ईरान से जीत पाना क्यों नहीं आसान? इज़रायल-अमेरिका को क्यों हो रही परेशानी?

ईरान को फतेह करना ना सिर्फ मुश्किल है बल्कि ये रणनीतिक और सैन्य नजरिए से लगभग नामुमकिन जैसा है इसका कारण सिर्फ इसकी सैन्य ताकत नहीं बल्कि इसकी भौगोलिक भू-राजनीतिक और आर्थिक विशेषताएं भी हैं जो उसे एक दुर्गम और अपराजित राष्ट्र बनाती हैं सबसे पहले बात करें इसके आकार की ईरान कोई छोटा-मोटा देश नहीं बल्कि यह ब्रिटेन से सात गुना बड़ा देश है इतनी विशाल भौगोलिक संरचना को फतेह करना किसी भी सेना के लिए एक मुश्किल काम है .

इसके पश्चिमी हिस्से में जाग्रोस पर्वतमाला फैली हुई है जो ना सिर्फ दुर्गम है बल्कि रणनीतिक रूप से ईरानी सेना के लिए स्वाभाविक सुरक्षा कवच की तरह काम करती है वहीं दक्षिण में फारस की खाड़ी से सटे तट बेहद सख्त खुरदरे और नकीले हैं जिन पर लैंडिंग ऑपरेशंस या समुद्री हमला करना बेहद मुश्किल है और तो और देश के मध्य में दो बेहद खतरनाक रेगिस्तान फैले हुए हैं यह रेगिस्तान इतने गर्म है कि यहां दुश्मन की फौज का टिकना तो दूर चलना तक मुश्किल है यही कारण है कि ईरान के ये क्षेत्र प्राकृतिक नोबो ज़ोन माने जाते हैं.

इन जगहों की भौगोलिक स्थिति ईरान की रक्षात्मक रणनीति को और भी मजबूत बना देती है फिर ईरान की एक और अहम ताकत है उसकी स्थिति यह देश बिल्कुल उस जगह बसा हुआ है जिसे रणनीतिक रूप से हॉर्मोस जलसंधी कहा जाता है यह एक संकरा समुद्री मार्ग है जिससे होकर दुनिया का करीब 20% तेल गुजरता है अगर ईरान चाहे तो इस संकीर्णन रास्ते को बंद करके पूरी दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति को बंधक बना सकता है यही कारण है कि अमेरिका और उसके सहयोगी देश भी कई बार सैन्य कारवाही से पहले 100 बार सोचते हैं.

ईरान की आर्थिक मजबूती भी उसकी एक ढाल है यह देश दुनिया का चौथा सबसे बड़ा तेल भंडार रखता है और प्राकृतिक गैस में इसका स्थान दूसरे नंबर पर है अपने तेल और गैस संसाधनों के बल पर करीब दो शताब्दियों तक युद्ध झेल सकता है ईरान पर लगे अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों का भी उस पर कम असर होता है इसके अलावा ईरान की सेना भी एक पारंपरिक सेना नहीं है यहां रिवोल्यूशनरी गार्ड्स मलेशिया और विभिन्न युद्ध रणनीतियां काम करती हैं चाहे वे सीरिया हो इराक हो या यमन हो ईरान ने हर जगह अपने प्रभाव का विस्तार कर रखा है उसका यह रणनीतिक नेटवर्क भी उसे अप्रत्यक्ष रूप से मजबूत बनाता है.

इसलिए किसी भी बाहरी शक्ति के लिए ईरान को पूरी तरह से हराना एक अत्यंत जोखिम भरा महंगा और दीर्घकालिक युद्ध सिद्ध होगा जिसकी कोई निश्चित जीत नहीं है यही कारण है कि इतिहास में भी कोई शक्ति ईरान को पूरी तरह झुका नहीं पाई ना सिकंदर ना अरब खलीफा और ना ही आधुनिक साम्राज्यवादी ताकतें ईरान वाकई में एक किला है एक ऐसा किला जो अपने भूगोल संसाधनों संस्कृति और जिद्दी जज्बे की वजह से आज भी अड़े खड़ा है.

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