भारत के प्रधानमंत्री इजराइल दौरे पर जाते हैं। वहां से वापसी करते हैं और इस दौरान की तस्वीरें वर्ल्ड मीडिया में इंटरनेशनल मीडिया में छाई रहती हैं। चर्चा होती है इजराइल और भारत की दोस्ती की। चर्चा होती है कि जिस तरीके से इजराइल ने ईरान पर मिसाइल अटैक किया है। क्या इसकी जानकारी नरेंद्र मोदी को थी? चर्चा होती है नेतन्याऊ के उस बयान की जिसमें वो अफगानिस्तान की मदद करने का जिक्र कर रही हैं।
इसका मतलब यह है कि वो भारत के दुश्मन पाकिस्तान को मजा चखाने की बात कर रही हैं। और इन सबके बीच एक और चर्चा आगे बढ़ रही है और वो यह कि चाइना क्यों बौखलाया हुआ है और यह दावा भी और यह बातें भी हवाहवाई नहीं है। दरअसल चाइना टुडे जो कि एक मैगजीन है उसमें एक ऐसा आपत्तिजनक कार्टून छापा गया है नरेंद्र मोदी का जिसे आपको इस मंच से डायरेक्ट दिखाना भी गलत होगा और इसीलिए सबसे पहले तो उस अकाउंट को ब्लॉक किया गया है भारत में और इसके अलावा सवाल यह उठ रहे हैं कि भारत की अगर किसी भी देश के साथ खासकर इजराइल जैसे देशों के साथ अगर दोस्ती और मजबूत हो रही है तो चाइना को क्या प्रॉब्लम है?
तो आज इस वीडियो में इसी को डिकोड करने की कोशिश करेंगे कि मुलाकात हो रही है दो देशों की, दोस्ती बढ़ रही है दो देशों की। चाइना क्यों बौखलाया हुआ है? और इस तरह का कार्टून छापने का क्या मतलब है? मेरे साथ इसी खबर पर ग्लोबल टाइम्स में तो अक्सर इस तरह के कार्टून दिखते रहे हैं और एक तरीके से मजाक पहले भी बनता रहा है। चाइना टुडे को क्या मिला यह सब छाप कर? और जिस तरीके का वो कार्टून है जिसमें भारत को एक तरीके से इजराइल का चाटुकार बताने की कोशिश की गई है।
दिखाना तो मेरे लिए मुमकिन नहीं होगा लेकिन बताया तो यही जा रहा है। क्यों? क्या दिक्कत है चाइना को? मैं एक बहुत आसान शब्दों में कोशिश करता हूं कि 1 मिनट के अंदर इसे डिकोड कर दूं। ये गलगोटिया यूनिवर्सिटी वाला विवाद सबसे पहले चाइना टुडे में ही पोस्ट किया गया था। कि हमारे कुत्ते को उन्होंने अपना कुत्ता बनाकर पेश किया।
यह लिखा गया था। उसके बाद भारत के विपक्ष ने उसको हाथों हाथ लिया। पूरा नैरेटिव सेट हुआ। ठीक है? नरेंद्र सरेंडर वाला सबसे पहला पोस्ट वो चाइना टुडे में ही आया था। जिसको बाद में भारत के तमाम विपक्ष ने यह सारा कुछ हाथों हाथ लिया और उसको पूरा यहां नैरेटिव फैलाया। अब इजराइल में मोदी ने सरेंडर कर दिया है। 56 इंच की छाती 6 इंच तक हो गई है। चाइना टुडे ने पोस्ट किया। और आप देखिए यहां पूरा का पूरा कांग्रेस और लेफ्ट इकोसिस्टम यह पूरा कर रहा है। उसको फैला रहा है।
सिर्फ मतलब अगर चाइना टुडे ने एक बूंद कहीं गिराया तो उसको छितराने का काम यहां के इकोसिस्टम को दिया है। जिसमें लेफ्ट और कांग्रेस इकोसिस्टम है। मैं पर्टिकुलर नाम लेकर बोल रहा हूं। लेफ्ट समझ में आता है क्योंकि चाइना उनका आईडियोलॉजिकल फादर है और वो चाइना जो भी करता है वो ये हमेशा फैलाते रहे। कांग्रेस अब उस गैंग में शामिल हो गई है। अब समझिए असली कहानी। चाइना का 30% ऑयल आता था ईरान से 30% वो सप्लाई लाइन कट जाएगा अगर वहां अमेरिका की समर्थक सरकार हो गई तो क्योंकि बहुत सस्ते दरों पर हमने ही चाइना को कच्चा तेल दे रहे थे क्योंकि बाकी सब ने सेंशंस लगा के रखा था। ठीक है? दूसरा चाइना का सबसे बड़ा तेल आता था वेनेजुएला से। वो सप्लाई लाइन भी कट हो गई है। तो चाइना का मोटा-मोटी 50% ऑयल सप्लाई कट हो चुका है।
किसी देश का 50% ऑयल सप्लाई कट होने का मतलब कुछ देश की अर्थव्यवस्था धराशाई होने के कगार पे। रशिया के साथ भी बातचीत कर रहे हैं। जिनसे चाइना तेल खरीदता है। चाइना कच्चा तेल कहां से खरीदेगा? अंतिम देश जो बचा है वो रशिया। तो चाइना बेचैन है। जैसे ही नरेंद्र मोदी गए हैं इजराइल चाइना को मिर्ची लगी है क्योंकि चाइनीज इंटेलिजेंस ने उन्हें बता दिया होगा कि कुछ ना कुछ तो ईरान पे बड़ा होने वाला है। अब वो फ्रस्ट्रेशन निकाले कहां? अमेरिका को गाली दे नहीं सकते। तो उन्होंने दो देशों को चुना है इंडिया और इजराइल। और इंडिया इजराइल को क्यों चुना? क्योंकि चाइना को ऐसा लगता है कि इंडिया और इजराइल से तमाम मुस्लिम देश नफरत करते हैं। वो मुस्लिम देश जिनके पास तेल है। तो अगर हम इजराइल और इंडिया को गाली देंगे यानी हिंदू और यहूदी को गाली देंगे तो वो मुस्लिम मुबालिक जो वो देश हैं कच्चा तेल वाला वो हमें अपना दोस्त समझेगा और हमें वायल सप्लाई होगा। ठीक है? ये गेम वहां से लड़ी जा रही है। और अपने यहां के क्या कर रहे हैं? आप देख ही रहे हैं जो चाइना टुडे या जो ग्लोबल टाइम्स आज छाप दिया कल पता चलेगा कि पूरा इकोसिस्टम उनका एक पत्रकारों का लॉबी है। कुछ नेताओं का लॉबी है और फिर तब पॉलिटिकल पार्टी में स्प्रेड होना शुरू होता है। देखिए मैं गलत बोल रहा हूं तो आप बताइए। मैं आपको आज पूरी जिम्मेदारी से बोल रहा हूं कि जिस न्यूज़ क्लिक पर चाइना से फंड लेने का आरोप लगा था उसने सबसे पहले यहां किसान आंदोलन को लेकर गलत बातें फैलाई थी। चाइनीस कनेक्शन यहां भी समझ में आ गया। भारत के नरेंद्र मोदी सरकार मुसलमानों का दुश्मन है। यह हैवी पेमेंट किया गया था चाइना से और तब जाकर शाहीन बाग हुआ अपने यहां। अब समझ में आया? चाइनीस इंटेलिजेंस इंडिया में भी काम कर रही है। उन्होंने भी अपने डीप एसेट्स क्रिएट किए हैं इंडिया में। और चाइना के डीप एसेट्स इंडिया में कौन है? ये मैं दर्शकों पे छोड़ देता हूं। हमारी हमारा कंपटीशन किस देश के साथ है? इन टर्म्स ऑफ इकोनमी इन टर्म्स ऑफ मिलिट्री।
वही एक दूसरे पर दबदबा कायम करने की कोशिश करेगा। चाइना हमें नुकसान पहुंचा रहा है और हमारे यहां का एक पूरा का पूरा इकोसिस्टम वो एनजीओ भी उसमें हैं। पत्रकार हैं, कुछ वकील हैं, कुछ नेता हैं। सब मिलके चाइना प्रोपोगेंडा को आगे बढ़ा रहे हैं। और वो लोग मैं किसी का नाम नहीं लूंगा। ये दर्शकों के ऊपर कोई जानता है।
दर्शकों के ऊपर छोड़ दीजिए। हां, हर किसी को पता है। मैंने कोशिश की कि एक से दो मिनट में चीजें स्पष्ट तौर पर रख सकूं। अगर आप मेरी बात से कंविंस हैं तो ठीक और नहीं तो आपको क्या लगता है? कि क्या सचमुच भारत सरेंडर कर चुका है? क्या भारत क्या सब कुछ बिक गया है जैसा वो बता रहे हैं? क्या भारत में सड़कों पर उतरने वाले लोग हैं? आज आप जाके देखिए उस इकोसिस्टम के तमाम ट्वीट्स ऐला खमैनी शहीद था और वो कम से कम लड़ते हुए मरा। नरेंद्र मोदी कायर है। ये लड़ने की हिम्मत नहीं जुटा सका। सरेंडर कर दिया। आपको लगेगा कि कोई ना कोई चाइना से ये लिख रहा है। या फिर चाइना हो, पाकिस्तान हो या कहां से इनका फंडिंग होता है। आपको सब वो स्पष्ट दिखेगा। ठीक है।
