जबलपुर के बरगी डैम में गुरुवार देर शाम हुए क्रूज हादसे के बाद अब तक स्थिति सहज नहीं हो पाई है। क्रूज बोट जिस वक्त डूब रहा था उस पर 47 लोग सवार थे। अब तक नौ लाशें निकाली जा चुकी हैं। तीन बच्चों समेत कुल चार लोग अब भी लापता हैं।
जिनकी तलाश में बचाव टीमें और उनके गोताखोर लगे हुए हैं। कुल 34 लोग इस पानी से बचाए जा चुके हैं। अब यहां का नजारा ऐसा है कि इस तट पर पानी में लापता हुए प्रियजनों के मिलने की उम्मीद में इंतजार करती आंखें हैं। इलाके के लोग भी डैम के किनारे ऊंची जगह पर जमावड़ा लगाए हैं। जैसे पानी में लापता लोगों के जीवित निकल आने जैसे किसी चमत्कार का इंतजार उन्हें भी हो। इन सबके बीच शुक्रवार को डैम हादसे वाली साइट पर सबका दिल चाक कर देने वाला दृश्य सामने आया। बचाओ दल को पानी के तल में एक साथ दो लाशें मिली।
यह l थी एक महिला की और उससे चिपटे उसके मासूम बेटे की। मीडिया रिपोर्ट्स बताती है कि इस महिला का नाम मरीना मैसी था। जिसने अपने 4 साल के बेटे प्रिशान को अपने सीने से चिपकाए रखा था।
इन दोनों की लाशें बाहर आते ही पूरा माहौल गमगीन हो गया। जिसने भी इस मां को अपनी लाइफ जैकेट के भीतर अपने कलेजे के टुकड़े को समेटे देखा सबकी हिचकियां इस मां ने अपने बच्चे को अपने सीने से इतनी मजबूती से चिपकाए रखा था कि मौत भी उन्हें अलग नहीं कर सकी। शायद जीवन के आखिरी पलों में इस मां को उम्मीद थी कि उनके साथ उनका बेटा भी जिंदा बच जाएगा।
सोशल मीडिया पर इस मां बेटे की तस्वीरें वायरल हैं और लोग लगातार अपनी संवेदना जता रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स बताती है कि चार लोगों का यह परिवार दिल्ली से जबलपुर घूमने आया था। पिता प्रदीप मैसी और बेटी सिया इस हादसे में किसी तरह अपनी जान बचाने में कामयाब रहे।
लेकिन हादसे के वक्त ही मां मरीना और बेटा त्रिशान उनसे छिटक गए। इस मां बेटे की लाश के बाहर आते ही हादसे की साइट पर मौजूद एनडीआरएफ की टीम हो या एसडीआरएफ की बचाव काम में जुटा हर शख्स और वहां मौजूद लगभग तमाम लोगों की आंखें नम हो गई। अपने बच्चे की जान बचाने की इस आखिरी कोशिश ने सभी को रुला दिया।
बहरहाल इस हादसे के बाद क्रूज पायलट महेश पटेल हेलपर छोटेलाल गोंड और टिकट काउंटर प्रभारी बृजेंद्र को बर्खास्त कर दिया गया है। बोट क्लब बारगी के मैनेजर सुनील मारावी निलंबित कर दिए गए हैं। रीजनल मैनेजर संजय मल्होत्रा को हेड ऑफिस अटैच कर दिया गया है और उनके खिलाफ विभागीय जांच शुरू कर दी गई है।
सरकार ने मुआवजे की घोषणा भी कर दी है। लेकिन इन सब से मारे गए लोगों की जिंदगी वापस नहीं पाई जा सकती। इसलिए असल चिंता है कि आखिर इस तरह की लापरवाही पर अंकुश कैसे लगे इस पर हमारी सरकारों को सोचना होगा।
