गाज़ा की महिलाओं से रोटी के बदले मांगा जा रहा जि!स्म!

गाज़ा में हुई सदियों तक याद रखी जाएगी। ऐसी जिसने इंसानियत को शर्मसार कर दिया। करीब 2 साल से गाजा नफरती जख्म झेल रहा है। इंसानों की चीखें दिल को चीर देती हैं। लेकिन अब गाजा से जो खबर सामने आई है वो खून खौलाने वाली है। गाजा के लोगों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए तिल तिल तड़पना पड़ रहा है।

पापी पेट के बदले अब गाजा की महिलाओं के साथ घिनौना काम हो रहा है। उनके आबरू का सौदा किया जा रहा है। मजबूरी का फायदा उठाया जा रहा है। रक्षक बनकर आए पुरुष ही भक्षक निकल रहे हैं और मदद के बहाने गाज़ा की महिलाओं के साथ घिनौना काम कर रहे हैं। जरा सोचिए 2 जून की रोटी के लिए किसी मां, किसी बहन, किसी बेटी को अपने आत्मसम्मान को दांव पर लगाना पड़े और फिर दो निवाला उस घर के लोग खा सके। सोचने पर ही रोंगटे खड़े हो जाते हैं। लेकिन ऐसा हो रहा है।

गाजा के स्थानीय पुरुष और ऐड वर्कर्स महिलाओं के साथ घिनौना काम कर रहे हैं। गाजा में मानो इंसानियत की कर दी गई हो। जो मर्द मदद कर रहे हैं, खानापानी पैसे पहुंचा रहे हैं। बदले में गाजा की महिलाओं से यौन संबंध बनाने के लिए दबाव बना रहे हैं। उन्हें या तो भावनात्मक तरीके से या फिर डराकर धमकाकर उनसे यौन संबंध बनाने के लिए मजबूर कर रहे हैं। उन्हें अपने हवस का शिकार बना रहे हैं।

इतना ही नहीं महिलाओं को मानसिक रूप से भी प्रताड़ित किया जा रहा है। अगर उन्हें या उनके परिवार को किसी भी चीज की जरूरत है तो घर की महिला को देर रात कभी भी मदद करने के बहाने पुरुष बुला लेते हैं और उनका यौन शोषण करते हैं। साथ ही मैसेज भी भेजे जा रहे हैं। अपने साथ हो रहे इस घिनौने काम की आपबीती खुद गाजा की महिलाओं ने बयां की है। न्यूज़ एजेंसी एपी ने ऐसी ही छह पीड़ित महिलाओं से बात की है। बातचीत में महिलाओं ने अपना दर्द साझा किया है। बताया है कि उनके साथ क्या हो रहा है। निजिता के चलते नाम और महिला की शक्ल हम नहीं दिखा रहे लेकिन उनकी बात आप तक जरूर पहुंचाएंगे।

पीड़ित महिलाओं ने अपना दर्द बताते हुए कहा कि कभी-कभी तो पुरुष उनके पास आते और साफ-साफ दो टूक शब्दों में कहते मैं तुम्हें छूना चाहता हूं। मुझे ऐसा करने दो। कभी-कभी यह सब कुछ शादी के नाम पर होता था। उनसे कहा जाता था, मैं तुमसे शादी करना चाहता हूं। चलो कहीं साथ चलते हैं। एक महिला ने के एक साल बाद अक्टूबर में शुरू हुई फोन कॉल्स के बारे में बताया। उन्होंने बताया कि शुरुआत में उस शख्स के सवाल साधारण थे। उस शख्स ने पहले घर परिवार के बारे में पूछा। शादी हुई या नहीं पूछा। कितने बच्चे हैं? वह पूछा।

फिर अचानक ऐसा वाहिया सवाल पूछा जिसे सुनने के बाद महिला सन्न रह गई। उस शख्स ने बिना किसी हिचकिचाहट से पूछा कौन सा अंडरवियर पहनी हो? उसका पति उसे कैसे खुश करता था? हैरानी की बात यह है कि जो पुरुष मदद करने के लिए आते थे वही पुरुष ऐसी हरकतें करते थे। ऐसे में महिलाएं शिकायत करें तो किसे करें?

महिला ने आगे बताया कि वह उस व्यक्ति से मुआवासी में मिली थी जो इजराइल की तरफ से घोषित एक मानवीय क्षेत्र है। जिस समय जब वह मदद पाने के लिए लाइन में खड़ी थी तभी वहां एक ऐड वर्कर ने उन्हें अपना फोन नंबर दे दिया। वह एक फिलिस्तीनी था जिसने यूएआरडब्ल्यूए यानी संयुक्त राष्ट्र राहत एवं कार्य एजेंसी की यूनिफार्म पहनी थी। नंबर लेने के कुछ ही देर बाद देर रात फोन कॉल्स आने शुरू हुए। उसने बताया कि वह रिलेशन के लिए उससे सवाल करता था और वह चुप रहती थी।

उसने बताया कि एक बार तो उसने सेक्स के लिए उसके पास आने को कहा। उसने मना कर दिया। करीब एक दर्जन कॉज के बाद भी कोई मदद ना मिलने पर उसने उसका नंबर ब्लॉक कर दिया। वहीं छह बच्चों की मां ने अपनी आपबीती बताई। उन्होंने बताया कि जिस शख्स ने उसे नौकरी का वादा किया था, उसकी जिंदगी बेहतर करने की उम्मीद जताई थी, वह संयुक्त राष्ट्र का सदस्य था। लेकिन मदद के बहाने उसने उस महिला का नंबर लिया और अश्लील मैसेज करने लगा। महिला ने बताया कि मैसेज आते रहे जिसमें उसने लेट नाइट सेक्सुअल रिलेशन बनाने वाले कॉल और तस्वीरों के लिए कहा गया था। उन्होंने बहाने बनाकर उन्हें टालने की कोशिश की। वह अक्सर उसे कहती कि वह बिजी है या फिर उनका फोन खराब है या बात नहीं कर सकती है। अब जरा सोचिए गाजा की महिलाएं किस पर विश्वास करें? मदद के बहाने उन्हें सहना पड़ रहा है। जब रिपोर्टर ने सवाल पूछा कि आप शिकायत क्यों नहीं दर्ज करवाती?

तो महिला ने बताया कि उनसे यूएआरडब्ल्यूए को यौन शोषण के मामले में मौखिक शिकायत दर्ज कराई थी। उनका कहना है कि एजेंसी की ओर से उनसे बातचीत की रिकॉर्डिंग बतौर सबूत मांगी गई थी। लेकिन उनके पास पुराना फोन था जिसमें कॉल रिकॉर्ड करने की सुविधा ही नहीं थी। वहीं यूएआरडब्ल्यूए की कम्युनिकेशन डायरेक्टर जूलियट टॉमा का कहना है एजेंसी इस तरह के मामलों में जीरो टॉलरेंस पॉलिसी अपनाती है और किसी भी शिकायत को पूरी गंभीरता से लिया जाता है। एजेंसी को शिकायत की जांच के लिए किसी ठोस सबूत की आवश्यकता नहीं होती। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि इस घटना की जानकारी संबंधित कर्मचारियों तक पहुंची या नहीं।

वहीं ह्यूमन राइट वॉच में वुमेन राइट डिवीजन की एसोसिएट डायरेक्टर हेथर बर्ग का कहना है यह सच्चाई है कि मानवीय संकट लोगों को कई तरह से कमजोर बना देते हैं। इजाफा अक्सर इसका परिणाम होती है। गाजा में आज की स्थिति अकल्पनीय है।

खासकर महिलाओं और लड़कियों के लिए। अब जरा सोचिए जंग का मैदान है। पुरुषों को खौफ है कि कहीं जान ना चली जाए और महिलाओं को खौफ है कि कहीं वह अकेली बच ना जाए। कई महिलाओं के साथ यौन शोषण हो रहा है। वह गर्भवती हो जाती हैं और फिर उन्हें अकेले उन बच्चों को पालनापसना पड़ रहा है।

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