होर्मुज बंद ! तेल-गैस पर ‘संकट’ ये हैं वैकल्पिक रास्ते ! बड़ा एक्शन..

हॉर्मोस में इस वक्त अमेरिका और ईरान आमने-सामने हैं। यहां पर नाकेबंदी दोनों की तरफ से जो दावा है वो किया जा रहा है। लेकिन अब यह बड़ा सवाल उठ रहा है कि आखिर जहां दुनिया को यह डर सता रहा है कि अगर हॉर्मोन ज्यादा वक्त तक बंद रहता है तो फिर एक बड़ा ऊर्जा संकट दुनिया के सामने यहां पर खड़ा मिलेगा।

इसी बीच आखिर कौन-कौन से जो वैकल्पिक रास्ते हैं जिस पर अब जो दुनिया है वो काम कर सकती है अगर हॉर्मोंस लंबे समय तक बंद रहता है। इसकी ज्यादा जानकारी के लिए हमारे साथ जुड़े हैं रतिक उनसे जानेंगे। रतिक जहां एक तरफ तेल और ऊर्जा को लेकर गैस को लेकर जो स्थिति अभी फिलहाल जो पैदा हो रही है उस बीच दुनिया को अब ये डर है कि इससे एक बड़ा ऊर्जा संकट दुनिया को देखने को मिल सकता है।

इसी बीच कौन-कौन से ऐसे वैकल्पिक रास्ते हैं जो हॉर्मोस का ऑप्शन बनकर उभर सकते हैं। बिल्कुल देखिए हॉर्मोस की वजह से जो स्थिति उत्पन्न पूरी दुनिया में हुई है सबने देखा है। 20% क्रूड ऑयल वहां से होके निकलता है। बहुत बड़ी मात्रा होती है। और ऐसे में अगर आप देखें तो स्ट्रेट ऑफ़ हार्मोस के बाधित होने से ईरान और अमेरिका के इस जंग से पूरे वेस्ट एशिया में एक अलग ही यू नो त्राहिमाम मचा है। लेकिन वैकल्पिक रास्ते कहते हैं कि आपदा में अवसर की तलाश इंसान को करनी चाहिए और अगर हम इसमें देखें तो अमेरिका इजराइल और ईरान के बीच जो ये युद्ध है इसके कारण स्ट्रेट ऑफ हार्मूस से तेल और गैस की सप्लाई बहुत ज्यादा प्रभावित हुई है। ये दुनिया का सबसे अहम तेल मार्ग माना जाता है ।

सोनम और ऐसे में स्थिति ने पूरे मध्य पूर्व के देशों के सामने तेल गैस के निर्यात के बहुत ही लिमिटेड जो विकल्प है उसको सामने लाकर रख दिया है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी ने इसे अब तक का सबसे बड़ा सप्लाई संकट करार दिया है। ऐसे में 1970 के दशक के तेल संकट और यूक्रेन युद्ध के बाद रूस की गैस सप्लाई रुकने से भी बड़ा ये स्टेट ऑफ हॉर्मोस का मामला है। ऐसे में अगर आप देखें तो ऐसे में कई देश हॉर्मूस को बाईपास करने के लिए पुराने और नए रास्तों पर निर्भर भी हो रहे हैं। अगर आप इस पूरे मामले में देखें तो सऊदी अरब की जो ईस्ट वेस्ट पाइप लाइन है वो करीब 1200 कि.मी. लंबी है। ऐसे में अगर आप देखें तो रोजाना वहां से लगभग 70 लाख बैरल तेल ले जा सकती है।

हालांकि फिलहाल इससे करीब 45 लाख बैरल तेल जो है वो निर्यात हो पा रहा है। ये इसकी अभी की कैपेबिलिटी है। ये तेल जो है वो यनबू बंदरगाह तक जाता है। जहां से यूरोप और एशिया उसे भेज दिया जाता है। इसके अलावा अगर आप देखें तो संयुक्त अरब अमीरात की हबशान फजेरा पाइपलाइन 360 कि.मी. लंबी है और उसकी जो क्षमता है वो 15 से 18 लाख बैरल प्रतिदिन की है और ये हॉर्मूस के बाहर स्थित फुजेरा बंदरगाह तक तेल पहुंचाती है।

लेकिन हाल ही में ड्रोन हमलों से यहां पर भी सप्लाई काफी प्रभावित हुई। जिस तरीके से ड्रोन अटैक वहां पे हुए। इसकी वजह से वहां पे भी चीजें बहुत ज्यादा फंसी हैं। पूरे मामले को अगर आप देख तो इराक तुर्की की जो किरकुक जेहान पाइपलाइन भी है वो भी एक बहुत इंपॉर्टेंट रास्ता बन जाता है जो कि कुर कुर्दिस्तान होते हुए तुर्की के जेहान बंदरगाह तक जाती है और इसे ढाई साल बाद फिर से शुरू किया गया था। ऐसे में अगर आप देखिए फिलहाल करीब 1.7 लाख बैरल प्रतिदिन तेल भेजा जा रहा है यहां से जिसे बढ़ाकर 2ाई लाख बैरल तक करने की पूरी योजना है। अब ईरान की जो गोरे जास् पाइपलाइन है वो भी एक ऑप्शन बन जाता है ऐसे ऐसे यू नो पेंडेमिक सिचुएशन में जिसकी क्षमता करीब 10 लाख बैरल प्रतिदिन की है।

जास टर्मिनल भी पूरी तरह तैयार नहीं है लेकिन 204 में यहां से ट्रायल शिपमेंट किया गया था और इसके अलावा इराक ओमान के दुख बंदरगाह तक पाइपलाइन बनाने पर अभी बातचीत चल रही है। हालांकि ये योजना अभी शुरुआती चरण में है और इसके रास्ते फिलहाल तय किए जा रहे हैं। इराक जॉर्डन पाइपलाइन का प्रस्ताव भी लंबे वक्त से पारित है जिसके जरिए बसरा से अकाबा बंदरगाह तक तेल भेजा जा सकता है और इसकी क्षमता 10 लाख बैरल प्रतिदिन होगी। लेकिन लागत और सुरक्षा कारणों से यह प्रोजेक्ट अब भी अटका हुआ है।

कुल मिलाकर अगर आप देख तो हॉर्मोस को पूरी तरीके से बाईपास करने के लिए खाड़ी से ओमान सागर तक नहर बनाने के विचार भी सामने आए हैं। जो कि स्वेज या पनामा नहर तक की तरह है वो जो हो सकती है। हालांकि हज़र पर्वतों को कट काटकर ये नहर बनाना बेहद मुश्किल और महंगा हो जाएगा और इसकी लागत सैकड़ों अरब डॉलर तक पहुंच सकती है। तो कहीं ना कहीं अगर आप देखें स्ट्रेट ऑफ हार्मस के ही बंद होने की वजह से इतनी मुश्किलात पैदा हुई। चाहे आपने ईरान के बंदरगाह की बात की हो। अभी हमने आपको यूरोप की बताया।

कई ऐसे वैकल्पिक रास्ते हैं जिसकी वजह से फिलहाल अभी जो सप्लाई संकट है उस पे असर तो हुए हैं। जो चीजें बहुत ही ईजीली हो रही थी, ईली गो थ्रू हो रही थी वो अब बहुत घूम के जा रही हैं। तो कहीं ना कहीं उस चीज से आपको अगर आप देखिए उसमें पैसे भी ज्यादा आपके खर्च हो रहे हैं। जो सामान है वो बहुत ज्यादा मिल नहीं पा रहा है। जितनी उसकी क्षमता थी कैपेबिलिटी थी उससे कम वो प्रति बैरल तेल जो है वो बस उसको वो लोड कर पा रहा है। तो कहीं ना कहीं अगर आप इस पूरे मामले में देख तो स्टेट ऑफ हार्मोस के इस की वजह से उसको बंद करने की वजह से बहुत ही मुश्किलात जो है वो उसको फेस किया जा रहा है। फिलहाल बड़े मुश्किल विकल्प सामने देखने को मिल रहे हैं। तो कहीं ना कहीं अगर आप देखें तो जैसा कि मैंने आपको बताया कि हॉर्मोन्स को पूरी तरीके से बाईपास करने के लिए खाड़ी से ओमान सागर तक नहर बनाने पर विचार सामने आया है कि कहीं ना कहीं वो रास्ता काट के हम एक ऐसा वैकल्पिक रास्ता तैयार करें जिससे कहीं ना कहीं हम उस चीज के यू नो मतलब जो चीजें हैं वो प्रभावित ज्यादा हो। बिल्कुल।

हालांकि रितिक ये जो विकल्प है वो मुश्किल होगा क्योंकि आपने जैसे बताया कि हज़र पर्वतों को काटकर ये नहर बनाना बेहद कठिन और काफी महंगा होगा। कॉस्ट इफेक्टिव नहीं होगा। बिल्कुल। बिल्कुल और ऐसे में या तो ऐसे मोमेंट पे इस पेंडेमिक सिचुएशन में इस चीज को फुलफिल करना ये कितना मुश्किल होगा वो भी देखने वाली बात होगी लेकिन ये कुछ वैकल्पिक रास्ते थे कुछ ऐसे ऑप्शंस हैं जो कि स्ट्रेट ऑफ हॉर्मोस के अलावा इंसान उस पे यू नो गो थ्रू कर सकता है लेकिन वो चीजें कितनी ज्यादा एप्लीकेबल होंगी वो देखने वाली बात होगी बिल्कुल ये तो आने वाला वक्त ही बताएगा कि ये जो वैकल्पिक रास्ते जो अब निकल कर सामने आ रहे हैं ये कितने यहां पर सक्सेसफुल होते हैं।

लेकिन इसी बीच हॉर्मोस में जो तनाव है वो अभी भी बना हुआ है ईरान की तरफ से कहा जा रहा है कि जब तक अमेरिका की नाकेबंदी खत्म नहीं होती तब तक हम बातचीत नहीं करेंगे। वहीं लगातार पाकिस्तान यह कोशिशें करता हुआ नजर आ रहा है कि मैं एक बार फिर से जो है बातचीत की मेज पर दोनों को लेकर आऊं दोनों पक्षों को लेकिन अब ये एक्सपर्ट्स के द्वारा भी कहा जा रहा है कि पाकिस्तान फिर से पहले की तरह फेल होता हुआ दिखेगा क्योंकि पोस्टमैन पाकिस्तान आखिर क्या ही करेगा।

अब यहां पर लगातार ये सवाल उठ रहा है कि क्या हॉर्मोंस में जो तनाव बना हुआ है वो और कितना लंबा खींचता है? क्योंकि अगर यह ज्यादा लंबा खींचेगा तो दुनिया को अब एक गंभीर संकट का सामना करना पड़ सकता है।

Leave a Comment