जबलपुर में कैसे पलटा क्रूज? हादसे की कहानी पायलट की जुबानी

पर हादसे वाले क्रूज़ का पायलट पर क्रूज पायलट ने एक बड़ा खुलासा किया है। हादसे से पहले अलर्ट किया गया था। अचानक आई ऊंची लहरों के कारण यह हादसा हुआ। वक्त रहते लोगों ने लाइफ जैकेट पहन लिया था और यह भी कहना है पायलट का कि मेरी कोई गलती नहीं है। यह कुदरती आपदा थी। संभलने का वक्त नहीं मिला। लोग नाच रहे थे और इसलिए जैकेट नहीं दिया गया।

हादसे से पहले सब ने जैकेट पहन लिया था। तो पर सबसे पहले क्रूस का पायलट जिसने यह कहा है कि हादसे से पहले सब ने जैकेट पहन लिया था। सबको आगाह कर दिया गया था। लोग डांस कर रहे थे। इसीलिए उस वक्त जैकेट नहीं दिया गया था। और क्या कुछ कहा पायलट ने एनडीt से बातचीत में वो भी आपको सुनवाते हैं। शुभ नाम क्या हुआ? महेश पटेल। महेश जी। अच्छा महेश जी आप ही उस शिप को चला रहे थे। तो तो थोड़ा सा आपसे भी समझने की कोशिश करेंगे क्योंकि जैसे उस दिन भी दिक्कत आई होगी तो कैसे क्या किया आपने कैसे उसको आप लेकर के आए क्या हुआ उस दिन सर मैं यहां से निकला तो मौसम सही था ठीक है हल्कीहल्की हवा चल रही थी ।

जैसे ही मैं वहां पहुंचा हूं थोड़ी तेज हुई तो मैं मोड़ दिया बोट जब वहां से बोट मोड़ा तो तूफान एकदम से इतना तेज आया कि वे इतनी बड़ी-बड़ी वेब्स थी अच्छा तो वेब्स में वो पानी बहना शुरू हुआ तो फिर मैंने बोट मोड़ा तो सामने अपना वो बना हुआ है क्या बोलते हैं ब्रिज टाइप का उससे बोट टकराई वाली थी। वहां जैसेजैसे बोट मोड़ाई हूं मैंने और पानी बोट में भर गया। जैसे ही बोट में पानी भरा तो मैंने फ़ लगाया अपने रिसेप्शन सर बोट में पानी भर गया। छोटी बोट भेज दीजिए। कहीं भी कुछ हादसा हो सकता है। और उससे पहले मैं लड़कों को बोल दिया था कि सर अब सबको लाइफ जैकेट पहना दीजिए। आप सभी को लाइफ जैकेट पहन चुके थे। नियम तो ये कहते हैं कि जैसे ही बोट में बैठते हैं लाइफ जैकेट देना चाहिए। तो लोगों ने पहना नहीं। आप लोगों ने दिया नहीं था। नहीं सर वो अपने यहां ऐसा होता था कि जैसे बोट चल रही है अब आप डांस भी कर रहे हैं जब कर रहे हैं तो नहीं पहनते ।

जैसे अपन ने देखा मौसम खराब हुआ फटाफट अप जाके सबको दे देते हैं और जाके सभी लोगों ने पहन रखा था किसी ने बाकी नहीं था जैकेट ना पहना हो कुछ लोग कह रहे थे कि जब तेज हवाएं चलने लगी तो उन्होंने आपसे कहा कि आप किनारे पे ले लीजिए फिर नहीं लिया नहीं सर किसी ने नहीं बोला है ना साक्षी हैं मुझे किसी ने ऐसा नहीं बोला आप बाहर लीजिए मैं अपने हिसाब साइड ही लगाते लगाते।

वहां तक वोट पहुंची थी कितने सालों आप कितने साल से चला रहे हैं 15 साल करीब 15 साल कभी इस तरह की तेज हवाएं या इस तरह इतनी तेज आंधी या निकलने के बाद कई बार ऐसा हुआ है बट इतना तेज कभी नहीं आया तूफानी आपको भी डर लगा उस वक्त उस समय सर मैं तो बस यही लग रहा था कि ऐसी हाल में बोट से थोड़ा साइड में हो जाए थोड़ा साइड में हो जाए बस तो कहां तक ला पाए थे आप बस वहां तक रह गया सर वहां से यहां तो आ ही नहीं रही थी बोट किसी हालत में तो ऐसा मुड़ा वहां से मान लीजिए 100 मीटर करीब बचा था पूरी बोट पलट गई हां तो आप खुद तैर के बाहर आए आपको रेस्क्यू ने फिर बाहर निकाला हुआ ।

वहां नहीं सर मैं खुद आया था तैर के आए आप तैर रहे थे कितने सालों से आप बोट चला रहे हैं सर मेरे 2006 करीब से 2006 से मतलब जब से यहां पर यह बोट खड़ी है तब से आप चला रहे थे इसको। अच्छा कुछ चीज़ है जैसे कि जो बोट चलाने के लिए योग्यता होती है सिरंग या मास्टर लाइसेंस जो कि अपना ये या छोटी नौकाओं को चलाने का अनुभवी है आपके पास कोई लाइसेंस कौन सा लाइसेंस है? मेरे गोवा वाला लाइसेंस है। कौन सा? गोवा से। गोवा से सबकी ट्रेनिंग होती है। हर हर दो साल में। लाइफ सेविंग भी है मेरे पास। लाइसेंस है और बोर्ड का भी लाइसेंस है सर। तो आपको डीजल इंजन या जो भी इसका बुनियादी ज्ञान है तकनीकी का वो है नौकाओं का जी और शारीरिक फिटनेस तो आप फिट लग रहे हैं लेकिन जो जो लाइफ जैकेट का उपयोग होता है या जो रेस्क्यू ऑपरेशन का ज्ञान है ये आप लोगों को ट्रेनिंग दी गई थी जी सर कब कब दी जाती है हर दो साल में सर हर दो साल में कौन देता है ट्रेनिंग मतलब एमपीडीसी डलवा के गोवा से आते हैं वो हां लाइसेंस सब रखा हुआ है अपने आपने लाइसेंस कब लिया था।

अभी सर अभी एक साल भी नहीं हुए सर अभी एक साल भी नहीं हुए पर आप चला रहे हैं लगभग 20 साल से 15 साल सर 15 साल से लेकिन लाइसेंस आपने एक साल पहले नहीं सर हर दो साल बनता है लाइसेंस नहीं तो जो तिरंगा जो मास्टर लाइसेंस है वो कब मिला था? 2012 से। 2012 से आपके पास है। 2006 से चला रहे हैं आप? जी। तो छ साल बाद आप नहीं मैं तो पहले हेल्पर था इसी में। अच्छा इसी में हेलपर थे। फिर मेरी ट्रेनिंग हुई। फिर फिर मुझे सहायक के रख 2012 उसमें रख लिया गया था। तो इस तरह की जो आपदा की स्थिति बन जाती है। इसमें आप लोगों को बताया गया कि लोगों को कैसे बचाना है। इस तरह की कोई ट्रेनिंग होती है? इस तरह सर यही होता है कि जहां तक हो तो बोर्ड को सेफ्टी जगह ले चलने पर अपन लेकिन कुदरत ने हमें बिलकुल इतना समय नहीं दे पाया। हम क्योंकि मतलब अभी हम सेफ जगह पहुंच जाए जब तूफान पे मतलब इतना तेज तूफान कि कुछ नहीं कर पाए कुछ नहीं कर पाए किसी को नहीं बचा पाए अच्छा एक तस्वीर दिख रही है जब पूरी लहर हिलने लगती है तब उनको सेफ्टी जैकेट बांटा जा रहा है पन्नी से खोल खोल सर पहले कभी की बात और नहीं नहीं अभी कल की ही कल का ही वीडियो है वो वीडियो आप देख पाए हैं मैं आपको दिखाता हूं अभी का वीडियो है ये देखिए वो जब पूरी नाव हिलने लगी है उस वक्त ये सेफ्टी जैकेट बांटे गए हैं।

तो सवाल यही है ये देखिए ये आप ही की वोट का वीडियो है। ठीक है? अभी देखिए आप यहां पर ये सारे जाके सब बांटे जा रहे हैं। नहीं सर ये तो मामू की बोट। हां नहीं पर देखिए ना नए-नए मैं फाड़ फाड़ के आप पानी का वो देखिए ना। हां नहीं वही मैं कह रहा हूं कि इसके पहले क्योंकि इसके पहले जो वीडियो है ये देखिए इसमें किसी ने जैकेट नहीं पहन रखी है। कोई भी पर्यटक ने नहीं पहना। कुछ कोई पहनता नहीं सर। देंगे तो अभी नहीं बोलेगा। हम एंजॉय कर रहे हैं। जब अपन ऐसा जाएगा जैसे अभी वीडियो आप जो दिखा रहे हैं उसमें वेब्स नहीं चल रिपोर्ट नहीं है। अच्छा आप ऊपर आइए ना एक बार आपसे समझने की कोशिश करते हैं कि क्या इसमें कैसे आप चलाते हैं? क्या तकनीकी दिक्कत हो सकती है?

तो बाकी जो लोग थे यहां ऊपर सवार थे इसमें है ना अभी आपके ऊपर कारवाई हो गई है। अब सर ये तो कुदरती अब इसमें जैसा कुछ भी हो। है ना? मेरे मेरी तो इसमें 1% गलती नहीं है। मैंने इतना सोचा कि मतलब पूरे गेस्टों को सही सलामत कहीं साइड में लगा दूं। तनख्वाह वगैरह क्या देती थी सरकार आपको? मेरे को यहां से। हां। यहां से 27,000 को देती थी। बच्चे-वच्चे कितने हैं? दो बच्चे हैं सर। अब क्या सोचा है? क्या करेंगे? मूढ़ी मां बाप मूढ़ी मां है। बाप तो है नहीं है। जमीन जाया कुछ है नहीं। बस इसी के भरोशी में थे। 45 साल उम्र हो गई। इस हादसे का दुख आपके मन में है। लगता है 100% है सर। बहुत ज्यादा संभावना है। तीन दिन हो गए मैंने खाना भी नहीं खाया अभी तक। उन बच्चों की याद आती है जो आपके क्रूज में सवार थे और जो नहीं रहे। सर रात दिन वही देखते हैं मुझे तो। होने की तस्वीर नजर आती मतलब मैं अपना बयान नहीं बयान नहीं कर सकता हूं कि इतना पढ़ा लिखा तो नहीं इतना बयान नहीं कर सकता जितना उनको मेरे को हुआ है रोना आ रहा है ।

आपको भी जी मतलब वही देखता है मतलब नींद नहीं आती मुझे ना खाना खाने की इच्छा होती है ना बस थोड़ा पानी पी अगर वो पीड़ित परिवार सामने आ गए जो उस वक्त क्रूज में सवार थे जिनके अपने नहीं रहे तो क्या कहें ना कहना चाहेंगे बस उनसे सर यही राउंड करूंगा जो मतलब कुदरत ने या प्रकृति ने जो लिखा था उसके लिए आप मुझे भी क्षमा कर दें।

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