हम पानी के अंदर गए तो मंजर देखकर हैरान रह गए। एक महिला फंसी हुई थी। जब उनका हाथ खींचा तो वह बाहर नहीं आ पा रही थी। ध्यान से देखा तो उनके हाथों में बच्चा सिमटा हुआ था। वो हाथों की पकड़ से बच्चे को छोड़ ही नहीं रही थी। यह शब्द उन डवर्स के हैं जो जबलपुर क्रूज हादसे के बाद लोगों को रेस्क्यू करने में जुटे हुए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक बचाव में लगे एक कर्मी ने बताया कि पानी के अंदर जाना और काम करना बहुत कठिन हो गया था। क्रूज बोर्ड पूरी तरह उल्टी पड़ी है।
पानी के अंदर विजिबिलिटी बहुत कम थी और कुछ भी साफ दिखाई ना देने की वजह से बचाव कार में मुश्किलें आ रही थी। बचाव कर्मियों ने यह भी बताया है कि वहां जगह बहुत कम थी और लोहे की नुकीली कीलें मौजूद थी। इस वजह से हमें हथौड़ों का इस्तेमाल कर संकरिय रास्ते बनाने पड़े। इस दौरान एक गोताखोर उसमें ही फंस भी गया था। उनका कहना है कि नाव का स्ट्रक्चर दोनों तरफ से पूरी तरह टूट गया था और अंदर की ग्रिल की वजह से रास्ते पतले हो गए थे। इन मुश्किलों के साथ टीम ने अब तक कई शव निकाले हैं। इन शवों में ही वो मां और बच्चा भी थे
। मलबे से महिला का शव निकालने में हमें सबसे ज्यादा मुश्किल हुई। देखा तो महिला ने अपने बच्चे को कसकर पकड़ रखा था और उन्हें अलग करना मुश्किल था। हमारी टीम इस दृश्य को देखकर भावुक हो गई। आपको यह भी बता दें कि क्रूज पर महिला के साथ उनकी 8 साल की बेटी, पति और अन्य परिवार वाले भी मौजूद थे। परिवार के छह लोगों में से तीन की मौत हो गई है। हादसे में बची महिला की बेटी ने बताया कि एकदम से बाढ़ आ गई थी और शिप के अंदर पानी भर गया था। इसके बाद क्रूज पलट गई। मुझे मेरे पापा मिल गए थे तो मैंने उनका हाथ पकड़ लिया। मृतक अपने परिवार के साथ रिश्तेदार के गृह प्रवेश में शामिल होने गई थी। प्रोग्राम खत्म करने के बाद वह घूमने के लिए डैम के पास गए और क्रूज पर बैठे जिसके बाद यह हादसा हो गया। परिवार ने और क्या कहा?
से पहले महिला ने अपने रिश्तेदारों से फोन पर क्या कहा था वो भी सुनिए। मेरी वाइफ से बात हुई थी। हां। जब शिप डूबा नहीं था उस टाइम। मेरे ख्याल से 5:30 6 बजे का टाइम था। तो वो वीडियो दिखा रहे थे पूरा और बहुत अच्छा लग रहा था। एंजॉय कर रहे थे सारे। गाना चल रहा था और इतने में मैं अपने बेटे को ट्यूशन छोड़ने गया 5:00 बजे और मैं आया हूं वहां से 5:30 बजे करीब आया हूं तो वो बहुत जोर से चिल्लाने लगी 5:30 से 6:00 बजे का टाइम होगा तो मैंने पूछा क्या हो गया उनका फोन आया वो ऐसे बोल रही है कि मुझे बचा लो प्रेयर करो मेरे लिए और शिप डूब रहा है पानी आ गया है पता नहीं कैसे आ गया उसके अंदर तो बस इतना बोला फिर उसके बाद फोन कल कर रहे हैं तो कॉल नहीं जा रही है फोन बिल्कुल बंद हो गया कुछ भी नहीं दिया था। सेफ्टी भी कुछ भी नहीं थी।
जब वह डूब रहे थे, जहाज पलट गया था। तब मेरे ब्रदर इन लॉ ने लाइफ जैकेट लेके फेंक के दिए कि आप ये लो बचो। मेरी सिस्टर इन लॉ थी। उनका 4 साल का बेटा था। उसमें ही उसको फंसाया था सेट करने के लिए कि बचो किसी तरह से। उस उस क्रूस वाले ने सिर्फ पैसे के लिए उसको नहीं सुनी किसी की। गांव वालों ने बोला था कि तूफान आने वाला है। मत चलाओ इसको आगे बीच में मत लेके जाओ। लेकिन उसने नहीं सुनी। किसी की नहीं सुनी। सब कुछ खत्म हो गया।
मेरे परिवार से तीन लोग जा चुके हैं। मेरी मम्मी चली गई। मेरी ननद चली गई। चार साल का बेटा चला गया। परिवार का आरोप है कि यात्रियों ने कई बार बोला था कि तूफान आ रहा है। क्रूज रोक लो। लेकिन उन्होंने नहीं रोका। वहीं क्रूज डूबने के बाद गांव वाले उनकी मदद के लिए आगे आए।