BJP ने बंगाल में खेला कर दिया ?

वैसे तो चुनाव को लोकतंत्र का पर्व कहते हैं। पर जो ईवीएम पर ही कोई टेप चिपका दे तो उसे तंत्र का पर्व कहें या लोक का या फिर टेप का। आज पश्चिम बंगाल के फाल्टा में यही हुआ है। ईवीएम पर बीजेपी के खांचे के आगे टेप लगा हुआ था। अब दोबारा वोटिंग होगी वहां और क्या-क्या हुआ दूसरे फेज की वोटिंग में? एग्जिट पोल में किसकी सरकार बन रही है? यह है पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी में।

ममता का पीछा करते हुए नंदीग्राम से भवानीपुर पहुंच तो गए शुभेंदु अधिकारी लेकिन पलड़ा किसका भारी है जानेंगे आज के शो में। एग्जिट पोल पर आएंगे उसकी बात करेंगे पर दूसरे फेज में 142 सीटों पर आज वोटिंग हो गई फर्स्ट फज़ की तरह इस बार भी लोगों ने बढ़-चढ़कर कर मतदान किया। 5:00 बजे तक शाम 5:00 बजे तक बंगाल में करीब 90% वोटिंग हुई। पूर्वी वर्धमान हुगली में शाम 4:00 बजे तक ही 80% वोटिंग हो चुकी थी। वोटिंग भी हुई, बवाल भी हुआ। ममता बनर्जी की सीट भवानीपुर जहां शुभेंदु अधिकारी मुख्यमंत्री को टक्कर देने आए हैं। वहां से भी और हंगामे की खबरें आई। सब पर इत्मीनान से बात करेंगे। पर पहले सबसे बड़ा सवाल कि जीत कौन रहा है बंगाल? असल नतीजे तो 4 मई को आएंगे।

लेकिन एग्जिट पोल्स ने किसकी सरकार बनाई है? 71 साल की ममता बनर्जी चौथी बार मुख्यमंत्री बन रही हैं या रास्ते में आ गई हैं अड़चनें? जानने के लिए न्यूज़ रूम चलते हैं। पश्चिम बंगाल में 294 विधानसभा सीटें हैं। सबसे पहले जेबीसी के एग्जिट पोल की बात। इसके मुताबिक टीएमसी और गठबंधन को मिल रही है 131 से 152 सीटें। बीजेपी को मिल रही है 138 से 159 सीटें। ज़ीरो से दो सीटें कांग्रेस के पास और बाकी सब खाली हाथ।

अब इसके बाद बात करते हैं मैट्रिक्स की। इसके मुताबिक टीएमसी को 125 से 140, बीजेपी को 146 से 161 सीटें और अदर्स के खाते में छ से 10 सीटें। इसके अलावा पीएमआरक्यू का अभी एग्जिट पोल है। इसमें टीएमसी के खाते में आई है 118 से 138 सीटें और बीजेपी को 150 से 175 सीटें। अब इन सबको मिलाकर जो पोल ऑफ पोल्स बनता है उसके बारे में भी आपको बता देते हैं। पोल ऑफ पोल्स में टीएमसी के खाते में 147 सीटें आने का अनुमान है और बीजेपी के खाते में 137 सीटें कांग्रेस दो लेफ्ट दो अदर्स छह।

यानी पोल ऑफ पोल्स को ही अगर पैमाना माने तो यहां पर टीएमसी आगे दिख रही है मामूली बढ़त के साथ। तो यह था पश्चिम बंगाल का एग्जिट पोल। लेकिन चुनाव तो असम, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी में भी हुए हैं। इन राज्यों में किसकी सरकार बनवा रहे हैं एग्जिट पोल? पोल्स ऑफ पोल्स पर एक नजर डाल लेते हैं और फिर से एक बार न्यूज़ रूम का रुख करते हैं। पश्चिम बंगाल के अलावा बाकी विधानसभा सीटों की बात करें राज्यों की बात करें तो असम जहां पर 126 विधानसभा सीटें यहां पर भारतीय जनता पार्टी को 88 सीट मिलने का अनुमान है।

एग्जिट पोल के मुताबिक कांग्रेस और गठबंधन को 27 सीटें अदर्स के खाते में सात सीटें। केरल की बात करते हैं। केरल में एलडीएफ के खाते में 59, यूडीएफ के खाते में 77, बीजेपी प्लस को दो सीटें मिलने का अनुमान है। यह इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि केरल में भारतीय जनता पार्टी की अभी कोई सीट नहीं है। तो अगर दो सीट आती है तो वो उनको पिछले विधानसभा चुनाव की तुलना में एज ही होगा। अब तमिलनाडु के बाद यहां पर डीएमके प्लस को 130 सीटें, एआई डीएमके प्लस को 65, टीवी को 31 सीट मिलने का अनुमान है। यह कुछ खास राज्यों के पोल ऑफ पोल्स। तो यह एग्जिट पोल्स कह रहे हैं चुनाव नतीजे असली चुनाव नतीजे 4 मई को आएंगे।

एजेंसीज और न्यूज़ चैनल्स चुनाव के दिन वोटर्स से बात करते हैं और एक अनुमान लगाते हैं। कई बार सटीक होता है। कभी-कभी उलट भी होता है। पश्चिम बंगाल, असम, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी पांचों राज्यों के चुनाव नतीजे 4 मई को आएंगे। लल्लन टॉप पर आपको सुबह 7:00 बजे से लगातार हर सीट का अपडेट मिलेगा। उन पत्रकारों, उन रिपोर्टर्स के साथ जो इन प्रदेशों में घूम करके आए। अब आगे बढ़ते हैं। वोटिंग में आज क्या-क्या हुआ? पहले टेप की बात करते हैं। वहीं से बात शुरू हुई थी। पश्चिम बंगाल के डायमंड हार्बर में फालतता विधानसभा में बीजेपी प्रत्याशी देवांशु पांडा ने आरोप लगाए कि पोलिंग बूथ पर ईवीएम में बीजेपी के निशान के सामने जो बटन है उस पर टेप लगा हुआ है ताकि वोटर बीजेपी को वोट ही ना दे पाए।

वह बटन दबा ही ना पाए। ललन टॉप के रिपोर्टर सिद्धार्थ मोहन ने देशबंधु पांड्या से बात की और उन्होंने यही आरोप लगाए। जो मैं मैं अंदर में गया था। मुझको ईवीएम नहीं दिखाया बहुत वहां पर जो सीसीटीवी में कैमरा था पूरा बंद है और दो में सामने में गया था दो चार का देखा पूरा बीजेपी का बॉटम ऊपर में एक सेलोडे मारा हुआ है बीजेपी का बॉटम नहीं है पूरा ब्लॉक कर दिया है हम ऐसे रिपोर्ट किया इसलिए और सेक्टर ऑफिसर कोई हमको वो बूथ में सीबीएम को दिखा नहीं रहा बीजेपी आईटी सेल के चीफ और पश्चिम बंगाल में पार्टी के सह प्रभारी अमित मालवीय ने भी एक्स पर यही आरोप लगाए लिखा कि कई पोलिंग बूथ्स ऐसे हैं जहां गड़बड़ियां सामने आई हैं।

मालवीय ने आरोप लगाए कि कई पोलिंग बूथ्स पर बीजेपी को वोट देने का ऑप्शन टेप से ब्लॉक कर दिया गया है। जिससे वोटर अपनी पसंद का वोट नहीं दे पा रहे हैं। अमित वाल्मीय ने कहा कि यह पोलिंग बूथ कॉम्प्रोमाइज्ड हो चुका है। बीजेपी रीपोलिंग की मांग कर रही है। शो की स्क्रिप्ट लिखे जाने तक चुनाव आयोग ने रीपोलिंग का ऐलान तो नहीं किया है। पर पश्चिम बंगाल के मुख्य चुनाव अधिकारी मनोज अग्रवाल का इस पर बयान सामने आया है। सीईओ अग्रवाल ने कहा कि जिन पोलिंग स्टेशंस पर ईवीएम पर काले या सफ़ेद टेप लगे होने की पुष्टि होगी, वहां दोबारा चुनाव कराए जाएंगे और अगर इस तरह की गड़बड़ी कई पोलिंग बोथ पर इस तरह की गड़बड़ी पाई जाती है तो पूरी विधानसभा सीट पर दोबारा से वोटिंग कराई जाएगी।

फालता के बारे में हमने कल भी आपको लेलन टॉप शो में बताया था। यह वही विधानसभा है जो चुनाव आयोग के ऑब्जर्वर आईपीएस अजयपाल शर्मा के वीडियो की वजह से चर्चा में आई थी। फालता विधानसभा से टीएमसी के जहांगीर खान चुनाव लड़ रहे हैं। जहांगीर ममता बनर्जी के भतीजे और टीएमसी महासचिव अभिषेक बनर्जी के काफी करीबी माने जाते हैं।

आईपीएस अजय पाल के वायरल वीडियो में वह जहांगीर के परिवार को के जरिए उनको धमकाते हुए नजर आ रहे थे। सफलता में केंद्रीय सुरक्षा बलों ने बूथ नंबर 186 के बाहर लाठियां भी भांजी। ऐसी तस्वीरें सामने आई हैं। इस दौरान कुछ महिलाएं गिर पड़ी। वीडियो में दिखता है कि कुछ जवानों ने एहतियात बरतते हुए अपने साथियों को लाठियां चलाने से मना किया।

दिल लली टॉप के रिपोर्टर सिद्धार्थ उस समय वहीं मौजूद थे। फालता में ही उन्होंने महिलाओं से बात की। उनका गुस्सा ऑन कैमरा फूट पड़ा। लाठी लाठी मारा केंद्रीय वाहिनी का। क्यों? क्यों मारा है? लाठी मेरे छ। क्यों मारा? क्यों है?

क्यों मारा आपके? क्यों मारा? भीड़ लगाए थे आप लोग। स्लिप वोट मारते हो वोट दे बवाल सिर्फ फलता में ही नहीं हुआ। पश्चिम बंगाल में कई जिलों से छिटपुट हिंसा की घटनाएं सामने आई हैं। यह गाड़ी है दक्षिण 24 परगना की सीट बसंती से बीजेपी उम्मीदवार विकास सरदार की।

उन्होंने आरोप लगाया है कि टीएमसी के 200 से ज्यादा लोगों ने उनकी गाड़ी पर रड और लाठियों से हमला किया। कोलकाता में भी पुलिस को हल्का बल प्रयोग करना पड़ा। ममता बनर्जी के समर्थकों के बीच तनाव देखने को मिला। शुभेंदु दौरे पर निकले थे। टीएमसी समर्थकों ने उनका घेराव करने की कोशिश की। जय बांग्ला के नारे लगाए। बदले में शुभेंदु ने नारा लगाया हिंदू हिंदू भाई भाई। जय श्री राम। जय श्री राम। हिंदू हिंदू भाई भाई भाई भाई हिंदू भाई भाई आज तक के रिपोर्टर पीयूष ने शुभेंदु से बात की। उन्होंने कहा कि हिंदू खुलकर वोट कर दिया। 90% तक जाएगा।

मैं 100% हो गया। आपको लग रहा है लोग बंपर वोट हिंदू खुल के भटका कर दिया वो सीपीएम का कैंप का लड़का क्या बोला ना जी सब बाम राम को वोट दे दिया सब बाम राम को वोट दे वो भी बोल रहा था मैं मेरा नहीं वो कैंप में जाइए पूछिए जो उनका गैप है अभी बोला अभी बोला जी और ममता वाले से ममता वाले वोटर सब गई चुनाव के दिन क्या इस तरह से धार्मिक मिजाज के नारे लगाना धर्म का नाम लेते हुए एक राजनीतिक नारा लगाना कितना कानून सम्मत है कितना आचार संहिता सम्मत है यह चुनाव आयोग तय तय करेगा। ममता बनर्जी ने क्या कहा यह भी देखते हैं। ममता कह रही हैं कि उन्होंने ऐसा चुनाव पहले कभी नहीं देखा।

सुरक्षा बल सिर्फ एक राजनीतिक पार्टी को सुरक्षा दे रहे हैं। उन्होंने सुरक्षा बलों पर ही उत्पीड़न का आरोप लगा दिया। एंड सीआरटीएफ कैन नॉट टॉर्चर लाइक दिस। लर्न ऑफ़ द मूव ऑल दे आर ऑल दे आर कैप्चर। इज इट देयर ड्यूटी? दे शुड दे शुड सिक्योर द बॉर्डर। इंस्टेड ऑफ़ सिक्योर द बॉर्डर दे आर सिक्योरिंग वन पॉलिटिकल पार्टी। आई एम सॉरी। आई हैव नेवर सीन दिस टाइप ऑफ़ थिंग्स बिकॉज़ इन माय लाइफ आई एम माय इलेक्शन सिंस 1984 ममता बनर्जी और शुभेंदु अधिकारी की बात हो रही है तो भवानीपुर विधानसभा पर थोड़ी नजर डाल लेते हैं। भवानीपुर सीट ममता और बीजेपी दोनों के लिए नाक का अहम सवाल बन गई है। पिछले चुनाव में ममता नंदी्राम से चुनाव लड़ी थी। उनका साथ छोड़कर के बीजेपी में गए शुभेंदु ने भी नंदीग्राम से ही चुनाव लड़ा था और ममता बनर्जी को हरा दिया था।

इस बार ममता भवानीपुर वापस आई हैं और क्योंकि ममता भवानीपुर से चुनाव लड़ रही हैं एक ही सीट से तो शुभेंदु ने नंदीग्राम के साथ-साथ भवानीपुर से भी पर्चा भर दिया और बीजेपी ने ममता से यह सीट छीनने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भवानीपुर में शुभेंदु के साथ रोड शो किया। प्रधानमंत्री मोदी ने भी भवानीपुर में बीजेपी को जिताने की अपील की। वैसे ममता बनर्जी के लिए भवानीपुर की सीट नई नहीं है। 2011 में ममता ने जब लेफ्ट का किला ढहाया था तब भी वह उपचुनाव में भवानीपुर सीट से ही जीतकर विधानसभा पहुंची थी। 2016 में भी ममता ने भवानीपुर सीट से चुनाव लड़ा था। 21 में वह नंदीग्राम गई। वहां शुभ हिंदु ने उन्हें हराया। उपचुनाव में ममता एक बार फिर भवानीपुर से जीतकर विधानसभा पहुंची। ममता इस बार भवानीपुर से चौथी बार चुनाव लड़ रही हैं। ममता ने एसआईआर को इस चुनाव में बड़ा मुद्दा बनाया उनकी पार्टी ने।

भवानीपुर की बात करें तो एसआईआर में करीब 51,000 लोगों के नाम इस सीट से कटे हैं। इंडियन एक्सप्रेस ने बंगाल में एसआईआर पर रिसर्च कर रहे सबर संस्थान के प्रमुख साबिर अहमद के हवाले से लिखा है कि भवानीपुर में वोटर लिस्ट से हटाए गए कुल नामों में से 42% मुस्लिम मतदाता हैं। जबकि इस सीट पर कुल मतदाताओं में मुस्लिम आबादी का हिस्सा केवल 20% ही है। सवाल है कि क्या एसआईआर भवानीपुर में भी मुद्दा बना। भवानीपुर का चुनाव कैसा था? इस बार क्या मुद्दे थे वहां? हमारे रिपोर्टर सिद्धार्थ मोहन ने इस सीट को कवर किया है। उनसे जानते हैं कि कैसा था इस बार भवानीपुर का मूड। भवानीपुर विधानसभा में एसआईआर एक मुद्दा है लेकिन इतना जरूरी मुद्दा नहीं है। कई लोग कहते हैं कि उनके वोट काटे गए हैं वहां पे। खासकर वो लोग जो बिहार या उड़ीसा या उत्तर प्रदेश से माइग्रेट होकर के इस इलाके में रहने आए हैं।

लेकिन भवानीपुर में बड़ा मैटर क्या है? चूंकि सेकंड फेज में पड़ने वाली एक हाई प्रोफाइल सीट है। ममता बनर्जी लड़ती हैं। सुेंदु अधिकारी लड़ते हैं। सात वार्ड हैं टोटल इस इस विधानसभा में। तो इस पूरे चुनाव में ममता बनर्जी हो चाहे शुभेंदु अधिकारी हो दोनों इस पूरे सातों वार्ड में वार्ड डोमिनेशन की प्रैक्टिस करते रहे कि कौन किस वार्ड में मजबूत छोटूता है। और यही नहीं पोलिंग के डे तक आज के दिन तक दोनों नेता अलग-अलग इलाकों में घूम-घूम कर पोलिंग स्टेशंस चेक कर रहे थे। बूथ चेक कर रहे थे। जिस जो उनके दायरे में आता है। वहीं पे उनके और उनके बीच कार्यकर्ताओं के बीच में झड़प भी हो रही थी, बहसबाजी हो रही थी। गाली गलौज भी हो रहा था। मतलब वो एरिया और वार्ड डोमिनेशन जो है ना वो आज भी जारी था। पोलिंग के दिन तक जारी था। साथ ही भवानीपुर के लिए एक बड़ा चैलेंज है कि भवानीपुर के लोग बस अपना विधायक नहीं चुन रहे हैं।

वो इस बात को ध्यान में रख के ईवीएम पे बटन दबा रहे हैं कि उनका अगला सीएम इन दोनों में से शायद कोई हो सकता है। जिसकी भी सरकार बने क्या इन दोनों में से सीएम होगा? ये सोच के वहां पर पोलिंग हुई है। तो ये भवानीपुर की बात हुई। पर पूरे बंगाल का चुनाव कैसा रहा? यह कहना गलत नहीं होगा कि इस चुनाव में पश्चिम बंगाल में पिछले चुनाव के मुकाबले काफ़ी कम हिंसा हुई है। चुनाव आयोग में 2 लाख से ज़्यादा केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती की पश्चिम बंगाल में ताकि शांतिपूर्ण चुनाव हो। एसआईआर के बाद यह पहला चुनाव है। पश्चिम बंगाल में ममता एसआईआर की मुखालफ़त करती रही हैं। सड़क से लेकर के सुप्रीम कोर्ट तक और बीजेपी ने इसे घुसपैठियों की सफाई बताया है। लेकिन राजनीतिक प्रतिक्रियाओं से इतर कम हिंसा वाले इस चुनाव को किस तरह से देखना चाहिए? क्या यह चुनाव पिछले चुनाव से कुछ अलग था? सबसे बड़ी बात जो डिफरेंस 2026 का इलेक्शन और बाकी सारे इलेक्शंस में मेरे को देखने को मिला है वो है एसआईआर। ये तो हाला मतलब जाहिर सी बात है कि आप पूरा जो 2025 तक जो वोटर लिस्ट था उस वोटर लिस्ट के ऑलमोस्ट 12% जो नाम है जो वोटर्स के नाम है वो डिलीट होता है

एसआईआर के तहत और जो था ईसीआई जो अपना पूरा मशीनरी है वो बंगाल इलेक्शन में जैसे उस उन्होंने इस्तेमाल किया है वो कहीं पे ऐसा इस्तेमाल नहीं हुआ है। पहली दफा में 2400 से ज्यादा कंपनी सेंट्रल फोर्स आई थी और दूसरी दफा में 2300 से ज्यादा कंपनी सेंट्रल फोर्स बंगाल में तहत हुई हुआ था ताकि बंगाल इलेक्शंस पीसफुल हो और हां बंगाल इलेक्शंस इस दफा पीसफुल ही हुआ है और एक चीज ये है हमने पिछले इलेक्शंस में देखा है बंगाल में इलेक्शन स्टेट इलेक्शन जब होता है आठ दफा सात दफा फेसेस में इलेक्शन हुआ करता था बहुत सालों बाद बंगाल में सिर्फ दो फेज में इलेक्शन हुआ है।

फर्स्ट फज़ हुआ था 23 तारीख को और सेकंड फज़ हुआ 29 तारीख को। तो ये पूरा जो मिला के ये सब मिला के बंगाल इलेक्शन इस बार एब्सोलुटली एक एक यूनिक किस्म का इलेक्शन है। अगर तो पश्चिम बंगाल चुनाव पर बात यहीं तक। अब बारी है सुर्खियों की। कैंडिडेट डस्टिंग पाउडर। चार स्किन प्रॉब्लम्स का एक एक्सपर्ट सशन। कैंडिडेट डस्टिंग पाउडर। हटा खुजली लगा कैंडिडेट। ऐसा कम ही देखा गया है कि अदालत में जरह वकीलों के बीच ना होकर पक्षकार और जज के बीच हो रही हो। पक्षकार कह रहा है कि जज पक्षपाती है उसे सुनवाई से अलग करो। लेकिन जज नियमों का हवाला देकर के डटी हुई हैं। आप जानते हैं कि आम आदमी पार्टी और जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा के बीच की अदावत की बात हो रही है। पिछले दो दिनों में यह तीसरी बार है कि जब आम आदमी पार्टी के किसी नेता ने हाई कोर्ट में सुनवाई का बहिष्कार किया है। अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया के बाद अब दुर्गेश पाठक भी इस सूची में शामिल हो गए हैं। तीनों ने जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा के सामने हाई कोर्ट में पेश होने से मना कर दिया। दुर्गेश पाठक पार्टी के अहम फैसले लेने वाली कमेटी के सदस्य हैं। उनका कहना है कि वह केजरीवाल के साथ हैं। ना तो वह खुद और ना ही उनका कोई वकील इस केस में पेश होगा। केस जुड़ा है दिल्ली एक्साइज पॉलिसी से। आरोप है कि इस पॉलिसी के तहत केजरीवाल सरकार ने प्राइवेट कंपनियों को फायदा पहुंचाया जिससे सरकारी खजाने को नुकसान हुआ। साथ ही इस पॉलिसी से मिली रिश्वत का इस्तेमाल आम आदमी पार्टी के चुनाव प्रचार में किया गया। फरवरी में दिल्ली की एक निचली अदालत ने केजरीवाल समेत 22 लोगों को इस मामले में आरोप मुक्त कर दिया था। लेकिन सीबीआई इस फैसले के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट गई। जहां केस की सुनवाई कर रही हैं जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा।

केजरीवाल ने जस्टिस शर्मा पर पक्षपात का आरोप लगाया। खुद कोर्ट जाकर के जस्टिस स्वर्णकांता से इस केस की सुनवाई से हटने की मांग की। लेकिन जस्टिस स्वर्णकांता डटी हैं। साफ शब्दों में उन्होंने कह दिया कि आई विल नॉट रेक्यूज। यानी मैं केस से नहीं हटूंगी। जस्टिस शर्मा का कहना है कि जज निष्पक्ष होता है। केजरीवाल के मन में डाउट होना खुद को केस से अलग करने का आधार नहीं बन सकता है। लेकिन ऐसा भी नहीं है कि जस्टिस स्वर्णकांता ने खुद को किसी राजनीतिक केस से अलग ना किया हो। मजे की बात कि वह मामला भी कहीं ना कहीं शराब से ही जुड़ा था। एक दिन पहले उन्होंने कांग्रेस सांसद कार्तिक चिदंबरम के मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया था। मामला करीब 20 साल पुराना है। जब कार्तिक के पिता पी चिदंबरम केंद्रीय वित्त मंत्री थे यूपीए सरकार में। आरोप है कि तब एक विदेशी शराब कंपनी को उसकी विस्की की ड्यूटी फ्री बिक्री रोक के खिलाफ राहत दी गई थी।

मामले की जांच कर रही सीबीआई का आरोप है कि कंपनी ने प्रतिबंध हटवाने के लिए कार्तिक चिदंबरम से मदद मांगी थी। आरोप है कि कार्तिक ने अपने प्रभाव अपने इन्फ्लुएंस का इस्तेमाल करके कंपनी की मदद की। कार्तिक चिदंबरम ने मामले को रद्द करने की मांग की है। अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर को राजनीतिक प्रतिशोध बताया है। लेकिन 28 अप्रैल को जब मामले की सुनवाई शुरू हुई तो जस्टिस शर्मा ने इसे किसी दूसरी बेंच के सामने लिस्ट करने के लिए कहा। मामले की अगली सुनवाई 21 जुलाई को होगी। उत्तर प्रदेश का सबसे लंबा एक्सप्रेसवे बनकर तैयार है। नाम है गंगा एक्सप्रेसवे। दिल्ली एनसीआर को यह पूर्वांचल से जोड़ता है। सरकार का दावा है कि मेरठ से प्रयागराज की दूरी अब 6 घंटे में पूरी हो जाएगी। पहले 10 से 12 घंटे लगते थे। पीएम मोदी ने हरदोई में इसका उद्घाटन किया। डबल इंजन की सरकार की खूबियां गिनाई। बोले कि गंगा एक्सप्रेसवे को हरिद्वार से जोड़ा जाएगा। एक्सप्रेसवे मेरठ से आगे बढ़कर हरिद्वार तक पहुंचेगा। इसके और बेहतर उपयोग के लिए फर्रूखाबाद लिंक एक्सप्रेसवे का निर्माण कर इसे अन्य एक्सप्रेसवे से भी जोड़ा जाएगा। यह है डबल इंजन सरकार का विज़।

यह है भाजपा सरकार के काम करने की स्पीड। 594 कि.मी. लंबा यह एक्सप्रेसवे 5 साल में बनकर तैयार हुआ है। बनाने में 37,350 करोड़ लगे हैं। हापुड़, शाहजहांपुर, रायबरेली समेत 12 जिलों से होकर के गुजरेगा। राहगीरों की सुविधा के लिए पब्लिक कन्वीनियंस सेंटर बनाए गए हैं। इलाज के लिए ट्रॉमा सेंटर भी बनाया गया है।

एयरफोर्स के फाइटर जेट्स की लैंडिंग के लिए शाहजहांपुर के पास 3.5 कि.मी. लंबी एयर स्ट्रिप बनाई गई है। यह देश की पहली नाइट लैंडिंग एयर स्ट्रिप है। हर 75 कि.मी. पर पेट्रोल पंप मिलेगा। जिनका संचालन खुद भारत पेट्रोलियम कर रही है।

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