इतनी सजा तो इंसान शायद सात जन्म लेने के बाद भी ना काट पाए लेकिन अमेरिका की एक अदालत ने भारतीय मूल के दो भाइयों की यह सजा तय की है। एक की सजा 420 साल तक बनती है और दूसरे की सजा 415 साल यानी दोनों को मिलाकर कुल 835 साल की सजा। साफ कर दें कि यह कोई मजाक नहीं है।
बकायदा अमेरिका के जस्टिस डिपार्टमेंट की वेबसाइट में इसकी जानकारी दी गई है। तो फिर सवाल यह है कि दोनों भाइयों ने आखिर ऐसा क्या किया है जिससे इतनी बड़ी सजा बनती है? विस्तार से जानते हैं। जिन दो भाइयों को दोषी पाया गया है उनके नाम है भास्कर सवानी और अरुण सवानी। भास्कर की उम्र 60 साल है और अरुण की 58 साल है। जैसा कि नाम से पता चल ही रहा है।
दोनों भाई भारतीय मूल के हैं। अमेरिका के पेंसिलनिया के रहने वाले हैं। भास्कर सवानी पेशे से एक डॉक्टर हैं। दोनों भाई मिलकर सवानी ग्रुप के नाम से कारोबार चलाते थे। अरुण सवानी इस ग्रुप के फाइनेंस का काम देखता था। अमेरिकी अदालत में यह साबित हुआ है कि दोनों भाइयों ने इस ग्रुप के जरिए क्रिमिनल गैंग का एक पूरा नेटवर्क चलाया। ईस्टर्न डिस्ट्रिक्ट ऑफ पेंसिल्वेनिया के अटर्नी ऑफिस ने एक प्रेस रिलीज जारी कर पूरे मामले की जानकारी दी है।
बताया कि दोनों भाइयों ने धोखाधड़ी से लाखों डॉलर का चूना लगाया। इनके अपराध की जो फहरिस्त दी गई है, वह भी बड़ी लंबी है। इसलिए सजा भी इतनी लंबी सुनाई गई है। दोनों भाइयों को वीजा से लेकर हेल्थ केयर में फ्रॉड का दोषी पाया गया है। इसके अलावा मनी और में भी शामिल रहे हैं। बताया गया है कि दोनों भाइयों ने फर्जी दस्तावेजों के जरिए एच वनबी वीजा पर विदेश से लोग बुलाए। इनमें अधिकतर भारतीय लोग थे। फिर इनमें से कई लोगों की सैलरी से हिस्सा लिया। इसके अलावा दोनों भाइयों ने हेल्थ केयर में भी फ्रॉड किया। अमेरिका में सरकार की तरफ से मेडिकेट नाम से हेल्थ इंश्योरेंस स्कीम चलाई जाती थी। इसमें कम आय वाले लोगों की मेडिकल खर्चों में मदद की जाती थी।
जब भास्कर और अरुण अरुण के सवानी ग्रुप का मेडिकेड कॉन्ट्रैक्ट टर्मिनेट कर दिया गया तो इन्होंने नई कंपनियों के जरिए मेडिकेट के पैसे लेने जारी रखे। बताया गया है कि इससे अकेले 3032 मिलियन का फर्जीवारा किया गया। भारतीय रुपयों में यह करीब ₹276 करोड़ के आसपास बैठता है। गुनाहों की फहरिस्त यही खत्म नहीं होती है। दोनों भाइयों पर मनी लॉन्ड्रिंग का भी दोष सिद्ध हुआ है।
जिसमें कहा गया है कि दोनों ने फर्जी बिलिंग के जरिए शेल कंपनियों में पैसे घुमाए। इन पैसों से सवानी ग्रुप का फायदा पहुंचाया गया। लाखों करोड़ों की टैक्स चोरी का आरोप भी कोर्ट में सिद्ध हुआ है। इसके अलावा भास्कर सवानी को एफडीसीए यानी फेडरल 938 के उल्लंघन का भी दोषी पाया गया है। उसने मरीजों में वो मेडिकल डिवाइस इस्तेमाल किए जिन्हें इंसानों पर इस्तेमाल के लिए वर्जित किया गया है।
सरकारी वकीलों के मुताबिक पूरे क्रिमिनल नेटवर्क का पर्दाफाश करने के लिए कई एजेंसियों ने मिलकर जांच की। इसमें एफबीआई से लेकर होमलैंड सिक्योरिटी और स्टेट डिपार्टमेंट की एजेंसी भी शामिल रही। सभी आरोपों की जांच के बाद दोनों भाइयों को संगठित अपराध यानी ऑर्गेनाइज्ड क्राइम का दोषी पाया गया। दोनों पर रैकेटियर इन्फ्लुएंस एंड करप्ट ऑर्गेनाइजेशंस एक्ट लगाया गया है। इसके बाद फेडरल जूरी ने भास्कर सवानी को 420 सालों तक की अधिकतम सजा सुनाई है। वहीं अरुण सवानी को अधिकतम 415 साल की सजा।
इसके अलावा अलेक्जेंड्रा रोडामियाक नाम की एक महिला को भी दोनों भाइयों के अपराध में सहयोगी पाया गया है। उसे भी 40 साल की अधिकतम सजा दी गई है। हालांकि यहां पर ध्यान देने वाली बात यह है कि यह अधिकतम सजा है जो सभी अपराधों को मिलाकर सुनाई गई है।
