मध्य प्रदेश के जबलपुर में हुए क्रूज हादसे में लापरवाही के आरोप लगाए जा रहे हैं। कई चश्मदीदों का दावा है कि लोगों को पहले से लाइफ जैकेट तक नहीं दिए गए थे। जब नाव में पानी भरने लगा तब आननफानन में लोगों को लाइफ जैकेट दिए गए। इसका वीडियो भी सोशल मीडिया पर सामने आया है जिसमें क्रू मेंबर पानी भरना शुरू होने के बाद लाइफ जैकेट लाते हुए नजर आ रहे हैं।
यह दावा भी किया जा रहा है कि क्रू के सदस्य से खराब मौसम की शिकायत की गई थी, लेकिन इसके बावजूद उसने नाव को किनारे नहीं लगाया। अब इन सभी आरोपों पर क्रूज के पायलट महेश पटेल का बयान सामने आया है। उन्होंने दावा किया है कि क्रूज के जाने के समय कोई तूफान नहीं आया था। स्थिति लौटते समय बिगड़ी।
इसके अलावा उन्होंने यह भी दावा किया है कि सभी को लाइफ जैकेट दी गई लेकिन कुछ लोगों ने डांस करने के चक्कर में उसे नहीं पहना। उन्होंने कहा कि जब मैं निकला था तब कोई आंधी तूफान नहीं था। बस हल्की हवा चल रही थी। जब लौटने का समय आया तो हवा और ज्यादा तेज हो गई। इसलिए सभी को लाइफ जैकेट दी गई। अचानक हवा और भी ज्यादा तेज हो गई। हमने नाव को किनारे लगाने की सोची लेकिन हवा के कारण लाख कोशिशें करने पर भी ऐसा नहीं हो सका। सभी को लाइफ जैकेट दी गई लेकिन कुछ लोग नाच रहे थे और उन्होंने लाइफ जैकेट नहीं पहनी।
मैं निकला सर यहां से 5:16 पे और जब मैं गया तो मतलब ऐसे कुछ तूफान नहीं था मैं कुछ अभी वेप चल रही ऐसी वेव चल रही थी तो हम निकल जैसे हमारा 22 मिनट हुआ कि अभी तुम रिटर्न होना है रिटर्न हुए हैं तो 22 से 25 मिनट ही हुआ है तो हवा इस तरफ से तेज आने लगी तो मैं लड़की लड़की ये सबको लाइफ जैकेट आप दे दीजिए उन्होंने सबको लाइफ जैकेट दी इतने में बहुत ज़ोर-जोर से हवा चलना शुरू हो गई।
फिर अपन ने क्रूज़ का रेस दिए कि मतलब लगने पे अपन को मुश्किल से 10 मिनट का भी लगता है। लेकिन वोट नहीं लगी। वापस रिटर्न वहां हो गई। फिर वहां भी अपन सोचे कि मतलब किसी भी हाल से कोई भी कोर में बोट लगा दें। लेकिन पूरी जान से कोशिश करने के बाद भी वोट कॉर्नर तक किसी भी कोर में पहुंचने को तैयार नहीं हुई। उन्होंने आगे बताया कि अचानक नाव में पानी भर गया और मैं उसे किनारे भी नहीं लगा सका और आखिरकार वह पलट गई। हम किनारे से 50-60 मीटर दूर थे। पिछले तीन दिनों में मैंने कुछ नहीं खाया है। वे मंजर मेरी आंखों के सामने बार-बार आ रहे हैं। मुझे नींद नहीं आ रही है। मुझे बहुत पछतावा हो रहा है।
मैं भगवान से प्रार्थना करता हूं कि किसी को भी इस स्थिति का सामना ना करना पड़े। महेश ने आगे कहा कि क्रूज नाव का रखरखाव हर सोमवार को किया जाता है। घटना के समय मौसम की चेतावनी के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि मुझे मौसम के बारे में कोई जानकारी नहीं मिल पाई। मेरी नाव किसी चीज से नहीं टकराई। मैंने अपनी तरफ से हर संभव कोशिश की। आपको बता दें कि घटना के वक्त नाव पर 40 से ज्यादा लोग सवार थे। इनमें से नौ की मौत हो गई है। जबकि चार अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। अन्य लोगों को बचा लिया गया है। एक शख्स और तीन बच्चों की तलाश के लिए शनिवार को सेना के गोताखोरों और आपदा राहत टीम ने खोज अभियान का दायरा बढ़ा दिया।
अधिकारियों के अनुसार हादसे में नौ लोगों की मौत हो चुकी है। जबकि क्रूज में सवार 41 में से 28 यात्रियों को बचा लिया गया है। उन्होंने बताया कि घटना के संबंध में पुलिस प्राथमिकी दर्ज करने की तैयारी कर रही है। अनुमंडलीय पुलिस अधिकारी अंजुल अयंक मिश्रा ने बताया कि नर्मदा नदी पर बने इस बांध के बैक वाटर क्षेत्र में तलाशी का दायरा बढ़ाकर 5 कि.मी. कर दिया गया है। पुलिस ने बताया कि शनिवार सुबह 5:00 बजे से आगरा से हवाई मार्ग के जरिए पहुंचे सेना के 20 गोताखोर समेत 200 से ज्यादा बचावक कर्मी तलाशी अभियान में जुटे हुए हैं। फिलहाल जो अंतिम समय पर लाइफ जैकेट दिया जा रहा है उसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।
लेकिन इसी बीच नावचालक का जो बयान है वह भी अब सुर्खियों में बना हुआ है। क्या कहना है आपका नावचालक के बयान पर? हमें कमेंट सेक्शन में जाकर जरूर बताएं। नहीं सर लैब जैकेट सबको दी गई थी। बट कुछ लोग ऐसे जो थे नीचे डांस कर रहे थे। मतलब मैं तो ऊपर के में था मेरा लड़का बतला रहे थे कि ये वो लोग नहीं पहनते डांस कर रहे हैं उनको बोर हो जाए कि मौसम बहुत तेज खराब हो गया लाइफ जैकेट आप पहन लें और सामने वाले करीब खड़े हो जाए कुछ ऊपर आ जाए लेकिन जो वीडियो सामने आए हैं उसमें जो देखा है साफ दिख रहा है कि जो वीडियो है उसमें दिख रहा है कि लाइफ जैकेट का पैकेट खोला गया है वो पूरा पैक था जैकेट पन्नी के अंदर पैक थी ऊपर से भी पूरा पैक था वो निकाल के फिर दिया जा रहा है जैसे कि पहली बार लाइव जैकेट खोली गई है।
नहीं सर हमेशा खोल देते हैं बस शाम सबको स्पेक करके रख दिया राखी राउंड में जैसे अपने खत्म हुआ बोट बंद हुई जब स्पेक करके रखते ओपन रहती है पूरी लाइफ जैकेट उसमें वीडियो में तो सब कोई वो कोई पहना हुआ नहीं दिख रहा था तो आपने देखा सर कि वो एक मैम भी थी जो बच्चे को ली थी वो भी लाइफ जैकेट पहनी हुई थी अब नीचे लोगों ने मस्ती से डांस करने नहीं पहन पाई क्या नहीं हुआ पाया ये तो मुझे नहीं पता रहा मैं ऊपर था केबिन में बस अचानक जो बोट में पानी भरा तो मैं किसी भी कोने में वोट नहीं ले जा पाया और उससे पहले वोट पलट के किनारे से कितना दूर था? 50 फीट 50 60 मीटर सर। 50 मीटर मान लीजिए।
बस आपको दूसरे कॉर्नर में लगने से। दो रातें हो गई। कैसे कटी हैं आपकी? ये दो रात सर मैं तीन दो मतलब दो रात हैं। तो तीसरा दिन है आज मैं खाना नहीं खाया हूं सर। बस मेरे को वही वही सीन दिखता है बस वही बच्चे जो बच्चे जो वहां से मैंने ऐसे किए थे वो बच्चे बस देखते हैं ।
मतलब 11 वाला सा कोई छोटा सा यहां से जो बच्चे चार पांच ऊपर वाले जो उसमें फंस गए उनको निकालना वही वो देखते हैं बस उसके मुझे कुछ नहीं लगता नींद भी नहीं आती है एक घंटा के लिए आई तो आई नहीं तो नहीं आती पछतावा होता है सर 100% पछतावा है मेरी आंखों में बस वही दिखता है और भगवान से प्रार्थना करता हूं कि कभी किसी के साथ घटना ना घटे और उनके मां-बाप को सहाना और सब बुद्धि दे कि खुश रहें।
बच्चे तो खूब सीख रहे होंगे उस समय जब ये हो रहा था सभी लोग सर तो आपने बचाने की कोशिश की जितने सर वहां पे ऊपर कैबिन में थे तो सभी निकल गए थे सर। वहां के मतलब ऊपर वाले केबिन में कोई नहीं फंसा सर। सबको निकल गए थे। बस नीचे वाले कैबिन में समय नहीं मिल पाया हम लोगों को किसी को। तो आप लोगों की ट्रेनिंग होती है कि हां सर। कैसी होती है? कब होती पिछली ट्रेनिंग? ये सर समझ लीजिए आप जून में हुई थी सर ट्रेनिंग में ट्रेनिंग सर बचना सिखाना और कैसे आपको करना है कैसी बोट चेन्नई बोर्ड पे कैसे वो करना है वो सब होती है सर कितने मिनट की राइड होती है पूरी सर 40 से 45 मिनट की सर वो कितना मिनट हुआ था 20 मिनट के हुआ था नहीं ज्यादा हो गया सर ज्यादा 25 से 30 मिनट में हो गया 25 से 30 मिनट अच्छा ये बताइए इसके मेंटेनेंस की भी बातें आ रही है कि इसका मेंटेनेंस नहीं हुआ था। मेंटेनेंस की कमी थी। नहीं मेंटेनेंस क्रूज में था सर।
अच्छा खासा मतलब है। पिछली बार कब मेंटेनेंस हुआ था? चेक कब हुई थी मशीन? चेक तो मतलब हर मंडे को अपन चेक करते हैं। ऑयल चेक और सब कुछ चेक होता है हर मंडे को। लेकिन ये सारे मौसम के भी अलर्ट जारी हुआ था। तीन दिन उसकी बस जानकारी नहीं। कुछ जानकारी नहीं मौसम की नहीं। लगता है कि आप लोग को जब पता था या फिर यहां के प्रशासन को पता था कि यहां पे मौसम विभाग ने अलर्ट जारी किया हुआ है। येलो अलर्ट जारी था कि ऐसी हवाएं चलेंगी, आंधी तूफान आने की संभावना है। उसके बाद भी आप लोगों ने लापरवाही नहीं सर इस विषय में जानकारी नहीं लगी मुझे।
इस विषय में जानकारी लेकिन मौसम खराब मौसम खराब होने की जानकारी कौन देता है? यहां पे कोई विभाग वाले देते थे? ले रहे थे सर। लेकिन उस दिन ली थी? नहीं। एक दिन पहले दी थी। नहीं उससे एक दिन मेरा वक्त था सर। मौसम तो खराब था। आपकी वजह से आपकी वजह से कितने लोगों की जानी चली गई? कितने लोग अभी भी परेशान है उनको उनको कोई किसी का बच्चा नहीं मिल रहा। किसी के बड़े नहीं मिल रहे हैं। किसी की मां नहीं मिली। नहीं वो ठीक है। मैं मानता हूं पर मेरी वोट किसी चीज से टकराने तो है नहीं है और ना ही किसी पहाड़ से टकरानी। अब कुदरती मार थी। अब उसमें मैं भी कुछ नहीं कर पाया।
अपना जितना उतना पूरा लजी लगाया मैंने। अब कुदरती मार मैं क्या करें? मैं सोचा किसी भी कोने में बोट चली जाए कि कहीं भी बोट खड़ी कर दूं किसी भी कोने। लेकिन कुदरत माल वहां नहीं पहुंच पाया मैं। पानी कितनी देर में भरा उसमें? बोट में कितनी देर लगी पानी भरने में? बोट पानी भरने में सर मुश्किल से मान लीजिए आप 5 सात मिनट बस बता दें। हां वो तो कोई भी गेस्ट बता देंगे क्योंकि पूरा वेब से एकदम से आ गया ना।
