बिरियानी- तरबूज खा कर खत्म हुआ परिवार? ये था असल कारण, Dr. रवि गोडसे से जानिए।

वह मुंबई में हादसा हुआ ना बेचारे चार लोगों की जान चली गई। क्या वह चिकन की वजह से हुआ था? । चिकन तो दूसरे लोगों ने भी खाया था। चिकन की वजह से हो सकता है। लेकिन चिकन हम अच्छी तरह से उबालते हैं। पकाते हैं। तो कोई है उसमें तो उसी समय नष्ट हो जाएगा। तो इसका फाइनल रिपोर्ट आना तो बाकी है। क्या किसी ने दिया था? क्या कोई केमिकल था? क्या या बिल गेट्स का कॉनस्परेसी था? वो बाद में पता चलेगा। डॉक्टर रवि गोडसे का डायग्नोसिस है स्टफिलोकस ओरियस प्रीफॉर्म टॉक्सिन की वजह से हुआ था। यह क्या होता है?

देखो इस केस में वायरस वायरस वगैरह नहीं लगता ना तो फंगस ना लगता है। बैक्टीरिया में नहीं है। इ कोला है तो टॉयलेट के साथ खून गिरता है। कैंपेलोबक्टर नहीं है। लिस्टेरिया नहीं है। बोटलिनम होगा तो ऐसा डिप्लोपिया डबल दिखना होते हैं। नज़िया वोमिटिंग नहीं होता। यह का है। तो ये और बैक्टीरिया में क्या फर्क है?

कल्पना करो कि आपका बदन एक शहर है और अतिरेकी उस पर हमला कर रहे हैं। वो अतिरेकी है बैक्टीरिया। वो दो तरीके से हमला करता है। पहला उनका तरीका होता है कि आपके बदन में घुस गए और बैक्टीरिया बना दिए। फिर उन्होंने बनाना चालू किया। आप उनके साथ कैसे लड़ोगे? से। से उसे मार दोगे। दूसरा है वह लड़ना थोड़ा मुश्किल है। अतिरेकी बनाते हैं और छोड़ के वह चले जाते हैं। तो अतिरोकियों पर बैक्टीरिया पे हमला करके वो बॉम्ब को कुछ फर्क नहीं पड़ता।

तो फटने वाला है। तो यह के वजह से हुआ है। तो हम क्या प्रकॉशन ले लें? मतलब फल तो सेहत के लिए अच्छे हैं और गर्मी का मौसम भी है। अभी हमने अचानक फल खाना बंद कर दिया। तो जो हजारों लोग फल बेचते हैं उनके बच्चे क्या रास्ते पे आएंगे? और एक ऐसा कितना दिन चलेगा?

कल 500 लोग मरने वाले हैं गर्मी के वजह से तब हम गर्मी के ऊपर वीडियो चला देंगे तो यह फल का तो निकल जाएगा लोगों के मन से लेकिन अगर ऐसा कोई फल है जिसका छिलका आप खुद निकाल सकते हो जैसा कि केला है संतरा है तो यह जो वाटरमेलन है टरबूज वो कहते हैं वो ठीक तरह से देख के ले लो कि उसके ऊपर कोई प्रॉब्लम नहीं है ना ऐसा ऐसा देखोगे वो क्या ट्रक में पैदा होता है वो खेतों में बनता है जब तक शहर तक आता है तब अपने रास्ते पे इतने बड़े-बड़े खड्डे होते हैं कि एक-एक खड्डे में तीन-तीन तरबूज रह जाएंगे। तो फिर कैसा पता करोगे?

तो आप जब उसे टरबूज को काटते हो काटने के पहले ठीक तरह से साफ करो। साबुन लगाने का जरूरत नहीं है। बहते पानी के नीचे रखो। ठीक तरह से साफ करो। वो जो छुरी है वो साफ सुथरी हो। आप कटिंग बोर्ड इस्तेमाल करते हो तो फलों के लिए अलग कटिंग बोर्ड रखें। ठीक तरह से काट दे। कभी-कभी कुछ लोग उसमें केमिकल डालते हैं। लाल रंग का डाई यह लाल रंग किसे पेश करूं? तो वाटरमेलन का एक टुकड़ा पानी में डालो। रंग निकलता है क्या? देखो टिश्यू पेपर देखो।

लेकिन ऐसा कौन करता है? तो अगर ऐसा ये टरबूजा कांटा है तो 1 घंटे के अंदर फ्रिज में रखो और 1 दिन के अंदर खाओ। लेकिन यह तो सब हम प्रिकॉशन लेंगे ले सकते हैं। लेकिन फिर क्या ऐसा बाकी के लोगों के साथ हो सकता है? नहीं अभी हुआ खराब हुआ बहुत। ये न्यूज़ हुई। लेकिन फिर जान क्यों गई उन लोगों की? वो के वजह से अगर दिया भी है तो सही है। मतलब ना जानो बैक्टीरिया है मौजूदा तो का हम इस्तेमाल करेंगे। लेकिन इसका ट्रीटमेंट होता है इसका डिहाइड्रेशन होता है। तो ट्रीटमेंट होता है बॉडी को सपोर्ट करें जस्ट फ्लूइड दे दे। अभी चार लोग थे। आप कहोगे क्या कोई इम्यूनो सप्रेस थे या कोई की बीमारी थी या बहुत उम्र कम थी या बहुत उम्र छोटी थी तो उनको हो सकता है लेकिन एक ही फैमिली के चार हट्टे कट्टे लोग मर गए तो अपने इधर प्रॉब्लम क्या होता है कि लोग पहला एक डॉक्टर को पूछते हैं.

बाद में दूसरे को जब तक अस्पताल पहुंचे बहुत देर हो जाती है तो किसी अच्छे डॉक्टर को पहले से जिसके ऊपर आपका भरोसा है पहले से तय करो कि इस डॉक्टर के पास जाना है और अगर हॉस्पिटल में गए तो आप कहते हैं कि इंडिया का जीडीपी ज्यादा तीन नंबर का है।

चार नंबर का इतना पैसा है। चांद पे गए। अरे ये जीडीपी का आंकड़ा ना कोई मायने नहीं रखता। ऐसा अगर देश है ना जिसमें चार खट्टे-कट्टे लोग सिर्फ डिहाइड्र के डिहाइड्रेशन के वजह से मुंबई जैसे बड़े शहर के अस्पताल में मरते हैं ना तो उससे ज्यादा शर्म की कोई दूसरी बात नहीं है। यह हॉस्पिटल का नाम चेंज करें। ये सब नौटंकी ये सब नाटक छोड़ दे और ये हॉस्पिटल अच्छी तरह से क्लीन करें और उधर अच्छी तरह से मतलब ये लोगों के ऊपर ध्यान दे कि हम कहां आ फंसे इसमें लोगों की इसमें कुछ गलती भी नहीं है। हुए जो फिरदौस बदर तकसीर थी आदम की मगर हमारी अजाबे दरबदरी हमारी नाखत गुनाह ही है।

ऐसा एक गुनाह जो हमने किया भी नहीं है। उसकी सजा भुगत रहे हैं। सो बाकी के जो ये लंबे चौड़े हम बातें करते हैं कि ये किया है वो किया है सब ठीक किया है। अच्छा चल रहा है। लेकिन अपना जो पब्लिक सेक्टर का जो हॉस्पिटल है उस पे ऊपर ज्यादा फोकस होना मांगता है। ऐसे डिहाइड्रेशन के वजह से भारत में आज भी 200 बच्चों की होती है शायद पर दिन डिहाइड्रेशन के वजह से ये अच्छी बात नहीं

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