2 दिन में 2 मिलियन फॉलोवर घटे ! राघव चड्डा ने अब तोड़ी चुप्पी

लेकिन आज यह पार्टी वो पुरानी वाली पार्टी नहीं रही। इस पार्टी में आज एक वर्क एनवायरमेंट है। आपको काम करने से रोका जाता है। पार्लियामेंट में बोलने से रोका जाता है। और यह पॉलिटिकल पार्टी आज चंद करप्ट और कॉम्प्रोमाइज लोगों के हाथ में फंसकर रह गई है।

राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने आम आदमी पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया था। इस फैसले के बाद से लगातार उन पर कई सवाल उठ रहे थे। इतना ही नहीं उनके फॉलोअर्स की संख्या अचानक घटने लगी थी। जिसका अंजाम यह हुआ कि उनके 14.6 मिलियन फॉलोवर्स से घटकर 12.4 मिलियन फॉलोअ रह गए।

यानी लगभग बीते कुछ ही दिनों में उनको 2 मिलियन यानी 20 लाख फॉलोवर्स का नुकसान हुआ है। कुछ लोग उन्हें शुभकामनाएं दे रहे थे तो कुछ उनके फैसले के पीछे के कारण जानना चाहते थे। इन सवालों का जवाब देने के लिए राघव चड्डा ने अब अपने Instagram अकाउंट पर एक वीडियो पोस्ट किया है। राघव ने वीडियो में कहा कि पिछले तीन दिनों से उनके पास ढेर सारे मैसेजेस आ रहे हैं। लग ज्यादातर लोग उन्हें बेस्ट विशेस और बधाई दे रहे हैं। जबकि जबकि कुछ लोग उनके इस बड़े फैसले के पीछे क्या वजह हैं यह जानना चाहते हैं।

इसलिए उन्होंने यह वीडियो उन सभी के लिए बनाया जिन्होंने शायद उनकी प्रेस कॉन्फ्रेंस भी नहीं देखी। पिछले तीन दिनों से आप सबके बहुत मैसेजेस आ रहे हैं। आप में से ज्यादातर लोग मुझे बेस्ट विशेस दे रहे हैं। कांग्रेचुलेट कर रहे हैं। और कुछ लोग मेरे इस फैसले के पीछे क्या रीज़ंस हैं वो जानना चाहते हैं। तो आज ये वीडियो उनके लिए और उन लोगों के लिए भी जिन लोगों ने शायद मेरी प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं देखी। दोस्तों पॉलिटिक्स में आने से पहले मैं एक प्रैक्टिसिंग चार्टर्ड अकाउंटेंट था। मेरे सामने एक बेहतरीन करियर था। लेकिन मैं उस करियर को छोड़कर पॉलिटिक्स में आया। अपने करियर को बनाने के लिए पॉलिटिक्स में नहीं आया। और एक पॉलिटिकल पार्टी का फाउंडिंग मेंबर बना। जिस पार्टी को मैंने अपने प्राइम यूथ के 15 साल दिए अपने खून पसीने से बहुत मेहनत से इस पार्टी पार्टी को सींचा। लेकिन आज ये पार्टी वो पुरानी वाली पार्टी नहीं रही। इस पार्टी में आज एक टॉक्सिक वर्क एनवायरमेंट है। आपको काम करने से रोका जाता है।

पार्लियामेंट में बोलने से रोका जाता है। और यह पिटिकल पार्टी आज चंद करप्ट और कॉम्प्रोमाइज लोगों के हाथ में फंस कर रह गई है। जो अब देश के लिए नहीं अपने निजी पर्सनल फायदे के लिए काम करते हैं। पिछले कुछ सालों से मैं यह फील कर रहा था दैट परहैप्स आई एम द राइट मैन बट इन द रोंग पार्टी। और इसी के चलते मेरे सामने सिर्फ तीन ऑप्शंस थे। पहला ऑप्शन कि मैं पॉलिटिक्स ही छोड़ दूं। दूसरा ऑप्शन कि मैं इसी पार्टी में रहूं और चीजें ठीक करने की कोशिश करूं जो कि हुआ नहीं। और तीसरा ऑप्शन कि मैं अपनी एनर्जी और एक्सपीरियंस लेकर पॉजिटिव पॉलिटिक्स करूं। एक और प्लेटफार्म के साथ एक और पॉलिटिकल पार्टी के साथ जुड़कर सकारात्मक राजनीति करूं। इसीलिए मैंने अकेले ने नहीं मेरे साथ एक नहीं, दो नहीं, तीन नहीं, चार नहीं, पांच नहीं, छह और सांसदों ने यानी कि कुल सेवन एमपीज ने ये फैसला लिया कि हम अपनी इस पॉलिटिकल पार्टी से रिश्ता तोड़ते हैं।

एक आदमी गलत हो सकता है, दो आदमी गलत हो सकते हैं। लेकिन सात लोग गलत नहीं हो सकते। और वो अनगिनत लोग जो एजुकेटेड एरोडाइट लोग थे, जो इस पॉलिटिकल पार्टी के सपने के साथ जुड़े थे वो तमाम लोग जो इस पार्टी को छोड़ के चले गए। क्या वो सारे गलत हो सकते हैं? आप ऐसे समझिए आप में से जितने ऑफिस गोइंग लोग हैं यदि आपका वर्क प्लेस एक टॉक्सिक प्लेस बन जाए। उसका एनवायरमेंट टॉक्सिक हो जाए तो आप कितना काम कर पाएंगे? क्या आप वहां काम कर पाएंगे? अगर आपको वहां काम करने से रोका जाए, आपकी मेहनत को दबाया जाए, आपको चुप कराया जाए तो आप क्या करेंगे? उस स्थिति में सही फैसला यही है कि आप उस वर्क प्लेस को छोड़ दें। और शायद हमने भी वही किया। आप में से बहुत सारे लोगों ने यह भी मुझे मुझसे पूछा कि क्या अब मैं वैसे ही आपके मुद्दे ऑर्डिनरी प्रॉब्लम्स ऑफ ऑर्डिनरी सिटीजंस उठाता रहूंगा या बंद कर दूंगा। मैं उन्हें विश्वास दिलाना चाहता हूं कि मैं आपकी प्रॉब्लम्स को लगातार और एनर्जी के साथ और जोश के साथ उठाऊंगा और अच्छी बात यह है कि अब हम उन प्रॉब्लम्स की सशंस को भी ढूंढ पाएंगे और उसे इंप्लीमेंट करा पाएंगे।

तो कुल मिलाकर आम आदमी पार्टी को राघव चड्ढा ने एक टॉक्सिक पार्टी का खिताब दे दिया है। जहां काम करने से रोका जाता है, संसद में बोलने से रोका जाता है। लेकिन वहीं अब भी कुछ लोग राघव चड्ढा के इस फैसले से नाराज ही नजर आ रहे हैं। उनके कमेंट सेक्शन में लोगों की नाराजगी अभी भी देखने को मिल रही है। एक यूजर ने लिखा मुझे राघव भाई यह बताइए कि एक्टर आप हो या आपकी बीवी। मग ने लिखा सब अनफॉलो कर रहे हैं सर आपको। मैगजी ने लिखा ध्रुव राठी गलत बोल रहा था। चड्डा ने कहा था तब तक कोई रकम नहीं बनी थी पर आज बन गई है। मेगा ने लिखा अब देखेंगे आप पार्लियामेंट की पब्लिक के लिए आवाज उठाओगे या नहीं। एक और यूजर ने लिखा किस-किस को लगता है कि राघव सर को अपनी न्यू पार्टी बनानी चाहिए थी। एक और यूजर ने लिखा सर बस आप उम्मीद हो आज के भारत का बस आप मत बदलना।

लेकिन यहां एक सवाल उठता है कि क्या हम इंसान को इतनी जल्दी जज कर सकते हैं? राजनीति में पार्टी बदलना कोई नई बात नहीं है। हर नेता का अपना विज़न, स्ट्रेटजी और फ्यूचर प्लान होता है। हो सकता है कि राघव चड्डा ने यह फैसला अपने राजनीतिक करियर को आगे बढ़ाने के लिए दिया या फिर उनके पास कोई और बड़ा प्लान है जो अभी लोगों को समझ नहीं आ रहा। लेकिन सोशल मीडिया पर हम अक्सर पूरी कहानी जाने बिना ही रिएक्शन दे देते हैं।

अब देखना यह होगा कि क्या राघव चड्ढा दोबारा लोगों का भरोसा जीत पाएंगे या फिर वह अब किसी गुमनामी के अंधेरे में खो जाएंगे।

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