिका ने ईरान के खिलाफ 1000 से ज्यादा टॉम हॉक ट्रूज दागी। इसके अलावा करीब 1100 हवा से सतह पर मार करने वाली स्टेल्थ भी इस्तेमाल की गई। यह बहुत महंगी होती हैं और इन्हें बनाने में महीनों का समय लगता है। अमेरिका हर साल इनका उत्पादन सीमित संख्या में करता है।

इसलिए इतनी बड़ी संख्या में के इस्तेमाल से उसके भंडार में तेजी से कमी आ गई है। इसी तरह ईरानी हमलों को रोकने के लिए अमेरिका ने लगभग 1200 पेट्रियट इंटरसेप्टर भी फायर की। आपको बता दें एक पेट्रिएट की कीमत करीब $40 लाख यानी कि लगभग $33 करोड़ बताई जाती है। यानी कि अमेरिका का ईरान पर हमला उसके लिए काफी घातक बन गया है। अब इतनी बड़ी संख्या में इन को दोबारा बनाने में उसे महीनों का वक्त लगेगा। पर खर्च रोजाना करोड़ों डॉलर।

दोस्तों इस में अमेरिका ने ईरान में करीब 13,000 ठिकानों पर हवाई हमले किए। पूरे 40 दिनों के ऑपरेशन पर अनुमानित खर्च 28 से 35 अरब डॉलर यानी कि लगभग 2.3 लाख करोड़ तक का खर्च आया है। यानी रोजाना औसतन $1 अरब डॉलर जो भारतीय रुपए में करीब ₹830 करोड़ बैठता है।

यहां आपको बता दें अमेरिका ने जिस तेजी से शुरुआती दो दिनों में ईरान पर हमले किए उसका खर्च लगभग $5.6 अरब डॉलर का था। इतना खर्च कई देशों की अर्थव्यवस्था के बराबर है। ईरान ने किया था अमेरिकी ठिकानों पर हमला। के दौरान पश्चिम एशिया में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को भी काफी नुकसान पहुंचा है।

अमेरिका को हथियार और उपकरण की आपूर्ति के लिए एशिया और यूरोप के अन्य ठिकानों से संसाधन मंगाने पड़े थे। इससे चीन और रूस जैसे बड़े दुश्मनों के खिलाफ अमेरिका की सैन्य तैयारियों में असंतुलन पैदा होने की आशंका बढ़ गई है।

दोस्तों जितना नुकसान अमेरिका को इस से हुआ है उसकी जितनी और जेट हुए हैं उनको बनाने में कई साल लग सकते हैं। पेंटागन पर बढ़ता दबाव। पेंटागन ने अभी तक इस्तेमाल हुए की सटीक संख्या सार्वजनिक नहीं की है। लेकिन उपलब्ध आंकड़े साफ बताते हैं कि इस 40 दिनों में अमेरिका की हालत ईरान ने बहुत ज्यादा खराब कर दी है।

उसकी सैन्य और उत्पादन क्षमता की सीमाओं को दुनिया के सामने उजागर कर दिया है। अब पेंटागन ने लॉक हीट मार्टिन जैसी कंपनियों को थॉट जैसे इंटरसेप्टर सिस्टम के उत्पादन के आदेश दे दिए हैं। उनका लक्ष्य है कि उत्पादन की गति अब कई गुना बढ़ाई जाए। दोस्तों, यह संघर्ष अमेरिका को यह सबक दे गया है कि आधुनिक में सिर्फ ताकत ही काफी नहीं होती बल्कि हथियारों की पर्याप्त स्टॉक और तेज उत्पादन की क्षमता भी बहुत जरूरी होती है।

Leave a Comment