मध्य प्रदेश के जबलपुर में बर्गी डैम पर बीती रात एक ऐसा हादसा हुआ जिसने कई परिवारों की दुनिया पल-भर में बदल दी। नर्मदा नदी के बैक वाटर में पर्यटकों से भरा एक क्रूज़ अचानक डूब गया और इसके साथ ही खुशियों से भरी एक शाम मातम में बदल गई।
इस हादसे की सबसे दर्दनाक तस्वीर एक छोटी बच्ची की कहानी में नजर आती है। रेस्क्यू के बाद जब उससे पूछा गया कि क्या हुआ था? तो वह सहमी हुई आवाज में बस इतना ही कह पाई। अचानक से क्रूज पलट गया। पानी भर गया। सब लोग इधर-उधर हो गए।
उस वक्त वह अपने परिवार से बिछड़ चुकी थी। घबराहट के बीच उसे किसी तरह अपने पापा मिल गए तो उसने उनका हाथ कसकर पकड़ लिया। लेकिन उसकी कहानी यहीं खत्म नहीं होती। बच्ची ने बताया कि उसकी मां और भाई अभी तक नहीं मिले हैं। उसके नानू तो मिल गए लेकिन नानी अब इस दुनिया में नहीं रही। नानी मर गई। उनकी डेड बॉडी मिली। यह कहते वक्त उसकी आवाज कांप रही थी। यह शब्द सिर्फ एक बयान नहीं बल्कि उस दर्दका एहसास है जिसे शायद वह उम्र भर नहीं भूल पाएगी।
यह हादसा उस वक्त हुआ जब क्रूज नदी के गहरे बैक वाटर इलाके में पहुंचा था। अचानक मौसम खराब हो गया। तेज हवाएं चलने लगी और पानी में ऊंची लहरें उठने लगी। [संगीत] देखते ही देखते क्रूज का संतुलन बिगड़ा और कुछ ही पलों में वह पानी में समा गया। हादसे के बाद तुरंत राहत और बचाव कार्य शुरू किया गया। अब तक करीब 15 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा चुका है। जबकि नौ लोगों के शव बरामद हुए हैं। कुछ लोग अब भी लापता हैं।
जिनकी तलाश के लिए गोताखोर और एसडीआरएफ की टीमें लगातार सर्च ऑपरेशन चला रही हैं। चश्मदीदों का कहना है कि क्रूज पहले से ही डगमगा रहा था। लेकिन इसके बावजूद उसे तुरंत किनारे नहीं लगाया गया। शुरुआती जांच में मौसम खराब होना बड़ी वजह मानी जा रही है। लेकिन साथ ही कई सवाल भी खड़े हो रहे हैं।
क्या सुरक्षा के पूरे इंतजाम थे? क्या यात्रियों की संख्या तय सीमा में थी? और क्या खराब मौसम के बावजूद क्रूज को रवाना किया गया? फिलहाल जांच के आदेश दे दिए गए हैं। लेकिन इन सवालों के जवाब चाहे जो भी हो उस छोटी बच्ची का दर्द और उसका नुकसान कोई भी जांच कम नहीं [संगीत] कर सकती।
