मौ!त से कुछ सेकंड पहले का लाइव विडियो आखिरी सांस तक… मां ने लाडले को सीने से लगाए रखा

यह जबलपुर क्रूज हादसे के कुछ सेकंड पहले की वीडियो है। जब क्रूज डूबने वाली थी उससे कुछ सेकंड पहले जो यात्री थे उन्होंने यह वीडियो बनाई थी। उसमें देखिए एक मां अपने बेटे को लेकर बैठी है आराम से। इन्हें नहीं पता कि कुछ सेकंड बाद यह बोट डूबने वाली है और इन सबकी जान चली जाएगी।

अब तक नौ लोगों की हो चुकी है और अभी भी चार से ज्यादा लोग जो है लापता हैं। यह पहली वीडियो थी और साफ-साफ दिशा निर्देश है कि बिना सेफ्टी जैकेट के आप ट्रैवल नहीं कर सकते। आप नहीं घूम सकते। और यह दूसरी तस्वीर देखिए। यह दूसरी तस्वीर उस वक्त की है जब यह नाव डूबने लगी थी। जब ये फ्रूट शिप डूबने लगी थी तब लोगों को लाइव जैकेट बांटा जा रहा था। लाइफ जैकेट बांटा जा रहा था। उसके साथ-साथ वीडियो भी बनाई जा रही थी। यह तस्वीरें दोनों तस्वीर देखिए।

पहली तस्वीर इसमें देखिए कैसे आराम से लोग जो हैं हंस खेल रहे हैं वीडियो बना रहे हैं। सेम ऐसा ही सिचुएशन मथुरा में था। मथुरा वाले केस में भी आराम से लोग बैठे थे। भजन कीर्तन कर रहे थे। वीडियो बना रहे थे। लोगों को नहीं पता था क्या कुछ होने वाला है। लेकिन यहां एक शख्स ने नोटिस किया था तेज हवाओं को। उसने वहां के जो कैप्टन है शिप के क्रूस के उन्हें बताया था कि तेज हवाएं चल रही है। आप वापस से किनारे की तरफ ले जाओ। लेकिन कैप्टन ने उसकी बात को नजरअंदाज कर दिया। जिसके बाद तेज हवाएं आई और शिप डगमगा गई।

जैसे ही पानी में डूबने वाली थी, लोगों ने चिल्लाना शोर मचाना शुरू कर दिया। तब इन्होंने लाइफ जैकेट जो पैक था, उसे खोलकर एक-एक लोगों को बांटने लगे। एक बार ये पूरी तस्वीर देखिए। दोबारा एक बार तस्वीर देखिए। दिया आपने उस बोट की तस्वीर देखी। कैसे लोग उसमें बैठे हैं। आपने एक चीज नोटिस की होगी कि उसमें एक मां अपने बच्चे को लेकर बैठी है। वो चार साल का बच्चा है और 40 साल की मरीना अपनी फैमिली के साथ घूमने आई थी। दिल्ली से इनकी फैमिली जो है वो घूमने आई थी।

अब इन्हें लाइफ जैकेट दिया जा रहा था। तो लाइफ जैकेट जब इस मां ने मरीना ने पहना तो उसमें अपने बच्चे को भी घुसा लिया कि बच्चा बच जाए और दोनों की मौत हो जाती है। दोनों डूब जाते हैं। यह तस्वीर इतनी विचलित करने वाली है कि मैं आपको वो तस्वीर तो नहीं दिखा सकता लेकिन मैंने वो तस्वीर देखी और मैंने उस मां की ममता देखी कैसे उस मां ने अपने बच्चे को बचाने की पूरी कोशिश की।

मां के सीने से लिपटा रहा और बकायदा जब शिप डूब रही थी तो शिप के साथ मां बेटे दोनों डूब गए। अब यह फोटो हर जगह वायरल है और हर कोई यह फोटो देखकर यह कह रहा है कि यह सिस्टम की लापरवाही है सही से प्रोटोकॉल्स का फॉलो नहीं किया गया। यह नेचुरल डिजास्टर नहीं है कि ये प्राकृतिक आपदा है ना। ये सरासर चूक है। और चूक किसकी है? जो क्रूज की कम जो क्रूज मालिक है उसकी कंपनी की है उसकी भी जिम्मेदारी बनती है।

जिसकी जिसके पास ये डिपार्टमेंट है वहां सिक्योरिटी लैप्स हो रहा है। प्रोटोकॉल्स का लैप्स हो रहा है। उनकी जिम्मेदारी है। वहां डीएम, एसडीएम जो लोगों की निगरानी में ये सब कुछ होना था उनकी जिम्मेदारी है। लेकिन जिम्मेदारी लेने वाला कोई नहीं है। अब हादसा हो गया तो सब इसे हादसा बोल रहे हैं और ये बोल रहे हैं कि इस हादसे की जांच होगी। जांच क्या होगी? साफ-साफ चीजें पता चल रही है। कैसे? कुछ सेकंड पहले आप लाइफ जैकेट पहना रहे हो लोगों को। आपने पहले लाइफ जैकेट नहीं दी। और एक और चीज थी कि कुछ लोग जो है वो कह रहे हैं कि हमने बताया था कि तेज हवा चल रही है। आप बोट साइड पर ले लीजिए। लेकिन कैप्टन ने हमारी सुनी नहीं।

यहां तक कि जो रिपोर्ट्स हैं यानी जो वेदर रिपोर्ट्स हैं उनको भी जो है दरकिनार कर दिया गया और मेटोलॉजिकल का जो डाटा बताता है कि विंड स्पीड 60 से 70 किमी पर आवर की स्पीड से चल रही थी।

ऐसे में जब इतनी स्पीड में तेज हवा चल रही थी तो आपको क्या इसका पहले से अंदाजा नहीं था? क्या आपको इसकी इंफॉर्मेशन नहीं थी? क्या आपने उस इंफॉर्मेशन को नजरअंदाज किया? ऐसी कंपनी के खिलाफ स्ट्रिक्ट एक्शन अभी तक क्यों नहीं लिया गया? अभी तक जांच ही हो रही है। मतलब आप पहले से मान के चल रहे हैं कि यह नेचुरल डिजास्टर है। प्राकृतिक आपदा है। ये एक नॉर्मल एक्सीडेंट है। मथुरा में 10 से ज्यादा लोग मर जा रहे हैं।

जबलपुर में नौ लोग मर जा रहे हैं। लेकिन इंसानी जान इतनी सस्ती है हमारे देश में कि उसके लिए कोई कुछ बोलने वाला नहीं। एक धनराशि बाद में दे दी जाती है कि जो लोग मृत हो जिनके घर में मृत लोग हैं जो लोग इस हादसे में अपनी जान गवा बैठे हैं उन लोगों को कुछ पैसे दे दिए जाए लेकिन क्या उनकी कमी वो पैसा पूरा कर सकता है नहीं और ये पूरा परिवार देखिए इसमें जो आधे से ज्यादा लोग थे वो दिल्ली से थे कुछ लोग जबपुल के ऑर्डिनेंस फैक्ट्री की फैमिलीज़ थी जो ऑर्डिनेंस फैक्ट्री में काम करते थे आसपास के ही लोग थे एक जो शख्स है वो तमिलनाडु से थे एक भोपाल से थे तो ऐसे अलग-अलग जगहों से लोग छुट्टियां मनाने आए थे लेकिन फिर भी बहुत सारी जो सेफ्टी प्रोटोकॉल्स है उन्हें दरकिनार किया गया जिसके बाद यह हादसा इतना विकट रूप ले लिया और इतने सारे लोगों ने जान गवा दी। लेकिन पूरा मामला है क्या? शुरुआत से मैं आपको बताऊंगा। देखिए एमपी के जबलपुर में और जबलपुर से 40 कि.मी. दूर नर्मदा रिवर में बताया जाता है बारगी डैम है। और ये बहुत ही फेमस टूरिस्ट स्पॉट है।

अब एमपी टूरिज्म डिपार्टमेंट देखिए जो ये जो क्रूज चला रहे हैं ये कोई वहां के लोकल लोग नहीं है। मथुरा में तो लोकल लोग चला रहे लोकर गांव वाले। लेकिन यहां एमपी टूरिज्म डिपार्टमेंट ऑफिशियली क्रूज बोर्ड चलाती है। और सोचिए यह मतलब एक तरह से देखा जाए तो सरकारी परमिशन प्राप्त है इन लोगों को। अब नर्मदा का जो बैक वॉटर्स है वो देखने और उसे घूमने के लिए कई पर्यटक आते हैं और थर्सडे यानी 30 अप्रैल को भी लोग वहां आए थे और घूम रहे थे और शाम के 6:00 बजे होंगे। और करीब तकरीबन 40 से ज्यादा लोग थे उस ट्रिप पर और वो लोग घूमने निकले थे। बकायदा मैंने आपको पहले वीडियो दिखाई कि कैसे वो लोग वीडियो बना रहे हैं अच्छे से जो नदी का लुफ्त ले रहे हैं और इसके साथ एक कैप्टन थे दो क्रू मेंबर थे और ये लोग जो थे वो पूरे 40 से ज्यादा लोगों को संभाल कर लेकर जा रहे थे। अब कई रिपोर्ट्स में ये भी दावा किया जा रहा है कि ओवरलोडेड था।

लेकिन अभी तक इसकी कोई पुष्टि नहीं हुई है। जब तक हमारे पास कोई ऐसी करेक्ट इनफेशन नहीं आएगी तब तक मैं उस पे मोहर नहीं लगाऊंगा। आपको बताऊंगा नहीं। लेकिन फिर भी जो बाकी रिपोर्ट्स है मैंने उसका जिक्र किया। अब सुबह से शाम तक जो वेदर था वो नॉर्मल था। मौसम बहुत ही नॉर्मल था। लेकिन शाम के 6:00 बजे मौसम अचानक बदल गया। ऐसा लोगों का भी कहना है और डिपार्टमेंट का भी कहना है। अचानक से मौसम बदल गया। मेटोलॉजिकल डिपार्टमेंट का कहना है कि उनके डाटा के हिसाब से जो विंड स्पीड थी.

मतलब जो हवा की रफ्तार थी वो 60 से 70 कि.मी. प्रति घंटे की तेजी से बह रही थी। अब ऐसे में तेज हवा और एक तरह से पानी में मोशन आ गया और पानी में मोशन आया तो जो क्रूज था वो अपना संतुलन खो बैठा और ऐसे में क्रूज अचानक में पूरा डगमगा गया और वो पानी में उल्टा हो गया और डूबने से पहले की भी तस्वीर मैंने आपको दिखाई और ये डूबते वक्त की तस्वीर दिखा रहा हूं। डूब रहे थे और डूबने से कुछ सेकंड पहले देखिए ज्यादा टाइम नहीं होता। जब ऐसा कोई भी हादसा होता तो उसमें एक से 2 मिनट का समय होता और ऐसा ही कुछ था जब डूबने से पहले इन्होंने लोगों को लाइफ जैकेट बांध दी लेकिन जब तक लाइफ जैकेट बांध बांटी गई तब तक बहुत देर हो गया था.

और लोग जो है पानी में डूब गए थे और अब तक जो पैसेंजर्स हैं उनमें बताया जा रहा है कि नौ लोगों की अब तक मौत हो चुकी है। चार लोग अभी भी जो है वो गायब हैं और ये नदी के एकदम बीचोंबीच हुआ है और खमरिया आइसलैंड बताया जाता है। खमरी आइसलैंड के पास यह सब कुछ हुआ है और तभी भी हवा बहुत तेज़ चल रही थी। फिर रात को रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू हुआ। आसपास के लोग आ गए और वहां जो लोकल लोग थे वो आ गए। एसडीआरएफ की टीम आ गई और रात भर जो है 30 अप्रैल की रात को पूरी रात जो है रेस्क्यू ऑपरेशन चला। रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद 22 से 28 लोगों की जान बचाई जा बचाई गई और फ्राइडे की सुबह यानी 1 मई को जब आंकड़े निकले तो पता चला कि नौ लोगों की हुई है। अब सबसे बड़ा एलगेशन क्या है कि लाइफ जैकेट पहले से नहीं बांटे गए। दूसरा कि कैप्टन को बताया गया कि तेज हवा चल रही है। आप किनारे पर ले लिए चलिए लेकिन कैप्टन ने इनके बातों को नजरअंदाज किया। शिप का मेंटेनेंस नहीं हुआ है। ऐसी बात भी सामने आ रही है।

बताया जा रहा है कि प्रॉपर मेंटेन मेंटेन नहीं था शिप। शिप में खामियां थी और बताया जा रहा है कि जो मेटोलॉजिकल डिपार्टमेंट की तरफ से चेतावनी आती है उसको नजरअंदाज किया गया। अब इन सब कारणों पर जो है जांच बैठ गई है और खुद सीएम ने इसमें जांच के आदेश दे दिए। लेकिन सवाल एक है दिल्ली से एक पूरा परिवार आता है। मरीना मसीहा जो मां जिन मां की तस्वीर वायरल है। मधुर मसीहा प्रदीप कुमार फिर जबलपुर से नौ लोग थे। भोपाल से एक थे। शामीम नकवी तमिलनाडु से एक थे। इन लोगों का क्या कसूर है? ये तो आराम से घूमने आए थे और मरीना के घर वालों ने कैमरे पर क्या कुछ बताई पर वो भी सुनते हैं। सुनिए बाद में सब लोग मिसिंग थे।

सिस्टर का पता नहीं था कहां है वो। हम वेट कर रहे थे कि शायद बच जाएंगी। बच जाएंगी। जो नौका थी वो फ्लोट कर रही थी। हमें ये नहीं पता था कि वो बेचारी उसी के अंदर हैं। हमने सोचा कि शायद जो उन्होंने जैकेट पहनी थी और जहान को भी उसी के अंदर कर रखा था जो छोटा बेटा था। हो सकता है कि वो कहीं बह के कहीं इधर आसपास गए हो लेकिन उसके अंदर देखा नहीं किसी ने ढूंढा नहीं और सुबह जाके जब टीम आई है तब जाके उन्होंने वहां देखा है तो वो बेचारे उसी के अंदर थे उसी के अंदर फस गए बोट के अंदर फंस गए थे अगर टाइम रहते वहां पे पहुंच जाते जैसे शाम का टाइम था जो जब हम वीडियो में भी देख रहे थे कि वोट बोट जो है फ्लोट कर रही थी उस टाइम जाके उसमें देखते तो शायद वो उसमें मिलते और और लोग भी मिल पाते उसमें यानी लापरवाही तो है.

आपकी सर लापरवाही बिल्कुल है और जब यह हादसा हुआ उस टाइम जो वहां के गांव वाले जो लोग थे उन्होंने ही सारा रस्सी फेंक फेंक के बचाया। प्रशासन की तरफ से बहुत ही लेट बचाव की नौका वगैरह कुछ नहीं की। बचाव की नौका एक एक बोट आई थी वहां पे। मैं मैं वहां पे नहीं था। मैं नहीं कह सकता कैसे आई वहां पे कि जो घूम रहे थे वही थे कि कोई और आया था वहां पे। लेकिन उस टाइम जिन्होंने बचाया वो आसपास वाले ही थे। गांव वाले लोकल उन्होंने ही बचाया प्रशासन की तरफ से कोई भी बहुत देर में कारवाई हुई है सारी जितनी भी हुई है जो जैसे लोकल लोगों ने कुर्ती दिखा के उनको बचाने का प्रयास किया अगर वो एनडीआरएफ की टीम जो बचाव दल है वो अगर पहले आ जाता समय से जिस समय थोड़ा रोशनी भी उजाला भी था तो शायद बहुत सारे लोगों की जान बचाई जा सकती थी। ये मरीना के घर वाले थे और बहुत सारे चश्मदीद थे जो शिप पर थे और जो बाकी लोग जो हैं जो उनके घर वाले हैं वो भी आरोप लगा रहे हैं कि कैप्टन ने कहीं ना कहीं बात नहीं सुनी और सेफ्टी मेजर्स का ध्यान नहीं दिया गया। एक बार उन्हें भी सुनते हैं। कुछ भी नहीं दिया था। सेफ्टी भी कुछ भी नहीं थी। जब वो डूब रहे थे जहाज पलट गया था। तब मेरे ब्रदर इन लॉ ने लाइफ जैकेट लेके फेंक के दी है कि आप ये लो बचो। मेरी सिस्टर इन लॉ थी। उनका चार साल का बेटा था। उसमें ही उसको फंसाया था सेट करने के लिए कि बचो किसी तरह से। उस उस क्रूस वाले ने सिर्फ पैसे के लिए उसको नहीं सुनी। किसी की को गांव वालों ने बोला था कि तूफान आने वाला है। मत चलाओ इसको आगे बीच में मत ले जाओ। लेकिन उसने नहीं सुनी। किसी की नहीं सुनी। सब कुछ खत्म हो गया।

मेरे परिवार से तीन लोग जा चुके हैं। मेरी मम्मी चली गई। मेरी नैना चली गई। चार साल का बेटा चला गया। वो बहुत जोर से चिल्लाने लगी। 5:30 से 6 बजे का टाइम होगा। तो मैंने पूछा क्या हो गया? उनका फोन आया। वो ऐसे बोल रही है कि मुझे बचा लो प्रेयर करो मेरे लिए और शिप डूब रहा है। कह रहा बेटा मम्मी तो नहीं है यहां। चली गई। नहीं बचा। लापरवाही बिल्कुल है और जब यह हादसा हुआ उस टाइम जो वहां के गांव वाले जो लोग थे उन्होंने ही सारा रस्सी फेंक फेंक के बचाया प्रशासन की तरफ से बहुत ही लेट इस वक्त हम लोग दिल्ली के मायापुरी इलाके में मौजूद हैं। यहां पर हम उसी फैमिली के पास पहुंचे हैं जो तस्वीर जो मां बेटे की तस्वीर आप देख रहे हैं। उन्हीं के परिवार में हम पहुंचे हैं। हम बात करते हैं। क्या नाम है आपका? कुलदीप नाम है। कुलदीप जी जो मां और बेटे की तस्वीर वो आपकी क्या लगती हैं? वो वो मेरी दीदी लगते हैं। मेरी सिस्टर की वो नंद है। सिस्टर इन लॉ है वो। तो वो लोग कब गए थे मध्य प्रदेश?

किस काम से गए थे? वो वेडनेसडे गए थे जो हमारे जीजा जी हैं। उनके बड़े ब्रदर ने वहां पर घर बनाया था। तो उसके इनग्रेशन में गए हुए थे वो। अभी बुधवार को ही। अभी बुधवार को ही। जी। तो कल शाम को वो फिर वहां से अपना प्रोग्राम खत्म करने के बाद थोड़ा डैम की तरफ चले गए हम तो वहां पर जब क्रूज पर वो गए तो शाम को 5:30 6 बजे करीब तूफान आया वहां पर जिसकी वजह से यह हादसा हो गया। कितने लोग आपके परिवार के उस क्रूज पर थे? छह छह लोग हमारे परिवार से थे जिनमें से तीन को रेस्क्यू कर लिया और तीन का डेथ हो गया। जो तीन लोगों की डेथ हुई एक तो वो जो आपकी बहन जी उनका बेटा कितना बड़ा? क्या नाम था बहन का आपके? सिस्टर का नाम था मैरीना और उनका बेटा था जहान जो चार साल का था और तीन शख्स हां और और मम्मी थे जो मेरी सिस्टर की सास हैं .

जिनका 60 से 62 साल का एज था। मधुर नाम मधुर नाम मधुर नाम है उनका मधुर नाम है तो अचानक से जैसे यह लोग जब प्लान गए थे वापस कब आने का टिकट था उन लोगों का उनका वापस था अभी कल कल शनिवार में वापसी था उनका अच्छा कल की अच्छा कल की वापसी कल की वापसी थी और कल जब प्रोग्राम खत्म हुआ तो उसके बाद वो लोग वो लोग घूमने के लिए गए थे बात हुई थी किसी से आप लोगों की वहां पर मैरीना से की बात हुई थी जी जी मेरी मेरी वाइफ से बात हुई थी। हां। जब शिप डूबा नहीं था उस टाइम मेरे ख्याल से 5:30 6 बजे का टाइम था तो वो वीडियो दिखा रहे थे पूरा और बहुत अच्छा लग रहा था। एंजॉय कर रहे थे सारे गाना चल रहा था। मैरीना जी से बात हो रही थी? हां मैरीना तो आपकी क्या लगेंगे?

मेरी जो वाइफ है उनकी बहन है। बड़ी बहन है। ठीक है। तो बहुत अच्छा था माहौल वहां पे और इतने में मैं अपने बेटे को ट्यूशन छोड़ने गया 5:00 बजे और मैं आया हूं वहां से 5:30 करीब आया हूं। तो वो बहुत जोर से चिल्लाने लगी। 5:30 से 6:00 बजे का टाइम होगा। तो मैंने पूछा क्या हो गया? उनका फोन आया। वह ऐसे बोल रही है कि मुझे बचा लो प्रेयर करो मेरे लिए और शिप डूब रहा है। पानी आ गया है। पता नहीं कैसे आ गया उसके अंदर। तो बस इतना बोला। फिर उसके बाद फोन कल कर रहे हैं तो कॉल नहीं जा रही है। फोन बिल्कुल बंद हो गया। फ़ बिल्कुल बंद। जी। उसके बाद बात। हां। उसके बाद बात नहीं हुई। उसके बाद थोड़ी देर के बाद फिर हमने कोशिश करी। मेरे पास कॉल आया डैडी का मेरे पास और कोई शायद नौका वाला था जिसने निकाला था। उसने बताया कि आपसे बात करना चाह रहे हैं। मैंने बात करी और बात करने के बाद मैंने पूछा मम्मी कह रहा बेटा मम्मी तो नहीं है यहां। चली गई मम्मी। तूने नहीं बचाया। बाद में सब लोग मिसिंग थे। सिस्टर का पता नहीं था कहां है वो। हम वेट कर रहे थे कि शायद बच जाएंगी बच जाएंगी। जो नौका थी वो फ्लोट कर रही थी।हमें यह नहीं पता था कि वो बेचारी उसी के अंदर हैं। हमने सोचा कि शायद जो उन्होंने जैकेट पहनी थी और जहान को भी उसी के अंदर कर रखा था जो छोटा बेटा था। हो सकता है कि वो कहीं बह के कहीं इधर आसपास गए हो। लेकिन उसके अंदर देखा नहीं। किसी ने ढूंढा नहीं। और सुबह जाके जब टीम आई है तब जाके उन्होंने वहां देखा है तो वो बेचारे उसी के अंदर थे। उसी के अंदर फस गए। बोट के बोट के अंदर फंस गए अगर टाइम रहते वहां पे पहुंच जाते जैसे शाम का टाइम था जो जब हम वीडियो में भी देख रहे थे कि वोट बोट जो है फ्लोट कर रही थी उस टाइम जाके उसमें देखते तो शायद वो उसमें मिलते और और लोग भी मिल पाते उसमें यानी लापरवाही तो है.

आपकी सर लापरवाही बिल्कुल है और जब यह हादसा हुआ उस टाइम जो वहां के गांव वाले जो लोग थे उन्होंने ही सारा रस्सी फेंक फेंक के बचाया प्रशासन की तरफ से बहुत ही लेट बचाव की नौका वगैरह कुछ नहीं की बचाव की नौका एक एक बोट आई थी वहां वहां पे मैं मैं वहां पे नहीं था। मैं नहीं कह सकता कैसे आई वहां पे कि जो घूम रहे थे वही थे कि कोई और आया था वहां पे। लेकिन उस टाइम जिन्होंने बचाया वो आसपास वाले ही थे। गांव वाले लोकल जो थे उन्होंने ही बचाया प्रशासन की तरफ से कोई भी बहुत देर में कारवाई हुई है सारी जितनी भी हुई है। जो जैसे लोकल लोगों ने कुर्ती दिखा के उनको बचाने का प्रयास किया। अगर वो एनडीआरएफ की टीम जो बचाव दल है वो अगर पहले आ जाता समय से जिस समय थोड़ा रोशनी भी उजाला भी था तो शायद बहुत सारे लोगों की जान बचाई जा सकती थी क्योंकि तब तक तो जो बोट थी वो दिख रही थी पानी के ऊपर और उसको जाने से पहले उस क्रूज को बोला भी गया था कि आपका मौसम खराब हो रहा है प्लीज प्लीज बैक कर लीजिए उसको किसने बोला वो छोटी छोटी बेटी जो है जो बच गई है उसने भी ये बात बताई है कि हमने बताया था.

लेकिन उन्होंने नहीं मानी और जो किनारे और वो अगर वो वो नहीं लेके जाते तो ये इंसिडेंस नहीं होता। ये थे किनारे पे वो भी बोल रहे थे कि भाई किनारे पे लगा लो इसको साइड में। मौसम आगे खराब है। लेकिन वो शायद उसने अपनी मनमानी करी वो आगे को ले गया। शायद दूसरे किनारे पे ले जाना चाह रहा होगा वो। उसके बाद जो जब बोट जब गिर गई थी पानी में तो वहां तो एक ड्राइवर और जो हेल्पर था उन्होंने कोई हेल्प नहीं करी। चिंटू भैया प्रदीप भैया थे। उन्होंने वो नीचे की तरफ गए। वहां सेफ्टी जैकेट थी। उन्होंने और एक दो जनों ने और हेल्प करके जो और जा रहे थे कूद रहे थे उनके तरफ फेंकी थ्रो करी उन्होंने पहनी और जितने भी लोग बचे हैं सेफ्टी जैकेट की वजह से अगर वो नहीं होते तो शायद वो सेफ्टी जैकेट नहीं होती तो और ज्यादा लोग और लोग जाते आपकी कब बात हुई उनसे जिन्होंने कहा कि हमने बोला कि मौसम हमने वीडियोस देखे थे।

वो खुद शिप पे थी। हां वह जो उनका सिया जो लड़की जो थी 14 साल की 14 साल की उम्र थी जो बेटी जो है वह फादर थे उनके और उनके साथ उनके साथ जो बचा लिया गया उनको उसने खुद बताया कि हम अंकल को बोल रहे थे कि प्लीज इसको वापस ले लो मौसम खराब हो रहा है फिर वो माने नहीं लेकिन आगे लेके चले गए उसको और ये इंसिडेंस हो गया अगर उसी टाइम रहते ही अगर मौसम थोड़ा सा खराब है अगर बैक कर लेते तो हो सकता है कि और भी थे शिवपाल वो बता रहे कि वो उन्होंने भी वापस कर लिया लेकिन वो लोग उन्होंने नहीं करा और जो वो शिप कर रहे थे उनका तो कुछ अता पता नहीं है। वह भी कहां है कहां नहीं एटलीस्ट कम से कम जो चले गए उनको कोशिश तो करते कि भाई बचाने की किस तरीके से अब एक सेकंड में एकदम से लहरें उठी एकदम से कैसे रेडी हो सकते हैं तो कहीं ना कहीं एक सवाल है कि सर कुछ भी नहीं था वहां पे जिस तरीके से होना चाहिए ना वहां पे अगर आप किसी कहीं जा रहे हैं तो सबसे पहले सेफ्टी है अगर कुछ हो गया तो पीछे कोई बचाने वाला वहां कुछ भी नहीं था.

बचाने वाला आप देखेंगे बिल्कुल सुनसान जंगल के बीच में एक चीज है सेफ्टी कुछ भी नहीं दिया था सेफ्टी भी कुछ भी नहीं थी। जब वो डूब रहे थे, जहाज पलट गया था। तब मेरे ब्रदर इन लॉ ने लाइफ जैकेट लेके फेंक के दिए कि आप ये लो बचो। मेरी सिस्टर इन लॉ थी। उनका चार साल का बेटा था। उसमें ही उसको फंसाया था सेट करने के लिए कि बचो किसी तरह से। उस उस क्रूस वाले ने सिर्फ पैसे के लिए उसको नहीं सुनी। किसी की गांव वालों ने बोला था कि तूफान आने वाला है। मत चलाओ इसको आगे बीच में मत ले जाओ। लेकिन उसने नहीं सुनी। किसी की नहीं सुनी। सब कुछ खत्म हो गया। मेरे परिवार से तीन लोग जा चुके हैं। मेरी मम्मी चली गई। मेरी ननद चली गई। चार साल का बेटा चला गया। कुछ नहीं बचा हमारा।

कुछ नहीं बचा। परिवार पूरी तरीके से सदमे में है। चार साल का बेटा, उनकी मां और एक 60 साल की बुजुर्ग महिला तीन लोग इस हादसे में जान गवा चुके हैं। इस परिवार के छह लोग क्रूज पे थे और तीन लोगों को जो आसपास के लोग थे रस्सी फेंक कर किसी तरीके से जो मदद पहुंचा के उनको तो बचा लिया लेकिन तीन लोगों को नहीं बचाया जा सका। इस पूरे मामले में गंभीर लापरवाही का आरोप जो क्रूज चला रहा था उसके ऊपर परिवार की तरफ से लगाया जा रहा। ये सब कुछ हो रहा था और उसी समय वहां मंत्री जी पहुंच जाते हैं। मंत्री जी वो पूरा दृश्य देखकर रोने लगे और बकायदा वो फुटेज जो है सीसी जो वीडियो है वो रिकॉर्ड हुई और कैमरे पर वो रो रहे थे। लेकिन यहां रोने से बेटर है अगर उन लोगों पर स्ट्रिक्ट एक्शन लिया जाए और जो डीएम एसडीएम जिन लोगों की आपने नियुक्ति की है वहां जिन ऑफिसर्स की नियुक्ति की है.

उनका काम क्या है मैंने सेम चीज कही थी मथुरा वाले केस में मथुरा वाले केस में किसी भी अधिकारी पर कोई एक्शन नहीं हुआ मतलब कोई जिम्मेदारी नहीं है आराम से बिना लाइफ जैकेट के धड़ल्ले से चलाया जा रहा है बिना किसी सेफ्टी मेजर्स के वहां बिना किसी लाइफ जैकेट के लोगों को बिठाया जा रहा है घुमाया जा रहा है लेकिन ना डीएम पे कोई एक्शन नहीं हुआ ना वहां कोई एसडीएम पर एक्शन हुआ ना कोई किसी पुलिस अधिकारी पे एक्शन हुआ।

मतलब कोई जवाबदेही किसी की बनती ही नहीं है। यहां भी ऐसा ही कुछ होगा। किसी पर कोई एक्शन नहीं होगा। कोई कारवाई नहीं होगी। अगर कोई स्ट्रिक्ट एक्शन नहीं लेंगे तो लोगों के मन में तो डर ही नहीं है। और जो बिजनेस कर रहा है वो तो व्यापार कर रहा है। जो बोट मालिक है वो व्यापार कर रहा है। व्यापारी आराम से व्यापार करते रहेंगे। लेकिन जो आम लोग हैं आम जनमानस है वो अपनी जान को इसी तरह से गवाते रहेंगे और कोई पूछने वाला नहीं। और मेरा तो सवाल है जो जांच हुई थी नोएडा वाले केस में जो लड़का डूब गया था उस जांच रिपोर्ट में अब तक क्या कुछ हुआ? मथुरा वाले केस में क्या कुछ हुआ? किन बड़े बड़े अधिकारियों का नाम आया? किनका ट्रांसफर हुआ? नोएडा वाले केस में तो आप सबको पता है डीएम का ट्रांसफर तो होगा नहीं। तो नोएडा अथॉरिटी के जो सीईओ हैं उनका ट्रांसफर हो गया। जिसके अंडर , आता ही नहीं। उनका ट्रांसफर हो गया। चलो वो बात सही है। आगे जांच हो भी रही है। अब तक जांच रिपोर्ट भी नहीं आई है। और जांच रिपोर्ट कहां गई उसके बारे में कोई खबर नहीं।

दूसरा केस मथुरा का वहां भी देख लीजिए। अभी तक किसी भी बड़े अधिकारी पर कोई एक्शन नहीं हुआ। क्योंकि जिम्मेदारी तो उन्हीं की बनती है। शहर में अगर कोई गलत काम हो रहा है, कोई चीज अनऑर्गेनाइज्ड तरीके से हो रही है तो जिम्मेदारी तो अधिकारी की बनती है।

तीसरा वीडियो अब हम जबलपुर का देख रहे हैं। अब यहां देखना होगा किसी पर एक्शन होता है या बस जांच पर जांच चलेगी और कुछ दिनों बाद हम ये मामला भूल जाएंगे और लोगों की जान की वैल्यू कुछ भी नहीं है हमारे देश में। और जिस तरह से हमारे यहां सेफ्टी प्रोटोकॉल सेफ्टी मेजर का दरकिनार करके हम उसको बहुत बार होता है कि हमारी भी गलती होती है कि अगर कोई चीजों को फॉलो नहीं कर रहा है तो हम आवाज नहीं उठाते और आवाज नहीं उठाते ना हम बोलते हैं कि आप गलत गलत कर रहे हो आपको सेफ्टी जैकेट्स बांटना चाहिए लेकिन लोगों को भी मजा आए लोग भी उन चीजों को ध्यान नहीं दे रहे और मुझे इसीलिए लगता है कि कहीं ना कहीं मैं बहुत अब बचता हूं भीड़ में जाने से क्योंकि मुझे लगता है कि भाई सरकार हमारी जिम्मेदारी नहीं ले सकती हमारी जिम्मेदारी हमें खुद लेनी है। तो भीड़ से बचूं।

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