इमरान खान के मंत्री ने खोल दी असीम मुनीर की असलियत !

क्या पाकिस्तान में असली सत्ता प्रधानमंत्री के पास या फिर वर्दी के पीछे छिपी ताकत के पास है? यह सवाल नया नहीं है। लेकिन हाल ही में आईए बयान ने फिर से इसे चर्चा के केंद्र में ला दिया। पाकिस्तान के पूर्व सूचना मंत्री फवाद चौधरी ने एक ऐसा खुलासा किया जिसने देश की सत्ता से रचना पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।

मामला उस वक्त सामने आया जब अमेरिका और ईरान के बीच संभावित मध्यस्था वार्ता को लेकर पूछा गया कि पाकिस्तान की तरफ से नेतृत्व कौन कर रहा है? प्रधानमंत्री शबाज शरीफ या फिर आर्मी चीफ आसिम मुनी इसका जवाब फवा चौधरी का ने जो दिया वह चौंकाने वाला था। उन्होंने साफ शब्दों में कहा इसमें कोई दो राय नहीं है कि इस समय पाकिस्तान का नेतृत्व जनरल आसिम मुनीर कर रहे हैं। उनके इसी बयान ने यह संकेत दिया कि भले ही शबाज शरीफ देश के प्रधानमंत्री हो लेकिन फैसले लेने की असली ताकत उनके पास नहीं है। फवाद चौधरी ने आगे यह भी कहा कि वर्तमान में निर्णय लेने का अधिकार फील्ड मार्शल या सैन्य नेतृत्व के पास है।

उन्होंने यह तक दावा कर दिया कि हाल ही में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी जनरल मुनीर को ही पाकिस्तान का वास्तविक नेता माना और शबाज शरीफ का जिक्र तक नहीं किया। यह बयान ना सिर्फ राजनीतिक हलकों में हलचल पैदा कर रहे हैं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पाकिस्तान की छवि पर सवाल उठा रहे हैं। दरअसल पाकिस्तान में लंबे समय से यह धारणा रही है कि वहां की राजनीति पर सेना का गहरा प्रभाव होता है। कई बार ऐसा देखा गया कि विदेश नीति, सुरक्षा और बड़े रणनीतिक फैसलों में अनियमित तरीके से सेना नेतृत्व करती है। फवाद चौधरी का यह बयान उसी का उदाहरण माना जा रहा है। इस पूरे घटनाक्रम का एक और अहम पहलू है।

अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत जिसमें पाकिस्तान मध्यस्था की भूमिका निभाने की कोशिश कर रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक एक पाकिस्तानी प्रतिनिधि मंडल अमेरिका का संदेश लेकर ईरानक जाने वाला है। यह भी कहा जा रहा है कि इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच बातचीत की योजना चल रही है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने संकेत दिए हैं कि इस्लामाबाद में हुई बातचीत को आगे बढ़ाने की तैहरान में बैठक हो सकती है। अगर ऐसा होता है तो पाकिस्तान की भूमिका और भी ज्यादा अहम हो जाएगी।

लेकिन सवाल ये है कि इस भूमिका का नेतृत्व कौन करेगा? एक निर्वाचित प्रधानमंत्री या सेना का प्रमुख? पूरे मामले को देख तो यह साफ है कि पाकिस्तान की सत्ता वास्तविक में सिविल और मिलिट्री के बीच संतुलन का मुद्दा बहुत ज्यादा उलझता जा रहा है। फवाद चौधरी का बयान इस बहस को और तेजी से आगे बढ़ाता है। क्या पाकिस्तान में लोकतांत्रिक ढांचा है भी या नहीं? या फिर असली ताकत सिर्फ सेना के हाथों में है। आने वाले दिनों में इसका जवाब देखने को मिलेगा।

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